अमिताभ बच्चन ने यहीं देखी पहली फिल्म:लता मंगेशकर का पहला मंचीय प्रदर्शन; रॉयल ओपेरा हाउस के दोबारा खुलने के 10 साल पूरे

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अमिताभ बच्चन, लता मंगेशकर और पृथ्वीराज कपूर जैसे दिग्गजों की यादों से जुड़ा मुंबई का ऐतिहासिक रॉयल ओपेरा हाउस एक बार फिर चर्चा में है। 23 अक्टूबर को दोबारा खुलने के 10 साल पूरे होने पर यहां विशेष संगीत और इमर्सिव प्रोजेक्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर गोंडल के महाराजा हिमांशु सिंह और ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने इसकी विरासत, पुनरुद्धार और सांस्कृतिक सफर के बारे में बताया। बदहाली के कारण बंद पड़ा यह थिएटर अब मुंबई में कला और संगीत का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 1908 में बनी योजना, 1911 में हुआ उद्घाटन रॉयल ओपेरा हाउस की कहानी 1908 में शुरू हुई। मनोरंजन जगत से जुड़े मौरिस बैंडमैन और पारसी कारोबारी जहांगीर फ्रामजी कराका ने मुंबई में भव्य ओपेरा हाउस बनाने की योजना बनाई। इसकी आधारशिला 1909 में रखी गई। ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम ने 1911 में भारत यात्रा के दौरान इसका उद्घाटन किया। इमारत का निर्माण 1916 में पूरा हुआ। यूरोपीय और भारतीय स्थापत्य शैली के मेल से बनी यह इमारत मुंबई की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बन गई। पृथ्वीराज कपूर करते थे नाटक, ऋषि कपूर ने सुनाई बचपन की याद ओपेरा हाउस का रिश्ता भारतीय सिनेमा और रंगमंच के कई दिग्गजों से रहा है। पृथ्वीराज कपूर यहां नाटक प्रस्तुत करते थे। लता मंगेशकर ने यहां पहला सार्वजनिक मंचीय प्रदर्शन किया था। अमिताभ बच्चन ने 2016 में दोबारा उद्घाटन के दौरान बताया था कि मुंबई आने के बाद उन्होंने पहली बार फिल्म यहीं देखी थी। उनकी कई फिल्में यहां लंबे समय तक चली थीं। फिल्म ‘102 नॉट आउट’ के मीडिया आयोजन में ऋषि कपूर ने बताया था कि बाल कलाकार के रूप में उनका पहला मंचीय प्रदर्शन इसी ओपेरा हाउस में हुआ था। यह इमारत भारतीय सिनेमा और रंगमंच के इतिहास की गवाह भी है। 1952 में गोंडल राजपरिवार ने खरीदा, 1993 में बंद हुआ 1952 में गोंडल के महाराजा विक्रमसिंहजी ने रॉयल ओपेरा हाउस खरीदा। समय के साथ सिनेमा देखने का तरीका बदला और आधुनिक वातानुकूलित सिनेमाघर लोकप्रिय हुए। रखरखाव की चुनौतियों और दर्शकों की बदलती पसंद के चलते यह थिएटर 1993 में बंद हो गया। करीब दो दशक तक इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रही। पिता ने लिया पुनरुद्धार का फैसला, 2016 में फिर खुला महाराजा हिमांशु सिंह के मुताबिक, उनके पिता महाराजा ज्योतेंद्रसिंहजी जडेजा ने इस धरोहर को बचाने का फैसला किया। संरक्षण वास्तुकार आभा नारायण लांबा के मार्गदर्शन में इमारत को मूल स्वरूप के करीब लाया गया। पुराने डिजाइन और स्थापत्य विशेषताओं को सहेजते हुए इसमें आधुनिक सुविधाएं, नई सीटें, एयर कंडीशनिंग और बेहतर साउंड सिस्टम जोड़े गए। 2016 में इसे जनता के लिए दोबारा खोल दिया गया। हिमांशु सिंह ने कहा कि इस पहल का मकसद सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि मुंबई के लोगों को उनकी ऐतिहासिक धरोहर लौटाना है। उन्होंने पुनरुद्धार में आभा नारायण लांबा के योगदान की सराहना भी की। 10 साल में नाटक से संगीत तक हजारों रंग ओपेरा हाउस प्रबंधन से जुड़े आशीष दोषी ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में यहां नाटक, संगीत, स्टोरीटेलिंग, बच्चों के कार्यक्रम और कॉर्पोरेट आयोजन हुए। वर्षगांठ पर ‘तबला एंड सन्स’ की प्रस्तुति के साथ पूरे थिएटर पर प्रोजेक्शन के जरिए इमर्सिव शो दिखाया गया। दोषी ने गोंडल राजपरिवार के योगदान को मुंबई के लिए उपहार बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच विभिन्न विधाओं के कलाकारों के लिए खुला है। 2017 में रॉयल ओपेरा हाउस को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए यूनेस्को के एशिया-पैसिफिक अवॉर्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था।



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