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  • दृश्यम-3 ने 2 दिन में कमाए 177 करोड़:सलमान खान की 'सिकंदर' का रिकॉर्ड तोड़ा; 2015 में आई पहली दृश्यम को भी पीछे छोड़ा

    दृश्यम-3 ने 2 दिन में कमाए 177 करोड़:सलमान खान की 'सिकंदर' का रिकॉर्ड तोड़ा; 2015 में आई पहली दृश्यम को भी पीछे छोड़ा




    अजय देवगन स्टारर फिल्म ‘दृश्यम 3’ (दृश्यम: द कंक्लूजन) ने बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत की है। रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही फिल्म ने दुनियाभर में 177 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। इसके साथ ही यह फिल्म इस साल की टॉप 10 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की लिस्ट में शामिल हो गई है। घरेलू बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने दो दिनों में 115.50 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। वहीं, ‘दृश्यम 3’ के थिएटर्स में आने से पहले से चल रही फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कमाई की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। दूसरे दिन भारत में कमाए 53.50 करोड़ रुपए ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2 अक्टूबर को रिलीज हुई फिल्म ‘दृश्यम 3’ की एडवांस बुकिंग 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की रही थी। फिल्म ने पहले दिन शुक्रवार को दुनियाभर में 93 करोड़ रुपए का कलेक्शन दर्ज किया था। दूसरे दिन शनिवार को भी फिल्म की अच्छी पकड़ बनी रही। भारत में शनिवार को फिल्म ने 53.50 करोड़ रुपए का नेट बिजनेस किया, जबकि शुक्रवार को 62 करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। दो दिनों में फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 138.60 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। सलमान की ‘सिकंदर’ और पहली ‘दृश्यम’ का रिकॉर्ड टूटा ‘दृश्यम 3’ की दो दिनों की कमाई ने कई बड़ी फिल्मों के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है। फिल्म ने सलमान खान की ‘सिकंदर’ के 176 करोड़ रुपए के कुल कलेक्शन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसके साथ ही फिल्म ने साल 2015 में रिलीज हुई फ्रैंचाइजी की पहली फिल्म ‘दृश्यम’ के 107 करोड़ रुपए के लाइफटाइम बिजनेस को भी शनिवार सुबह पार कर लिया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फिल्म ने अब तक 4 मिलियन डॉलर (करीब 33 करोड़ रुपए) का कारोबार किया है। फिल्म में पुरानी स्टारकास्ट के साथ नए चेहरे भी शामिल अभिषेक पाठक के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी 2 अक्टूबर के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में अजय देवगन (विजय सालगांवकर), तबू, श्रिया सरन, रजत कपूर, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव और कमलेश सावंत अपने पुराने किरदारों में लौटे हैं। फिल्म में सौरभ शुक्ला का कैमियो रोल है। वहीं, इस तीसरे पार्ट में जयदीप अहलावत और प्रकाश राज नए किरदारों के रूप में फ्रैंचाइजी से जुड़े हैं। ‘दृश्यम 3’ के आने से ‘हनुमान अंश’ का कलेक्शन घटा सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार, 58 दिनों से सिनेमाघरों में चल रही फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कमाई में गिरावट आई है। 58वें दिन फिल्म ने 1.59 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। 9वें वीकेंड में ‘दृश्यम 3’ के आने से ‘हनुमान अंश’ की स्क्रीन और शोज प्रभावित हुए हैं। हालांकि, धीमी शुरुआत के बाद मजबूत वर्ड ऑफ माउथ से इस फिल्म ने अब तक भारत में 321.22 करोड़ रुपए का नेट और 379.39 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है।



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  • शबाना बोलीं-मुझ पर लिखी कविता जावेद साहब को याद नहीं:अख्तर बोले- कामयाबी पर इतराना नहीं और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए

    शबाना बोलीं-मुझ पर लिखी कविता जावेद साहब को याद नहीं:अख्तर बोले- कामयाबी पर इतराना नहीं और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए




    अभिनेत्री शबाना आजमी ने मशहूर लेखक-शायर जावेद अख्तर की ओर से उनके लिए लिखी गई एक कविता का जिक्र किया और कहा कि जावेद साहब को वह कविता अब याद नहीं है। वहीं जावेद अख्तर ने कामयाबी और नाकामी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सफलता पर इतराना नहीं चाहिए और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए। जयपुर में मशहूर लेखक-शायर जावेद अख्तर और अभिनेत्री शबाना आजमी रविवार को एक खास साहित्यिक शाम का हिस्सा बने। सीतापुरा स्थित इंटरकॉन्टिनेंटल जयपुर में आयोजित ‘पोएट्री एंड कन्वर्सेशन’ में जावेद अख्तर ने अपनी कविताएं, शायरी और गीतों को अपने अंदाज में पेश किया, वहीं शबाना आजमी ने उनके शब्दों का अंग्रेजी में अनुवाद करते हुए उनकी भावनाओं और विचारों को दर्शकों तक पहुंचाया। कार्यक्रम में जावेद अख्तर की रचनात्मक यात्रा, संघर्ष, लेखन और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से भी सामने आए। यह आयोजन दिल्ली के मशहूर रेस्तरां ‘चोर बाजार’ के जयपुर आगमन के मौके पर ईएचवी इंटरनेशनल की ओर से किया गया था। साहित्य, सिनेमा और कला से जुड़े लोगों के लिए यह शाम जावेद अख्तर और शबाना आजमी को करीब से सुनने का खास अवसर रही। पहले, यहां देखिए इवेंट के PHOTO’S… ‘अनुवाद में खुशबू कहीं न कहीं उड़ जाती है’ कार्यक्रम में शबाना आजमी ने जावेद अख्तर की शायरी के अनुवाद को लेकर दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि अनुवाद किसी परफ्यूम को एक शीशी से दूसरी शीशी में डालने जैसा है। ऐसा करते समय उसकी कुछ खुशबू उड़ ही जाती है। इसलिए किसी शायर की रचना को दूसरी भाषा में पेश करना आसान काम नहीं है। इसके बावजूद शबाना ने जावेद की कविताओं और शायरी का अंग्रेजी में ऐसा भावानुवाद किया कि दर्शक मूल रचना के भाव और अर्थ से जुड़े रहे। एक तरफ जावेद अख्तर अपनी रचनाएं पढ़ते रहे तो दूसरी तरफ शबाना आजमी उनके शब्दों को अंग्रेजी में समझाती रहीं। दोनों की बातचीत और संवाद ने कार्यक्रम को सिर्फ कविता पाठ न रखकर एक साहित्यिक अनुभव में बदल दिया। जावेद अख्तर ने कहा कि अपनी कामयाबी पर किसी को इतराना नहीं चाहिए और अपने दुख या नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए। सिर्फ जिंदगी का धन्यवाद देना चाहिए, जो हमें यह मिली है। ‘इनके शरीर की एक हड्डी में भी रोमांस नहीं है’ जावेद अख्तर के रोमांटिक गीतों और शायरी की चर्चा के दौरान शबाना आजमी ने अपने खास अंदाज में मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उनसे, खासकर महिलाएं, यह कहती हैं कि जावेद साहब इतनी रोमांटिक बातें लिखते हैं तो असल जिंदगी में भी काफी रोमांटिक होंगे। शबाना ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इनके शरीर की एक हड्डी में भी रोमांस नहीं है। इस पर जावेद अख्तर ने भी तुरंत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो इंसान सर्कस में उल्टा लटकता है, जरूरी नहीं कि वह घर जाकर भी उल्टा ही लटके। जावेद और शबाना की इस नोकझोंक पर दर्शकों के बीच खूब ठहाके गूंजे। शबाना ने कहा कि आप देखिए इन्होंने इतनी सारी नज्में बिना किताब देखें यहां पढ़ी और जो मेरे लिए ‘शबाना’ कविता लिखी है, वह तक याद नहीं है। 19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर कार्यक्रम के दौरान शबाना आजमी ने जावेद अख्तर की जिंदगी के संघर्ष को भी दर्शकों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर 1964 को एक 19 साल का नौजवान बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा था। उसकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े-बड़े सपने थे। शबाना ने बताया कि जावेद अख्तर ने मुंबई में संघर्ष के दौरान कई मुश्किलें देखीं। उन्होंने फुटपाथ, रेलवे स्टेशनों और कई स्टूडियो के परिसरों में रातें गुजारीं। एक दौर ऐसा भी आया जब उनके पास लगातार तीन दिन तक खाने के लिए कुछ नहीं था और शरीर पर पहने कपड़े भी फटे-पुराने थे। उन्होंने कहा कि निराशा के उस दौर में जब कोई व्यक्ति हार मान सकता था, जावेद अख्तर ने खुद से कहा कि वह यूं ही मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। ये दिन बदलेंगे। शबाना ने कहा कि समय बदला भी। 4 अक्टूबर 1964 का वह 19 साल का नौजवान, जिसके पास लगभग कुछ नहीं था। दशकों बाद ऐसी जिंदगी जी रहा था, जिसने भारत को कुछ सबसे यादगार शब्द दिए। आज वही 4 अक्टूबर का दिन है। ‘गुलजार और जावेद के अंदाज-ए-बयां में फर्क’ शबाना आजमी ने जावेद अख्तर और गुलजार के लेखन के अंदाज का भी दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने गुलजार और जावेद अख्तर दोनों से रोमांटिक कुछ लिखने के लिए कहा था। उन्होंने बताया कि गुलजार साहब ने लिखा- ‘जा जा रे पिया मोरे पिया मोरे, मोरा लागे ना जिया।’ वहीं, उसी धुन पर जावेद अख्तर ने लिखा- ‘बातों से नहीं बोलूं, ओ जा रे जा रे, तू ना मेरा सनम, तू ना मेरा पिया।’ शबाना ने कहा कि यही दोनों के अंदाज-ए-बयां का अंतर है। एक ही भाव को दो अलग रचनाकार किस तरह अपनी-अपनी शैली में सामने रखते हैं, इसका यह बेहतरीन उदाहरण है। ‘मेरा आंगन, मेरा पेड़’ से यादों के आंगन में लौटे जावेद कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने अपनी चर्चित कविता ‘मेरा आंगन, मेरा पेड़’ भी सुनाई। बचपन के घर, आंगन और उस पेड़ के बहाने उन्होंने उम्र के साथ बदलती नजर और यादों को शब्द दिए।जावेद अख्तर ने ‘वो कमरा याद आता है’ कविता भी सुनाई। इसमें उन्होंने उस कमरे को याद किया, जो जिंदगी की धूप, थकान और संघर्ष से लौटे व्यक्ति को अपनी मां की तरह अपने भीतर छुपा लेता है। जावेद अख्तर ने ‘ये खेल क्या है’ कविता के जरिए जिंदगी और जीत-हार को भी अलग नजरिए से देखा। काले-सफेद मोहरों को देखते हुए वह सवाल करते हैं कि अगर ये सिर्फ लकड़ी के खिलौने हैं तो फिर जीतना क्या और हारना क्या। दादर का किस्सा और एक हजार रुपए की उम्मीद जावेद अख्तर ने अपनी जिंदगी के संघर्ष से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में एक बार वह एक हजार रुपए की फीस लेने के लिए दादर गए थे। जेब में बहुत कम पैसे थे और जिस निर्माता के दफ्तर में जाना था, वहां पहुंचने पर पता चला कि दफ्तर पर ताला लगा है। उस समय उनके सामने बड़ा सवाल था कि बचे हुए पैसों से घर लौटने के लिए ट्रेन का टिकट लें या कुछ खा लें। भूख लगी थी, इसलिए उन्होंने रास्ते में चने खरीदे और दादर से बांद्रा तक पैदल लौटने का फैसला किया। इसी दौरान उन्होंने खुद से एक संकल्प लिया कि एक दिन वह इसी रास्ते से अपनी कार में गुजरेंगे। संघर्ष के दौर में देखा गया यह सपना बाद में सच हुआ। जावेद अख्तर ने बताया कि करीब चार दशक बाद जब वह अपनी बेटी जोया अख्तर के साथ उसी इलाके से गुजर रहे थे, तो उन्होंने जोया को अपने संघर्ष के दिनों का वही किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि किस तरह कभी उनके पास पैसे नहीं थे और उन्होंने दादर से बांद्रा तक पैदल जाने का फैसला किया था। उनकी बात सुनने के बाद जोया ने मजाकिया अंदाज में ऐसा जवाब दिया कि वह खुद भी निरुत्तर हो गए। जोया ने उन्हें कहा कि उस समय 20 पैसे के चने भी खूब आते होंगे।
    :::::::::::::::::::
    मेरा आंगन, मेरा पेड़ मेरा आंगन
    कितना कुशादा, कितना बड़ा था जिसमें
    मेरे सारे खेल
    समा जाते थे और आंगन के आगे था वो पेड़
    कि जो मुझसे काफी ऊंचा था लेकिन
    मुझको इसका यकीं था जब मैं बड़ा हो जाऊंगा
    इस पेड़ की फुंगी भी छू लूंगा बरसों बाद
    मैं घर लौटा हूँ देख रहा हूँ
    ये आंगन
    कितना छोटा है पेड़ मगर
    पहले से भी थोड़ा ऊंचा है वो कमरा याद आता है मैं जब भी
    ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तपकर मैं जब भी
    दूसरों के और अपने झूठ से थककर मैं सबसे लड़ के
    खुद से हार के जब भी उस एक कमरे में जाता था वो हल्के और गहरे कत्थई रंगों का इक कमरा
    वो बेहद मेहरबां कमरा जो अपनी नर्म मुट्ठी में मुझे
    ऐसे छुपा लेता था जैसे कोई मां
    बच्चे को आंचल में छुपा ले प्यार से डांटे
    ये क्या आदत है जलती दोपहर में
    मारे-मारे घूमते हो तुम
    :::::::::::::::::::::::::: वो कमरा याद आता है दबीज और खासा भारी
    कुछ जरा मुश्किल से खुलने वाला वो शीशम का दरवाजा
    कि जैसे कोई अक्खड़ बाप अपने खुरदुरे सीने में
    शफकत के समुंदर को छुपाए हो वो कुर्सी
    और उसके साथ वो जुड़वां बहन उसकी वो दोनों दोस्त थीं मेरी वो इक गुस्ताख, मुंहफट आईना
    जो दिल का अच्छा था वो बेढंग सी अलमारी
    जो कोने में खड़ी इक बूढ़ी अन्ना की तरह
    आईने को तंबीह करती थी वो इक गुलदान
    नन्हा सा
    बहुत शैतान उन दिनों पे हंसता था दरीचा
    या ज़ेहानत से भरी इक मुस्कुराहट और दरीचे पर झुकी वो बेल
    कोई सब्ज़ सरगोशी किताबें
    ताक में और शेल्फ पर संजीदा उस्तानी बनी बैठीं
    मगर सब मुंतज़िर इस बात की।



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  • इंटरव्यू- परिणीति चोपड़ा:स्क्रिप्ट चुनने में लंबी प्लानिंग नहीं, अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करती हूं

    इंटरव्यू- परिणीति चोपड़ा:स्क्रिप्ट चुनने में लंबी प्लानिंग नहीं, अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा करती हूं




    परिणीति चोपड़ा ने नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ के साथ अपना ओटीटी डेब्यू किया है। उन्होंने एक खास बातचीत में अपने वेब डेब्यू, खुद पर भरोसे, बायोपिक की इच्छा और जीवन के नए फैसलों को लेकर चर्चा की। ओटीटी की दुनिया में कदम रखने का फैसला आपने क्यों किया? बड़े परदे पर अलग-अलग किरदार निभाने के बाद डिजिटल माध्यम में कदम रखना सिर्फ प्लेटफॉर्म बदलने का फैसला नहीं था। मैं ऐसी कहानियों का हिस्सा बनना चाहती थी, जो दर्शकों को बांधे रखें और जिन्हें शुरू करने के बाद वे रोक न पाएं। ‘शक: ट्रस्ट नो वन’ की स्क्रिप्ट पढ़ते हुए भी मेरे साथ कुछ ऐसा ही हुआ था। इसलिए ही इससे जुड़ी थी। खुद को क्रॉस-चेक करने और खुद पर शक करने में क्या फर्क पाती हैं? मेरे लिए दोनों बातें बिल्कुल अलग हैं। अपने काम या फैसले को दोबारा जांचना सकारात्मक हो सकता है लेकिन लगातार खुद पर शक करना आपको पीछे खींच सकता है। जिंदगी में खुद पर विश्वास होना बहुत जरूरी है। अगर किसी चीज को लेकर भीतर से लगातार लगता है कि वह आपके लिए सही नहीं है, तो उस संकेत को भी समझना चाहिए। मेरे लिए आत्मविश्वास और आत्म-संदेह के बीच यही अंतर है। अब तक के इतने लंबे करियर में स्क्रिप्ट चुनने का तरीका कैसे बदला है? मैं करियर को लेकर कभी बहुत ज्यादा प्लानिंग करने वाली नहीं रही हूं। काफी हद तक अंतरात्मा की आवाज से काम करती हूं। जब कोई स्क्रिप्ट पढ़कर भीतर से लगता है कि मुझे यह करनी चाहिए, तो उस भावना को महत्व देती हूं। मैंने महसूस किया है कि जब इसके उलट जाकर फैसला लिया तो वह हमेशा गलत साबित हुआ। मेरे लिए करियर का मतलब हर चीज की लंबी प्लानिंग करना नहीं है। क्या स्क्रिप्ट चुनने में पति राघव चड्ढा से भी कोई सलाह लेती हैं? मेरे लिए पर्सनल और प्रोफेशनल दुनिया को अलग रखना जरूरी है। हम दोनों के अपने-अपने प्रोफेशन और जिम्मेदारियां हैं। जिस तरह मेरे काम में उनका हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए, उसी तरह उनके काम में भी मेरा हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। मैं अपनी स्क्रिप्ट का फैसला खुद करती हूं। मुझे लगता है कि हर व्यक्ति को अपनी पेशेवर पहचान और फैसले खुद लेने चाहिए। क्या बायोपिक जॉनर अब भी आकर्षित करता है? बायोपिक हमेशा मुझे दिलचस्प लगती हैं। इसमें सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि काफी रिसर्च भी होती है। आपको उस व्यक्ति की दुनिया, सोच और जर्नी को समझना पड़ता है। भविष्य में किसी स्पोर्ट्स पर्सन या म्यूजिक पर्सनैलिटी की कहानी करना अच्छा लगेगा। ऐसी प्रेरणादायक महिलाओं की कहानियां भी मुझे आकर्षित करती हैं, जिन्होंने देश में कोई बड़ा बदलाव किया हो। ओटीटी पर शुरुआत इसी सीरीज से क्यों की? मुझे जिस तरह का शो करना था, उसकी लगभग सारी खूबियां इस स्क्रिप्ट में थीं। इसे पढ़ते हुए मैं लगातार आगे बढ़ती गई और रोकने का मन नहीं हुआ। तभी लगा कि अगर इसे उसी तरह परदे पर बनाया गया, जैसा स्क्रिप्ट में महसूस हो रहा है, तो यह वैसा ही बिंज-वर्दी शो होगा, जिसकी मैं तलाश कर रही थी। डायरेक्टर, प्रोड्यूसर्स और पूरी स्टार कास्ट भी शानदार थी। इसकी शूटिंग का अनुभव इतना अच्छा रहा है कि अब वेब सीरीज फॉर्मेट में और काम करने की इच्छा है।



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  • फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का निधन:94 साल की उम्र में अपनी आखिरी फिल्म का निर्देशन किया था, कमल हासन-जूनियर NTR ने दी श्रद्धांजलि

    फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का निधन:94 साल की उम्र में अपनी आखिरी फिल्म का निर्देशन किया था, कमल हासन-जूनियर NTR ने दी श्रद्धांजलि




    दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का शनिवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने चेन्नई के कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। सिंगीतम ने ‘पुष्पक विमानम’ और ‘आदित्य 369’ समेत तेलुगु, कन्नड़, तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में करीब 60 फिल्मों का निर्देशन किया था। उन्हें दो नेशनल फिल्म अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिले। 94 साल की उम्र में उन्होंने अपनी आखिरी फिल्म ‘सिंग गीथम’ निर्देशित की थी। यह फिल्म 12 जून 2026 को रिलीज हुई थी। तेलुगु और तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कमल हासन, जूनियर NTR, श्रुति हासन, नाग अश्विन, महेश बाबू ने उनके निधन पर दुख जताया। सिंगीतम श्रीनिवास राव का फिल्मी सफर सिंगीतम श्रीनिवास राव ने फिल्मी करियर की शुरुआत दिग्गज निर्देशक के.वी. रेड्डी के सहायक के तौर पर की। उन्होंने ‘मायाबाजार’ और ‘जगदेक वीरुनी कथा’ जैसी फिल्मों में काम किया। साल 1972 में तेलुगु फिल्म ‘नीति-निजायती’ से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी में करीब 60 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘दिक्कत्र पार्वती’, ‘मयूरी’, ‘पुष्पक विमानम’, ‘आदित्य 369’, ‘भैरव द्वीपम’, ‘मगलिर मत्तुम’ और ‘माइकल मदना काम राजन’ शामिल हैं। कमल हासन के साथ खास साझेदारी सिंगीतम और कमल हासन ने कई चर्चित फिल्मों में साथ काम किया। इनमें ‘पुष्पक विमानम’, ‘अपूर्व सगोदरगल’ और ‘माइकल मदना काम राजन’ शामिल हैं। ‘पुष्पक विमानम’ में बिना संवाद के कहानी बताने का प्रयोग किया गया था। हिंदी सिनेमा में भी किया काम सिंगीतम ने हिंदी और हिंदी समेत कई भाषाओं में बनी फिल्मों का निर्देशन किया। इनमें ‘थ्रिलोक सुंदरी’ (1982), ‘लिटिल जॉन’ (2001), ‘मुंबई एक्सप्रेस’ (2005) और एनिमेशन फिल्म ‘घटोत्कच’ (2008) शामिल हैं। ‘फूल’ (1993) भी उनकी हिंदी फिल्मों में शामिल रही। ‘पुष्पक’ की खास पहचान ‘पुष्पक विमान’ 27 नवंबर 1987 को रिलीज हुई थी। फिल्म 27 नवंबर 1987 को रिलीज हुई थी। अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से रिलीज किया गया था। कर्नाटक में इसका मूल नाम ‘पुष्पक विमान’ था। आंध्र प्रदेश में इसे ‘पुष्पक विमानम’ नाम से रिलीज किया गया। हिंदी भाषी क्षेत्रों में फिल्म का नाम ‘पुष्पक’ रखा गया, जिसका अर्थ ‘फूल’ है। तमिलनाडु में इसे ‘पेसुम पडम’ नाम से रिलीज किया गया, जिसका अर्थ ‘बोलती तस्वीर’ है। वहीं केरल में इसे ‘पुष्पकविमानम’ नाम से रिलीज किया गया। फिल्म में कोई संवाद नहीं था। इसके बावजूद इसे दर्शकों और समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। बेंगलुरु में फिल्म 35 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चली। फिल्म को बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 35वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ में सिंगीतम को बेस्ट डायरेक्टर और कमल हासन को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। फिल्म को बेस्ट फिल्म का पुरस्कार भी मिला। प्रयोगात्मक फिल्मों के लिए पहचान सिंगीतम अलग तरह की कहानियों और प्रयोगों के लिए जाने गए। ‘दिक्कत्र पार्वती’ को भी नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। ‘आदित्य 369’ को तेलुगु सिनेमा की चर्चित साइंस फिक्शन फिल्मों में गिना जाता है, जबकि ‘भैरव द्वीपम’ फैंटेसी शैली की प्रमुख फिल्मों में शामिल रही। आखिरी फिल्म तक सिनेमा से जुड़े रहे साल 2026 में सिंगीतम ने करीब 10 साल बाद निर्देशन में वापसी की। उनकी आखिरी फिल्म ‘सिंग गीथम’ थी। 94 साल की उम्र तक वह सिनेमा से जुड़े रहे और नई कहानियों पर काम करते रहे। कमल हासन ने खुद को शिष्य बताया कमल हासन ने रविवार को X पर सिंगीतम की तस्वीर शेयर की। उन्होंने खुद को सिंगीतम का शिष्य बताया और उनके साथ काम करने का अनुभव याद किया। कमल हासन ने लिखा, “सिंगीतम कारू ने अपनी इच्छा के अनुसार, अपनी जवानी के साथ ही आखिरी सांस ली। उनकी जवानी बहुत लोगों तक नहीं पहुंची। उस खूबी को फैलाने की चाहत में, जिन दोस्तों का हाथ पकड़कर वे चले, उन शिष्यों में मैं भी एक हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “कम उम्र में मरना हमेशा दुखद नहीं होता। यह गौरवपूर्ण भी हो सकता है। सिंगीतम श्रीनिवास राव इसका शानदार उदाहरण हैं। जब से मैंने उन्हें जाना, तब से उनकी प्रशंसा की है। अब मैं भी उनके जैसे जीने की इच्छा रखता हूं।” जूनियर NTR ने बताया समय से आगे सोचने वाला फिल्ममेकर जूनियर NTR ने X पर सिंगीतम को समय से आगे सोचने वाला फिल्ममेकर बताया। उन्होंने लिखा, “सिंगीतम श्रीनिवास राव गरु के नहीं रहने की खबर बेहद दुखद है।” उन्होंने आगे लिखा, “‘आदित्य 369’, ‘पुष्पक विमानम’, ‘मयूरी’… वे समय से आगे सोचने वाले फिल्ममेकर थे। उन्होंने ऐसी फिल्में बनाईं, जो कई पीढ़ियों के बाद भी नई लगती हैं। उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ओम शांति।” नाग अश्विन ने साझा किया आखिरी स्क्रिप्ट आइडिया फिल्ममेकर नाग अश्विन ने सिंगीतम की क्रिएटिव सोच की एक झलक साझा की। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर सिंगीतम के एक मैसेज का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया। यह मैसेज 5 सितंबर 2026 का था। इसमें लिखा था, “ए फ्रूट कट्स द नाइफ, मेरी नई स्क्रिप्ट का टाइटल।” महेश बाबू ने भी दी श्रद्धांजलि महेश बाबू ने X पर सिंगीतम को भारतीय सिनेमा का दिग्गज बताया। उन्होंने लिखा, “भारतीय सिनेमा का एक दिग्गज अब हमारे बीच नहीं है। सिंगीतम श्रीनिवास राव गरु हर मायने में एक लीजेंड थे।” महेश बाबू ने आगे लिखा, “वे असाधारण कल्पना, साहस और प्रतिभा वाले फिल्ममेकर थे। भारतीय सिनेमा हमेशा उनका ऋणी रहेगा। सर, आपकी आत्मा को शांति मिले। आपके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।”



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  • फ्लाईदुबई विमान में कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी:'नीरजा’ से ‘बेल बॉटम’ तक प्लेन हाईजैक और संकट पर बनी 10 फिल्में

    फ्लाईदुबई विमान में कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी:'नीरजा’ से ‘बेल बॉटम’ तक प्लेन हाईजैक और संकट पर बनी 10 फिल्में




    30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में बड़ा संकट पैदा हो गया। दुबई से तेल अवीव जा रहे बोइंग 737 MAX 8 के कॉकपिट में को-पायलट ने कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया। विमान में 174 यात्री और 8 क्रू मेंबर सवार थे। हमले के बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा और करीब 30 सेकंड में 14 हजार फीट की ऊंचाई खो बैठा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा अनलॉक किया। यात्रियों ने हमलावर को काबू किया। दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान संभाला और ताबुक में सुरक्षित लैंडिंग कराई। इस घटना ने बॉलीवुड की उन फिल्मों की याद दिलाई, जिनमें विमान हाईजैक, विमान संकट और यात्रियों को बचाने की कहानियां दिखाई गई हैं। इनमें कुछ फिल्में वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं, जबकि कुछ काल्पनिक कहानियों पर आधारित हैं। 1. ‘नीरजा’ 2016 की फिल्म ‘नीरजा’ में सोनम कपूर ने एयर होस्टेस नीरजा भनोट का किरदार निभाया था। फिल्म 1986 के पैन एम फ्लाइट 73 हाईजैक पर आधारित थी। नीरजा ने यात्रियों को बचाने की कोशिश में अपनी जान गंवा दी थी। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। 2. ‘बेल बॉटम’ अक्षय कुमार की 2021 की फिल्म ‘बेल बॉटम’ 1980 के दशक की विमान हाईजैक घटनाओं से प्रेरित स्पाई थ्रिलर थी। फिल्म में अक्षय ने RAW एजेंट का किरदार निभाया, जो हाईजैक किए गए विमान से यात्रियों को बचाने के मिशन पर जाता है। 3. ‘योद्धा’ 2024 में आई सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘योद्धा’ में एक पूर्व सैनिक हाईजैक किए गए विमान में फंस जाता है। इसके बाद वह यात्रियों की जान बचाने और हमलावरों का सामना करने की कोशिश करता है। यह एक काल्पनिक एक्शन थ्रिलर थी। 4. ‘कंधार’ मलयालम फिल्म ‘कंधार’ में मोहनलाल ने मेजर महादेवन का किरदार निभाया था। फिल्म में एक यात्री विमान के हाईजैक होने के बाद बंधकों को बचाने का अभियान दिखाया गया है। इसकी कहानी 1999 के इंडियन एयरलाइंस फ्लाइट 814 हाईजैक से प्रेरित थी। 5. ‘जमीन’ अजय देवगन और अभिषेक बच्चन स्टारर ‘जमीन’ में एक विमान हाईजैक होने के बाद यात्रियों को बचाने का ऑपरेशन दिखाया गया है। यह फिल्म 1999 के IC-814 हाईजैकिंग से थोड़ी-बहुत प्रेरित थी और ऑपरेशन एंटेबे से भी प्रभावित थी। 6. ‘हाईजैक’ 2008 की फिल्म ‘हाईजैक’ में शाइनी आहूजा ने ग्राउंड मेंटेनेंस इंजीनियर विक्रम मदान का किरदार निभाया था। उनकी बेटी जिस विमान में सफर कर रही होती है, उसे आतंकवादी हाईजैक कर लेते हैं। इसके बाद विक्रम विमान में घुसकर अपनी बेटी और दूसरे यात्रियों को बचाने की कोशिश करता है। 7. ‘चोर निकल के भागा’ यामी गौतम और सनी कौशल स्टारर यह नेटफ्लिक्स थ्रिलर एक डायमंड चोरी की साजिश से शुरू होती है। इसके बाद विमान हाईजैक होने से कहानी पूरी तरह बदल जाती है। 8. ‘रनवे 34’ फिल्म ‘रनवे 34’ में अजय देवगन ने ‘कैप्टन विक्रांत खन्ना’ नाम के एक विलक्षण और आत्मविश्वासी पायलट की भूमिका निभाई है। कहानी में दिखाया गया है कि खराब मौसम और बेहद कम दृश्यता (लो विजिबिलिटी) के बीच वह जोखिम उठाकर विमान की एक ‘ब्लाइंड लैंडिंग’ करवाते हैं। इसके बाद यात्रियों की जान जोखिम में डालने के आरोप में उन पर कानूनी जांच (एविएशन इंक्वायरी) बैठती है, जिसका नेतृत्व अमिताभ बच्चन (नारायण वेदांत के रूप में) करते हैं। 9. ‘फ्लाइट’ 2012 की हॉलीवुड फिल्म ‘फ्लाइट’ में डेंजल वॉशिंगटन ने पायलट व्हिप व्हिटेकर का किरदार निभाया था। विमान में गंभीर तकनीकी खराबी आने के बाद वह इमरजेंसी लैंडिंग करता है। इसके बाद उसके फैसलों और हादसे की जांच होती है। 10. ‘एयर फोर्स वन’ 1997 में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म ‘एयर फोर्स वन’ एक पॉलिटिकल एक्शन थ्रिलर थी। फिल्म का निर्देशन मशहूर जर्मन डायरेक्टर वोल्फगैंग पीटरसन ने किया था। फिल्म की कहानी में राष्ट्रपति मार्शल रूस के मॉस्को से अमेरिका लौट रहे होते हैं। इसी दौरान उनके आधिकारिक विमान ‘एयर फोर्स वन’ को रूसी नव-राष्ट्रवादी आतंकवादी हाईजैक कर लेते हैं। इन आतंकियों का नेतृत्व इगोर कोर्शुनोव करता है। हाईजैक के दौरान सुरक्षा अधिकारी राष्ट्रपति को विमान से सुरक्षित निकालने की कोशिश करते हैं। हालांकि, मार्शल विमान से बाहर निकलने के बजाय वहीं छिपे रहते हैं। वह खुद को कार्गो होल्ड में छिपा लेते हैं और आतंकियों से बचते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर देते हैं।



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  • नुसरत भरूचा की सर्जरी होगी:अनु अग्रवाल हादसे के बाद 29 दिन कोमा में थीं, महिमा चौधरी के चेहरे से निकाले गए थे कांच के टुकड़े

    नुसरत भरूचा की सर्जरी होगी:अनु अग्रवाल हादसे के बाद 29 दिन कोमा में थीं, महिमा चौधरी के चेहरे से निकाले गए थे कांच के टुकड़े




    एक्ट्रेस नुसरत भरूचा हाल ही में बाली में एक हादसे का शिकार हो गईं। वह काम और छुट्टियों से जुड़े दौरे पर बाली गई थीं। हादसे के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ है। जिसके बाद आगे की सर्जरी के लिए उन्हें मुंबई लाने का फैसला किया गया। इसके लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। 2 अक्टूबर 2026 को वह एयर एंबुलेंस से मुंबई पहुंचीं। गौरतलब है कि इससे पहले भी कई एक्ट्रेस हादसों में घायल हो चुकी हैं। हादसे के बाद एक्ट्रेस अन्नू अग्रवाल की याददाश्त चली गई थी। तो वहीं महिमा चौधरी के चेहरे से 67 कांच के टुकड़े निकाले गए थे। अनु अग्रवाल का गंभीर कार एक्सीडेंट हुआ था 1990 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘आशिकी’ से रातों-रात मशहूर हुईं अभिनेत्री अनु अग्रवाल के साथ साल 1999 में दर्दनाक हादसा हुआ था। मुंबई में एक लेट-नाइट पार्टी से लौटते समय अनु अग्रवाल की कार का गंभीर एक्सीडेंट हुआ था। इस हादसे में उनके शरीर में कई जगह फ्रैक्चर हुए, उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ और सिर व दिमाग में अंदरूनी चोटें आईं। दुर्घटना के बाद वह 29 दिनों तक कोमा में रहीं। होश में आने के बाद उनका आधा शरीर पैरालिसिस (लकवा) का शिकार हो चुका था और याददाश्त चले जाने के कारण वह अपनी पुरानी जिंदगी और पहचान तक भूल चुकी थीं। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में एक्सीडेंट पर अनु अग्रवाल ने बताया था, मेरा सीधा हाथ पूरा पैरालाइज्ड था, मैं खुद खाना भी नहीं खा पाती थी। एक्सीडेंट के 7 साल बाद तक ये हुआ। मेरे कई एक्सीडेंट हुए थे। मेरा उल्टा हाथ, पैसिव था। राइट हैंड काम करता था। जब सीधा हाथ पैरालाइज हुआ, तो मैं चेक भी साइन नहीं कर पाती थी। मेरे कई चेक बाउंस हो गए। खाना उल्टे हाथ से कैसे खाना है, चम्मच इधर-उधर जाता। सुबह नाइट सूट का नाड़ा खोलने के लिए आपको दो हाथ चाहिए, एक हाथ से नाड़ा नहीं खुलता था। किस तरह मैं टूथब्रश पकड़ती। पेस्ट बार-बार फिसलता। एक हाथ से ये सब करती थी। हालांकि, अनु अग्रवाल ने हार नहीं मानी और योग, ध्यान तथा आत्मबल के सहारे न सिर्फ दोबारा चलना सीखा, बल्कि अपनी याददाश्त भी वापस पाई। महिमा चौधरी का कार एक्सीडेंट हुआ था फिल्म ‘परदेस’ से बॉलीवुड में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस महिमा चौधरी का 1999 में बेंगलुरु में गंभीर कार एक्सीडेंट हुआ था। उस वक्त वह अजय देवगन और काजोल की फिल्म ‘दिल क्या करे’ की शूटिंग कर रही थीं। स्टूडियो जाते समय उनकी कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसा इतना गंभीर था कि कार का कांच टूटकर महिमा के चेहरे में जा धंसा। महिमा ने साल 2020 में पिंकविला को दिए इंटरव्यू में बताया था कि मुझे लगा कि मैं मर रही हूं। मैं अस्पताल पहुंची, लेकिन उस समय किसी ने मुझे उठाया तक नहीं और अस्पताल नहीं ले गया। अस्पताल पहुंचने के काफी देर बाद मेरी मां आईं और अजय देवगन भी वहां पहुंचे। जब वे किसी से बात करने गए, तब मैं उठी और मैंने शीशे में अपना चेहरा देखा। मुझे लगा कि वे इतना हंगामा क्यों कर रहे हैं। मैंने कहा, चलो। कुछ नहीं हुआ, मैं ठीक हूं।’ उन्होंने कहा, ‘नहीं, आराम करो। हम वापस आएंगे और शेड्यूल पूरा करेंगे।’ मैंने कहा, ‘नहीं, नहीं। मेरे पास सिर्फ एक दिन है, तो मुझे इसे खत्म करने दो।’ जब मेरी सर्जरी हुई और डॉक्टरों ने मेरे चेहरे से शीशे के 67 टुकड़े निकाले, तब मुझे उस हादसे की गंभीरता का एहसास हुआ। मैं आज भी इस बारे में बात करते हुए रो पड़ती हूं, क्योंकि यह सिर्फ मेरे करियर के बारे में नहीं था। यह जिंदगी में किसी भी चीज को लेकर आपके नजरिए को बदल देने वाला अनुभव था। मुझे स्टेपल जैसे टांकों के साथ रहना पड़ा और बिना धूप के घर के अंदर रहना पड़ा। मेरे घर की खिड़कियों को काला कर दिया गया था। मैंने खुद को शीशे में देखना बंद कर दिया था। घर में कोई शीशा नहीं था और धूप भी अंदर नहीं आती थी। यहां तक कि जिन लाइटों में यूवी किरणें होती हैं, उन्हें भी मैं घर में नहीं रख सकती थी, ताकि चेहरे पर निशान न रह जाएं। उस दौरान मेरे पास कई फिल्में लाइन में थीं, जिनका मुझे हिस्सा बनना था, लेकिन हादसे के कारण मुझे उनमें से कई फिल्में छोड़नी पड़ीं।’ हेमा मालिनी भी हुई थीं भीषण सड़क हादसे का शिकार बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी भी साल 2015 में एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हुई थीं। यह दुर्घटना 2 जुलाई 2015 को राजस्थान के दौसा के पास आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे-11 पर हुई थी। हादसे में हेमा मालिनी घायल हुई थीं, जबकि दूसरी कार में सवार मासूम बच्ची की मौत हो गई थी। हेमा मालिनी अपनी मर्सिडीज कार से मथुरा से जयपुर जा रही थीं। इसी दौरान उनकी कार की सामने से आ रही ऑल्टो कार से टक्कर हो गई। ऑल्टो में एक परिवार सवार था। हादसे में ऑल्टो कार में सवार 2 साल की बच्ची चिन्नी की मौत हो गई, जबकि उसके परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए थे। वहीं हेमा मालिनी को भी गंभीर चोटें आई थीं। इस दुर्घटना में हेमा मालिनी के चेहरे पर गहरी चोटें आईं। उनके माथे और दाईं आंख के ऊपर भी चोट लगी थी। उन्हें इलाज के लिए जयपुर के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके चेहरे की सर्जरी की गई थी। हादसे के बाद इस बात को लेकर विवाद भी हुआ था कि दुर्घटना के बाद घायलों को कितनी जल्दी चिकित्सा सहायता मिली। मृत बच्ची के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि बच्ची कुछ समय तक घटनास्थल पर ही पड़ी रही। दूसरी ओर, हेमा मालिनी को एक स्थानीय डॉक्टर अपनी गाड़ी से अस्पताल ले गए थे। घटना के बाद पुलिस ने हेमा मालिनी की कार के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मामले में लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में कार्रवाई की थी। शूटिंग के दौरान तनीषा मुखर्जी की कार खाई में गिरी थी एक्ट्रेस तनीषा मुखर्जी की पहली हिंदी फिल्म ‘Sssshhh…’ की शूटिंग के दौरान 2003 में हादसा हुआ था। विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में तनीषा ने बताया था कि वह फिल्म की शूटिंग के लिए मनाली में थीं। उनके साथ अभिनेता डिनो मोरिया, गौरव कपूर और फिल्म के निर्देशक पवन एस. कौल भी कार में मौजूद थे। रास्ते में कार बर्फ की वजह से फिसली और खाई में जा गिरी। इस हादसे में तनीषा को सिर में गंभीर चोट लगी और उन्हें कंसशन हुआ। उन्होंने बताया था कि हादसे के बाद उनकी याददाश्त भी चली गई थी और उन्हें ठीक होने में एक साल से ज्यादा समय लगा। इलाज के लिए उन्हें दिल्ली भी लाया गया था। तनीषा ने इस घटना को याद करते हुए बताया था कि फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि किसी हादसे के बाद व्यक्ति उठकर पूछता है कि ‘आप कौन हैं’, लेकिन उनके मामले में वास्तव में ऐसा हुआ था। हादसे के बावजूद उन्हें फिल्म पूरी करनी पड़ी। मलाइका अरोड़ा कार हादसे में घायल हुई थीं अप्रैल 2022 में मलाइका अरोड़ा एक कार एक्सीडेंट में घायल हो गई थीं। यह हादसा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कार कई वाहनों की टक्कर में फंस गई थी। हादसे के बाद मलाइका को अस्पताल ले जाया गया। उन्हें आंख के पास चोट लगी और चेहरे पर टांके भी आए। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली। कनाडा में रंभा की कार को दूसरी गाड़ी ने टक्कर मारी थी ‘जुड़वा’ और कई फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस रंभा भी गंभीर सड़क हादसे का सामना कर चुकी हैं। 2022 में कनाडा में उनकी कार को दूसरी गाड़ी ने टक्कर मार दी थी। हादसे के समय रंभा के साथ उनकी बेटी और नैनी भी कार में थीं। रंभा ने सोशल मीडिया पर एक्सीडेंट की जानकारी साझा की थी। उनकी बेटी को हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। शूटिंग के दौरान घोड़ा-गाड़ी से गिरी थीं मनीषा कोइराला मनीषा कोइराला शूटिंग के दौरान घायल हो गई थीं। अक्टूबर 2002 में फिल्म ‘पैसा वसूल’ की शूटिंग के दौरान वह घोड़ा-गाड़ी से गिर गई थीं। उन्हें पैर में चोट लगी और अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में डॉक्टरों ने उनके दाहिने पैर में हेयरलाइन फ्रैक्चर की पुष्टि की। उन्हें कुछ दिनों तक अस्पताल में रखा गया और आराम की सलाह दी गई। ऐश्वर्या राय को शूटिंग के दौरान चोट लगी थी ऐश्वर्या राय भी शूटिंग के दौरान गंभीर चोट का सामना कर चुकी हैं। साल 2003 में फिल्म ‘खाकी’ की शूटिंग के दौरान एक सीन फिल्माया जा रहा था। इस सीन में एक वाहन को ऐश्वर्या से कुछ दूरी पर रुकना था, लेकिन ड्राइवर वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और गाड़ी ऐश्वर्या से जा टकराई। हादसे के बाद ऐश्वर्या गिर गईं और उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। उनके को-स्टार अक्षय कुमार उन्हें अस्पताल लेकर गए थे। सोनम कपूर ‘प्रेम रतन धन पायो’ के सेट पर लगी थी चोट सोनम कपूर भी फिल्म के सेट पर हादसे का सामना कर चुकी हैं। साल 2015 में ‘प्रेम रतन धन पायो’ की शूटिंग के दौरान एक डांस सीक्वेंस फिल्माया जा रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनम को एक डांस सीक्वेंस में जमीन से ऊपर उठाया जाना था। लैंडिंग के दौरान वह गिर गईं और उनके पैर में चोट लगी। उनके टखने से खून निकलने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।



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    नुसरत भरूचा की सर्जरी होगी:अनु अग्रवाल हादसे के बाद 29 दिन कोमा में थीं, महिमा चौधरी के चेहरे से निकाले गए थे कांच के टुकड़े




    एक्ट्रेस नुसरत भरूचा हाल ही में बाली में एक हादसे का शिकार हो गईं। वह काम और छुट्टियों से जुड़े दौरे पर बाली गई थीं। हादसे के बाद उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हुआ है। जिसके बाद आगे की सर्जरी के लिए उन्हें मुंबई लाने का फैसला किया गया। इसके लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। 2 अक्टूबर 2026 को वह एयर एंबुलेंस से मुंबई पहुंचीं। गौरतलब है कि इससे पहले भी कई एक्ट्रेस हादसों में घायल हो चुकी हैं। हादसे के बाद एक्ट्रेस अन्नू अग्रवाल की याददाश्त चली गई थी। तो वहीं महिमा चौधरी के चेहरे से 67 कांच के टुकड़े निकाले गए थे। अनु अग्रवाल का गंभीर कार एक्सीडेंट हुआ था 1990 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘आशिकी’ से रातों-रात मशहूर हुईं अभिनेत्री अनु अग्रवाल के साथ साल 1999 में दर्दनाक हादसा हुआ था। मुंबई में एक लेट-नाइट पार्टी से लौटते समय अनु अग्रवाल की कार का गंभीर एक्सीडेंट हुआ था। इस हादसे में उनके शरीर में कई जगह फ्रैक्चर हुए, उनका चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुआ और सिर व दिमाग में अंदरूनी चोटें आईं। दुर्घटना के बाद वह 29 दिनों तक कोमा में रहीं। होश में आने के बाद उनका आधा शरीर पैरालिसिस (लकवा) का शिकार हो चुका था और याददाश्त चले जाने के कारण वह अपनी पुरानी जिंदगी और पहचान तक भूल चुकी थीं। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में एक्सीडेंट पर अनु अग्रवाल ने बताया था, मेरा सीधा हाथ पूरा पैरालाइज्ड था, मैं खुद खाना भी नहीं खा पाती थी। एक्सीडेंट के 7 साल बाद तक ये हुआ। मेरे कई एक्सीडेंट हुए थे। मेरा उल्टा हाथ, पैसिव था। राइट हैंड काम करता था। जब सीधा हाथ पैरालाइज हुआ, तो मैं चेक भी साइन नहीं कर पाती थी। मेरे कई चेक बाउंस हो गए। खाना उल्टे हाथ से कैसे खाना है, चम्मच इधर-उधर जाता। सुबह नाइट सूट का नाड़ा खोलने के लिए आपको दो हाथ चाहिए, एक हाथ से नाड़ा नहीं खुलता था। किस तरह मैं टूथब्रश पकड़ती। पेस्ट बार-बार फिसलता। एक हाथ से ये सब करती थी। हालांकि, अनु अग्रवाल ने हार नहीं मानी और योग, ध्यान तथा आत्मबल के सहारे न सिर्फ दोबारा चलना सीखा, बल्कि अपनी याददाश्त भी वापस पाई। महिमा चौधरी का कार एक्सीडेंट हुआ था फिल्म ‘परदेस’ से बॉलीवुड में पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस महिमा चौधरी का 1999 में बेंगलुरु में गंभीर कार एक्सीडेंट हुआ था। उस वक्त वह अजय देवगन और काजोल की फिल्म ‘दिल क्या करे’ की शूटिंग कर रही थीं। स्टूडियो जाते समय उनकी कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। हादसा इतना गंभीर था कि कार का कांच टूटकर महिमा के चेहरे में जा धंसा। महिमा ने साल 2020 में पिंकविला को दिए इंटरव्यू में बताया था कि मुझे लगा कि मैं मर रही हूं। मैं अस्पताल पहुंची, लेकिन उस समय किसी ने मुझे उठाया तक नहीं और अस्पताल नहीं ले गया। अस्पताल पहुंचने के काफी देर बाद मेरी मां आईं और अजय देवगन भी वहां पहुंचे। जब वे किसी से बात करने गए, तब मैं उठी और मैंने शीशे में अपना चेहरा देखा। मुझे लगा कि वे इतना हंगामा क्यों कर रहे हैं। मैंने कहा, चलो। कुछ नहीं हुआ, मैं ठीक हूं।’ उन्होंने कहा, ‘नहीं, आराम करो। हम वापस आएंगे और शेड्यूल पूरा करेंगे।’ मैंने कहा, ‘नहीं, नहीं। मेरे पास सिर्फ एक दिन है, तो मुझे इसे खत्म करने दो।’ जब मेरी सर्जरी हुई और डॉक्टरों ने मेरे चेहरे से शीशे के 67 टुकड़े निकाले, तब मुझे उस हादसे की गंभीरता का एहसास हुआ। मैं आज भी इस बारे में बात करते हुए रो पड़ती हूं, क्योंकि यह सिर्फ मेरे करियर के बारे में नहीं था। यह जिंदगी में किसी भी चीज को लेकर आपके नजरिए को बदल देने वाला अनुभव था। मुझे स्टेपल जैसे टांकों के साथ रहना पड़ा और बिना धूप के घर के अंदर रहना पड़ा। मेरे घर की खिड़कियों को काला कर दिया गया था। मैंने खुद को शीशे में देखना बंद कर दिया था। घर में कोई शीशा नहीं था और धूप भी अंदर नहीं आती थी। यहां तक कि जिन लाइटों में यूवी किरणें होती हैं, उन्हें भी मैं घर में नहीं रख सकती थी, ताकि चेहरे पर निशान न रह जाएं। उस दौरान मेरे पास कई फिल्में लाइन में थीं, जिनका मुझे हिस्सा बनना था, लेकिन हादसे के कारण मुझे उनमें से कई फिल्में छोड़नी पड़ीं।’ हेमा मालिनी भी हुई थीं भीषण सड़क हादसे का शिकार बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद हेमा मालिनी भी साल 2015 में एक भीषण सड़क हादसे का शिकार हुई थीं। यह दुर्घटना 2 जुलाई 2015 को राजस्थान के दौसा के पास आगरा-जयपुर नेशनल हाईवे-11 पर हुई थी। हादसे में हेमा मालिनी घायल हुई थीं, जबकि दूसरी कार में सवार मासूम बच्ची की मौत हो गई थी। हेमा मालिनी अपनी मर्सिडीज कार से मथुरा से जयपुर जा रही थीं। इसी दौरान उनकी कार की सामने से आ रही ऑल्टो कार से टक्कर हो गई। ऑल्टो में एक परिवार सवार था। हादसे में ऑल्टो कार में सवार 2 साल की बच्ची चिन्नी की मौत हो गई, जबकि उसके परिवार के अन्य सदस्य घायल हुए थे। वहीं हेमा मालिनी को भी गंभीर चोटें आई थीं। इस दुर्घटना में हेमा मालिनी के चेहरे पर गहरी चोटें आईं। उनके माथे और दाईं आंख के ऊपर भी चोट लगी थी। उन्हें इलाज के लिए जयपुर के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके चेहरे की सर्जरी की गई थी। हादसे के बाद इस बात को लेकर विवाद भी हुआ था कि दुर्घटना के बाद घायलों को कितनी जल्दी चिकित्सा सहायता मिली। मृत बच्ची के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया था कि बच्ची कुछ समय तक घटनास्थल पर ही पड़ी रही। दूसरी ओर, हेमा मालिनी को एक स्थानीय डॉक्टर अपनी गाड़ी से अस्पताल ले गए थे। घटना के बाद पुलिस ने हेमा मालिनी की कार के ड्राइवर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मामले में लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में कार्रवाई की थी। शूटिंग के दौरान तनीषा मुखर्जी की कार खाई में गिरी थी एक्ट्रेस तनीषा मुखर्जी की पहली हिंदी फिल्म ‘Sssshhh…’ की शूटिंग के दौरान 2003 में हादसा हुआ था। विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में तनीषा ने बताया था कि वह फिल्म की शूटिंग के लिए मनाली में थीं। उनके साथ अभिनेता डिनो मोरिया, गौरव कपूर और फिल्म के निर्देशक पवन एस. कौल भी कार में मौजूद थे। रास्ते में कार बर्फ की वजह से फिसली और खाई में जा गिरी। इस हादसे में तनीषा को सिर में गंभीर चोट लगी और उन्हें कंसशन हुआ। उन्होंने बताया था कि हादसे के बाद उनकी याददाश्त भी चली गई थी और उन्हें ठीक होने में एक साल से ज्यादा समय लगा। इलाज के लिए उन्हें दिल्ली भी लाया गया था। तनीषा ने इस घटना को याद करते हुए बताया था कि फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि किसी हादसे के बाद व्यक्ति उठकर पूछता है कि ‘आप कौन हैं’, लेकिन उनके मामले में वास्तव में ऐसा हुआ था। हादसे के बावजूद उन्हें फिल्म पूरी करनी पड़ी। मलाइका अरोड़ा कार हादसे में घायल हुई थीं अप्रैल 2022 में मलाइका अरोड़ा एक कार एक्सीडेंट में घायल हो गई थीं। यह हादसा मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कार कई वाहनों की टक्कर में फंस गई थी। हादसे के बाद मलाइका को अस्पताल ले जाया गया। उन्हें आंख के पास चोट लगी और चेहरे पर टांके भी आए। इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली। कनाडा में रंभा की कार को दूसरी गाड़ी ने टक्कर मारी थी ‘जुड़वा’ और कई फिल्मों में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस रंभा भी गंभीर सड़क हादसे का सामना कर चुकी हैं। 2022 में कनाडा में उनकी कार को दूसरी गाड़ी ने टक्कर मार दी थी। हादसे के समय रंभा के साथ उनकी बेटी और नैनी भी कार में थीं। रंभा ने सोशल मीडिया पर एक्सीडेंट की जानकारी साझा की थी। उनकी बेटी को हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। शूटिंग के दौरान घोड़ा-गाड़ी से गिरी थीं मनीषा कोइराला मनीषा कोइराला शूटिंग के दौरान घायल हो गई थीं। अक्टूबर 2002 में फिल्म ‘पैसा वसूल’ की शूटिंग के दौरान वह घोड़ा-गाड़ी से गिर गई थीं। उन्हें पैर में चोट लगी और अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में डॉक्टरों ने उनके दाहिने पैर में हेयरलाइन फ्रैक्चर की पुष्टि की। उन्हें कुछ दिनों तक अस्पताल में रखा गया और आराम की सलाह दी गई। ऐश्वर्या राय को शूटिंग के दौरान चोट लगी थी ऐश्वर्या राय भी शूटिंग के दौरान गंभीर चोट का सामना कर चुकी हैं। साल 2003 में फिल्म ‘खाकी’ की शूटिंग के दौरान एक सीन फिल्माया जा रहा था। इस सीन में एक वाहन को ऐश्वर्या से कुछ दूरी पर रुकना था, लेकिन ड्राइवर वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया और गाड़ी ऐश्वर्या से जा टकराई। हादसे के बाद ऐश्वर्या गिर गईं और उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। उनके को-स्टार अक्षय कुमार उन्हें अस्पताल लेकर गए थे। सोनम कपूर ‘प्रेम रतन धन पायो’ के सेट पर लगी थी चोट सोनम कपूर भी फिल्म के सेट पर हादसे का सामना कर चुकी हैं। साल 2015 में ‘प्रेम रतन धन पायो’ की शूटिंग के दौरान एक डांस सीक्वेंस फिल्माया जा रहा था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोनम को एक डांस सीक्वेंस में जमीन से ऊपर उठाया जाना था। लैंडिंग के दौरान वह गिर गईं और उनके पैर में चोट लगी। उनके टखने से खून निकलने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।



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  • CJP के आंदोलन में शामिल हुए नसीरुद्दीन शाह:पुलिस परमिशन न मिलने के बाद भी पहुंचे, दीपके को गले लगाया; शबाना आजमी-विशाल ददलानी भी पहुंचे

    CJP के आंदोलन में शामिल हुए नसीरुद्दीन शाह:पुलिस परमिशन न मिलने के बाद भी पहुंचे, दीपके को गले लगाया; शबाना आजमी-विशाल ददलानी भी पहुंचे




    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शामिल हुए। पुलिस की इजाजत न मिलने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के इस प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी और संगीतकार विशाल ददलानी भी पहुंचे। शर्लिन चोपड़ा और विशाल भारद्वाज समेत कई सेलेब्स ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। इन बॉलीवुड सेलेब्स की मौजूदगी से प्रदर्शन स्थल पर भीड़ जुट गई। इन कलाकारों ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार का खुलकर समर्थन किया। नसीरुद्दीन शाह ने दीपके को गले लगाकर कहा शुक्रिया प्रदर्शन के दौरान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस वीडियो को शेयर किया। वीडियो में नसीरुद्दीन शाह आयोजक अभिजीत को गले लगाते और धन्यवाद कहते दिख रहे हैं। अभिजीत ने बताया कि वे नसीरुद्दीन शाह के बहुत बड़े फैन हैं और उनका इस प्रदर्शन में आना किसी सपने के सच होने जैसा है। शबाना आजमी बोलीं- अधिकारों के लिए आवाज उठाना जरूरी अभिनेत्री शबाना आजमी भी प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचीं और उनका हौसला बढ़ाया। शबाना ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है। जब वोटर लिस्ट से बिना किसी कारण लोगों के नाम हटा दिए जाएं, तो जनता का विरोध करना बिल्कुल सही है। इससे पहले शबाना आजमी नीट पेपर लीक मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हो चुकी हैं। विशाल भारद्वाज ने सेलेब्स के सपोर्ट करने न करने पर दिया बयान फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज भी पत्नी के साथ कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट का हिस्सा बने। इस दौरान उनसे पूछा गया कि क्या बॉलीवुड वालों को भी इस मुद्दे में सपोर्ट देना चाहिए। जवाब में उन्होंने कहा- मैं बॉलीवुड से ही तो हूं। अन्य कलाकारों के बारे में पूछे जाने पर विशाल भारद्वाज ने कहा- ये हर एक की अपनी मर्जी है। अगर किसी को मन से लगता है कि जो हो रहा है वो गलत है, तो सपोर्ट में आए और नहीं लगता तो न करे। संगीतकार विशाल ददलानी ने जताया समर्थन बॉलीवुड सिंगर विशाल ददलानी ने भी शिवाजी पार्क पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने सीजेपी नेता अभिजीत दीपके से मुलाकात की और उन्हें गले लगाया। विशाल ने कार्यक्रम से पहले भी सोशल मीडिया के जरिए इस प्रदर्शन का समर्थन किया था। सीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से विशाल की मौजूदगी की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए गए। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने पर बोलीं शर्लिन चोपड़ा एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने वोट देने के अधिकार को मौलिक अधिकार बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की हत्या नहीं होनी चाहिए और नागरिकों से मतदान का हक नहीं छीना जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए जिन 13 करोड़ भारतीयों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, क्या यह साबित किया जा सकता है कि वे गैर-नागरिक हैं। शर्लिन ने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सम्मान करती हैं और उन्हें पिता तुल्य मानती हैं, इसलिए एक बेटी के तौर पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी असहमति दर्ज कराना उनका अधिकार है। उन्होंने पीएम मोदी से भारतीय नागरिकों के इस अधिकार को न छीनने की अपील की। सीजेपी की मांग और चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए किया मुंबई के शिवाजी पार्क में किया गया। सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीट लीक के बाद दो महीने में यह उनका दूसरा बड़ा आंदोलन है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चुनौती दी कि सरकार चाहे तो उन्हें जेल भेज सकती है। दरअसल, यह विवाद मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स के बाद शुरू हुआ था।



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  • खुद को खूबसूरत नहीं मानती थीं हरलीन सेठी:बोलीं- ‘ब्रोकन’ ने बदली जिंदगी; दर्शकों की तारीफों से आत्मविश्वास मिला, खुद से प्यार करना सीखा

    खुद को खूबसूरत नहीं मानती थीं हरलीन सेठी:बोलीं- ‘ब्रोकन’ ने बदली जिंदगी; दर्शकों की तारीफों से आत्मविश्वास मिला, खुद से प्यार करना सीखा




    रिलेटेबल चेहरा, दमदार अदाकारी और लगातार मेहनत के दम पर हरलीन सेठी ने अपने हर किरदार से अलग पहचान बनाई है। ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’, ‘कोहरा’, ‘बैड कॉप’ और ‘डॉक्टर्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स के बाद अब वह ‘शक’ में नजर आ रही हैं। अपने किरदारों से हरलीन ने साबित किया है कि वह खुद को सिर्फ नायिका की पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं रखना चाहतीं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में हरलीन ने अपने बचपन, अभिनय की शुरुआत, ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ की सफलता और रिजेक्शन के अनुभवों पर बात की। उन्होंने सह-कलाकारों और ‘शक’ में श्रेया के किरदार की तैयारी से जुड़े अनुभव भी साझा किए। सवाल: बचपन में कैसी थीं? अभिनय का ख्याल कब आया? जवाब: मैं बचपन से ही बहुत मस्तमौला थी। खेल-कूद और दूसरी गतिविधियों में काफी रुचि थी। हालांकि, अभिनय करने का कोई प्लान नहीं था। मुझे सिर्फ इतना पता था कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में कुछ करना है। मुझे संगीत में भी बहुत रुचि थी। याद है, बचपन में ‘कल हो न हो’ की कैसेट आई थी। मैंने उसे पूरे दिन बजाया था। मेरे दादा ने मजाक में कहा था कि जब तक सारे गाने याद नहीं हो जाएंगे, तब तक हमें यही सुनाती रहोगी। फिर संगीत से डांस और डांस से धीरे-धीरे अभिनय की तरफ आ गई। सवाल: क्या आप पढ़ाई में भी आप काफी अच्छी थीं? जवाब: हां। मैंने विज्ञापन में पढ़ाई की और पूरे मुंबई में टॉप-5 में थी। उस समय टीचर और आसपास के लोग चाहते थे कि मैं पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ूं। लेकिन मेरा मन वहां पूरी तरह नहीं था। मैंने विज्ञापन एजेंसी में काम करने के बारे में सोचा। विज्ञापनों में असिस्टेंट डायरेक्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर भी काम किया। दरअसल, मैं लगातार तलाश रही थी कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में आखिर मुझे करना क्या है। सवाल: वह कौन सा पल था, जब लगा कि अभिनय ही करना है? जवाब: कोई एक पल तो याद नहीं, लेकिन जब मैंने अपना पहला विज्ञापन किया, तब आधे दिन के काम के लिए मुझे 17 हजार रुपए मिले थे। मैंने सोचा कि मैंने ऐसा क्या काम किया? बस मुस्कुराई और विज्ञापन किया। उस समय मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी। उसके बाद धीरे-धीरे विश्वास बढ़ता गया। मैंने कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन किए। लेकिन असली आत्मविश्वास वेब सीरीज ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ से आया। सवाल: ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ आपके लिए कितना बड़ा मोड़ था? जवाब: यह मेरे लिए बहुत बड़ा मोड़ था। लोगों ने समीरा के किरदार से बहुत जुड़ाव महसूस किया। पहली बार मैंने लोगों को अपनी खूबसूरती और आवाज की तारीफ करते सुना। मैंने कभी खुद को उस नजर से नहीं देखा था। मुझे लगता था कि मैं खूबसूरत नहीं हूं, क्योंकि मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और मेरा भाई भी उन पर गया है। ‘ब्रोकन’ के बाद पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं भी खूबसूरत हूं। यह मेरे लिए सिर्फ अभिनय की सफलता नहीं थी, बल्कि खुद को स्वीकार करने की यात्रा भी थी। सवाल: क्या आपको लगा था कि ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ इतना बड़ा बनेगा? जवाब: बिल्कुल नहीं। हमने बहुत सच्चाई और प्यार से इसे बनाया था, लेकिन यह कल्ट बन जाएगा, इसकी कल्पना नहीं की थी। आज भी रोमांटिक सीरीज की बात होती है तो ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ का जिक्र होता है। शो दोबारा ट्रेंड हुआ, लोगों ने इसके किरदारों और संगीत को फिर से पसंद किया। मुझे उन लड़कियों की तस्वीरें मिलीं, जिन्होंने समीरा वाला टैटू तक बनवाया था। कई लोगों ने लिखा कि समीरा के किरदार ने उन्हें खुद से प्यार करना सिखाया। यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। सवाल: ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ में विक्रांत मैसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत अच्छा। जब आप करियर की शुरुआत कर रहे होते हैं, तब सामने वाला आपको छोटा महसूस न कराए, यह बहुत जरूरी होता है। विक्रांत ने कभी मुझे ऐसा महसूस नहीं कराया कि वह मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं। उन्होंने मेरी काफी मदद की और एक बार मेरी परफॉर्मेंस देखकर कहा था कि मैं उन्हें एक अनुभवी कलाकार जैसी लगी। मेरे लिए यह बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट था। सवाल: ‘ब्रोकन’ के बाद आपने ‘कोहरा’ में मुख्य भूमिका के बजाय महत्वपूर्ण किरदार क्यों चुना? जवाब: मेरे लिए अच्छी कहानी और अच्छे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना ज्यादा जरूरी था। ‘कोहरा’ के ऑडिशन के लिए जो सीन मुझे मिले, उन्हें पढ़कर ही लगा कि यह बहुत अच्छा प्रोजेक्ट है। सुदीप शर्मा सर के साथ काम करने का मौका भी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने मुझसे कहा था, ‘हरलीन, बस मुझ पर भरोसा रखो और इसे करो।’ मैंने उन पर भरोसा किया और ‘कोहरा’ मेरे लिए एक बड़ा मोड़ बन गया। सवाल: ‘कोहरा’ और ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ की सफलता में क्या अंतर महसूस हुआ? जवाब: ‘ब्रोकन’ को दर्शकों से बहुत प्यार मिला। ‘कोहरा’ को इंडस्ट्री के लोगों से भी बहुत सराहना मिली और दर्शकों ने भी इसे पसंद किया। इन दोनों तरह की स्वीकृति का मिलना बहुत खास होता है। बहुत कम प्रोजेक्ट्स ऐसे होते हैं जिन्हें दर्शक भी पसंद करें और इंडस्ट्री के लोग भी उतनी ही गंभीरता से लें। सवाल: ‘बैड कॉप’ में अनुराग कश्यप और गुलशन देवैया जैसे कलाकारों के साथ काम करना कैसा रहा? जवाब: बहुत मजेदार अनुभव था। गुलशन बहुत मजेदार और अलग तरह के इंसान हैं। उन्हें देखकर ही आपको मनोरंजन मिलता रहता है। अनुराग कश्यप हमेशा से मेरे पसंदीदा निर्देशकों में रहे हैं। उनके साथ एक ही प्रोजेक्ट में काम करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। सौरभ सचदेवा, गुलशन, विक्रांत, शरद केलकर जैसे कलाकारों के बीच मैं अनुभव के मामले में सबसे जूनियर थी। इसलिए मेरी कोशिश रहती थी कि मैं मेहनत करके जाऊं और उनके सामने कम न लगूं। सवाल: अनुराग कश्यप के निर्देशन में काम करने की इच्छा भी है? जवाब: बिल्कुल। मैंने उनकी एक फिल्म के लिए ऑडिशन भी दिया था। बाद में किरदार बदल गया और उसमें एक अलग तरह के उच्चारण की जरूरत थी, इसलिए बात आगे नहीं बढ़ी। लेकिन उन्होंने मेरा ऑडिशन देखा था और खुद फोन करके मेरी तारीफ की थी। उम्मीद है, आगे उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिले। सवाल: ‘शक’ के लिए हां कहने की सबसे बड़ी वजह क्या थी? जवाब: रेंसिल डिसिल्वा सर का फोन आया था। उन्होंने श्रेया के किरदार के बारे में बताया। मैं उस समय जुहू सर्कल के सिग्नल पर कार में थी। जैसे ही उन्होंने किरदार के बारे में बताया, मुझे लगा कि इसमें बहुत सारी परतें हैं। वह बचपन से नायिका की सबसे अच्छी दोस्त है, उसका नायिका के पति से रिश्ता है, बच्ची के गायब होने में भी उसका हाथ है और वह अपने पति से भी सच छिपा रही है। इतना जटिल किरदार सुनते ही मैंने कहा- सर, मैं यह करना चाहती हूं। सवाल: श्रेया जैसे किरदार में उतरने के लिए आपने क्या तैयारी की? जवाब: सबसे पहले मुझे अपने अंदर से उसके प्रति जजमेंट हटाना था। स्क्रिप्ट पढ़ते ही आप उसके कई फैसलों को गलत मान सकते हैं। लेकिन कलाकार के तौर पर आपको उस किरदार को समझना होता है। मैंने उसके बचपन से लेकर वर्तमान तक की पूरी जिंदगी के बारे में सोचा। अगर वह और उसकी दोस्त बचपन से साथ थीं, तो उनके रिश्ते में ऐसा क्या हुआ कि वह अपनी दोस्त के साथ ऐसा कर सकी? उसके मन में क्या था? पति के साथ उसका रिश्ता कैसे बना? इन सभी सवालों के जवाब मैंने अपनी नोटबुक में लिखे। मेरे लिए किरदार की तैयारी सिर्फ स्क्रिप्ट तक सीमित नहीं होती। मैं यह भी सोचती हूं कि कैमरे पर दिखाए जा रहे दृश्य से ठीक पहले किरदार की जिंदगी में क्या हुआ होगा। इससे किरदार को भीतर से समझने में मदद मिलती है। सवाल: इतने गंभीर किरदार के बाद क्या सेट का माहौल भी गंभीर रहता था? जवाब: नहीं। कैमरा शुरू होते ही हम किरदार बन जाते थे, लेकिन उससे पहले खूब मस्ती होती थी। ‘शक’ की शूटिंग पहाड़ों में हुई। एक दिन पूरी कास्ट ने साथ में पार्टी की। खुले आसमान के नीचे संगीत था और सभी कलाकार साथ बैठे थे। शूटिंग के दौरान हम खाली समय में ट्रैकिंग और साइकिलिंग के लिए भी जाते थे। यही चीजें कलाकारों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं और काम के दौरान केमिस्ट्री भी बेहतर होती है। सवाल: ‘शक’ के लिए मिला सबसे अच्छा कॉम्प्लिमेंट क्या रहा? जवाब: लोगों ने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ तो की ही, लेकिन मेरे लिए यह भी खास था कि लोगों ने कहा कि मैं स्क्रीन पर बहुत खूबसूरत लग रही हूं। मैंने आपको बताया कि मैंने कभी खुद को उस तरह नहीं देखा था, इसलिए यह बात मेरे लिए मायने रखती है। इसके अलावा मेरा और सुमित व्यास का जेल वाला एक सीन है, जिसे बहुत प्यार मिल रहा है। मेरे डीएम उस सीन की तारीफ से भरे हुए हैं। सवाल: आप किस तरह के किरदार करना चाहती हैं? जवाब: मेरी कोशिश रहती है कि ऐसे किरदार करूं, जिन्हें लोग अक्सर समझ नहीं पाते। मैं उन्हें सहानुभूति के साथ निभाना चाहती हूं। चाहे समीरा हो, ‘कोहरा’ की निमरत हो या ‘शक’ की श्रेया- इन सभी किरदारों में एक बारीक रेखा है। मुझे ऐसे किरदारों को समझना और निभाना पसंद है। सवाल: आगे क्या करने वाली हैं? जवाब: मैंने एक बहुत अच्छी सीरीज साइन की है। उसकी शूटिंग अक्टूबर-नवंबर में होगी। किरदार भी बहुत अच्छा है और कलाकार भी शानदार हैं। अभी मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकती। इसके अलावा एक थिएट्रिकल प्रोजेक्ट पर भी बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ तय हो गया तो जनवरी में उसकी शूटिंग शुरू हो सकती है।



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  • सलमान खान की मातृभूमि को सरकार से NOC:CBFC की मंजूरी बाकी, भारत-चीन रिश्तों को ध्यान में रखकर फिल्म में हुए कई बदलाव, जानिए क्यों अटकी फिल्म

    सलमान खान की मातृभूमि को सरकार से NOC:CBFC की मंजूरी बाकी, भारत-चीन रिश्तों को ध्यान में रखकर फिल्म में हुए कई बदलाव, जानिए क्यों अटकी फिल्म




    सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ को सरकार से NOC मिल गई है। अब फिल्म को CBFC की मंजूरी का इंतजार है। भारत-चीन के बीच 2020 में हुए टकराव पर बनी इस फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी देश के सम्मान को ठेस न पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (IB Ministry) को मेकर्स के दिए ‘मातृभूमि’ के नए वर्जन से कोई आपत्ति नहीं है।इसके बाद इस वॉर-ड्रामा फिल्म को NOC दे दी गई है। NOC मिलने के बाद फिल्म इस साल के आखिर में सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है। फिल्म की आधिकारिक रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, सलमान खान और उनकी टीम इसे 13 नवंबर को रिलीज करने पर विचार कर रही है। उनका मानना है कि दिवाली के बाद का फेस्टिव माहौल फिल्म की रिलीज के लिए सही रहेगा। फिल्म की सेंसर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मेकर्स जल्द ही फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास जमा करेंगे। अगर CBFC से मंजूरी मिल जाती है और यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो जाती है, तो सलमान और उनकी टीम फिल्म को 13 नवंबर को रिलीज कर सकती है। NOC के बाद CBFC सर्टिफिकेट जरूरी NOC और CBFC की मंजूरी अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मंत्रालय से NOC मिलने के बाद फिल्म CBFC के पास भेजी जाती है। CBFC से सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 दिनों में फिल्म की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। ओरिजिनल वर्जन में किए गए बदलाव फिल्म जिस घटना पर आधारित है, वह चीन से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच घटी थी, हालांकि अब चीन के साथ सुधरे रिश्तों को देखते हुए सरकार ने फिल्म के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने मेकर्स को उनमें बदलाव करने का सुझाव दिया। इसके बाद ‘मातृभूमि’ को ओरिजिनल वर्जन की तुलना में काफी बदला गया है। अब फिल्म में भारत और चीन के रिश्तों को सकारात्मक नजरिए से दिखाया जाएगा। डीटेल में जानिए क्यों बार-बार टल रही मातृभूमि, क्या है पूरा विवाद? फिल्म मातृभूमि लंबे समय से विवादों में है। फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प पर बनी है। पहले इसका टाइटल ही बैटल ऑफ गलवान रखा गया था। ‘बैटल ऑफ गलवान’ का ट्रेलर 27 दिसंबर को सलमान खान के जन्मदिन के मौके पर रिलीज हुआ था। ट्रेलर सामने आने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सलमान खान की ड्रेस और हेयर स्टाइल को लेकर भी आलोचना हुई थी। चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बॉलीवुड फिल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन वे इतिहास को बदल नहीं सकतीं। चीनी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के हवाले से लिखा था कि भारत में फिल्मों का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना को बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, उनके मुताबिक कोई भी फिल्म गलवान झड़प से जुड़े तथ्यों को नहीं बदल सकती। सॉन्ग ने दावा किया था कि पहले भारतीय सैनिकों ने सीमा पार की थी और इसके जवाब में चीनी सैनिकों ने चीनी सीमा की रक्षा की थी। आलोचना के बाद मेकर्स ने फिल्म के कुछ हिस्सों को दोबारा शूट करने का फैसला किया। करीब 40 दिनों तक री-शूट किया गया, ताकि कहानी के कुछ हिस्सों में बदलाव कर उसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके। इसी वजह से फिल्म की तय रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई।आपत्ति उठाए जाने पर टाइटल बदलकर मातृभूमिः मे वॉर रेस्ट इन पीस कर दिया गया है। फिल्म के नाम और रिलीज में बदलाव को गलवान संघर्ष से जुड़े संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे से भी जोड़कर देखा गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘मातृभूमि’ को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। प्रोडक्शन हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि फिल्म की सीबीएफसी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी होने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। सर्टिफिकेट से जुड़े दावों के बीच सलमान खान फिल्म्स ने बयान जारी कर कहा कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजा ही नहीं गया। इसलिए इस तरह की रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें। सलमान खान फिल्म्स ने मीडिया और लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि की जानकारी न फैलाएं। फिल्म से जुड़े सभी आधिकारिक अपडेट केवल उनके ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर ही शेयर किए जाएंगे। फिल्म में सलमान खान मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके अलावा ‘मातृभूमि’ में चित्रांगदा सिंह, अंकुर भाटिया, अभिलाष चौधरी और जेन शॉ समेत कई कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। सीबीएफसी कैसे काम करता है? सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड के पास फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए अधिकतम 68 दिनों का समय होता है। पहले फिल्म के आवेदन की जांच की जाती है। इसमें एक हफ्ते का समय लगता है। इसके बाद फिल्म को जांच समिति के पास भेजा जाता है। उनके पास फिल्म की जांच के लिए 15 दिनों का समय होता है। जांच समिति फिल्म को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पास भेजती है। सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष फिल्म की जांच के लिए अधिकतम 10 दिनों का समय ले सकता है। इसके बाद 36 दिनों के भीतर सेंसर बोर्ड आवेदक को जरूरी कट्स के बारे में जानकारी और सर्टिफिकेट प्रदान करता है।



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