साउथ एक्टर अल्लू अर्जुन और डायरेक्टर एटली की फिल्म ‘राका’ ने रिलीज से पहले ही बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म ने ‘मोस्ट पीपल मोशन-कैप्चर्ड इन रियल-टाइम’ के लिए आधिकारिक तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया है। एक सिंगल सेशन के दौरान एक साथ 37 कलाकारों के मोशन को रियल-टाइम में ट्रैक और कैप्चर किया गया। इस रिकॉर्ड प्रक्रिया में 4 साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग कलाकार तक शामिल थे। इस बड़े पैमाने के सेटअप को तैयार करने के लिए मेकर्स ने लॉस एंजिल्स से आधुनिक तकनीक और उपकरण मंगवाकर भारत में अपना बेस तैयार किया था। 92 मोशन कैप्चर कैमरों का किया गया इस्तेमाल फिल्म के मोशन कैप्चर सेशन को पूरा करने के लिए 92 ऑप्टिकल मोशन-कैप्चर कैमरों का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही रियल-टाइम अनरियल विजुअलाइजेशन, फेसियल कैप्चर और एडवांस नेटवर्क सिस्टम को एक साथ सिंक किया गया था। सन पिक्चर्स के वीडियो में मोशन कैप्चर टेक्निकल डायरेक्टर ब्रायन रौश ने बताया कि लोग समझते हैं कि सिर्फ एक बटन दबाने से एनीमेशन मिल जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। वहीं सिनेमैटोग्राफर जीके विष्णु ने बताया कि फिल्म में कई मोशन-कैप्चर कैरेक्टर हैं, जिनके बीच आपस में काफी एक्शन और इंटरेक्शन देखने को मिलेगा। लॉस एंजिल्स से मंगाए गए आधुनिक उपकरण डायरेक्टर एटली ने बताया कि भारत में मोशन-कैप्चर स्टेशन मौजूद थे, लेकिन ‘राका’ के बड़े विजन के लिए ज्यादा कैपेसिटी वाले सेटअप की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने सन पिक्चर्स के प्रोड्यूसर कलानिधि मारन से बात की। प्रोड्यूसर की मंजूरी मिलने के बाद लॉस एंजिल्स से सभी जरूरी उपकरण भारत मंगाए गए और एक नया बेस स्थापित किया गया। इसके बाद फिल्म के VFX प्रोड्यूसर ने ‘राका’ की जरूरतों के हिसाब से एक नया मोशन-कैप्चर पाइपलाइन और वर्कफ्लो तैयार किया। अल्लू अर्जुन बोले- विजन को हकीकत में बदलना बड़ी बात इस उपलब्धि पर अल्लू अर्जुन ने कहा कि कई लोगों के पास विचार और विजन होता है, लेकिन उसे इस स्तर की क्वालिटी के साथ पूरा करना बड़ी बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय डायरेक्टर एटली, पूरी टेक्निकल टीम और इतने बड़े प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए सन पिक्चर्स को दिया। फिल्म में 4 रोल निभा सकते हैं अल्लू अर्जुन ‘राका’ एक बड़े बजट की साइंस-फिक्शन एक्शन ड्रामा फिल्म है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में अल्लू अर्जुन चार अलग-अलग किरदार निभाते नजर आ सकते हैं, जिनमें दादा, पिता और दो बेटों का रोल शामिल है। चर्चा यह भी है कि फिल्म की कहानी पैरेलल यूनिवर्स के कॉन्सेप्ट पर आधारित हो सकती है, हालांकि मेकर्स ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिल्म में दीपिका पादुकोण, रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। अल्लू अर्जुन और एटली पहली बार किसी प्रोजेक्ट में एक साथ काम कर रहे हैं।
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अल्लू अर्जुन की फिल्म 'राका' ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड:37 लोगों का एक साथ रियल-टाइम मोशन कैप्चर किया; 92 कैमरों का किया गया इस्तेमाल
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सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइन:सलमान की फिल्म पर पड़ेगा असर; हिंसा, ड्रग्स और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्ती, जानिए क्या बदलाव हुए
भारतीय फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को फिल्म सर्टिफिकेशन के नियमों में बदलाव किया है। नई गाइडलाइन ने 1991 में बनाए गए पुराने नियमों की जगह ली है। हालांकि सेंसरशिप के पुराने प्रावधानों को पूरी तरह बदला नहीं गया है, लेकिन क्रिएटिव फ्रीडम, सामाजिक बदलाव, उम्र के हिसाब से रेटिंग और कंटेंट से जुड़े नियमों को नए तरीके से स्पष्ट किया गया है। नई गाइडलाइन में फिल्ममेकर्स को हिंसा, ड्रग्स, धूम्रपान, यौन हिंसा और महिलाओं के चित्रण को लेकर खास सावधानी बरतने को कहा गया है। साथ ही बच्चों और कमजोर वर्गों के चित्रण से जुड़े नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। जानिए कैसी है नई गाइडलाइन, किन फिल्मों पर पड़ेगा असर? 1. क्रिएटिव फ्रीडम और सेंसरशिप में संतुलन नई गाइडलाइन के मुताबिक सेंसर बोर्ड को यह ध्यान रखना होगा कि फिल्मों में सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारी का पालन हो, लेकिन इसके नाम पर कलाकारों की रचनात्मक आजादी को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाए। यानी सेंसरशिप और क्रिएटिव फ्रीडम के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। 2. हिंसा और अपराध का महिमामंडन नहीं फिल्मों में हिंसा या अपराध को बढ़ावा देने या उसका महिमामंडन करने से बचना होगा। अपराध करने के तरीकों को इतनी विस्तार से दिखाने पर भी रोक होगी, जिससे लोगों को अपराध करने का तरीका मिल सके। बिना जरूरत की अत्यधिक हिंसा, क्रूरता और डरावने दृश्यों को भी कम करने के निर्देश दिए गए हैं। 3. बच्चों से जुड़े कंटेंट पर सख्ती बच्चों को हिंसा का शिकार, हिंसा करने वाला या जबरन हिंसा का गवाह बनाकर दिखाने वाले कंटेंट पर भी सख्ती की गई है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को दिखाने से भी बचने को कहा गया है। 4. दिव्यांग लोगों और जानवरों के साथ क्रूरता पर रोक फिल्मों में जानवरों के साथ बिना जरूरत की क्रूरता दिखाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने या उनके साथ दुर्व्यवहार दिखाने वाले कंटेंट को भी प्रतिबंधित किया गया है। 5. शराब, ड्रग्स और स्मोकिंग का महिमामंडन नहीं फिल्मों में शराब पीने, ड्रग्स लेने या धूम्रपान को ग्लैमराइज करने से बचना होगा। नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक सब्सटेंस से जुड़े दृश्यों में निर्धारित एंटी-ड्रग चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। 6. यौन हिंसा के ग्राफिक सीन नहीं महिलाओं को अपमानजनक या नीचा दिखाने वाले कंटेंट पर भी रोक रहेगी। अगर कहानी के लिए यौन हिंसा दिखाना जरूरी है, तो उसे ग्राफिक या बेहद विस्तृत तरीके से नहीं दिखाया जा सकेगा। गाइडलाइन में यौन कंटेंट को भी जरूरत के मुताबिक सीमित रखने की बात कही गई है। 7. अश्लीलता और डबल मीनिंग डायलॉग पर भी नजर फिल्मों में अश्लीलता, आपत्तिजनक भाषा और ऐसे डबल मीनिंग डायलॉग जो दर्शकों की ‘बेसर इंस्टिंक्ट्स’ को उकसाने वाले माने जाएं, उन पर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहेंगे। 8. धर्म और समुदायों को लेकर सावधानी किसी धर्म, नस्ल या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक शब्दों या दृश्यों को दिखाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा सांप्रदायिकता, अंधविश्वास, गैर-वैज्ञानिक सोच या ‘राष्ट्र-विरोधी’ विचारों को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर भी प्रतिबंध रहेगा। 9. देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट पर रोक रहेगी। दूसरे देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रभावित करने वाली सामग्री को लेकर भी नियम लागू होंगे। 10. कोर्ट और मानहानि से जुड़े नियम फिल्मों में मानहानिकारक सामग्री और अदालत की अवमानना से जुड़े कंटेंट पर भी रोक रहेगी। गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा कंटेंट जो अदालतों के प्रति अपमान, तिरस्कार या अनादर पैदा करता है या उनकी गरिमा को कमजोर करता है, वह अवमानना के दायरे में आ सकता है। उम्र के हिसाब से भी होगा सर्टिफिकेशन नई गाइडलाइन में U/A 7+, U/A 13+ और U/A 16+ कैटेगरी को शामिल किया गया है। हालांकि ये कैटेगरी भी पूरी तरह नई नहीं हैं; इन्हें पहले ही 2024 के सर्टिफिकेशन और 2025 में गाइडलाइन में शामिल किया जा चुका था। सलमान खान की फिल्म पर पड़ सकता है असर सलमान खान जल्द ही फिल्म मातृभूमि में नजर आने वाले हैं। ये फिल्म भारत-चीन की झड़प पर बनी है, जिसमें जाहिर तौर पर चीन के खिलाफ कुछ सीन दिखाए जाएंगे, लेकिन नई गाइडलाइन से फिल्म पर बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि अब फिल्मों में ऐसे देशों के खिलाफ सीन नहीं रखे जा सकते, जिनसे भारत के संबंध अच्छे हैं। फिल्म पहले ही विवादों में है। फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प पर है, पहले इसका टाइटल ही बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, लेकिन आपत्ति होने पर इसे बदलकर मातृभूमि कर दिया गया है। फिल्म का ट्रेलर जारी होने के बाद इसकी काफी आलोचना हुई थी। इसे अब तक सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं मिला है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का ऐलान किया है। इस नई टीम में सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के कई बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक्ट्रेस प्रीति जिंटा, एक्टर सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और बंगाली सिनेमा के दिग्गज एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी का नाम प्रमुख है। नया बोर्ड सिनेमाग्राफ एक्ट के तहत 3 साल की अवधि या अगले आदेश तक काम करेगा। पुराने नियम क्या थे? 1991 की गाइडलाइन में भी कहा गया था कि- जानिए क्या है सेंसर बोर्ड? सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) को सेंसर बोर्ड के नाम से भी जाना जाता है। यह एक वैधानिक संस्था है जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह संस्था भारत में बनने वाली फिल्मों को रिलीज से पहले उनके कंटेंट के हिसाब से सर्टिफिकेट देती है। यह सर्टिफिकेट सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 के तहत आता है। इंडियन सिनेमैटोग्राफी एक्ट साल 1920 में बना। यह तब मद्रास (चेन्नई), बॉम्बे (मुंबई), कलकत्ता (कोलकाता), लाहौर (पाकिस्तान) और रंगून (यांगून, बर्मा ) सेंसर बोर्ड पुलिस चीफ के अंडर आता था। पहले रीजनल सेंसर्स स्वतंत्र थे। आजादी के बाद रीजनल सेंसर्स को बॉम्बे बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर्स के अधीन कर दिया गया। उसके बाद 1952 में सिनेमैटोग्राफ एक्ट लागू होने के बाद बोर्ड का ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर्स’ के नाम से पुनर्गठन हुआ। 1983 में फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े एक्ट में कुछ बदलाव किए गए और इस संस्था का नाम ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ यानी ‘सीबीएफसी’ रखा गया। क्या सीबीएफसी को फिल्म बैन करने का अधिकार है? सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 और सिनेमैटोग्राफी के नियम में 1983 में आए बदलाव के मुताबिक सेंसर बोर्ड किसी भी फिल्म पर बैन नहीं लगा सकता है। वह सिर्फ फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर सकता है। ऐसी स्थिति में फिल्म थिएटर में रिलीज नहीं की जा सकती है। सीधे तौर पर यह बैन जैसी ही स्थिति होती है। केंद्र सरकार ने इस मसले पर 31 मार्च 2022 को राज्यसभा में कहा था कि सेंसर बोर्ड किसी फिल्म को बैन नहीं कर सकता, लेकिन सिनेमैटोग्राफी एक्ट के तहत दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर सर्टिफिकेट देने से मना जरूर कर सकता है। सीबीएफसी कैसे काम करता है? सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड के पास फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए अधिकतम 68 दिनों का समय होता है। पहले फिल्म के आवेदन की जांच की जाती है। इसमें एक हफ्ते का समय लगता है। इसके बाद फिल्म को जांच समिति के पास भेजा जाता है। उनके पास फिल्म की जांच के लिए 15 दिनों का समय होता है। जांच समिति फिल्म को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पास भेजती है। सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष फिल्म की जांच के लिए अधिकतम 10 दिनों का समय ले सकता है। इसके बाद 36 दिनों के भीतर सेंसर बोर्ड आवेदक को जरूरी कट्स के बारे में जानकारी और सर्टिफिकेट प्रदान करता है। सेंसर बोर्ड के नाम को लेकर कन्फ्यूजन क्यों है? दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान बॉलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूसर और सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा कि लोग ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ और सेंसर बोर्ड के नाम को लेकर कन्फ्यूजन में हैं। निहलानी ने कहा- मिनिस्ट्री से लेकर पब्लिक तक इस कन्फ्यूजन में हैं कि इसे क्या बोलना चाहिए। मेरे कार्यकाल में केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने इंडस्ट्री में यह हवा फैला दी थी कि सेंट्रल सर्टिफिकेशन बॉडी है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सीबीएफसी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन है या सेंसर बोर्ड।
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जूबीन गर्ग के निधन के एक साल:पत्नी गरिमा बोलीं- वो हर जगह दिखते हैं, सिंगापुर में क्या हुआ, इसका जवाब चाहिए, न्याय किसके लिए
असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग की पहली बरसी पर उनकी पत्नी गरिमा ने न्याय की मांग की है। मशहूर सिंगर जुबीन गर्ग का 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में निधन हुआ था। वह एक कॉन्सर्ट के लिए गए थे। मौत के बाद 7 लोगों को जांच के दायरे में लिया गया है। उनकी पहली बरसी पर कई चाहनेवाले उनके घर पहुंच रहे हैं। इस पर उनकी पत्नी ने कहा है कि परिवार और असम के लोग अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर उनकी मौत कैसे हुई। गरिमा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में असल में में क्या हुआ था। मैं उन्हें हर जगह देखती हूं। जिस तरह लोग यहां आए हैं, वे किसी की जाति, धर्म या विचारधारा को नहीं देख रहे हैं। वे इंसान बनकर आए हैं।” असम सरकार ने सिंगापुर में उनकी मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। केस अदालत में आगे बढ़ रहा है। असम सरकार ने कहा है कि जांच का मकसद जुबीन की सिंगापुर में मौत से जुड़ी परिस्थितियों और तथ्यों का पता लगाना है। न्याय की मांग पर गरिमा ने कहा, “हम सभी जुबीन गर्ग के लिए न्याय चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में वास्तव में क्या हुआ था। हम अब भी उस जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हमें न्याय मिलना चाहिए। अगर जुबीन के लिए न्याय नहीं है, तो फिर किसके लिए है?” फैंस ने मना रहे हैं जुबीन दिवस जुबीन गर्ग की पहली बरसी को उनके फैंस जुबीन दिवस के रूप में मना रहे हैं। 17 सितंबर से शुरू हुआ तीन दिवसीय जुबीन दिवस संगीत, प्रार्थना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। कामारकुची स्थित स्मारक पर प्रशंसकों की भीड़ जुटी। स्मारक को फूलों और गमोसों से सजाया गया था। तीन दिवसीय कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए इंतजाम किए गए थे। यह कार्यक्रम शनिवार को यानी आज खत्म होगा। देखिए जुबीन गर्ग दिवस की चुनिंदा तस्वीरें- पिछले साल सितंबर में मौत हुई थी, सिंगापुर पुलिस बोली- मौत डूबने से हुई सिंगर जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को हुआ। जुबीन गर्ग सिंगापुर में भारत और सिंगापुर के बीच 60 साल के कूटनीतिक रिश्तों के जश्न में शामिल होने गए थे। उन्हें वहां ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में परफॉर्म करना था। परफॉर्मेंस से जुबीन अपने दोस्तों के साथ लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर पार्टी कर रहे थे, तभी डूबने से उनकी मौत हो गई थी। सिंगर की मौत की खबर मिलते ही उस बड़े आयोजन को रद्द कर दिया गया था। जुबीन गर्ग के निधन के बाद असम में उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा समेत घटना के वक्त उनके साथ मौजूद सभी लोगों और इवेंट मैनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। शिकायत होने के बाद सिंगर की पत्नी गरिमा ने सिंगर के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से रोते हुए एक वीडियो जारी कर मैनेजर के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत वापस लिए जाने की अपील की है। कुछ समय बाद जुबीन की पत्नी ने हत्या का शक जताते हुए जांच की मांग की। शिकायत होने के बाद जुबीन के साथ यॉट में मौजूद दोस्तों और इवेंट ऑर्गेनाइजर की गिरफ्तारी हुई। दूसरी तरफ गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की हर दिन सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट बनाई है। बक्सा जिले की जिला जज शर्मिला भुइयां इस फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अध्यक्षता करेंगी। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने ये नियुक्ति की है। असम पुलिस की CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले की जांच की और स्थानीय कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 25 नवंबर को विधानसभा में कहा था कि जुबीन गर्ग की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि हत्या थी। वे दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे। असम पुलिस के साथ-साथ सिंगापुर पुलिस ने भी मामले की जांच की। जनवरी में सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को लेकर सिंगापुर पुलिस ने किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया। अदालत को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, जुबीन की मौत डूबने की वजह से हुई थी। उन्होंने नशे की हालत में लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। सिंगापुर पुलिस ने 35 लोगों की गवाही के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। गवाहों ने उस दिन की पल-पल की जानकारी दी और बताया कि जुबीन गर्ग ने कितनी शराब पी और नशे में डाइविंग करने पहुंचे। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 52 साल के जुबीन गर्ग घटना के समय नशे में थे। उनकी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में ब्लड अल्कोहल की मात्रा 333 मिलीग्राम पाई गई, जो सिंगापुर की कानूनी सीमा (80 मिलीग्राम) से चार गुना से भी ज्यादा थी। कोरोनर ने कहा कि इतने नशे की वजह से वे सही फैसला नहीं ले पा रहे थे। उन्होंने पहले तो लाइफ जैकेट पहनी थी, लेकिन पहली बार तैरने के बाद उसे उतार दिया। दूसरी बार जब वे पानी में उतरे, तो कैप्टन और दूसरे साथियों के टोकने के बावजूद उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से साफ मना कर दिया था। पत्नी के आरोपों को कोर्ट ने किया खारिज जुबीन की पत्नी ने शक जताया था कि सिंगर को पानी में धक्का दिया गया होगा। इस पर कोरोनर नाखोडा ने साफ किया कि पुलिस ने बहुत बारीकी से जांच की है। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे लगे कि किसी ने उन्हें मजबूर किया या धक्का दिया। यहां तक कि उन्हें बचाने की कोशिश करने वाले लोगों ने भी पूरी जान लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि जुबीन अपनी मर्जी से तैरने के लिए पानी में उतरे थे और डूबने के दौरान किसी ने भी उनका चेहरा जानबूझकर पानी के नीचे नहीं दबाया था।
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