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  • Sanjay Dutt Jail Memories | Sunil Dutt Emotional Statement Shekhar Suman

    Sanjay Dutt Jail Memories | Sunil Dutt Emotional Statement Shekhar Suman


    14 घंटे पहले

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    संजय दत्त ने हाल हीमें शेखर सुमन के शो शेखर टुनाइट में जेल के दिनों को याद करते हुए बताया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके पिता सुनील दत्त के सामने उन्हें हथकड़ी पहनाई गई थी। उस समय उनके पिता की आंखों में आंसू आ गए थे।

    संजय दत्त को 1993 में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें गैर-कानूनी तरीके से हथियार रखने के आरोप में जेल की सजा हुई थी। बाद में वे आतंकवाद के आरोपों से बरी हो गए, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराए गए और कई बार जेल गए।

    शेखर सुमन के टॉक शो में संजय दत्त ने बताया कि जेल अधिकारियों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की थी। शेखर सुमन ने दर्शकों से कहा, ‘संजय दत्त को ‘अंडा सेल’ में रखा गया था, फिर भी उन्होंने अपना मानसिक संतुलन बनाए रखा।’ इसके बाद उन्होंने संजय से पूछा, ‘क्या कभी ऐसी स्थितियों में आपको अपनी जान देने का ख्याल आया?’

    संजय दत्त ने जवाब दिया, ‘कभी नहीं।’ इसके बाद उन्होंने संजय से पूछा, ‘वह कौन-सा पल था, जब आपने खुद को सबसे कमजोर महसूस किया?’ संजय ने कहा, ‘मुझे पता था कि मेरे पिता और परिवार ने बहुत मुश्किल हालात का सामना किया है। लेकिन मैंने कभी खुद को कमजोर महसूस नहीं किया।’

    आगे उन्होंने कहा, ‘जब पुलिस पहली बार आई और मुझे हथकड़ी पहनाई, तो मेरे पिता सदमे में आ गए। उनकी आंखों में आंसू थे। उन्होंने कहा, “तुम मेरे बेटे के साथ क्या कर रहे हो?”’

    संजय ने बताया, ‘मैंने उन्हें कसकर गले लगाया और कहा, “आप इन हथकड़ियों से परेशान क्यों हो रहे हैं? ऐसा मत कीजिए। यह बस एक प्रक्रिया है, प्लीज परेशान न हों।”, जबकि असल में, यह मुझे अंदर ही अंदर तोड़ रहा था। लेकिन मुझे उनके लिए मजबूत बने रहना था।’

    संजय दत्त ने कहा कि स्टारडम और सुविधाओं के बावजूद उन्होंने खुद को कभी दूसरों से बेहतर नहीं समझा।

    उन्होंने कहा, ‘देखिए, इतने सालों में भी मुझमें अपने स्टारडम को लेकर कभी कोई घमंड नहीं आया। मुझमें ऐसी कोई बात नहीं है।’

    सिगरेट नहीं मिली तो बीड़ी मांगी

    संजय दत्त के मुताबिक, जेल अधिकारियों को लगता था कि उनकी सेलिब्रिटी वाली सुख-सुविधाएं छीनने से वे टूट जाएंगे।

    संजय ने बताया कि अधिकारियों ने उनका मजाक उड़ाया। उनमें से एक उनके पास आया और बोला, ‘तुम्हें यहां सिगरेट नहीं मिलेगी। अब क्या करोगे?’ एक्टर ने कहा, “सर, यहां बीड़ी तो मिल जाएगी।”’

    जानिए संजय दत्त केस की पूरी डीटेल-

    12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए। अलग-अलग जगहों पर हुए इन धमाकों में 257 लोगों की मौत और 713 लोग घायल हुए थे। जांच में हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का पता चला। इसी जांच के दौरान अभिनेता संजय दत्त का नाम सामने आया। वह इस मामले में आरोपी नंबर 117 बनाए गए।

    सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, 16 जनवरी 1993 को तीन AK-56 राइफलें, 250 राउंड गोलियां और कुछ हैंड ग्रेनेड उनके घर लाए गए थे। बाद में इनमें से दो राइफलें और कुछ गोला-बारूद वहां से ले जाए गए। जांच में संजय के घर से AK-56 राइफल, 9mm पिस्तौल बरामद की गई।

    12 मार्च को हुए धमाकों के समय संजय दत्त मॉरीशस में एक फिल्म शूट कर रहे थे। करीब एक महीने बाद, 19 अप्रैल 1993 को संजय दत्त मुंबई लौटे। मुंबई क्राइम ब्रांच ने एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया। उन पर अवैध रूप से रखने का आरोप था।

    गिरफ्तारी के बाद संजय दत्त ने पुलिस के सामने हथियार रखने की बात स्वीकार की थी। रिकॉर्ड के अनुसार 28 अप्रैल 1993 को उन्होंने पुलिस के सामने बयान दिया, जो बाद में उन्होंने वापस ले लिया। 5 मई 1993 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी।

    जुलाई 1994 में ट्रायल कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर दी और 4 जुलाई 1994 को उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्होंने करीब 16 महीने जेल में बिताए।

    अक्टूबर 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी। उस समय तक वह लगभग 18 महीने जेल में रह चुके थे।

    करीब 13 साल तक चली सुनवाई के बाद नवंबर 2006 में TADA कोर्ट ने संजय दत्त को आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया। लेकिन उन्हें TADA के तहत आतंकवादी साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया। यानी अदालत ने यह नहीं माना कि वह 1993 के मुंबई धमाकों की साजिश का हिस्सा थे। 2007 में उन्हें 6 साल की सजा सुनाई गई।

    21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी आर्म्स एक्ट वाली सजा को बरकरार रखा, लेकिन सजा को 6 साल से घटाकर 5 साल कर दिया। चूंकि संजय दत्त पहले ही लगभग 18 महीने जेल में रह चुके थे, उन्हें बाकी अवधि जेल में बितानी थी।

    इसके बाद उन्होंने 16 मई 2013 को सरेंडर किया और पुणे की यरवडा जेल भेजे गए। फरवरी 2016 में अच्छे व्यवहार आदि के आधार पर उनकी सजा पूरी होने से कुछ महीने पहले रिहाई हुई।



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  • Sanjay Mishra Wins First National Award for Bhakshak

    Sanjay Mishra Wins First National Award for Bhakshak


    12 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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    नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी मंगलवार को गुजरात में हुई है।

    सीनियर एक्टर संजय मिश्रा को फिल्म भक्षक के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। पिछले 35 सालों से टीवी और फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहे संजय मिश्रा का ये पहला नेशनल अवॉर्ड है। जब उनसे पूछा गया कि वो अवॉर्ड में किसका नाम लिखवाना चाहते हैं, तो उन्होंने पिता शंभूनाथ मिश्रा का नाम लिखवाया। संजय ने ये भी बताया है कि जब उन्होंने मां को नेशनल अवॉर्ज जीतने की जानकारी दी, तो उनका पहला सवाल था- ‘खाना खाया कि नहीं?’

    वहीं मैदान के गाने जाने दो के लिए बेस्ट लिरिक्स का अवॉर्ड जीतने वाले मनोज मुंतशिर ने कहा कि जिस समय ये गाना बन रहा था, तब ही ए.आर.रहमान ने कहा था कि इसे नेशनल अवॉर्ड मिलेगा।

    दैनिक भास्कर से बातचीत में संजय मिश्रा, मनोज मुंतशिर, कार्तिक आर्यन समेत कई नेशनल अवॉर्ड विजेताओं ने इस पर भावुक बातें कही हैं। पढिए इंटरव्यू-

    फिल्म भक्षक के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड जीतने पर संजय ने कहा, ‘सबसे पहले में शुक्रिया कहूंगा, डायरेक्टर का जिसने मुझे ऐसी फिल्म में कास्ट किया। इसके बाद शुक्रिया करूंगा रेड चिल्लीज का, जो ऐसी फिल्में प्रमोट करता है और फिर शुक्रिया करूंगा भूमि पेडनेकर का, भूमि के साथ जो भी काम करता हूं अच्छा निकलकर आता है। बड़ा मजा आता है। दम लगा के हइशा, बड़ी तारीफ मिली थी और अब ये दूसरी फिल्म। उसके बाद ये स्क्रिप्ट। बहुत असल कहानी थी। कलाकारों को मुंह से नहीं काम से बोलना चाहिए। मुझे लगता है मैंने जिम्मेदारी निभाई।’

    जब उनसे पूछा गया कि आप अपना अवॉर्ड किसे डेडिकेट करेंगे। संजय मिश्रा ने भावुक अंदाज में कहा, ‘मुझसे पूछा गया था कि अवॉर्ड में किसका नाम लिखना चाहेंगे। मैंने अपने पिता का नाम संजय शंभूनाथ मिश्रा लिखवाया। सबसे अहम कि इसमें इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट्री है, जिसने हमें पाला, पापा जी की तनख्वाह वहीं से आती थी। पीआईबी है, जिसमें भी पापा ने काम किया।’

    संजय मिश्रा से जब पूछा कि इस पर मां का रिएक्शन कैसा था, उन्होंने मां की नकल उतारते हुए जवाब दिया और उनका जवाब बताया, जो था- ‘बेटा बहुत बढ़िया, लेकिन तुम खाना खा लिए हो, बहुत देर प्रोग्राम चला है, कुछ खाना खिलाया उन लोगों ने। पापा होते तो बढ़िया होता।’

    सेरेमनी में संजय मिश्रा पत्नी के साथ पहुंचे। इस पर उन्होंने कहा- ‘अब घर में थोड़ी इज्जत बढ़ जाएगी, वर्ना हम पति किस काम के।’

    मनोज मुंतशिर बोले- ए.आर.रहमान सर ने पहले ही कहा था इस गाने को नेशनल अवॉर्ड मिलेगा

    हिंदी फिल्म ‘मैदान’ के गाने ‘जाने दो’ के लिए मनोज मुंतशिर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट लिरिक्स का पुरस्कार मिला। इस पर उन्होंने कहा, ये गाना हमने चेन्नई में ए.आर.रहमान सर के स्टूडियो में बनाया था। रात में तकरीबन 3 बजे सर ने ट्यून दी। ट्यून ऐसी कि आंखे भर आएं। छत पर एक झूला था, उस पर बैठकर मैंने 2 लाइनें लिखीं- ये आवाजों के धागे खोले और तराने गाने दो, मैदानों में धूम न कम हो, जाते हैं हम जाने दो। मैं नीचे उतरा, मैंने रहमान सर को सुनाया और रहमान सर, बोनी कपूर जी हमारे डायरेक्टर अमित शर्मा सब लोग थे। मेरे मुंह से ये दो लाइनें निकलते ही, रहमान सर ने कहा- मनोज जी, ये नेशनल अवॉर्ड है। देखिए क्या संयोग था। उस वक्त मैं मुस्कुरा कर रह गया। लेकिन कभी सोचा नहीं था कि ये असल में होगा।’

    आगे उन्होंने कहा, ‘दैनिक भास्कर के जो मेरे दर्शक और पाठक हैं उनसे मैं कहना चाहूंगा कि जो भी उम्मीदें आपने मुझ से लगाई हैं, उन्हें टूटने नहीं दूंगा। अपने हिस्से की गलतियां मैं कर चुका हूं। इसके बाद मैं प्रतिज्ञाबद्ध हूं कि आपकी उम्मीदों से खिलवाड़ नहीं होने दूंगा।’

    पूछा गया कि अवॉर्ड किसे डेडिकेट करेंगे, जवाब मिला, ‘मैंने ये अवॉर्ड अपनी पत्नी नीलम मुंतशिर को डेडिकेट किया है। जब पहला अवॉर्ड मिला, तो बड़ा जलवा था, बड़ा नाम था, लेकिन पहले और दूसरे अवॉर्ड के बीच कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिसमें नीलम का एक साथी के तौर पर नीलम का मेरे साथ खड़ा होना, मुझे अंदर तक कश कर गया। मुझे लगा कि हमारी जो सबसे प्रिय दोस्त होती है वो पत्नी होती है।’

    विजय गांगुली को आज की रात गाने के लिए अवॉर्ड

    हिंदी फिल्म ‘स्त्री 2’ के गाने ‘आज की रात’ के लिए विजय गांगुली को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कोरियोग्राफी का पुरस्कार मिला। गाने में तमन्ना भाटिया नजर आई थीं। अवॉर्ड मिलने के बाद विजय गांगुली ने कहा- ‘मैं नम हूं, अभी तक समझ नहीं आ रहा कि ये अवॉर्ड मेरे हाथ में है। इसे समझने में 2-3 दिन लगेंगे। मैंने अभी-अभी तमन्ना को मैसेज किया कि इस अवॉर्ड का क्रेडिट आपको जाता है। अगर आप वो स्टेप नहीं कर पातीं, जो सिखाया गया, तो शायद हम यहां तक नहीं पहुंचते। जब मैं छोटे बच्चों के डांस करते हुए वीडियो देखे, तो बहुत खुशी हुई। ये एक आर्टिस्ट के लिए सपने जैसा है।’

    कार्तिक आर्यन बोले- ये फीलिंग अनरियल है

    कार्तिक आर्यन को फिल्म चंदू चैंपियन के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। ये उनके करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड है। सेरेमनी खत्म होने के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा, मैं बहुत खुश हूं, पूरी फैमिली के साथ हूं, बहुत इमोशनल मूमेंट है। अनरियल फीलिंग है, एक्सप्रेस नहीं कर पा रहा हूं।

    आदित्य धर बोले- इंडिया को अवॉर्ड डेडिकेट करूंगा

    आदित्य धर की फिल्म आर्टिकल 370 को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस पर उन्होंने कहा, ‘ये अवॉर्ड इंडिया को डेडिकेट करूंगा। मुझे लगता है कि ऐसी फिल्में देश को ऊपर उठाती हैं, लोग कुछ भी कहें लेकिन ये फिल्म देश को रिप्रेजेंट करती है।’

    शाश्वत सचदेव को दूसरा नेशनल अवॉर्ड

    हिंदी फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए शाश्वत सचदेव को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (सॉन्ग्स) का पुरस्कार मिला। इससे पहले उन्हें फिल्म ऊरीः द सर्जिकल स्ट्राइक के लिए बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का भी अवॉर्ड मिल चुका है।

    दूसरी बार नेशनल अवॉर्ड हासिल कर उन्होंने कहा, ‘मैं ये फील कर रहा हूं कि एक राजस्थान का लड़का है, जो मिडिल क्लास परिवार में बड़ा हुआ, उसे आप लोगों ने इतना आशीर्वाद दिया कि वो आज यहां है। मैं ये अवॉर्ड अपने पेरेंट्स और पत्नी को डेडिकेट कर रहा हूं।’

    अतुल गंगवार बोले- ये फीलिंग शब्दों में बयां करना मुश्किल

    दिवंगत शायर निदा फाजली के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट आर्ट्स एंड कल्चर फिल्म’ का पुरस्कार मिला है। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माता अतुल गंगवार पिछले करीब ढाई दशक तक निदा फाजली के बेहद करीब रहे। अवॉर्ड हासिल कर उन्होंने कहा- ‘फीलिंग को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। सिनेमा के सबसे बड़े योगदान में से एक ये अवॉर्ड हासिल कर किसे अच्छा नहीं लगेगा।’

    आगे उन्होंने कहा, ‘निदा साहब ने ग्वालियर, मध्यप्रदेश का नाम हमेशा रोशन किया, जब उनका निधन हुआ, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में उनका गीत पढ़ा। उन्होंने एक लाइन पर जोर देकर कहा- यहां कोई किसी को रास्ता नहीं देता, अगर मुझे गिराकर तुम चल सको, तो चले। जब प्रधानमंत्री उनकी लेखनी पढ़ते हैं, तो उनकी ऊंचाइयों का पता चलता है।’

    आनंद एल. राय को हिंदी नॉन-फीचर फिल्म ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ के लिए बेस्ट डायरेक्शन का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं जब अपनों के बीच होता हूं तो अच्छा ही लगता है, लेकिन इतना बड़ा अवॉर्ड मिलना, ये सौभाग्य खुशी दे रहा है। मैं फीचर फिल्म बनाता रहा, एक बार मौका मिला डॉक्यूमेंट्री बनाने का, वो भी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, सरदार वल्लभ भाई पटेल पर। उनके बारे में जितना पता था, उससे 10 गुना ज्यादा समझा।’

    आगे उन्होंने कहा, ‘ये समझ आया कि इस उम्र में भी सीखना बंद नहीं होता। इस डॉक्यूमेंट्री ने अवॉर्ड तो दिया, लेकिन इसने मुझे बहुत कुछ सिखाया। अक्षय ने ही मुझसे पूछा था कि क्या आप ऐसी डॉक्यूमेंट्री करना चाहोगे, मैंने इस पर रिसर्च की, हम साथ बैठे और इस पर काम किया। हम गुजरात भी आए थे। मैं ये अवॉर्ड अपने देश को डेडिकेट करना चाहूंगा।’

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    नेशनल फिल्म अवॉर्ड में कार्तिक-यामी बेस्ट एक्टर-एक्ट्रेस:KGF अभिनेता को दादासाहेब फाल्के; 72 साल में अवॉर्ड्स 7 से बढ़कर 45 हुए

    कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिया गया। यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया।

    सेरेमनी गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में मंगलवार को हुई। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को हुई थी।

    ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म और ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला। तमिल स्टार धनुष को दो कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड दिया गया। पूरी खबर पढ़िए… नेशनल अवॉर्ड जीतकर भावुक कार्तिक आर्यन:कहा- ऐसे माहौल में एक्टर बनने का सपना देखा, जहां लोग हंसते हैं; छोटे शहर के लड़के का सपना पूरा हुआ

    कार्तिक आर्यन को फिल्म चंदू चैंपियन के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड दिया गया है। सेरेमनी मंगलवार को गुजरात के एकता नगर में हुई, जहां राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कार्तिक को अवॉर्ड दिया। ये कार्तिक का पहला नेशनल अवॉर्ड है। इसे जीतने के बाद उन्होंने भावुक अंदाज में एक छोटे शहर से निकलकर सपने पूरे करने के सफर को याद किया है। पूरी खबर पढ़ें…



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