एक्टर बोले-जयपुर में कार-ड्राइवर की स्पीड ने नानी याद दिलाई:सीट बेल्ट की हालत ऐसी थी, मानो पुराने अवशेषों की तरह संभालकर रखा गया

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बॉलीवुड अभिनेता गजराज राव अपनी फिल्मों में सहज अभिनय और हास्य के लिए पहचाने जाते हैं, लेकिन इस बार जयपुर में उनका सामना ऐसे अनुभव से हुआ। इसे उन्होंने सोशल मीडिया पर व्यंग्य के अंदाज में शेयर किया। एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के सिलसिले में जयपुर आए गजराज राव का यहां कार में सफर करना अच्छा अनुभव नहीं रहा। उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिखकर शहर में शूटिंग के दौरान मिले ड्राइवरों की ड्राइविंग शैली, तेज रफ्तार, फोन पर बातचीत और सीट बेल्ट को लेकर लापरवाही पर सवाल उठाए। गजराज राव ने पोस्ट में लिखा- न तो ट्रैफिक लाइट पर रुकने की चिंता थी। न ही स्पीड ब्रेकर पर रफ्तार कम करने की। रियर-व्यू मिरर में लगातार देखने के बावजूद गाड़ी की गति कम नहीं हो रही थी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए लिखा- स्पीड ब्रेकर के झटकों ने मुझे तीन बार अपनी स्वर्गीय नानी जी की याद दिला दी। कार में मिडिल सीट की बेल्ट भी ऐसी हालत में थी। मानो कई कारों में उसे पुरातात्विक अवशेषों की तरह संभालकर रखा गया हो। गौरतलब है कि गजराज राव राजस्थान से ही ताल्लुक रखते हैं। फोन पर बात करते रहे ड्राइवर, अभिनेता ने किया टोका गजराज राव के मुताबिक- शूटिंग के लिए प्रोडक्शन कंपनियां आमतौर पर नई या पुरानी इनोवा गाड़ियां उपलब्ध कराती हैं। इन गाड़ियों में सफर के दौरान मैंने महसूस किया कि कुछ ड्राइवर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाते हुए फोन कॉल का जवाब भी दे रहे थे। उन्होंने एक ड्राइवर की बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा कि वह गाड़ी चलाते हुए फोन पर अपने घर की बातें कर रहा था। बातचीत में वह बता रहा था कि शादी का कार्यक्रम ठीक रहा, लेकिन सासू ने कुछ ऐसा खा लिया कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। गजराज राव ने ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय फोन पर बात नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा- ऐसा करने पर ड्राइवर ने मुझे इस तरह देखा। मानो उन्होंने कौन बनेगा करोड़पति के ‘फोन-ए-फ्रेंड’ राउंड में सात करोड़ रुपए का गलत जवाब सुझा दिया हो। इसके बाद फोन कॉल खत्म हो गई, लेकिन गाड़ी नहीं रुकी। ड्राइवर रियर-व्यू मिरर में मुझे लगातार देखता रहा। सीट बेल्ट लगाने की सलाह पर मिला अजीब जवाब पोस्ट में गजराज राव ने सीट बेल्ट को लेकर हुई बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ड्राइवरों में से एक ने मुझे समझाने की कोशिश की कि यहां कोई सीट बेल्ट नहीं लगाता और मुझे डरने की जरूरत नहीं है। अभिनेता ने ड्राइवर के कथन को व्यंग्यात्मक अंदाज में साझा करते हुए लिखा- यहां तो कोई नहीं लगाता सर जी, बेल्ट-फेल्ट… डरने की कोई बात नहीं, कुछ नहीं होगा आपको! उन्होंने यह भी बताया कि एक ड्राइवर ने उन्हें यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सीट बेल्ट लगाने पर ट्रैफिक पुलिस चालान कर देती है। ‘बधाई हो’ से मिली बड़ी पहचान गजराज राव हिंदी सिनेमा के उन अभिनेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक छोटे और सहायक किरदार निभाने के बाद अपनी अलग पहचान बनाई। उनका जन्म राजस्थान के डूंगरपुर में हुआ था। अभिनय की दुनिया में उनका सफर वर्ष 1994 में शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने ‘दिल से’, ‘अक्स’, ‘ब्लैक फ्राइडे’ और ‘नो स्मोकिंग’ जैसी फिल्मों में काम किया। वर्ष 2015 में आई फिल्म ‘तलवार’ में इंस्पेक्टर धनीराम की भूमिका और 2018 की फिल्म ‘बधाई हो’ में नकुल के पिता जीतेंद्र कौशिक का किरदार उनके करियर के अहम पड़ाव रहे। ‘बधाई हो’ में नीना गुप्ता के साथ उनकी जोड़ी और सहज अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। इसके बाद गजराज राव ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’, ‘मेड इन चाइना’, ‘लूटकेस’, ‘थाई मसाज’, ‘माजा मा’, ‘सत्यप्रेम की कथा’, ‘मैदान’ और ‘बैड न्यूज’ जैसी फिल्मों में नजर आए। फिल्मों के साथ उन्होंने वेब सीरीज में भी काम किया है। गजराज राव केवल अभिनेता ही नहीं, बल्कि विज्ञापन फिल्मों के निर्देशक के रूप में भी काम करते रहे हैं। उन्होंने विज्ञापन जगत में भी अपनी पहचान बनाई और कोड रेड फिल्म्स के माध्यम से निर्देशन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया।



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