शाहजहांपुर4 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी एक्टर राजपाल यादव को बुधवार को अल्टीमेटम दिया। कोर्ट ने कहा- 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपए जमा कराइए। इसके बाद ही हम दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ आपकी याचिका पर विचार करेंगे, जिसमें राजपाल को दोषी ठहराते हुए 3 महीने की सजा सुनाई गई थी।
सुनवाई के दौरान राजपाल ने हाथ जोड़कर बेंच के सामने प्रणाम किया। बताया कि फिल्म ‘अता पता लापता’ में ₹200-250 करोड़ का नुकसान हुआ था। प्रोड्यूसर्स के साथ उन्हें भी नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद उनसे ₹5 करोड़ की देनदारी वसूली जा रही है। इस पर CJI ने मजाकिए लहजे में कहा- आपकी फिल्म की तरह आपका पैसा भी ‘अता पता लापता’ हो गया।
CJI ने सलाह दी कि वे अच्छी फिल्में बनाएं और लोगों का मनोरंजन करें। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले वकील भी अच्छे कलाकार होते हैं। उन्हें भी फिल्मों में कास्ट किया जा सकता है।
मामला 2010 में राजपाल की फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लिए गए ₹5 करोड़ के लोन से जुड़ा है। इसमें ₹1.05 करोड़ के सात चेक बाउंस हो गए। ब्याज और दूसरे चार्ज के साथ बकाया रकम समय के साथ बढ़ती गई।

राजपाल ने कहा था- पांच बार जेल जाने को तैयार, लेकिन एक पैसा नहीं दूंगा।
सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए राजपाल, प्रॉपर्टी बेचकर पैसे देने को कहा
चेक-बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी के बाद राजपाल यादव सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को बताया कि वे शिकायतकर्ता को 2 करोड़ रुपए देने को तैयार हैं।
उन्होंने कोर्ट को 1.15 करोड़ रुपए का डिमांड ड्राफ्ट भी दिखाया। बाकी 85 लाख अपनी एक प्रॉपर्टी बेचकर देने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रॉपर्टी खरीदने वाला इस वक्त कोर्ट में मौजूद है।
सजा बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है कोर्ट
कोर्ट ने साफ किया कि राजपाल को बार-बार समय इसलिए दिया जा रहा है, ताकि शिकायतकर्ता को उसका पैसा मिल सके। कोर्ट ने बार-बार देरी वाले बर्ताव को लेकर चेतावनी देते हुए कहा- कानून का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इशारों-इशारों में यह भी कहा कि कोर्ट उनकी सजा को बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।
राजपाल बोले- फिल्मों के लिए लोन नहीं लिया जाता
एक्टर राजपाल यादव ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा था कि फिल्मों के लिए लोन नहीं लिया जाता। आप घर बनाने या जमीन खरीदने के लिए लोन लेते हैं। यह एक पैकेज डील होती है या फिर इन्वेस्टमेंट। राजपाल खुद पहले से ही 100 फिल्मों पर काम कर रहा है, तो उसे एक फिल्म बनाने के लिए लोन की क्या जरूरत होगी?
मुझे अपने देश, सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के पर पूरा भरोसा है। जो भी फैसला होगा, उसे सभी स्वीकार करेंगे। बता दें कि राजपाल यादव शाहजहांपुर के बंडा थाना क्षेत्र के कुंडरा गांव के रहने वाले हैं। उनके ऊपर जिस कंपनी ने केस किया है। उसके मालिक उद्योगपति माधौ गोपाल अग्रवाल भी शाहजहांपुर के निवासी हैं।

‘आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है’
- इससे पहले, सोमवार को राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट के आदेश के बावजूद पैसे नहीं जमा करने पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची नाराज हो गए थे। उन्होंने कहा था, “इस घमंड को सही जगह दिखानी होगी। आपको पता होना चाहिए कि कब मुंह खोलना है। आपकी जगह जेल में है।”
- सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को आखिरी मौका देते हुए मंगलवार (6 अक्टूबर) तक पैसे जमा करने का आदेश दिया था। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर तय की थी। इससे पहले कोर्ट ने 15 सितंबर को भी उन्हें भुगतान के लिए समय दिया था। साथ ही उन्हें सरेंडर करने से मिली अंतरिम राहत 5 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी।

राजपाल यादव ने फिल्म के लिए मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाई थी 3 महीने की सजा
मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया था। जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सातों मामलों में उनकी सजा बरकरार रखते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। सभी सजाएं एक साथ चलने का आदेश दिया गया था। इसके बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए भुगतान की शर्त रखी थी। 15 सितंबर को कोर्ट ने उन्हें रकम जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया था। अब भुगतान की शर्त पूरी नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें आखिरी मौका दिया है।

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