सलमान खान की फिल्म ‘मातृभूमि’ को सरकार से NOC मिल गई है। अब फिल्म को CBFC की मंजूरी का इंतजार है। भारत-चीन के बीच 2020 में हुए टकराव पर बनी इस फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी देश के सम्मान को ठेस न पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय (IB Ministry) को मेकर्स के दिए ‘मातृभूमि’ के नए वर्जन से कोई आपत्ति नहीं है।इसके बाद इस वॉर-ड्रामा फिल्म को NOC दे दी गई है। NOC मिलने के बाद फिल्म इस साल के आखिर में सिनेमाघरों में रिलीज हो सकती है। फिल्म की आधिकारिक रिलीज डेट अभी सामने नहीं आई है। हालांकि, सलमान खान और उनकी टीम इसे 13 नवंबर को रिलीज करने पर विचार कर रही है। उनका मानना है कि दिवाली के बाद का फेस्टिव माहौल फिल्म की रिलीज के लिए सही रहेगा। फिल्म की सेंसर प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मेकर्स जल्द ही फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास जमा करेंगे। अगर CBFC से मंजूरी मिल जाती है और यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो जाती है, तो सलमान और उनकी टीम फिल्म को 13 नवंबर को रिलीज कर सकती है। NOC के बाद CBFC सर्टिफिकेट जरूरी NOC और CBFC की मंजूरी अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मंत्रालय से NOC मिलने के बाद फिल्म CBFC के पास भेजी जाती है। CBFC से सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज के लिए पूरी तरह तैयार मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 दिनों में फिल्म की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी। ओरिजिनल वर्जन में किए गए बदलाव फिल्म जिस घटना पर आधारित है, वह चीन से तनावपूर्ण रिश्तों के बीच घटी थी, हालांकि अब चीन के साथ सुधरे रिश्तों को देखते हुए सरकार ने फिल्म के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। सरकार ने मेकर्स को उनमें बदलाव करने का सुझाव दिया। इसके बाद ‘मातृभूमि’ को ओरिजिनल वर्जन की तुलना में काफी बदला गया है। अब फिल्म में भारत और चीन के रिश्तों को सकारात्मक नजरिए से दिखाया जाएगा। डीटेल में जानिए क्यों बार-बार टल रही मातृभूमि, क्या है पूरा विवाद? फिल्म मातृभूमि लंबे समय से विवादों में है। फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प पर बनी है। पहले इसका टाइटल ही बैटल ऑफ गलवान रखा गया था। ‘बैटल ऑफ गलवान’ का ट्रेलर 27 दिसंबर को सलमान खान के जन्मदिन के मौके पर रिलीज हुआ था। ट्रेलर सामने आने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सलमान खान की ड्रेस और हेयर स्टाइल को लेकर भी आलोचना हुई थी। चीनी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बॉलीवुड फिल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन वे इतिहास को बदल नहीं सकतीं। चीनी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के हवाले से लिखा था कि भारत में फिल्मों का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना को बढ़ाने के लिए किया जाता है। हालांकि, उनके मुताबिक कोई भी फिल्म गलवान झड़प से जुड़े तथ्यों को नहीं बदल सकती। सॉन्ग ने दावा किया था कि पहले भारतीय सैनिकों ने सीमा पार की थी और इसके जवाब में चीनी सैनिकों ने चीनी सीमा की रक्षा की थी। आलोचना के बाद मेकर्स ने फिल्म के कुछ हिस्सों को दोबारा शूट करने का फैसला किया। करीब 40 दिनों तक री-शूट किया गया, ताकि कहानी के कुछ हिस्सों में बदलाव कर उसे ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके। इसी वजह से फिल्म की तय रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई।आपत्ति उठाए जाने पर टाइटल बदलकर मातृभूमिः मे वॉर रेस्ट इन पीस कर दिया गया है। फिल्म के नाम और रिलीज में बदलाव को गलवान संघर्ष से जुड़े संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे से भी जोड़कर देखा गया। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म ‘मातृभूमि’ को सर्टिफिकेट देने पर फिलहाल रोक लगा दी है। प्रोडक्शन हाउस ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि फिल्म की सीबीएफसी सर्टिफिकेशन प्रक्रिया रुकी होने की खबरें पूरी तरह गलत और बेबुनियाद हैं। सर्टिफिकेट से जुड़े दावों के बीच सलमान खान फिल्म्स ने बयान जारी कर कहा कि फिल्म को अभी तक सेंसर बोर्ड के पास सर्टिफिकेशन के लिए भेजा ही नहीं गया। इसलिए इस तरह की रिपोर्ट्स पर भरोसा न करें। सलमान खान फिल्म्स ने मीडिया और लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि की जानकारी न फैलाएं। फिल्म से जुड़े सभी आधिकारिक अपडेट केवल उनके ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर ही शेयर किए जाएंगे। फिल्म में सलमान खान मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके अलावा ‘मातृभूमि’ में चित्रांगदा सिंह, अंकुर भाटिया, अभिलाष चौधरी और जेन शॉ समेत कई कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। सीबीएफसी कैसे काम करता है? सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड के पास फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए अधिकतम 68 दिनों का समय होता है। पहले फिल्म के आवेदन की जांच की जाती है। इसमें एक हफ्ते का समय लगता है। इसके बाद फिल्म को जांच समिति के पास भेजा जाता है। उनके पास फिल्म की जांच के लिए 15 दिनों का समय होता है। जांच समिति फिल्म को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पास भेजती है। सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष फिल्म की जांच के लिए अधिकतम 10 दिनों का समय ले सकता है। इसके बाद 36 दिनों के भीतर सेंसर बोर्ड आवेदक को जरूरी कट्स के बारे में जानकारी और सर्टिफिकेट प्रदान करता है।
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सलमान खान की मातृभूमि को सरकार से NOC:CBFC की मंजूरी बाकी, भारत-चीन रिश्तों को ध्यान में रखकर फिल्म में हुए कई बदलाव, जानिए क्यों अटकी फिल्म
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प्रत्युषा बनर्जी सुसाइड केस:कोर्ट ने 10 साल बाद एक्स बॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह को किया डिस्चार्ज, सुसाइड के लिए उकसाने का ट्रायल खत्म
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी के सुसाइड केस में अभिनेता राहुल राज सिंह को डिस्चार्ज यानी आरोपमुक्त कर दिया। प्रत्युषा बनर्जी को टीवी शो ‘बालिका वधू’ में आनंदी के किरदार से पहचान मिली थी। 1 अप्रैल 2016 को उन्हें मुंबई के गोरेगांव स्थित किराए के फ्लैट में मृत पाया गया था। कोर्ट ने 1 अप्रैल 2016 को प्रत्युषा की मौत से कुछ समय पहले हुई आखिरी फोन बातचीत को अहम माना। जस्टिस एसजी डिगे की बेंच ने कहा कि बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट में एक्ट्रेस के एक्स बॉयफ्रेंड राहुल उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकते दिख रहे हैं। NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल ने बातचीत में कहा था कि उन्होंने अपनी कार वापस मोड़ ली है और प्रत्युषा से मिलने जा रहे हैं। बातचीत से यह भी पता चला कि प्रत्युषा परेशान थीं और अपने माता-पिता समेत कई लोगों को अपनी हालत के बारे में बता रही थीं। माता-पिता ने लगाए थे गंभीर आरोप प्रत्युषा के माता-पिता ने राहुल पर सुसाइड के लिए उकसाने, मारपीट और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। राहुल उस समय प्रत्युषा के बॉयफ्रेंड थे और दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहते थे। राहुल पर प्रत्युषा को सुसाइड के लिए उकसाने का केस दर्ज किया गया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने जुलाई 2016 में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी थी। चार्जशीट के बाद से चल रही थी कानूनी लड़ाई पुलिस ने 2018 में चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद राहुल ने केस से डिस्चार्ज करने के लिए सेशंस कोर्ट में याचिका दायर की। सेशंस कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया। राहुल के वकीलों ने क्या दलील दी राहुल की ओर से सीनियर एडवोकेट आबाद पोंडा और एडवोकेट श्रेयांश मिठारे ने दलीलें दीं। उन्होंने कहा कि आखिरी बातचीत से साफ है कि राहुल ने प्रत्युषा को कोई बड़ा कदम उठाने से रोकने की कोशिश की थी। वकीलों ने कहा कि राहुल उस समय प्रत्युषा के फ्लैट की ओर जा रहे थे। इसलिए उनके खिलाफ सुसाइड के लिए उकसाने का केस नहीं बनता। राहुल के वकीलों के मुताबिक, आखिरी बातचीत में प्रत्युषा अपनी स्थिति के लिए कई लोगों को जिम्मेदार बता रही थीं। इनमें उनके माता-पिता भी शामिल थे। वकीलों ने यह भी सवाल उठाया कि सुसाइड नोट नहीं मिलने के बावजूद राहुल के खिलाफ जल्दबाजी में FIR दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि ट्रायल जारी रखना ‘कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग’ होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल की याचिका मंजूर कर ली और उन्हें केस से डिस्चार्ज कर दिया। इसका मतलब है कि प्रत्युषा की मौत से जुड़े इस मामले में राहुल के खिलाफ ट्रायल नहीं चलेगा। राहुल ने प्रत्युषा से आखिरी बातचीत के बारे में बताया था सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में राहुल ने प्रत्युषा के साथ हुई अपनी आखिरी बातचीत के बारे में बताया था। राहुल के मुताबिक, घटना वाले दिन दोपहर करीब 3 से 4 बजे वह लोखंडवाला बैक रोड पर थे। उन्हें मीत ब्रदर्स से मिलने जाना था। इसी दौरान प्रत्युषा का फोन आया। राहुल ने बताया कि फोन पर प्रत्युषा ने सबसे पहले उनसे कहा, “बेबी, आई लव यू।” राहुल ने भी जवाब में कहा, “आई लव यू टू।” राहुल ने बताया था कि उन्होंने प्रत्युषा से पूछा कि क्या हुआ है। इस पर प्रत्युषा ने कहा कि वह उनकी परेशानी नहीं समझ सकते, क्योंकि वह वहां काम करने के दौरान कथित तौर पर परेशान हो रही थीं। राहुल के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्रत्युषा ने अपने पिता को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि प्रत्युषा अपने पिता को लेकर काफी परेशान थीं। राहुल ने उन्हें समझाने की कोशिश की और कहा कि वह ऐसी बातें न करें। राहुल ने बताया था कि इसके बाद उन्होंने प्रत्युषा से कहा कि वह तुरंत वापस आ रहे हैं। उन्होंने फोन पर उन्हें शांत रहने के लिए कहा और प्यार से बात की। राहुल के मुताबिक, प्रत्युषा ने उनसे कहा कि वह फोन रख दें। इसके बाद राहुल ने अपनी कार घुमाई और उनके पास जाने के लिए वापस निकल पड़े। प्रत्युषा बनर्जी का करियर प्रत्युषा बनर्जी ने साल 2010 में टीवी शो ‘रक्त संबंध’ से करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में वाणी के किरदार में नजर आईं। प्रत्युषा को बड़ी पहचान ‘बालिका वधू’ से मिली। साल 2010 में उन्होंने शो में आनंदी का किरदार निभाया। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके बाद उन्हें लोग आनंदी के नाम से भी जानने लगे। ‘बालिका वधू’ की सफलता के बाद प्रत्युषा ने डांस रियलिटी शो ‘झलक दिखला जा’ के पांचवें सीजन में हिस्सा लिया। हालांकि, डांस की रिहर्सल में सहज महसूस नहीं करने के कारण उन्होंने शो छोड़ दिया। साल 2013 में वह ‘बिग बॉस 7’ में कंटेस्टेंट के तौर पर नजर आईं। इसके बाद उन्होंने ‘हम हैं ना’, ‘ससुराल सिमर का’ और ‘गुलमोहर ग्रैंड’ जैसे टीवी शोज में काम किया। उन्होंने अपने पार्टनर राहुल राज सिंह के साथ रियलिटी शो ‘पावर कपल’ में भी हिस्सा लिया था।
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फिल्म ‘हनुमान अंश’ के 2 पार्ट और आएंगे:प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने बताया- क्या दिसंबर से शुरू होगी दूसरे पार्ट की शूटिंग
महज डेढ़ करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने जिस तरह दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई, उसने फिल्म की अगली कड़ी की संभावनाओं को लेकर भी उत्सुकता बढ़ा दी है। दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर ने बताया कि इसे आगे ले जाने का विचार सफलता मिलने के बाद पैदा नहीं हुआ, बल्कि फिल्म शुरू करने से पहले ही इसे एक फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित करने की योजना थी। यहां तक कि शुरुआती स्तर पर तीन फिल्मों के बारे में सोचा गया था। हालांकि, दूसरे पार्ट की स्क्रिप्टिंग अभी शुरू नहीं हुई है और निर्देशक के दूसरी फिल्म साइन करने के कारण इसमें कुछ समय लग सकता है। इसके बावजूद अनुप्रिया नागर का कहना है कि कहानी और महाराज जी के जीवन से जुड़ी इतनी सामग्री है कि एक फिल्म में सब कुछ समेटना संभव नहीं। सवाल: ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद इसे फ्रेंचाइजी के रूप में आगे ले जाने की तैयारी कितनी आगे बढ़ चुकी है? जवाब: इसका विचार सफलता के बाद नहीं आया है। फिल्म बनाने से पहले ही हमारे मन में इसे फ्रेंचाइजी के तौर पर विकसित करने की बात थी। महाराज जी की इतनी सारी कहानियां हैं, उनके जीवन से जुड़ी इतनी अद्भुत लीलाएं हैं कि एक फिल्म में सब कुछ बताना संभव नहीं है। इसलिए शुरुआत में ही हमने तीन फिल्मों के बारे में सोचा था। लेकिन अभी मैं यह नहीं कह सकती कि दूसरी फिल्म कब आएगी। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान पहली फिल्म को उसका पूरा न्याय देने पर है। हम अभी भी उसके साथ जुड़े काम कर रहे हैं। दूसरी फिल्म का विचार पूरी तरह मौजूद है, लेकिन उसकी राइटिंग अभी शुरू नहीं हुई है। सवाल: क्या दूसरे पार्ट के लिए कोई संभावित टाइमलाइन तय है? जवाब: अभी कोई निश्चित टाइमलाइन बताना जल्दबाजी होगी। हमारे डायरेक्टर ने एक दूसरी फिल्म साइन कर ली है, इसलिए स्वाभाविक तौर पर थोड़ा समय लगेगा। हमारी टीम ने अभी दूसरी फिल्म को लेकर पूरी तरह बैठकर चर्चा भी नहीं की है। जब तक वह बातचीत नहीं होती, तब तक तारीख बताना सही नहीं होगा। सच कहूं तो मैं भी इंतजार कर रही हूं कि कब महाराज जी बताएंगे कि यह फिल्म कब आएगी। सवाल: पहली फिल्म की सफलता के बाद क्या दूसरे पार्ट का बजट कई गुना बढ़ाने की योजना है? जवाब: मेरी सोच इस मामले में बहुत स्पष्ट है। मुझे लगता है कि पहली फिल्म जिस बजट में बनी, उसे उसी बजट में बनना चाहिए था। अगर हमने उसमें 10 या 20 करोड़ रुपये लगा दिए होते तो जरूरी नहीं कि फिल्म बेहतर बनती। उल्टा उसमें ऐसा VFX या AI आ सकता था जिसकी कहानी को जरूरत ही नहीं थी और उससे फिल्म की ऑथेंटिसिटी प्रभावित होती। हम जिस दौर की कहानी कह रहे हैं, उसमें सिर्फ किरदार ही महत्वपूर्ण नहीं हैं। लैंडस्केप, विजुअल टेक्सचर, वातावरण और उस समय की दुनिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए हमारे लिए सबसे जरूरी चीज ऑथेंटिसिटी है। अगर समाज ने हमें इतना प्यार और सपोर्ट दिया है तो हम फिजूलखर्ची नहीं कर सकते। हां, अगर अगली कहानी की जरूरत बजट बढ़ाने की होगी तो हम जरूर बढ़ाएंगे। सवाल: यानी स्केल बढ़ सकता है, लेकिन सिर्फ कहानी की जरूरत के हिसाब से? जवाब: बिल्कुल। मान लीजिए कहानी में कोई बड़ा युद्ध दिखाना है या ब्रिटिश राज और कॉलोनाइजेशन का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे सीक्वेंस स्वाभाविक रूप से ज्यादा संसाधन मांगेंगे। वहां बजट बढ़ना जरूरी है। लेकिन सिर्फ इसलिए पैसा खर्च करना कि फिल्म ज्यादा ग्लॉसी दिखाई दे या बड़ी लगे, यह हमारी सोच नहीं है। हम कहानी को बड़ा बनाने के लिए खर्च करेंगे, फिल्म को सिर्फ महंगा दिखाने के लिए नहीं। सवाल: सफलता के बाद क्या किसी बड़े स्टूडियो के साथ साझेदारी की संभावना भी बनी है? जवाब: संभावनाएं हमेशा रहती हैं, लेकिन फैसला हमारा होगा। अभी हमारे साथ अलग-अलग स्तर पर पार्टनर्स जुड़े हुए हैं। सिनेपोलिस ने ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूशन किया है और हुमाले ने ग्लोबल डिस्ट्रीब्यूशन संभाला है। लेकिन हमारा प्रोडक्शन हाउस हमारा ही है। अगर कोई स्टूडियो हमारे साथ आता है तो हम यह देखेंगे कि वह फिल्म के लिए सही है या नहीं। आखिरकार कितना बजट रखना है, कितना खर्च करना है और फिल्म को किस तरह आगे ले जाना है, इन चीजों पर हमारा नियंत्रण रहना जरूरी है। सवाल: अगर कोई बड़ा स्टूडियो जुड़ता है तो क्या फिल्म का स्केल भी अपने आप बड़ा हो जाएगा? जवाब: ऐसा जरूरी नहीं है। सिर्फ किसी बड़े स्टूडियो के जुड़ने से हमारा स्केल बदल जाए, यह हमारी सोच नहीं है। हमारा उद्देश्य सिर्फ पैसे कमाना या फिल्म को एक कमर्शियल और फाइनेंशियल प्रोजेक्ट की तरह देखना नहीं है। हमारे लिए पहली प्राथमिकता फिल्म की आत्मा और ऑथेंटिसिटी है। पहली फिल्म में आपको वह साफ दिखाई देती है। अगर कोई स्टूडियो हमारे साथ आकर उसी चीज को बनाए रखने में विश्वास करता है तो हम जरूर साथ काम करेंगे। लेकिन अगर उसके आने का मतलब फिल्म की मूल भावना से समझौता करना है तो हम अपने दम पर भी फिल्म बना सकते हैं। सवाल: फिल्म का वास्तविक बजट कितना था? अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। जवाब: फिल्म करीब डेढ़ करोड़ रुपये से थोड़ी ज्यादा में बनी है, लेकिन दो करोड़ रुपये में नहीं बनी। हमारा बजट दो करोड़ से कम ही रहा है। हम तीन प्रोड्यूसर्स हैं और हमने इसमें एक-तिहाई के हिसाब से योगदान दिया है। सवाल: निर्देशक ने पारंपरिक फीस लेने के बजाय प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल चुना। यह फैसला कैसे हुआ? जवाब: हमारे डायरेक्टर ने पारंपरिक तरीके से फीस लेने के बजाय प्रॉफिट शेयरिंग में हिस्सा लिया है। मुझे लगता है कि यह एक अलग और अच्छा मॉडल है। यह उनकी पहली फीचर फिल्म थी और उन्होंने बहुत अच्छी फिल्म बनाई। मेरी सोच यह है कि अगर फिल्म प्रॉफिट कमाती है तो उसमें निर्देशक की हिस्सेदारी होनी चाहिए। एक निर्माता के तौर पर हमें लगा कि यह उनके योगदान को सम्मान देने का सही तरीका है। सवाल: यानी शुरुआत से ही निर्देशक को सिर्फ फीस लेने वाले प्रोफेशनल के बजाय प्रोजेक्ट के पार्टनर की तरह देखा गया? जवाब: हां। अगर कोई व्यक्ति अपनी पहली फीचर फिल्म में इतना अच्छा काम कर रहा है और प्रोजेक्ट में उसका योगदान इतना महत्वपूर्ण है तो सफलता में उसका हिस्सा होना चाहिए। हमारे लिए यह उचित मॉडल था। सवाल: जब आपने ‘हनुमान अंश’ शुरू की थी, तब क्या आपने सोचा था कि यह इतना बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट बन सकता है? जवाब: बिल्कुल नहीं। मेरे लिए यह कमर्शियल प्रोजेक्ट से ज्यादा एक इमोशनल प्रोजेक्ट था। मैं इसे फाइनेंशियल प्रोजेक्ट की तरह लेकर नहीं आई थी। मेरी ज्यूरिख में नौकरी लग गई थी और वहां मुझे सैलरी मिलने वाली थी। लेकिन मैंने वह रास्ता छोड़कर वापस आने और इस फिल्म के लिए काम करने का फैसला किया। अपनी सेविंग्स भी इसमें लगाईं। इसलिए शुरुआत में मेरा सवाल यह नहीं था कि फिल्म कितनी कमाई करेगी। मेरी सबसे बड़ी इच्छा थी कि लोग महाराज जी के बारे में जानें और खासकर बच्चे उनके बारे में जानें। सवाल: तो निवेश करते समय रिटर्न आपकी पहली प्राथमिकता नहीं था? जवाब: नहीं। जाहिर है, फिल्म महंगा माध्यम है और हर निर्माता चाहता है कि उसका निवेश वापस आए। लेकिन इस फिल्म के मामले में मेरी शुरुआती प्राथमिकता अलग थी। मैं चाहती थी कि यह कहानी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। मुझे कोई ऐसी एक्सपेक्टेशन नहीं थी कि फिल्म इतनी बड़ी हिट होगी या इतने रिकॉर्ड बनाएगी। अगर आप शुरुआत में सिर्फ नंबर सोचकर फिल्म बनाते हैं तो शायद आपकी प्राथमिकताएं अलग हो जाती हैं। सवाल: अब जब फिल्म को दर्शकों का प्यार मिल चुका है, क्या अगले पार्ट में बड़े स्टार्स को लेने का दबाव महसूस होता है? जवाब: जरूरी नहीं। कोई सुपरस्टार अपने साथ अनुभव और क्राफ्ट जरूर लेकर आता है, लेकिन सिर्फ स्टार पावर से ‘हनुमान अंश’ नहीं चल सकती। इस फिल्म की खूबसूरती इसकी सादगी में है। हमारे कई कलाकार पहली बार फीचर फिल्म कर रहे थे। यहां तक कि हमारे कलाकारों में से एक असिस्टेंट डायरेक्टर भी हैं। इसलिए मैं उन सभी के काम और मेहनत की बहुत इज्जत करती हूं। मेरी इच्छा है कि इन कलाकारों को आगे भी काम मिले। उन्होंने अपनी क्षमता दिखाई है और उनके लिए भी यह फिल्म एक महत्वपूर्ण शुरुआत रही है। सवाल: क्या इसका मतलब है कि अगले पार्ट में मौजूदा कास्ट को बरकरार रखने की कोशिश होगी? जवाब: यह पूरी तरह कहानी पर निर्भर करेगा। कास्ट रिटेन होगी या बदलेगी, यह हमारे डायरेक्टर के विजन और कहानी की जरूरत तय करेगी। सिर्फ इसलिए किसी कलाकार को नहीं बदला जाएगा कि अब फिल्म सफल हो गई है और हमें बड़े नाम चाहिए। अगर किसी कहानी में किसी नए कलाकार की जरूरत होगी तो उसे लिया जाएगा और अगर मौजूदा कलाकार उस किरदार के लिए सही होंगे तो वे भी रहेंगे। हमारे लिए कास्टिंग का आधार कहानी है, स्टार पावर नहीं। सवाल: तीन फिल्मों की योजना के पीछे क्या सबसे बड़ा कारण यही है कि महाराज जी की कहानी का संसार बहुत विस्तृत है? जवाब: हां, यही सबसे बड़ी वजहों में से एक है। उनके जीवन और लीलाओं से जुड़ी सामग्री इतनी विस्तृत है कि उसे एक फिल्म में समेटना संभव नहीं है। इसलिए जब हमने शुरुआत की थी तभी यह महसूस हुआ था कि अगर इस कहानी को सही तरीके से कहना है तो इसे कई हिस्सों में आगे ले जाना होगा। लेकिन हर पार्ट सिर्फ पिछली फिल्म की सफलता का विस्तार नहीं होगा। कहानी की अपनी जरूरत होगी, उसका अपना संसार होगा और उसी के हिसाब से फिल्म का स्केल, बजट और कास्ट तय होगी। हमारी कोशिश यही रहेगी कि जैसे पहली फिल्म में हमने बिना फिजूलखर्ची के कहानी की आत्मा को बचाया, वैसे ही आगे भी बड़ा करने और बेहतर करने के बीच का फर्क समझते हुए काम करें।
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बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल पिता बने:गणेश चतुर्थी पर हुआ बेटे का जन्म, बोले- अभी नाम डिसाइड नहीं किया; मां-बच्चा दोनों स्वस्थ
बॉलीवुड के मशहूर सिंगर और उत्तराखंड मूल के जुबिन नौटियाल पिता बन गए हैं। उनकी पत्नी ने 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के दिन बेटे को जन्म दिया। खास बात यह है कि बेटे के जन्म की जानकारी अब सामने आई है। जुबिन ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और अस्पताल से घर लौट चुके हैं। जुबिन ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में कहा कि उनके बेटे का जन्म गणेश चतुर्थी के बेहद शुभ दिन हुआ। उन्होंने कहा, “हां, मैं अब पिता हूं। हमारे बेटे का जन्म 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के बेहद शुभ दिन हुआ। मां और बच्चा दोनों घर वापस आ गए हैं और स्वस्थ हैं।” परिवार इस समय नाम रखने की बजाय नवजात के साथ शुरुआती खूबसूरत पलों को जी रहा है। जुबिन ने कहा कि वे अपने बेटे के साथ हर पल का आनंद ले रहे हैं। बेटे का नाम अभी तय नहीं जुबिन से जब बेटे के नाम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तक उन्होंने और उनकी पत्नी ने कोई नाम तय नहीं किया है। उनका कहना है कि फिलहाल परिवार का पूरा ध्यान बच्चे के साथ समय बिताने पर है। जुबिन ने कहा कि वह इस समय अपने बेटे के साथ बिताए जा रहे हर पल को महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में काम के सिलसिले में बाहर जाना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि बेटे से दूर रहना मुश्किल लगेगा। दिसंबर में यूके टूर, बोले- बच्चे से दूर रहना मुश्किल होगा जुबिन के काम से जुड़ी व्यस्तताएं भी जारी हैं। दिसंबर में उनका यूके टूर प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें काम के लिए बाहर जाना पड़ेगा तो यह मुश्किल होगा। जुबिन के यूके टूर में 12 दिसंबर को लीसेस्टर और 13 दिसंबर को लंदन में कार्यक्रम निर्धारित हैं। लंदन का शो OVO Arena Wembley में होना है। जुबिन ने कहा कि अभी वह अपने बेटे के साथ हर मिनट बिताने का आनंद ले रहे हैं और इस समय उनके लिए यह बेहद खास अनुभव है। इस साल सामने आई थी शादी की खबर जुबिन ने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा लाइमलाइट से दूर रखा है। उनकी शादी की खबर भी इस साल अप्रैल में सामने आई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने उत्तराखंड में अपनी बचपन की दोस्त के साथ निजी समारोह में शादी की थी। शादी में करीबी परिवार के लोग ही शामिल हुए थे। शादी को लेकर भी जुबिन ने निजीपन बरकरार रखा था। बाद में तस्वीरें सामने आने के बाद उनकी शादी की खबर सार्वजनिक हुई। उनकी पत्नी के बारे में भी सार्वजनिक तौर पर बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। कई रिपोर्टों में उन्हें जुबिन की बचपन की दोस्त बताया गया है। देहरादून से निकली आवाज, बॉलीवुड में बनाई पहचान जुबिन नौटियाल उत्तराखंड के देहरादून से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने 2011 में रियलिटी शो ‘एक्स फैक्टर इंडिया’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद फिल्म ‘सोनाली केबल’ के गाने ‘एक मुलाकात’ से बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगिंग की शुरुआत की। उन्हें सलमान खान की फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ के गाने ‘जिंदगी कुछ तो बता’ से बड़े स्तर पर पहचान मिली। इसके बाद ‘तुम ही आना’, ‘काबिल हूं’, ‘लुट गए’, ‘रातां लंबियां’ और ‘तुझे कितना चाहने लगे हम’ जैसे गानों ने उन्हें हिंदी संगीत की दुनिया में खास पहचान दिलाई। बेटे की तस्वीर अभी सामने नहीं आई बेटे के जन्म की पुष्टि जुबिन ने खुद कर दी है, लेकिन उन्होंने अभी बच्चे की तस्वीर या नाम सार्वजनिक नहीं किया है। रिपोर्टों के मुताबिक जुबिन अपनी निजी जिंदगी को सोशल मीडिया और मीडिया की नजरों से दूर रखना पसंद करते हैं। फिलहाल परिवार बेटे के साथ समय बिता रहा है और नाम को लेकर भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। ———————–
ये खबर भी पढ़ें… हनुमान अंश की प्रोड्यूसर हरिद्वार के काली मंदिर पहुंचीं:स्वामी कैलाशानंद से लिया आशीर्वाद; 2 करोड़ में बनी फिल्म ने कमाए 200 करोड़ हरिद्वार में बाबा नीम करौली के जीवन और संदेश पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर अपने परिवार के साथ सिद्ध पीठ दक्षिण काली मंदिर पहुंचीं। उन्होंने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया और मंदिर में पूजा-अर्चना की। (पढ़ें पूरी खबर)
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नेशनल अवॉर्ड में तिलक लगाने पर ममूटी की आलोचना:यूजर्स बोले- मुस्लिम होकर माथे पर तिलक क्यों; एक्टर यूसुफ बोले- नफरत फैलाने वाले कुएं के मेंढक
गुजरात में आयोजित नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी के दौरान नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर ममूटी का तिलक लगाकर पारंपरिक स्वागत किया गया। मुस्लिम होकर माथे पर तिलक लगवाने को लेकर सोशल मीडिया पर ममूटी की तीखी आलोचना की जा रही है। कई यूजर्स इसे इस्लाम का अपमान और धर्म के खिलाफ बता रहे हैं। इस विवाद पर मलयालम एक्टर और फिल्ममेकर हरिश्री यूसुफ ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर ट्रोलर्स को जवाब दिया है। हरिश्री ने कहा कि तिलक लगाना अतिथियों के स्वागत की भारतीय परंपरा है और धर्म का मकसद इंसानों को बेहतर बनाना है, न कि आपस में लड़ाना। ‘माथे पर तिलक लगाना इस्लाम का अपमान’ ममूटी को हाल ही में फिल्म ‘भ्रमयुगम’ के लिए नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। गुजरात यात्रा के दौरान उनके स्वागत में माथे पर तिलक लगाया गया था। इसका वीडियो सामने आने के बाद एक्स और इंस्टाग्राम पर कुछ यूजर्स ममूटी की आलोचना करने लगे। अब्बास नाम के एक यूजर समेत कई लोगों ने लिखा कि मुस्लिम होकर माथे पर तिलक लगाना इस्लाम के खिलाफ है और इससे धर्म का अपमान हुआ है। हालांकि कई प्रशंसकों ने ममूटी का बचाव करते हुए इसे सिर्फ एक सांस्कृतिक स्वागत बताया। ‘ट्रोल करने वाले कुएं के मेंढक’ सोशल मीडिया पर हो रही बयानबाजी पर मलयालम एक्टर हरिश्री यूसुफ ने एक वीडियो जारी कर आलोचना करने वालों को करारा जवाब दिया। यूसुफ ने ट्रोलर्स को ‘कुएं का मेंढक’ बताते हुए कहा, हम कलाकार संकीर्ण सोच के नहीं होते, हमारी सोच व्यापक होती है। जब आप किसी बड़े होटल या कार्यक्रम में जाते हैं, तो मेहमानों का स्वागत गुलदस्ता देकर और माथे पर तिलक लगाकर ही किया जाता है। यह किसी धर्म का प्रचार नहीं, बल्कि भारतीय आदर की परंपरा है। उन्होंने कहा, “धर्म का असली मकसद इंसानों को आपस में लड़ाना नहीं, बल्कि उन्हें एक बेहतर इंसान बनाना है। सोशल मीडिया पर आकर किसी के खिलाफ अपशब्द बोलना और फिर उसमें धर्म को घसीटना पूरी तरह गलत है।” चार बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं ममूटी ममूटी मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता हैं। साल 2026 में उन्हें फिल्म ‘भ्रमयुगम’ में शानदार अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के नेशनल फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जिसे उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन के साथ साझा किया। इसी साल भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण से भी नवाजा है। ममूटी अब तक चार बार नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं। हाल ही में वे फिल्म ‘पैट्रियट’ में नजर आए थे और जल्द ही धनुष के साथ तमिल फिल्म ‘ओम – चैप्टर 1: उधिरम’ में दिखाई देंगे। शाहरुख-सलमान भी हो चुके आलोचना का शिकार बॉलीवुड के कई मुस्लिम अभिनेताओं को त्योहारों और धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान माथे पर तिलक लगाने या पूजा-पाठ में शामिल होने पर सोशल मीडिया पर तीखी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा है। इनमें सबसे प्रमुख उदाहरण शाहरुख खान का है, जिन्हें दिवाली और गणेश चतुर्थी के मौकों पर माथे पर तिलक लगाए तस्वीरें शेयर करने पर निशाने पर लिया जाता रहा है। साल 2018 और 2019 में अपने छोटे बेटे अबराम के साथ माथे पर तिलक लगाए फोटो पोस्ट करने पर कई यूजर्स ने उनके इस कदम को इस्लाम के खिलाफ बताते हुए कमेंट्स किए थे। इसी तरह सलमान खान को भी गणेश पूजन और पारिवारिक धार्मिक आयोजनों में माथे पर तिलक लगाने पर ट्रोल किया जाता रहा है। सारा अली और आमिर खान की भी हो चुकी ट्रोलिंग सैफ अली खान और उनकी बेटी सारा अली खान को भी ऐसी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। सारा अली खान जब भी केदारनाथ, उज्जैन के महाकाल मंदिर या काशी विश्वनाथ दर्शन के दौरान माथे पर तिलक-चंदन लगाए तस्वीरें शेयर करती हैं, तो कुछ ट्रोलर्स ने उन्हें मुस्लिम होकर तिलक लगाने पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा अभिनेता आमिर खान को भी अपनी फिल्म के ऑफिस पूजा समारोह और गृह प्रवेश के मौकों पर कलश-पूजन और माथे पर तिलक लगाने के बाद सोशल मीडिया पर धार्मिक आधार पर निशाना बनाया गया था।
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रामायण इवेंट में मीडिया ने किया साढ़े चार घंटे इंतजार:मिस्टर बीस्ट के आने में हुई देरी; रणबीर-साई पल्लवी समेत टीम पहले से मौजूद थी
रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर ‘रामायण’ के प्रचार को लेकर शनिवार को मुंबई के फिल्म सिटी स्थित प्राइम फोकस स्टूडियो में खास कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम का पहला समय दोपहर 12 बजे बताया गया था, जिसे बाद में दोपहर 1 बजे कर दिया गया। तय समय के अनुसार मीडिया कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया, लेकिन बातचीत शुरू होने में करीब साढ़े चार घंटे की देरी हुई। इस दौरान रणबीर कपूर, साई पल्लवी, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी समेत फिल्म की टीम मौजूद थी। देरी की वजह मिस्टर बीस्ट के कार्यक्रम में देर से पहुंचने को बताया गया। पहले 12 बजे था कार्यक्रम का समय मीडिया को भेजे गए निमंत्रण में शुरुआत में कार्यक्रम का समय दोपहर 12 बजे बताया गया था। बाद में समय बदलकर दोपहर 1 बजे कर दिया गया। साथ ही जानकारी दी गई थी कि बातचीत दोपहर 1:30 बजे से शुरू होगी। पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि बदले हुए समय के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए थे। हालांकि, बातचीत तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। करीब साढ़े चार घंटे करना पड़ा इंतजार कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मीडिया को बातचीत शुरू होने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान फिल्म की मुख्य टीम के कई सदस्य पहले से ही वहां मौजूद थे। रणबीर कपूर, साई पल्लवी, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी के कार्यक्रम स्थल पर समय से पहुंचने की जानकारी थी। इसके बावजूद मीडिया से बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। मिस्टर बीस्ट की वजह से हुई देरी कार्यक्रम में मिस्टर बीस्ट की मौजूदगी को लेकर पहले से काफी उत्सुकता थी। उन्हें ‘रामायण’ की टीम के साथ विशेष बातचीत में शामिल होना था। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मीडिया को बताया गया कि मिस्टर बीस्ट इससे पहले दो उड़ानें मिस कर चुके थे और उनके देर से पहुंचने के कारण कार्यक्रम में देरी हुई। उनके पहुंचने के बाद ही फिल्म की टीम के साथ तय बातचीत आगे बढ़ी। मीडिया के समय को लेकर उठे सवाल करीब साढ़े चार घंटे के इंतजार के बाद मीडिया के बीच कार्यक्रम के प्रबंधन को लेकर नाराजगी देखने को मिली। सवाल यह भी उठा कि जब रणबीर कपूर, साई पल्लवी, नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी पहले से कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे, तो उनके साथ बातचीत तय समय पर शुरू क्यों नहीं की गई। मीडिया के लिए आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों ने अपना समय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रखा था। ऐसे में लंबे इंतजार को लेकर कई मीडिया प्रतिनिधियों में असंतोष देखने को मिला। मिस्टर बीस्ट के साथ रणबीर की बातचीत मिस्टर बीस्ट के पहुंचने के बाद ‘रामायण’ की टीम के साथ उनकी विशेष बातचीत हुई। रणबीर कपूर के साथ मिस्टर बीस्ट की बातचीत के वीडियो भी सामने आए हैं। मिस्टर बीस्ट को रणबीर ने बताया राम का परिचय इवेंट के दौरान एक पैपराजी ने मिस्टर बीस्ट से ‘जय श्री राम’ कहा। मिस्टर बीस्ट जवाब देने को लेकर असमंजस में दिखे, जिसके बाद रणबीर कपूर ने उन्हें ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए कहा। मिस्टर बीस्ट ने भी रणबीर की बात दोहराई। इसके बाद रणबीर ने मिस्टर बीस्ट को भगवान राम के बारे में बताते हुए कहा कि वे राजकुमार थे और उनके पास सब कुछ था, लेकिन पिता के वचन और अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने सब त्याग दिया। रणबीर ने कहा कि भगवान राम को एक आदर्श पुरुष के रूप में जाना जाता है और उम्मीद है कि फिल्म के जरिए मिस्टर बीस्ट को भारतीय संस्कृति और इतिहास की झलक मिलेगी। इवेंट में रणबीर ने उठाया शिव धनुष कार्यक्रम में रणबीर कपूर शिव धनुष उठाते हुए भी नजर आए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया। इवेंट में रणबीर के साथ साई पल्लवी, रवि दुबे, नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा भी मौजूद रहे। मिस्टर बीस्ट की मौजूदगी को फिल्म के अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए निर्माताओं की कोशिश ‘रामायण’ को भारतीय दर्शकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की है। ‘रामायण’ में राम बने हैं रणबीर कपूर नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। साई पल्लवी माता सीता और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म में यश रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका में हैं। फिल्म को दो हिस्सों में रिलीज किया जाएगा। वैश्विक प्रचार पर निर्माताओं का जोर निर्माता नमित मल्होत्रा की फिल्म ‘रामायण’ को बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने की तैयारी है। मिस्टर बीस्ट के साथ यह विशेष कार्यक्रम भी इसी वैश्विक प्रचार अभियान का हिस्सा है।
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कृति सेन ने पितृसत्ता पर उठाए सवाल:कहा- कब तक पूछेंगे कि लड़की ने क्या पहना, आदमियों को क्यों नहीं सिखाते कि शोषण, जबरदस्ती न करें
रक्षाबंधन से जुड़े एड में पहनावे के चलते विवादों में रहीं कृति सेनन ने अब देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे छेड़छाड़, रेप और शोषण के मामलों में पितृसत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये लड़ाई आदमियों और औरतों के बीच नहीं बल्कि उन औरतों के साथ भी है, जो पितृसत्ता को ही संस्कार मानती हैं। कृति सेनन ने बिना किसी घटना का जिक्र किए आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, यह लड़ाई पुरुषों और महिलाओं के बीच नहीं है। यह महिलाओं और पितृसत्तात्मक सोच के बीच की लड़ाई है। उन पुरुषों के खिलाफ, जो महिलाओं को कमतर समझते हैं और उन महिलाओं के खिलाफ भी, जो पितृसत्ता को ही संस्कार मान बैठी हैं। आगे कृति ने लिखा, ‘आखिर कब तक महिलाओं को ही यह सिखाया जाता रहेगा कि वे खुद को यौन हिंसा से कैसे बचाएं? पुरुषों को यह क्यों नहीं सिखाया जाता कि वे महिलाओं के साथ छेड़छाड़, यौन शोषण और जबरदस्ती न करें?’ ‘जब किसी नाबालिग के साथ बलात्कार होता है, तो सवाल यह क्यों नहीं पूछा जाता कि ऐसा करने वाला इंसान किस तरह की सोच रखता है? इसके बजाय आज भी लोग यही पूछते हैं कि लड़की ने क्या पहना था, वह कहां थी, किसके साथ थी, बाहर क्यों गई थी और उसके परिवार ने उसे ऐसा करने की इजाजत क्यों दी?’ इसके अलावा कृति ने लिखा, ‘महिलाओं को हर बार यह समझाना बंद कीजिए कि वे खुद को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा सावधान रहें। जरूरत पुरुषों को यह सिखाने की है कि वे महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आएं और अपनी मर्यादा में रहें। लड़कों को सहमति और सम्मान का मतलब सिखाइए। उन्हें अपने व्यवहार की जिम्मेदारी लेना सिखाइए। जो पुरुष गलत व्यवहार करते हैं, उनकी गलती का बोझ महिलाओं पर डालना बंद कीजिए।’ आएशा खान बोलीं- ये देखकर घिन आती है धुरंधर के गाने शरारत में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस ने भी कुछ समय पहले जमुई में लड़की के साथ हुई बर्बरता पर लिखा था, बिहार में जो हुआ, उसे देखकर मुझे सच में घिन आती है। सोचिए, जब लोग आपको घेरकर खड़े हों, आप डरे हुए हों, अपमानित महसूस कर रहे हों और लोग आपकी मदद करने के बजाय खड़े होकर आपका वीडियो बना रहे हों। इसे नैतिकता का नाम देना बंद कीजिए। उत्पीड़न को संस्कृति की आड़ में छिपाना बंद कीजिए। यह बेहद शर्मनाक और घिनौना है। दिशा पाटनी की बहन खुशबू बोलीं- कोई साथ घूमे तो आपत्ति क्यों खुशबू पाटनी ने 22 सितंबर को एक वीडियो शेयर कर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। खुशबू ने सवाल उठाया कि अगर कोई लड़का और लड़की अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं, साथ घूमना चाहते हैं या दोस्त बनना चाहते हैं, तो लोगों को इससे आपत्ति क्यों होनी चाहिए? जमुई केस के बारे में पढ़िए- 19 सितंबर को जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में 14 साल की छात्रा के साथ सड़क पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया गया था। इसका वीडियो 21 सितंबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो की जानकारी 21 सितंबर को मिली, जिसके बाद पीड़िता की पहचान कर केस दर्ज किया गया। इसके लिए SIT बनाई गई। वीडियो में दिख रहे तीन नाबालिगों को पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपियों के रूप में बताए जा रहे हरेराम यादव और नंदन यादव का 22 सितंबर को एनकाउंटर किया गया। एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने बताया कि छेड़खानी मामले में तीन नाबालिगों को पकड़ा गया है जबकि वीडियो वायरल करने के आरोप में रामाशीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। पटना के मुख्य आरोपी नंदन यादव (लाल गमछा) और हरे राम यादव अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चल रहे वीडियो को टेकडाउन कराया गया है। आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने को लेकर दो दर्जन से अधिक लोगों, ट्विटर हैंडलर, फेसबुक और इंस्टाग्राम को चिन्हित किया गया है। वीडियो प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ भी POSCO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
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रीति तिवारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर भड़के सलमान:बोले- किसी का अपमान करने की भी एक सीमा होनी चाहिए; आपको इस पर गर्व क्यों है
सलमान खान ने रीति तिवारी को उदिति सिंह और काजी तौकीर के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर फटकार लगाई। बिग बॉस 20 के इस हफ्ते के वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान ने रीति से पूछा कि वह अपनी बातों पर गर्व क्यों कर रही हैं और कहा कि किसी का अपमान करने की भी एक लिमिट होनी चाहिए। दरअसल, हाल ही में एक डिस बैटल के दौरान रीति तिवारी ने उदिति सिंह और काजी तौकीर को लेकर टिप्पणी की थी। टास्क खत्म होने के बाद भी रीति अपने बयान पर कायम रहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने किए पर गर्व है और उन्हें भरोसा है कि उनके पिता भी उन पर गर्व करेंगे। सलमान ने पूछा- इस पर गर्व क्यों कर रही हैं? आने वाले वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान खान रीति के व्यवहार पर सवाल करते नजर आएंगे। सलमान ने कहा कि रीति काजी से जलती हैं और असुरक्षित महसूस करती हैं। इस पर रीति ने कहा कि वह काजी से नहीं जलतीं, बल्कि उन्हें एक व्यक्ति के तौर पर पसंद नहीं करतीं। इसके बाद सलमान ने टास्क के दौरान उदिति और काजी के खिलाफ की गई रीति की टिप्पणियों पर बात की। उन्होंने कहा, “डिस को भूल जाइए, मुझे समझ नहीं आता कि आपको इस पर गर्व क्यों है, लेकिन मुझे लगता है कि यह अब तक का सबसे खराब डिस था। किसी का अपमान करने की भी एक सीमा होनी चाहिए।” रीति ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा वह कहने का नहीं था, जो उन्होंने डिस के दौरान कहा। इस पर सलमान ने सवाल किया कि अगर उन्हें अपनी बात का मतलब ही नहीं पता था, तो उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की। सलमान ने बाकी घरवालों से भी सवाल किया सलमान ने घर के दूसरे सदस्यों से भी पूछा कि जब रीति लगातार ऐसी बातें कर रही थीं, तब किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने कहा, “क्या आपको नहीं लगा कि अपनी बातों से वह डिसरिस्पेक्ट की सीमा पार कर रही थीं? ये आपको चढ़ा रहे थे और ये चढ़ रही थीं।” सलमान ने आसिफ से भी इस मामले में सवाल किया। आसिफ ने रीति का समर्थन किया था, जब वह उदिति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रही थीं। सलमान ने पूछा कि उन्होंने रीति को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने आसिफ से यह भी सवाल किया कि अगर यही डिस उनकी बहन को लेकर किया गया होता, तो क्या वह ऐसे शब्दों को बर्दाश्त करते। आखिर क्या था मामला? मामला बिग बॉस 20 के एक टास्क से शुरू हुआ। घर में दो टीमों के बीच एक-दूसरे को ‘डिस’ करने का टास्क रखा गया था। पहले रीति का मुकाबला उदिति सिंह से होना था। उदिति के इनकार के बाद काजी तौकीर सामने आए। टास्क के दौरान रीति ने उदिति और काजी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उनकी कुछ बातें शो के एडिट में म्यूट करनी पड़ीं। इसको लेकर घर में बहस भी हुई। रीति ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने ये शब्द सिर्फ राइमिंग के लिए इस्तेमाल किए थे। उन्होंने इन्हें स्लैंग बताया। मामला यहीं नहीं रुका। एक दूसरे टास्क के दौरान रीति ने काजी को धमकी भी दी। उन्होंने कहा, “अगर मेरे बाप आपको यह सब करते हुए देख लेते, तो आपको पता नहीं है आपका क्या हाल होता।” रीति ने काजी से यह भी कहा, “तेरा म्यूट बटन दबा दूंगी मैं। कौन है तू, तू किससे बात कर रहा है? तेरे बाप की नौकर हूं? कौन हूं मैं, तू कौन है? मुझसे बात मत करना और मेरी तरफ देखना भी मत।” शो में शामिल हो सकते हैं मनोज तिवारी इस बीच रीति के पिता और अभिनेता-राजनेता मनोज तिवारी के भी बिग बॉस 20 के वीकेंड का वार में पहुंचने की खबर है। इंडिया फोरम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मनोज तिवारी शो में अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर उनसे बात कर सकते हैं। इससे पहले पैपराजी से बातचीत में मनोज तिवारी से पूछा गया था कि क्या वह बिग बॉस 20 में अपनी बेटी का सफर देख रहे हैं। उन्होंने रीति के गेम को लेकर कहा था, “डर-डर के देखता हूं।” इससे पहले ‘बिग बॉस 20’ के प्रीमियर के एपिसोड में मनोज तिवारी नजर आए थे। वह रीति तिवारी को शो में छोड़ने पहुंचे थे। मनोज तिवारी गाना गाते हुए स्टेज पर पहुंचे थे। सलमान खान ने उन्हें दोबारा शो में आने को लेकर मजाक किया था। इस पर मनोज ने बताया था कि वह खुद कंटेस्टेंट बनने नहीं, बल्कि बेटी को शो में छोड़ने आए हैं। प्रीमियर के दौरान रीति को सलमान ने घर के अंदर होने वाले झगड़ों को लेकर सलाह दी थी। उन्होंने मजाक में कहा था कि अंडों को लेकर लड़ाई मत करना। इसके बाद सलमान ने कहा था, “ऐ बाप पे मत जाना।”
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जयपुर- फिल्म 'करण अर्जुन’ के गाने पर नाचीं ममता कुलकर्णी:कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ किया डांस, बोलीं- डांस और एक्टिंग मनोरंजन नहीं साधना है
एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जयपुर में अपने फेमस गाने पर डांस करती दिखीं। खास बात यह रही कि ममता ने सिर्फ मंच पर प्रस्तुति नहीं दी, बल्कि स्टूडेंंट्स के बीच जाकर उनके साथ भी कदम मिलाए। महारानी कॉलेज की छात्राओं के साथ उन्होंने अपने लोकप्रिय गानों पर डांस किया और कुछ गीत गाकर भी सुनाए। ममता कुलकर्णी राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के तहत शुक्रवार को मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में आयोजित आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट 2026 और इंटर स्कूल-कॉलेज डांस कॉम्पिटिशन के फिनाले में पहुंची थीं। इस दौरान ममता कुलकर्णी ने फिल्म करण अर्जुन के गाने भंगडा पाले, ‘घातक’ के ‘कोई जाए तो ले आए’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ के ‘एक मुंडा मेरी उम्र का’ और ‘लंबा-लंबा घूंघट काहे को डाला’ जैसे गीतों पर डांस किया। इस दौरान स्टूडेंट्स भी उनके साथ शामिल हो गए। ममता ने अपने पुराने फिल्मी अंदाज की झलक दिखाते हुए गीतों की धुन पर डांस किया तो ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। यहां देखिए इवेंट के फोटोज…
स्टूडेंट्स से बोलीं- डांस और एक्टिंग को साधना की तरह करें ममता कुलकर्णी ने स्टूडेंट्स से बातचीत करते हुए कहा कि डांस हो या एक्टिंग, इसे केवल मनोरंजन नहीं बल्कि साधना की तरह करना चाहिए। जब तक किसी कला में परफेक्शन नहीं आता, तब तक उसे स्टेज पर पेश करने से बचना चाहिए। उन्होंने स्टूडेंट्स को जिंदगी को लेकर भी एक दिलचस्प सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो करना है, उसे आज की सोच के साथ करें। ममता ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई नए कपड़े लेकर आया है और सोच रहा है कि उन्हें किसी खास दिन पहनेगा तो उस दिन का इंतजार करने के बजाय कपड़े उसी दिन पहन लेने चाहिए, जिस दिन वे खरीदे हैं। सोशल मीडिया क्रिएटर्स को मिला सम्मान कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाने वाले क्रिएटर्स को आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। आरएफएफ की फाउंडर डायरेक्टर संजना शर्मा ने बताया- नेहा एंड अंशु को बेस्ट फूड इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर, सोमी शर्मा को इमर्जिंग डांस स्टार ऑफ द ईयर, निधि नरवाल को पोएट्री आइकन ऑफ द ईयर और विजय को फादर-डॉटर डिजिटल डुओ ऑफ द ईयर का सम्मान दिया गया। इसी क्रम में ब्यूटीफुल गुलाबी नगरी की अनिशा जैन को सिटी इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर, प्रवीण प्रजापत को यूथ आइकन इन राजस्थानी फोक आर्ट्स, एडवोकेट अमृता वर्मा को लीगल अवेयरनेस क्रिएटर ऑफ द ईयर, द वाइज स्टोरीज की युवरागी राठौड़ को रीजनल स्टोरीटेलर ऑफ द ईयर और चारू असोपा को व्लॉगर ऑफ द ईयर की कैटेगरी में सम्मानित किया गया। प्रोग्रामिंग हेड अनिल जैन ने बताया कि सोशल मीडिया क्रिएटर्स की कैटेगरी उनके कंटेंट और डिजिटल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तय की गई थीं। कार्यक्रम में खान-पान, कविता, डांस, राजस्थानी लोक कला, कानूनी जागरूकता और क्षेत्रीय कहानियों जैसे अलग-अलग विषयों पर काम करने वाले क्रिएटर्स को मंच मिला। 14 प्रस्तुतियों में दिखी विद्यार्थियों की क्रिएटिविटी इंटर स्कूल-कॉलेज कॉम्पीटिशन के फिनाले में जयपुर के तीन कॉलेज और 11 स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के तहत जयपुर के स्कूल-कॉलेजों में अब तक करीब 100 गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। फिनाले के लिए चयनित विद्यार्थियों ने सामाजिक सरोकार, संस्कृति, कला और रचनात्मकता से जुड़ी अलग-अलग थीम पर कुल 14 प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को रचनात्मक अंदाज में मंच पर पेश किया। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों की ऊर्जा और उत्साह भी देखने को मिला। प्रतियोगिता में महारानी कॉलेज की टीम विजेता रही। विजेता टीम को 25 हजार रुपए और ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं कनोडिया कॉलेज की टीम दूसरे स्थान पर रही, जिसे 5 हजार रुपए और ट्रॉफी दी गई। विजेताओं को ममता कुलकर्णी और अतिथियों ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में आरएफएफ की फाउंडर डायरेक्टर संजना शर्मा और राजस्व, उपनिवेशन एवं सैनिक कल्याण विभाग के राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी सहित आयोजन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।
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अल्लू अर्जुन की फिल्म 'राका' ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड:37 लोगों का एक साथ रियल-टाइम मोशन कैप्चर किया; 92 कैमरों का किया गया इस्तेमाल
साउथ एक्टर अल्लू अर्जुन और डायरेक्टर एटली की फिल्म ‘राका’ ने रिलीज से पहले ही बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। फिल्म ने ‘मोस्ट पीपल मोशन-कैप्चर्ड इन रियल-टाइम’ के लिए आधिकारिक तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया है। एक सिंगल सेशन के दौरान एक साथ 37 कलाकारों के मोशन को रियल-टाइम में ट्रैक और कैप्चर किया गया। इस रिकॉर्ड प्रक्रिया में 4 साल के बच्चे से लेकर 70 साल के बुजुर्ग कलाकार तक शामिल थे। इस बड़े पैमाने के सेटअप को तैयार करने के लिए मेकर्स ने लॉस एंजिल्स से आधुनिक तकनीक और उपकरण मंगवाकर भारत में अपना बेस तैयार किया था। 92 मोशन कैप्चर कैमरों का किया गया इस्तेमाल फिल्म के मोशन कैप्चर सेशन को पूरा करने के लिए 92 ऑप्टिकल मोशन-कैप्चर कैमरों का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही रियल-टाइम अनरियल विजुअलाइजेशन, फेसियल कैप्चर और एडवांस नेटवर्क सिस्टम को एक साथ सिंक किया गया था। सन पिक्चर्स के वीडियो में मोशन कैप्चर टेक्निकल डायरेक्टर ब्रायन रौश ने बताया कि लोग समझते हैं कि सिर्फ एक बटन दबाने से एनीमेशन मिल जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। वहीं सिनेमैटोग्राफर जीके विष्णु ने बताया कि फिल्म में कई मोशन-कैप्चर कैरेक्टर हैं, जिनके बीच आपस में काफी एक्शन और इंटरेक्शन देखने को मिलेगा। लॉस एंजिल्स से मंगाए गए आधुनिक उपकरण डायरेक्टर एटली ने बताया कि भारत में मोशन-कैप्चर स्टेशन मौजूद थे, लेकिन ‘राका’ के बड़े विजन के लिए ज्यादा कैपेसिटी वाले सेटअप की जरूरत थी। इसके लिए उन्होंने सन पिक्चर्स के प्रोड्यूसर कलानिधि मारन से बात की। प्रोड्यूसर की मंजूरी मिलने के बाद लॉस एंजिल्स से सभी जरूरी उपकरण भारत मंगाए गए और एक नया बेस स्थापित किया गया। इसके बाद फिल्म के VFX प्रोड्यूसर ने ‘राका’ की जरूरतों के हिसाब से एक नया मोशन-कैप्चर पाइपलाइन और वर्कफ्लो तैयार किया। अल्लू अर्जुन बोले- विजन को हकीकत में बदलना बड़ी बात इस उपलब्धि पर अल्लू अर्जुन ने कहा कि कई लोगों के पास विचार और विजन होता है, लेकिन उसे इस स्तर की क्वालिटी के साथ पूरा करना बड़ी बात है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय डायरेक्टर एटली, पूरी टेक्निकल टीम और इतने बड़े प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने के लिए सन पिक्चर्स को दिया। फिल्म में 4 रोल निभा सकते हैं अल्लू अर्जुन ‘राका’ एक बड़े बजट की साइंस-फिक्शन एक्शन ड्रामा फिल्म है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में अल्लू अर्जुन चार अलग-अलग किरदार निभाते नजर आ सकते हैं, जिनमें दादा, पिता और दो बेटों का रोल शामिल है। चर्चा यह भी है कि फिल्म की कहानी पैरेलल यूनिवर्स के कॉन्सेप्ट पर आधारित हो सकती है, हालांकि मेकर्स ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फिल्म में दीपिका पादुकोण, रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर और मृणाल ठाकुर मुख्य भूमिकाओं में हैं। अल्लू अर्जुन और एटली पहली बार किसी प्रोजेक्ट में एक साथ काम कर रहे हैं।
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