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  • नाना पाटेकर ने कहा था- आई लव पंजाबी:गोल्डन टेंपल देख बोले थे- रब का शुक्र, जीते जी दर्शन हो गए; चंडीगढ़ में किसान को ₹3 लाख दिए

    नाना पाटेकर ने कहा था- आई लव पंजाबी:गोल्डन टेंपल देख बोले थे- रब का शुक्र, जीते जी दर्शन हो गए; चंडीगढ़ में किसान को ₹3 लाख दिए




    बॉलीवुड के सुपरस्टार नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ। मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे। अब शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। नाना पाटेकर पंजाबियों को बहुत पसंद करते थे। 17 साल पहले वह पंजाब में शूटिंग कर रहे थे तो उन्होंने पंजाबी सीखी। उन्होंने कहा था कि पंजाबी उन्हें बहुत पसंद हैं। चंडीगढ़ में वेलकम की शूटिंग के दौरान उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के किसान पिता की बाइपास सर्जरी के लिए तुरंत 3 लाख रुपए दे दिए थे। इसके अलावा नाना पाटेकर जनवरी 2018 में पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ अमृतसर आए थे। यहां उन्होंने गोल्डन टेंपल में माथा टेका। यह गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद नाना ने कहा था- रब का शुक्र है कि जीते जी मुझे गोल्डन टेंपल में माथा टेकने का मौका मिला इस दौरान उन्होंने गोल्डन टेंपल की पूरी परिक्रमा की और फिर लंगर हॉल में जूठे बर्तन भी मांजे थे। इसके बाद जब वे फिर अमृतसर आए तो वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में भी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने BSF की नशा विरोधी दौड़ में भी हिस्सा लिया था। नाना ने कहा था- ऐसी शांति कहीं नहीं मिली
    नाना पाटेकर ने गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मुझे यहां आकर बहुत शांति मिली है, ऐसी शांति मैंने कभी कहीं और महसूस नहीं की। यहां के लोगों की सेवा और श्रद्धा देखकर मैं बहुत हैरान हूं। मैं सोच रहा हूं कि मैं पहले कभी यहां क्यों नहीं आया। यहां कोई छोटा-बड़ा या किसी तरह का भेदभाव नहीं है। अगर पूरा देश इस बात को समझ ले और अपनी जिंदगी में अपना ले तो हमारा देश सोने जैसा बन जाएगा। नाना पाटेकर ने पंजाब में शूटिंग के दौरान पंजाबी सीखी थी
    साल 2009 में एक: द पॉवर ऑफ वन की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर चंडीगढ़ और पंजाब में शूटिंग कर रहे थे। फिल्म में उन्हें CBI अधिकारी का किरदार निभाना था और उनके कई सीन पंजाब में लोगों से बातचीत करते हुए थे। अपने मराठी लहजे के बावजूद संवादों को पंजाबी अंदाज में बोलने के लिए उन्होंने बाकायदा स्थानीय पंजाबी महिलाओं से पंजाबी एक्सेंट सीखने की कोशिश की थी। उस दौरान एक रिपोर्ट में नाना ने कहा था कि मुझे पंजाबी पसंद हैं। मेरे पिता भी फर्राटेदार पंजाबी बोलते थे, क्योंकि टेक्सटाइल प्रिंटिंग के कारोबार में उनका रोजाना पंजाबियों से संपर्क रहता था। नाना पाटेकर को खेती-किसानी भी खूब पसंद थी। उन्होंने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मैं प्रकृति के करीब रहना पसंद करता हूं और “दिल से किसान” हूं। चंडीगढ़ में असिस्टेंट डायरेक्टर के पिता को तुरंत मदद दी
    साल 2007 में फिल्म ‘वेलकम’ की शूटिंग के दौरान नाना को पता चला कि यूनिट के एक असिस्टेंट डायरेक्टर बिट्टू चंडोक के चाचा अवतार सिंह चंडीगढ़ में रहते हैं और किसान हैं। वह गंभीर रूप से बीमार थे और बाईपास सर्जरी के लिए करीब 3 लाख रुपये की जरूरत थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाना ने तुरंत 3 लाख रुपये का चेक दे दिया था। नाना ने इस मदद को ‘दान’ मानने से भी इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि अवतार सिंह उनके पिता की उम्र के हैं, इसलिए यह ऐसा था जैसे वह अपने पिता के लिए कुछ कर रहे हों। उन्होंने यह भी कहा था कि एक समय उनके पास कुछ नहीं था और जो कुछ उनके पास है, वह लोगों की वजह से है।



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  • नाना पाटेकर को पीएम मोदी की श्रद्धांजलि:6 फिल्मों तिरंगा, परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर, खामोशी, अंकुश का जिक्र, इनमें से 2 को नेशनल अवॉर्ड मिला

    नाना पाटेकर को पीएम मोदी की श्रद्धांजलि:6 फिल्मों तिरंगा, परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर, खामोशी, अंकुश का जिक्र, इनमें से 2 को नेशनल अवॉर्ड मिला




    नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि वे बेहतरीन कलाकार थे और अलग-अलग किरदारों से दर्शकों का दिल जीता। मोदी ने अपने बयान में नाना की फिल्मों के नामों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, नाना पाटेकर का जीवन तिरंगे की आन-बान और शान की तरह रहा। वो बंधनों में नहीं रहे, परिंदे की तरह फिल्मों के आसमान में उड़े। उन्होंने समाज में व्याप्त अव्यवस्था पर अपनी फिल्मों के माध्यम से करारा प्रहार किया। वे एक ऐसे क्रांतिवीर थे, जिन्होंने बुराइयों के विरुद्ध काम किया। उनकी वाणी जितनी तेज थी, उनकी खामोशी भी उतनी ही प्रभावी थी। वो देशविरोधियों पर निरंतर अंकुश के समर्थक थे। पीएम मोदी ने अपने बयान में नाना पाटेकर की 6 फिल्मों तिरंगा, परिंदा, प्रहार, क्रांतिवीर, खामोशी और अंकुश का जिक्र किया। इनमें ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ के लिए नाना पाटेकर को नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था।

    इसके अलावा बॉलीवुड, राजनीति, खेल और साहित्य जगत की कई हस्तियों ने पाटेकर को श्रद्धांजलि दी है। अक्षय कुमार, विराट कोहली, रवीना टंडन, रजनीकांत, परेश रावल, मनोज बाजपेयी, कंगना रनौत और सुनील शेट्टी समेत कई सितारों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। राहुल गांधी बोले- दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी
    नेता विपक्ष राहुल गांधी ने भी नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि दी। उन्होने लिखा “प्रसिद्ध अभिनेता नाना पाटेकर जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। अपने अभिनय और किरदारों से उन्होंने भारतीय सिनेमा पर और दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है। इस पीड़ा के समय में मेरी गहरी संवेदनाएं उनके शोकाकुल परिजनों, मित्रों और समर्थकों के साथ हैं।” अक्षय कुमार बोले- यकीन करना मुश्किल है कि आप चले गए अक्षय कुमार ने नाना के साथ (वेलकम) और हाल ही में (हाउसफुल 5) में काम किया था। उन्होंने कहा कि नाना उन दुर्लभ कलाकारों में थे, जिन्हें दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं थी। अक्षय ने उनकी आवाज, इंटेंसिटी और हर परफॉर्मेंस में ईमानदारी को याद किया। उन्होंने लिखा कि नाना की कमी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। विराट कोहली बोले- उनका काम पीढ़ियों तक जिंदा रहेगा विराट कोहली ने नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया। उन्होंने लिखा, “भारतीय सिनेमा के एक सच्चे दिग्गज। उनका काम और विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जिंदा रहेगी। नाना पाटेकर जी, आपकी आत्मा को शांति मिले। ॐ शांति।” रजनीकांत और परेश रावल ने जताया गहरा शोक सुपरस्टार रजनीकांत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं हो रहा कि उनके प्यारे दोस्त नानाजी अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने परिवार और करीबियों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। वहीं अभिनेता परेश रावल ने उन्हें याद करते हुए लिखा, “भाऊ, नाना साहेब। बेहद ईमानदार और गंभीर इंसान। आपके लिए हमेशा प्यार और सम्मान रहेगा। ओम शांति।” रितेश देशमुख बोले- एक युग का अंत रितेश देशमुख ने नाना के निधन पर कहा कि उनके पास शब्द नहीं हैं और यह खबर सुनकर ऐसा लगा जैसे उन पर ट्रक चढ़ गया हो। रितेश ने उन्हें बेमिसाल अभिनेता बताया। उन्होंने (ब्लफमास्टर) और (हाउसफुल 5) में नाना के साथ काम किया था। रितेश ने कहा कि नाना के साथ मराठी फिल्म में काम करना उनकी अधूरी इच्छा रह गई। सुनील शेट्टी ने कहा- सिनेमा अब पहले जैसा नहीं रहेगा अभिनेता सुनील शेट्टी ने अपनी श्रद्धांजलि में लिखा कि यह खबर बेहद हैरान करने वाली है। आप जितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंचे, अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहे। बिना किसी झिझक के अपनी बात कहने वाले, बेहद ईमानदार और अपनी कला के उस्ताद नाना जी जैसा दूसरा कोई नहीं हो सकता। दुनिया में सिर्फ एक ही नाना थे और हमेशा वही रहेंगे। उनके बिना सिनेमा अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा। रवीना टंडन ने याद की ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग अभिनेत्री रवीना टंडन ने एक लंबे नोट में लिखा कि नाना पाटेकर का जाना उनके लिए एक गहरा झटका है। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि एक दिन हर इंसान को जाना है, लेकिन फिर भी इस नुकसान को सहना आसान नहीं होता। रवीना ने बताया कि उनके और नाना के बीच आपसी सम्मान और प्यार भरा रिश्ता था। वे बेहद निडर, मजबूत और दयालु इंसान थे। फिल्म ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ के एक सीन का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा कि नाना की समझ और मार्गदर्शन ने उनके अभिनय में गहराई लाने में बहुत मदद की थी, जिसके लिए वे हमेशा उनकी आभारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यादों से भी बढ़कर अपनी ताकत और व्यक्तित्व की छाप छोड़ जाते हैं, नाना पाटेकर भी उन्हीं में से एक थे। मनोज बाजपेयी बोले- मुंबई आने वाले युवाओं को उम्मीद देते थे नाना अभिनेता मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि नाना पाटेकर जी के निधन की खबर पर यकीन कर पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि मुंबई आकर फिल्मों में अपनी जगह बनाने का सपना देखने वाले हम जैसे कई लोगों को नाना जी के सफर से हिम्मत मिलती थी। उन्होंने यह विश्वास दिलाया कि अगर आप अपनी कला, अपनी पहचान और खुद के प्रति सच्चे हैं, तो अपनी जगह खुद बना सकते हैं। मनोज ने लिखा कि हमने अपने समय का एक बेहतरीन अभिनेता खो दिया है, उनकी कमी हमेशा खलेगी। कंगना रनोट बोलीं- हमेशा फिट और सेहतमंद दिखते थे नाना अभिनेत्री कंगना रनोट ने भी नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह बेहद दुखद और दर्दनाक खबर है। नाना पाटेकर हमेशा इतने फिट और सेहतमंद नजर आते थे कि इस खबर पर यकीन करना मुश्किल लग रहा है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। प्रकाश राज बोले- बातचीत और बहसें हमेशा याद रहेंगी एक्टर प्रकाश राज ने नाना को याद करते हुए कहा कि वह उनके साथ बिताए पलों, बातचीत, बहसों और नाना के हाथ का बना खाना हमेशा याद रखेंगे। उन्होंने नाना से मिली सीख को भी याद किया और कहा कि उनकी जिंदगी में आने के लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे। मेहुल कुमार बोले- नाना पाटेकर हमेशा जमीन से जुड़े इंसान रहे दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में डायरेक्टर मेहुल कुमार ने नाना पाटेकर को याद करते हुए कहा कि उनके साथ तिरंगा, क्रांतिवीर और कोहराम जैसी तीन यादगार फिल्में कीं। उन्होंने बताया कि नाना बेहद जमीन से जुड़े और सच्चाई के साथ चलने वाले इंसान थे। फिल्मों की सफलता और कई अवॉर्ड मिलने के बाद भी उनका व्यवहार कभी नहीं बदला। मेहुल कुमार ने बताया कि नाना ने किसी और डायरेक्टर के साथ तीन फिल्में नहीं की थीं। क्रांतिवीर को लेकर दिलीप कुमार ने भी कहा था कि नाना को लोग हमेशा इस किरदार के नाम से याद रखेंगे। उन्होंने बताया कि कोहराम के दौरान अमिताभ बच्चन को शुरुआत में नाना के साथ काम करने में थोड़ा संकोच था, लेकिन नाना और अमिताभ की बाद में अच्छी दोस्ती हो गई। वहीं (तिरंगा) के सेट पर नाना और राज कुमार के बीच भी अच्छी बॉन्डिंग बन गई थी। मेहुल कुमार ने कहा कि नाना सिर्फ एक स्टार नहीं थे, बल्कि अच्छे इंसान भी थे। उन्होंने गरीबों और किसानों की काफी मदद की। उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा। उदित नारायण बोले- नाना के निधन की खबर सुनकर हिल गया हूं दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में सिंगर उदित नारायण ने नाना पाटेकर के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि सुबह-सुबह यह खबर सुनकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 75 साल की उम्र में नाना का जाना फिल्म इंडस्ट्री और देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। बतौर एक्टर उनका कोई जवाब नहीं था और बतौर इंसान भी उनकी शानदार पर्सनालिटी थी। उदित ने बताया कि उन्हें नाना के साथ काम करने का मौका मिला था। एक फिल्म की रिकॉर्डिंग के दौरान नाना ने खुद माइक पर गाकर बताया था कि वह गाने को किस तरह चाहते हैं। उदित ने उनके लिए एक टेक में गाना गाया, जिसके बाद नाना ने उनकी तारीफ की थी। उन्होंने (तिरंगा) में भी नाना के साथ काम की यादें साझा कीं। जूनियर NTR बोले- हर किरदार में दिखती थी ईमानदारी साउथ स्टार जूनियर NTR ने नाना को भारतीय सिनेमा के बेहतरीन कलाकारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि नाना के हर किरदार में एक खास ईमानदारी और इंटेंसिटी नजर आती थी। उनकी परफॉर्मेंस अभिनय जैसी नहीं, बल्कि पर्दे पर जिंदगी के सामने आने जैसी लगती थी। NTR ने कहा कि भारतीय सिनेमा में नाना का योगदान पीढ़ियों तक याद किया जाएगा। नितिन गडकरी ने दोस्ती को किया याद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके और नाना पाटेकर के बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध थे। उन्होंने नाना के पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर और उनकी खास डायलॉग डिलीवरी को याद किया। गडकरी ने (नाम फाउंडेशन) के जरिए किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए नाना के काम को भी श्रद्धांजलि में याद किया। सुवेंदु अधिकारी बोले- भारतीय सिनेमा ने खास आवाज खो दी पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने नाना को भारतीय सिनेमा की बेबाक और खास आवाज बताया। उन्होंने (परिंदा), (क्रांतिवीर), (प्रहार) और (अब तक छप्पन) में उनके अभिनय को याद किया। उन्होंने नाना के सामाजिक काम और ग्रामीण समुदायों के लिए किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। नाना का करीब पांच दशक का करियर नाना पाटेकर ने 1978 में गमन से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ थिएटर में भी काम किया। परिंदा, क्रांतिवीर, प्रहार, अब तक छप्पन, नटसम्राट, वेलकम और हाउसफुल 5 जैसी फिल्मों में उनके किरदार यादगार रहे। उन्हें तीन नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले थे और 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।



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  • रेपिस्ट का रोल ऑफर किया, तो डायरेक्टर को गालियां दीं:कारगिल जंग में आर्मी के साथ रहे; नाना पाटेकर के 10 अनसुने किस्से

    रेपिस्ट का रोल ऑफर किया, तो डायरेक्टर को गालियां दीं:कारगिल जंग में आर्मी के साथ रहे; नाना पाटेकर के 10 अनसुने किस्से




    नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक CPR देने की कोशिश की गई, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर का करीब पांच दशक लंबा फिल्मी करियर रहा। उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और बाद में फिल्मों का रुख किया। गमन, अंकुश, परिंदा, क्रांतिवीर, तिरंगा, अब तक छप्पन, अपहरण और वेलकम जैसी फिल्मों में उन्होंने यादगार भूमिकाएं निभाई थीं। 1 जनवरी, 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के गांव मुरुद-जंजीरा में जन्मे विश्वनाथ गजानन पाटेकर, जिन्हें दुनिया ने नाना पाटेकर के नाम से जाना। नाना बचपन से ही बाकी बच्चों से अलग रहे। तेवर में बगावती सुर थे। समाज की कुरीतियों को कला के माध्यम से दिखाना चाहते थे। इसलिए पहले थिएटर में आए, फिर फिल्मों का रुख किया। नाना अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए भी चर्चा में रहते थे। जब रवि चोपड़ा ने इन्हें रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो इन्होंने गाली दे दी थी। फिल्म परिंदा की शूटिंग के वक्त नाना और फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा भिड़ गए थे। जानिए नाना पाटेकर से जुड़े कुछ खास किस्से..
    13 साल की उम्र, दिन में 16 किमी पैदल चलते थे नाना के पिता टेक्सटाइल पेंटिंग का एक छोटा सा बिजनेस चलाते थे। नाना जब 13 साल के थे, तभी किसी ने पिता के साथ फ्रॉड कर दिया। रातों-रात बिजनेस चौपट हो गया। सारी प्रॉपर्टी बिक गई। पैसे कमाने के लिए नाना को भी सड़क पर आना पड़ा। वे सुबह स्कूल जाते, शाम में फिल्म के पोस्टर्स पेंट करते थे। जहां पोस्टर पेंट करते थे, वहां से घर की दूरी 8 किलोमीटर थी। इस तरह दिन में 16 किलोमीटर की दूरी पैदल ही तय करते थे। इस काम के लिए हर महीने 35 रुपए मिलते थे। यह बात 1963 के आस-पास की है। पैसों की इतनी किल्लत थी कि कभी-कभार खाना भी नसीब नहीं होता था। लंच या डिनर टाइम में नाना यूं ही अपने दोस्तों से मिलने चले जाते थे। इस उम्मीद में कि सामने से कोई दो रोटी खाने को पूछ ले। टीचर बगल में बिठाते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े नाना बचपन में बहुत शरारती थे। इतने शरारती कि टीचर इन्हें बगल में बिठाकर रखते थे, ताकि मारने के लिए बार-बार उठना न पड़े। शरारत इतनी बढ़ गई कि नाना की मां ने उन्हें छठी कक्षा के बाद अपनी बहन के गांव भेज दिया। मां को लगा कि दूसरी जगह जाएगा तो सुधर जाएगा। नाना अपनी मौसी के घर एक-दो साल रहे, फिर वापस लौट आए। मौसी ने ही उन्हें वापस भेज दिया। उन्हें डर था कि नाना की संगत में कहीं उन्हीं के बच्चे न बिगड़ जाएं। खुद को बदसूरत समझते थे, पिता को लेकर पाला था भ्रम नाना अपने आप को दूसरों से कमतर आंकते थे। वे अपने आप को बदसूरत मानते थे। नाना के दोनों भाई लुक में उनसे ठीक थे। नाना को लगता था कि पिता बाकी भाइयों को ज्यादा तवज्जो देते हैं। नाना बचपन से ही गांव-दराज में होने वाले नाटक-ड्रामों में भाग लेते थे। एक बार वे गांव में नाटक कर रहे थे। उनके पिता बंबई (अब मुंबई) से सिर्फ नाटक देखने गांव आ गए। उस वक्त नाना का भ्रम टूट गया कि पिता उनसे प्यार नहीं करते। नाना को उस वक्त एहसास हुआ कि जैसे उन्होंने अपनी कला से पिता को प्रभावित किया, वैसे ही पूरी दुनिया को भी कर सकते हैं। पिता हॉस्पिटल में थे, उनकी दवाई के भी पैसे नहीं थे नाना के पिता को लेकर बचपन में जो गलतफहमी थी, वह समय के साथ दूर हो गई, लेकिन पिता को लेकर एक मलाल उन्हें जिंदगी भर रहा। नाना अपने पिता के हाथ पर अपनी कमाई का एक रुपया भी नहीं रख पाए थे। उन्होंने दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था। नाना ने कहा था कि उन्हें इस बात का बहुत दुख था कि वह अपनी कमाई से पिता के लिए कुछ नहीं कर सके। उनके पिता का निधन म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अस्पताल में हुआ था। उस वक्त नाना के पास उनकी दवाइयों के लिए भी पैसे नहीं थे। ऐसे मुश्किल समय में उनके दोस्तों ने मदद की और दवाइयों के पैसे दिए थे। रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो गालियां दीं एक्ट्रेस स्मिता पाटिल ने नाना को बी.आर. चोपड़ा के बेटे रवि चोपड़ा के पास भेजा था। रवि चोपड़ा उस वक्त फिल्म ‘आज की आवाज’ बना रहे थे। उन्होंने नाना को रेपिस्ट का रोल ऑफर किया। ऑफर सुनते ही नाना भड़क उठे। उन्होंने सबके सामने रवि को गालियां बक दीं। नाना ने कहा कि तुम मुझे ऐरा-गैरा आदमी समझते हो, क्या मैं ऐसा रोल करूंगा? यह कहकर नाना वहां से लौटने लगे। तभी स्मिता पाटिल वहां पहुंच गईं। उन्होंने नाना और रवि, दोनों को समझाया। तब रवि चोपड़ा ने उन्हें मेन विलेन का रोल ऑफर किया। नाना इस बार भी सीधी तरह नहीं माने। उन्होंने कहा कि मैं कर तो लूंगा, लेकिन अपना किरदार खुद लिखूंगा। आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम कर लिया था। विधु विनोद चोपड़ा के साथ हाथापाई फिल्म परिंदा की शूटिंग के दौरान डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा और नाना पाटेकर में लड़ाई हो गई थी। यह बात खुद विधु ने एक टीवी रियलिटी शो के दौरान स्वीकारी थी। उन्होंने कहा था, ‘नाना हर सीन में गाली देता था। मुझे यह बात बड़ी अजीब लगती थी। मुझे उस वक्त गालियां नहीं आती थीं। नाना बार-बार गालियां दिए जा रहा था। ऊपर से बिना शूटिंग किए घर जाने लगा। मैंने कहा कि पहले पैसे दो, फिर वापस जाओ। कम से कम मेरा नुकसान तो मत कराओ। यही बात कहते हुए मैंने उसका कुर्ता फाड़ दिया।’ उन्होंने आगे कहा था, ‘अभी यह सब चल ही रहा था कि कैमरामैन ने शॉट रेडी कर दिया। आप फिल्म देखिए, एक सीन में नाना बनियान में बैठकर रोता दिखाई देगा। वह शॉट झगड़े के तुरंत बाद लिया गया था। खैर, शॉट परफेक्ट हो गया। बाद में नाना ने मुझे गले लगा लिया।’ सेफ्टी गार्ड पहनने से मना किया, आग में झुलसे तो स्किन उतर गई फिल्म परिंदा के क्लाइमैक्स सीन में नाना पाटेकर को आग में जलते दिखाया गया था। दुर्भाग्यवश, नाना सच में आग में झुलस गए थे। इस वजह से उनकी पूरी स्किन उतर गई थी। दरअसल, उस वक्त की फिल्मों में आर्टिफिशियल फायर जैसी कोई चीज नहीं थी। सेट पर असली आग लगाई जाती थी। फिल्म के डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने नाना को सेफ्टी गार्ड पहनने को कहा था। नाना ने कहा था कि अगर वे सेफ्टी गार्ड पहन लेंगे तो एक्टिंग नेचुरल नहीं लगेगी। फिर भी विधु के कहने पर उन्होंने थोड़ा बहुत खुद को ढंक लिया। हालांकि, जब सीन शुरू हुआ तो आग की लपटें उनके शरीर को छू गईं। उनके हाथ-पैर की स्किन ही गायब हो गई। मामला सीरियस हो गया। उन्हें मुंबई के नानावटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद नाना एक साल तक फिल्मों से दूर रहे। अधिकारी ने रिस्पॉन्स नहीं दिया तो रक्षा मंत्री को लगा दिया फोन नाना पाटेकर बचपन से आर्मी जॉइन करना चाहते थे। 1991 की फिल्म प्रहार के जरिए उनका यह सपना भी पूरा हो गया। आर्मी बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म की तैयारी के लिए नाना ने तीन साल तक आर्मी ट्रेनिंग प्रोग्राम किया था, जहां उन्हें कैप्टन की मानद रैंक दी गई थी। 1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल वॉर में नाना ने भारतीय सेना को अपनी सेवाएं दी थीं। हालांकि इसके पीछे दिलचस्प कहानी है। नाना ने सेना के एक बड़े अधिकारी को फोन किया और आर्मी जॉइन करने की इच्छा जताई। अधिकारी ने कहा कि आप आम नागरिक हैं, हम आपको आर्मी में नहीं ले सकते। नाना ने तब देश के तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को फोन कर दिया। जॉर्ज फर्नांडिस पहले से नाना को जानते थे। पहले तो उन्होंने मना किया, लेकिन जब नाना ने उन्हें अपना आर्मी वाला बैकग्राउंड बताया, तब मान गए। उन्हें हरी झंडी दे दी। नाना कारगिल में दो महीने सेना के साथ जुड़े रहे। वहां वे क्विक रिएक्शन टीम का हिस्सा थे। क्विक रिएक्शन टीम में सिर्फ वहीं लोग काम करते हैं, जो औरों से निपुण हों और हर परिस्थिति में लड़ने को तैयार रहें। परफॉर्मेंस के बीच में जूते बरसाए जाते थे नाना ने एक नाटक पुरुष (1981) में 16 साल अभिनय किया। इस नाटक में वे विलेन बनते थे। उनका रोल इस कदर घिनौना था कि परफॉर्मेंस के बीच में ही महिलाएं जूते बरसाने लगती थीं। जब वे जूते मांगने जातीं तो नाना मना कर देते। वे उन जूतों को सम्मान के तौर पर संभाल कर रखते थे। 1993 मुंबई ब्लास्ट में भाई को खोया, हाथ के कड़े से बॉडी पहचानी 1993 बम ब्लास्ट में नाना ने अपना भाई खो दिया था। उनके भाई जिस बस में बैठे, उसी में ब्लास्ट हो गया था। बॉडी पहचान में नहीं आ रही थी। नाना के भाई हाथ में एक कड़ा पहनते थे। उसी से शव की पहचान हुई थी। जिसमें ब्लास्ट हुआ, उसके आगे वाली बस में नाना की पत्नी नीलकांति बैठी हुई थीं। दरअसल, नाना की पत्नी और भाई साथ ही निकले थे। दोनों एक ही बस में बैठने वाले थे, लेकिन सीट सिर्फ एक ही मिली। नाना के भाई मजबूरन पीछे वाली बस में बैठ गए। अगर उन्हें पहली बस में सीट मिल जाती तो शायद जान बच जाती।



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