अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने अपने दिवंगत को-स्टार सुशांत सिंह राजपूत को याद किया है। जूम को दिए इंटरव्यू में परिणीति ने साल 2013 की फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ की शूटिंग के दिनों का एक भावुक वाकया शेयर किया।
परिणीति ने बताया कि जब उनकी पहली फिल्म ‘इश्कजादे’ के लिए नेशनल अवॉर्ड की घोषणा हुई थी, तब सुशांत खुशी के मारे स्विमिंग पूल की कुर्सियों पर चढ़कर चिल्लाने लगे थे।
परिणीति ने सुशांत को अपना सच्चा दोस्त और सबसे बड़ा चीयरलीडर बताया।
‘पूल चेयर पर खड़े होकर चिल्लाए थे’
परिणीति ने बताया कि फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ की शूटिंग के दौरान एक दिन काम से छुट्टी थी। वे सुशांत सिंह राजपूत और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर के साथ होटल के स्विमिंग पूल के पास बैठे थे।
तभी परिणीति के फोन पर फिल्ममेकर करन जौहर का ‘मुबारक हो’ मैसेज आया। परिणीति समझ नहीं पाईं कि बधाई किसलिए है, लेकिन सुशांत तुरंत वजह पता करने में जुट गए। जैसे ही पता चला कि परिणीति को ‘इश्कजादे’ के लिए नेशनल अवॉर्ड (स्पेशल मेंशन) मिला है, सुशांत बेहद खुश हो गए।
वे पूल डेक की कुर्सियों पर चढ़ गए और जोर-जोर से चिल्लाने लगे कि ‘मैं नेशनल अवॉर्ड विनर के साथ काम कर रहा हूं’। परिणीति रोने लगीं और सुशांत ने उन्हें गले लगा लिया। यह देखकर ऋषि कपूर ने हंसते हुए दोनों से कहा था कि तुम दोनों पागल हो गए हो।
‘हम दोनों के बीच इकोनॉमिक्स और साइंस पर बात होती थी’
अपनी बॉन्डिंग पर बात करते हुए परिणीति ने बताया कि सुशांत सिर्फ उनके को-स्टार नहीं, बल्कि एक बहुत अच्छे दोस्त थे। फिल्मों में आने से पहले परिणीति बैंकर थीं, जबकि सुशांत ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी।
परिणीति के मुताबिक, पढ़ाई-लिखाई का बैकग्राउंड होने की वजह से वे दोनों सेट पर फिल्मों के अलावा इकोनॉमिक्स, तारों और साइंस जैसे गंभीर विषयों पर काफी बातें करते थे।
परिणीति ने कहा कि वे दोनों एक-दूसरे की सोच को बहुत अच्छी तरह समझते थे। वे होमी अदजानिया के निर्देशन में एक और फिल्म साथ करने वाले थे, लेकिन वह प्रोजेक्ट नहीं बन पाया।
2013 में आई थी ‘शुद्ध देसी रोमांस’
सुशांत सिंह राजपूत और परिणीति चोपड़ा की फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ साल 2013 में रिलीज हुई थी। मनीष शर्मा के निर्देशन और आदित्य चोपड़ा के प्रोडक्शन में बनी इस फिल्म में वाणी कपूर भी मुख्य भूमिका में थीं।
लिव-इन रिलेशनशिप और शादी के डर पर आधारित यह रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म भारत में सफल रही थी। इस फिल्म को साल 2013 के टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में भी दिखाया गया था।
जून, 2020 में हुई सुशांत की मौत
सुशांत सिंह राजपूत 14 जून, 2020 को बांद्रा में अपने घर पर रहस्यमयी तरीके से मृत पाए गए थे। पहली नजर में मामला सुसाइड का लगा था, लेकिन बाद में परिवार की शिकायत, मीडिया और विपक्षी दलों के प्रेशर की वजह से मामले की जांच को CBI को सौंपी गई। CBI की क्लोजर रिपोर्ट में मौत की असल वजह सुसाइड ही बताई गई है।
इस केस में CBI ने 6 अगस्त 2020 को FIR दर्ज की थी। 4 साल 6 महीने 15 दिन बाद CBI ने मार्च 2025 में फाइनल क्लोजर रिपोर्ट फाइल की, जिसमें कहा गया कि आत्महत्या के लिए सुशांत को उकसाने का कोई सबूत नहीं मिला है। रिया चक्रवर्ती और अन्य को मामले में क्लीनचिट दी गई।
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नेशनल फिल्म अवॉर्ड सेरेमनी मंगलवार को गुजरात में हुई है।
सीनियर एक्टर संजय मिश्रा को फिल्म भक्षक के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। पिछले 35 सालों से टीवी और फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा रहे संजय मिश्रा का ये पहला नेशनल अवॉर्ड है। जब उनसे पूछा गया कि वो अवॉर्ड में किसका नाम लिखवाना चाहते हैं, तो उन्होंने पिता शंभूनाथ मिश्रा का नाम लिखवाया। संजय ने ये भी बताया है कि जब उन्होंने मां को नेशनल अवॉर्ज जीतने की जानकारी दी, तो उनका पहला सवाल था- ‘खाना खाया कि नहीं?’
वहीं मैदान के गाने जाने दो के लिए बेस्ट लिरिक्स का अवॉर्ड जीतने वाले मनोज मुंतशिर ने कहा कि जिस समय ये गाना बन रहा था, तब ही ए.आर.रहमान ने कहा था कि इसे नेशनल अवॉर्ड मिलेगा।
दैनिक भास्कर से बातचीत में संजय मिश्रा, मनोज मुंतशिर, कार्तिक आर्यन समेत कई नेशनल अवॉर्ड विजेताओं ने इस पर भावुक बातें कही हैं। पढिए इंटरव्यू-
फिल्म भक्षक के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड जीतने पर संजय ने कहा, ‘सबसे पहले में शुक्रिया कहूंगा, डायरेक्टर का जिसने मुझे ऐसी फिल्म में कास्ट किया। इसके बाद शुक्रिया करूंगा रेड चिल्लीज का, जो ऐसी फिल्में प्रमोट करता है और फिर शुक्रिया करूंगा भूमि पेडनेकर का, भूमि के साथ जो भी काम करता हूं अच्छा निकलकर आता है। बड़ा मजा आता है। दम लगा के हइशा, बड़ी तारीफ मिली थी और अब ये दूसरी फिल्म। उसके बाद ये स्क्रिप्ट। बहुत असल कहानी थी। कलाकारों को मुंह से नहीं काम से बोलना चाहिए। मुझे लगता है मैंने जिम्मेदारी निभाई।’
जब उनसे पूछा गया कि आप अपना अवॉर्ड किसे डेडिकेट करेंगे। संजय मिश्रा ने भावुक अंदाज में कहा, ‘मुझसे पूछा गया था कि अवॉर्ड में किसका नाम लिखना चाहेंगे। मैंने अपने पिता का नाम संजय शंभूनाथ मिश्रा लिखवाया। सबसे अहम कि इसमें इन्फॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्ट मिनिस्ट्री है, जिसने हमें पाला, पापा जी की तनख्वाह वहीं से आती थी। पीआईबी है, जिसमें भी पापा ने काम किया।’
संजय मिश्रा से जब पूछा कि इस पर मां का रिएक्शन कैसा था, उन्होंने मां की नकल उतारते हुए जवाब दिया और उनका जवाब बताया, जो था- ‘बेटा बहुत बढ़िया, लेकिन तुम खाना खा लिए हो, बहुत देर प्रोग्राम चला है, कुछ खाना खिलाया उन लोगों ने। पापा होते तो बढ़िया होता।’
सेरेमनी में संजय मिश्रा पत्नी के साथ पहुंचे। इस पर उन्होंने कहा- ‘अब घर में थोड़ी इज्जत बढ़ जाएगी, वर्ना हम पति किस काम के।’
मनोज मुंतशिर बोले- ए.आर.रहमान सर ने पहले ही कहा था इस गाने को नेशनल अवॉर्ड मिलेगा
हिंदी फिल्म ‘मैदान’ के गाने ‘जाने दो’ के लिए मनोज मुंतशिर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट लिरिक्स का पुरस्कार मिला। इस पर उन्होंने कहा, ये गाना हमने चेन्नई में ए.आर.रहमान सर के स्टूडियो में बनाया था। रात में तकरीबन 3 बजे सर ने ट्यून दी। ट्यून ऐसी कि आंखे भर आएं। छत पर एक झूला था, उस पर बैठकर मैंने 2 लाइनें लिखीं- ये आवाजों के धागे खोले और तराने गाने दो, मैदानों में धूम न कम हो, जाते हैं हम जाने दो। मैं नीचे उतरा, मैंने रहमान सर को सुनाया और रहमान सर, बोनी कपूर जी हमारे डायरेक्टर अमित शर्मा सब लोग थे। मेरे मुंह से ये दो लाइनें निकलते ही, रहमान सर ने कहा- मनोज जी, ये नेशनल अवॉर्ड है। देखिए क्या संयोग था। उस वक्त मैं मुस्कुरा कर रह गया। लेकिन कभी सोचा नहीं था कि ये असल में होगा।’
आगे उन्होंने कहा, ‘दैनिक भास्कर के जो मेरे दर्शक और पाठक हैं उनसे मैं कहना चाहूंगा कि जो भी उम्मीदें आपने मुझ से लगाई हैं, उन्हें टूटने नहीं दूंगा। अपने हिस्से की गलतियां मैं कर चुका हूं। इसके बाद मैं प्रतिज्ञाबद्ध हूं कि आपकी उम्मीदों से खिलवाड़ नहीं होने दूंगा।’
पूछा गया कि अवॉर्ड किसे डेडिकेट करेंगे, जवाब मिला, ‘मैंने ये अवॉर्ड अपनी पत्नी नीलम मुंतशिर को डेडिकेट किया है। जब पहला अवॉर्ड मिला, तो बड़ा जलवा था, बड़ा नाम था, लेकिन पहले और दूसरे अवॉर्ड के बीच कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जिसमें नीलम का एक साथी के तौर पर नीलम का मेरे साथ खड़ा होना, मुझे अंदर तक कश कर गया। मुझे लगा कि हमारी जो सबसे प्रिय दोस्त होती है वो पत्नी होती है।’
विजय गांगुली को आज की रात गाने के लिए अवॉर्ड
हिंदी फिल्म ‘स्त्री 2’ के गाने ‘आज की रात’ के लिए विजय गांगुली को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कोरियोग्राफी का पुरस्कार मिला। गाने में तमन्ना भाटिया नजर आई थीं। अवॉर्ड मिलने के बाद विजय गांगुली ने कहा- ‘मैं नम हूं, अभी तक समझ नहीं आ रहा कि ये अवॉर्ड मेरे हाथ में है। इसे समझने में 2-3 दिन लगेंगे। मैंने अभी-अभी तमन्ना को मैसेज किया कि इस अवॉर्ड का क्रेडिट आपको जाता है। अगर आप वो स्टेप नहीं कर पातीं, जो सिखाया गया, तो शायद हम यहां तक नहीं पहुंचते। जब मैं छोटे बच्चों के डांस करते हुए वीडियो देखे, तो बहुत खुशी हुई। ये एक आर्टिस्ट के लिए सपने जैसा है।’
कार्तिक आर्यन बोले- ये फीलिंग अनरियल है
कार्तिक आर्यन को फिल्म चंदू चैंपियन के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला है। ये उनके करियर का पहला नेशनल अवॉर्ड है। सेरेमनी खत्म होने के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा, मैं बहुत खुश हूं, पूरी फैमिली के साथ हूं, बहुत इमोशनल मूमेंट है। अनरियल फीलिंग है, एक्सप्रेस नहीं कर पा रहा हूं।
आदित्य धर बोले- इंडिया को अवॉर्ड डेडिकेट करूंगा
आदित्य धर की फिल्म आर्टिकल 370 को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस पर उन्होंने कहा, ‘ये अवॉर्ड इंडिया को डेडिकेट करूंगा। मुझे लगता है कि ऐसी फिल्में देश को ऊपर उठाती हैं, लोग कुछ भी कहें लेकिन ये फिल्म देश को रिप्रेजेंट करती है।’
शाश्वत सचदेव को दूसरा नेशनल अवॉर्ड
हिंदी फिल्म ‘आर्टिकल 370’ के लिए शाश्वत सचदेव को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन (सॉन्ग्स) का पुरस्कार मिला। इससे पहले उन्हें फिल्म ऊरीः द सर्जिकल स्ट्राइक के लिए बेस्ट बैकग्राउंड म्यूजिक का भी अवॉर्ड मिल चुका है।
दूसरी बार नेशनल अवॉर्ड हासिल कर उन्होंने कहा, ‘मैं ये फील कर रहा हूं कि एक राजस्थान का लड़का है, जो मिडिल क्लास परिवार में बड़ा हुआ, उसे आप लोगों ने इतना आशीर्वाद दिया कि वो आज यहां है। मैं ये अवॉर्ड अपने पेरेंट्स और पत्नी को डेडिकेट कर रहा हूं।’
अतुल गंगवार बोले- ये फीलिंग शब्दों में बयां करना मुश्किल
दिवंगत शायर निदा फाजली के जीवन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘मैं निदा’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘बेस्ट आर्ट्स एंड कल्चर फिल्म’ का पुरस्कार मिला है। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माता अतुल गंगवार पिछले करीब ढाई दशक तक निदा फाजली के बेहद करीब रहे। अवॉर्ड हासिल कर उन्होंने कहा- ‘फीलिंग को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। सिनेमा के सबसे बड़े योगदान में से एक ये अवॉर्ड हासिल कर किसे अच्छा नहीं लगेगा।’
आगे उन्होंने कहा, ‘निदा साहब ने ग्वालियर, मध्यप्रदेश का नाम हमेशा रोशन किया, जब उनका निधन हुआ, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संसद में उनका गीत पढ़ा। उन्होंने एक लाइन पर जोर देकर कहा- यहां कोई किसी को रास्ता नहीं देता, अगर मुझे गिराकर तुम चल सको, तो चले। जब प्रधानमंत्री उनकी लेखनी पढ़ते हैं, तो उनकी ऊंचाइयों का पता चलता है।’
आनंद एल. राय को हिंदी नॉन-फीचर फिल्म ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी-एकता का प्रतीक’ के लिए बेस्ट डायरेक्शन का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला है। इस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं जब अपनों के बीच होता हूं तो अच्छा ही लगता है, लेकिन इतना बड़ा अवॉर्ड मिलना, ये सौभाग्य खुशी दे रहा है। मैं फीचर फिल्म बनाता रहा, एक बार मौका मिला डॉक्यूमेंट्री बनाने का, वो भी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, सरदार वल्लभ भाई पटेल पर। उनके बारे में जितना पता था, उससे 10 गुना ज्यादा समझा।’
आगे उन्होंने कहा, ‘ये समझ आया कि इस उम्र में भी सीखना बंद नहीं होता। इस डॉक्यूमेंट्री ने अवॉर्ड तो दिया, लेकिन इसने मुझे बहुत कुछ सिखाया। अक्षय ने ही मुझसे पूछा था कि क्या आप ऐसी डॉक्यूमेंट्री करना चाहोगे, मैंने इस पर रिसर्च की, हम साथ बैठे और इस पर काम किया। हम गुजरात भी आए थे। मैं ये अवॉर्ड अपने देश को डेडिकेट करना चाहूंगा।’
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सेरेमनी गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में मंगलवार को हुई। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को हुई थी।
‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म और ‘आर्टिकल 370’ को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला। तमिल स्टार धनुष को दो कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड दिया गया। पूरी खबर पढ़िए…नेशनल अवॉर्ड जीतकर भावुक कार्तिक आर्यन:कहा- ऐसे माहौल में एक्टर बनने का सपना देखा, जहां लोग हंसते हैं; छोटे शहर के लड़के का सपना पूरा हुआ
कार्तिक आर्यन को फिल्म चंदू चैंपियन के लिए बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड दिया गया है। सेरेमनी मंगलवार को गुजरात के एकता नगर में हुई, जहां राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कार्तिक को अवॉर्ड दिया। ये कार्तिक का पहला नेशनल अवॉर्ड है। इसे जीतने के बाद उन्होंने भावुक अंदाज में एक छोटे शहर से निकलकर सपने पूरे करने के सफर को याद किया है। पूरी खबर पढ़ें…
राष्ट्रपति ने फिल्म इंडस्ट्री से कर्मचारियों, असिस्टेंट्स, छोटे कलाकारों और अपना करियर बनाने की कोशिश कर रहे लोगों को सम्मान देने की अपील भी की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फिल्म इंडस्ट्री के सेलेब्स से हेल्थ के लिए नुकसानदायक प्रोडक्ट्स का विज्ञापन नहीं करने की अपील की।
राष्ट्रपति मुर्मू ने मंगलवार को गुजरात में 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह के दौरान अपने संबोधन में कहा, “जो फिल्म कलाकार बहुत लोकप्रिय होते हैं, उनमें देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को प्रभावित करने की असीम क्षमता होती है। जब सफल फिल्म कलाकार डिसिप्लिन्ड लाइफस्टाइल के फायदे के बारे में बताते हैं, तो करोड़ों बच्चे और युवा उनका अनुकरण करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं यह अनुरोध करना चाहूंगी कि लोकप्रिय कलाकार स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का एंडोर्समेंट न करें। स्टार वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए फिल्मों का चयन करने वाली ज्यूरी में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी की मांग की। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि हर क्षेत्रीय ज्यूरी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित हो।”
उन्होंने आगे कहा, “किसी भी क्षेत्र में महिलाओं का नजरिया शामिल करने से इंसान को हर पहलू से देखने वाली सोच बनती है।”
विमल इलायची विज्ञापन मामले में अभिनेताओं को नोटिस
गौरतलब है कि हाल ही में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन से जुड़े मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किए थे।
महाराष्ट्र FDA के मुताबिक, यह अभियान विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार हो सकता है। राज्य में विमल पान मसाला प्रतिबंधित है।
नोटिस में तीनों अभिनेताओं से इस अभियान में शामिल होने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
यह मामला अदालत तक भी पहुंच चुका है। दिल्ली हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र FDA के नोटिस को चुनौती देने वाली PB एग्रो LLP की याचिका खारिज कर दी। ये नोटिस विमल इलायची अभियान के जरिए पान मसाला के कथित सरोगेट प्रचार को लेकर जारी किए गए थे।
अक्षय ने पान मसाला का विज्ञापन न करने का फैसला किया था
अक्षय कुमार से जुड़ा विमल पान मसाला के विज्ञापन का विवाद साल 2022 में काफी चर्चा में रहा था। अक्षय कुमार, अजय देवगन और शाहरुख खान के साथ विमल के विज्ञापन में नजर आए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर अक्षय के फैंस ने उनकी आलोचना की थी। फैंस का कहना था कि फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल की बात करने वाले अभिनेता को पान मसाला ब्रांड का प्रचार नहीं करना चाहिए।
विवाद बढ़ने के बाद अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर फैंस से माफी मांगी थी। उन्होंने विमल के ब्रांड एंबेसडर के तौर पर पीछे हटने का फैसला भी किया था।
अक्षय ने यह भी कहा था कि विज्ञापन से मिली एंडोर्समेंट फीस को वह किसी अच्छे काम के लिए दान करेंगे।
हालांकि, अक्टूबर 2023 में विमल का एक और विज्ञापन सामने आने के बाद अक्षय दोबारा ट्रोल हुए थे। लोगों ने सवाल उठाया था कि जब वह विज्ञापन से हट चुके थे, तो फिर उसमें कैसे नजर आए।
इस पर अक्षय कुमार ने सफाई दी थी। उन्होंने बताया था कि उन्होंने यह विज्ञापन नया शूट नहीं किया था। यह शूट अक्टूबर 2021 में ही हो चुका था।
कॉन्ट्रैक्ट की अवधि के कारण कंपनी के पास पुराने विज्ञापन को प्रसारित करने का अधिकार था। अक्षय ने साफ किया था कि वह भविष्य में ऐसे विज्ञापन शूट नहीं करेंगे।
कार्तिक आर्यन को मंगलवार को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। उन्होंने यह अवॉर्ड ममूटी के साथ शेयर किया, जिन्हें ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए यह पुरस्कार मिला।
फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन ने अपनी लाइफ का सबसे बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन किया था।
‘चंदू चैंपियन’ देश के पहले पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर की जिंदगी पर आधारित थी। फिल्म में मुरलीकांत का किरदार निभाने के लिए कार्तिक को अपने शरीर के साथ-साथ बॉक्सिंग स्किल्स पर भी काम करना पड़ा। इसके लिए उन्होंने करीब 14 महीने तक लगातार ट्रेनिंग ली।
नेशनल लेवल के बॉक्सर और फिटनेस कोच त्रिदेव पांडे ने कार्तिक के बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन में उनकी मदद की थी। त्रिदेव ने 2024 में दैनिक भास्कर से बातचीत में कार्तिक की ट्रेनिंग से जुड़ी कई बातें बताई थीं।
कार्तिक आर्यन ने 2025 में हुए 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का अपना पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था।
90 किलो वजन से शुरू हुई ट्रेनिंग
त्रिदेव के मुताबिक, जब फिल्म के लिए ट्रेनिंग शुरू हुई, तब कार्तिक का वजन 90 किलो था। लक्ष्य था कि उनका वजन घटाकर 69 से 75 किलो के बीच लाया जाए। इसके साथ ही उन्हें एक बॉक्सर के तौर-तरीकों के लिए तैयार करना था।
त्रिदेव ने बताया था कि सिर्फ कार्तिक की बॉडी बनाना लक्ष्य नहीं था। फिल्म में बॉक्सिंग के प्रॉपर सीन थे, इसलिए उन्हें बॉक्सर की तरह तैयार करना जरूरी था। इसके लिए ट्रेनिंग में हैंड-आई कोऑर्डिनेशन पर खास ध्यान दिया गया।
त्रिदेव पांडे (दाएं) खुद भी एक नेशनल लेवल के बॉक्सर रह चुके हैं।
बॉक्सिंग में सामने वाले की हर मूवमेंट पर नजर रखना जरूरी होता है। त्रिदेव के मुताबिक, इस खेल में माइक्रो सेकेंड में चीजें बदल सकती हैं। इसलिए कार्तिक को निशाने पर नजर बनाए रखने और उसी के मुताबिक तेजी से प्रतिक्रिया देने की ट्रेनिंग दी गई थी।
ट्रेनिंग में कई पंच भी खाने पड़े
बॉक्सिंग सीखना कार्तिक के लिए आसान नहीं था। त्रिदेव ने बताया था कि ट्रेनिंग के दौरान कार्तिक को उनसे कई पंच पड़े। कई बार उनके चेहरे और पेट पर भी चोट लगी।
कार्तिक को ट्रेनिंग के दौरान काफी दर्द सहना पड़ा। कई मौकों पर वह त्रिदेव से कहते थे, ‘भाई आराम से मारो।’ इसके बावजूद फिल्म की जरूरत के मुताबिक उन्होंने ट्रेनिंग जारी रखी थी।
डाइट में 12 अंडे, एक साल तक मिठाई से दूरी
कार्तिक की डाइट पर भी खास ध्यान दिया गया। त्रिदेव के मुताबिक, 14 महीने की ट्रेनिंग के दौरान उनके खाने में 12 अंडे शामिल थे। वह मांस नहीं खाते थे।
बॉडी में फैट की मात्रा कम करने के लिए कार्तिक ने करीब एक साल तक मिठाई को हाथ नहीं लगाया। त्रिदेव ने कहा था कि लोगों में यह धारणा है कि मांस के बिना बॉडी नहीं बनाई जा सकती, लेकिन ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक की बॉडी इसका उदाहरण थी।
फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन ने अपने शरीर का बॉडी फैट 39% से घटाकर मात्र 7% पर ले आए थे।
पहली फिल्म के लिए मिले थे 70 हजार रुपए
ग्वालियर के एक सामान्य परिवार से निकले कार्तिक आर्यन ने बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए लंबा संघर्ष किया। 22 नवंबर 1990 को जन्मे कार्तिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने मुंबई आए थे, लेकिन उनका सपना इंजीनियर बनने का नहीं, एक्टर बनने का था।
कॉलेज के साथ वे फिल्मों के ऑडिशन देने लगे। परिवार को भी इसकी ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऑडिशन की जानकारी तलाशते और फिर बेलापुर से अंधेरी तक लोकल ट्रेन से पहुंचते थे। कई बार स्टेशन के वॉशरूम में कपड़े बदलकर ऑडिशन देते थे। करीब दो-तीन साल तक उनका यही सिलसिला चलता रहा।
फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से लव रंजन ने बतौर निर्देशक डेब्यू किया था। वहीं, इस फिल्म से कार्तिक आर्यन ने भी एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा था।
इसी दौरान फेसबुक से उन्हें फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ के ऑडिशन की जानकारी मिली। पहली कोशिश में कार्तिक रिजेक्ट हो गए। करीब 6 महीने तक कोई कॉल नहीं आया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने प्रोडक्शन हाउस से अपनी तस्वीरें तक वापस मांगीं, ताकि दूसरे ऑडिशन में इस्तेमाल कर सकें।
इसके बाद उन्हें दोबारा ऑडिशन के लिए बुलाया गया। करीब 6 महीने तक अलग-अलग राउंड हुए। फाइनल ऑडिशन में उन्हें 5 पेज का लंबा मोनोलॉग दिया गया। अगले दिन उन्हें इसे परफॉर्म करना था। कार्तिक ने इसे याद किया और ऑडिशन पास कर लिया।
साल 2011 में कार्तिक ने ‘प्यार का पंचनामा’ में रजत यानी रज्जो का किरदार निभाया था। इस फिल्म के लिए उन्हें करीब 70 हजार रुपए मिले थे। फिल्म में उनका लंबा मोनोलॉग काफी चर्चा में रहा। हालांकि इसके बाद का सफर आसान नहीं रहा।
2018 में ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने बदला करियर
‘आकाशवाणी’ और ‘कांची’ जैसी फिल्मों को खास सफलता नहीं मिली। एक समय ऐसा भी आया जब कार्तिक को लगने लगा था कि शायद उन्हें आगे काम न मिले, लेकिन साल 2018 में ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ ने उनका करियर बदल दिया। फिल्म हिट हुई और कार्तिक की पहचान तेजी से बढ़ी।
कार्तिक आर्यन की फिल्म ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ (2018) का कुल बजट लगभग 25 करोड़ रुपए था और इसने बॉक्स ऑफिस पर 152–156 करोड़ रुपए की कमाई की थी।
इसके बाद ‘लुका छुपी’ और ‘पति पत्नी और वो’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता और मजबूत की। फिर साल 2022 में ‘भूल भुलैया 2’ ने उन्हें बड़े कमर्शियल स्टार्स की लिस्ट में पहुंचा दिया।
कार्तिक ने इसके बाद अलग तरह के किरदार भी चुने। ‘सत्यप्रेम की कथा’ के बाद उन्होंने ‘चंदू चैंपियन’ में पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया।
70 हजार से 20 करोड़ तक पहुंची फीस
कभी 70 हजार में फिल्म करने वाले कार्तिक की जिंदगी में ऐसे पल भी आया, उन्हें मात्र 10 दिन के रोल के लिए 20 करोड़ मिले।
कार्तिक आर्यन ने आप की अदालत में बताया था कि उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी एक फिल्म की महज 10 दिनों की शूटिंग के लिए 20 करोड़ रुपये चार्ज किए थे। हालांकि उन्होंने फिल्म का नाम नहीं लिया, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वह फिल्म ‘धमाका’ (2021) थी।
अनंत नाग: 10वीं में फेल हुए, अब दादासाहेब फाल्के मिला
अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड 2024 मिला। यह सम्मान उनके पांच दशक से ज्यादा लंबे फिल्मी सफर के लिए मिला है। अनंत नाग ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। इनमें कन्नड़ के अलावा हिंदी, तेलुगु, तमिल, मराठी और मलयालम सिनेमा भी शामिल है।
लेकिन यहां तक पहुंचने की कहानी आसान नहीं थी। अनंत नाग बचपन में कई स्कूलों और आश्रमों में रहे। करीब 11 साल की उम्र में वे पढ़ाई के लिए मुंबई आ गए।
यहां कन्नड़ से सीधे अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई करना उनके लिए मुश्किल रहा। भाषा और पढ़ाई में दिक्कत के चलते वे 10वीं की परीक्षा में फेल हो गए। हालांकि बाद में 10वीं की पढ़ाई पूरी की। वहीं 11वीं कक्षा तक पढ़ाई की है।
अनंत नाग को साल 2022 में बेंगलुरु नॉर्थ यूनिवर्सिटी द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से भी नवाजा गया था।
उनके माता-पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर या इंजीनियर बनें, लेकिन पढ़ाई में लगातार परेशानी के बाद अनंत ने दूसरा रास्ता तलाशना शुरू किया।
1962 और 1965 के युद्धों का उन पर गहरा असर पड़ा और उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया। स्कूल के दिनों में वे NCC और ऑक्जीलियरी कैडेट कॉर्प्स में भी शामिल हुए।
लेकिन सेना में भी उन्हें सफलता नहीं मिली। कम वजन की वजह से भारतीय सेना ने उन्हें मेडिकल आधार पर रिजेक्ट कर दिया। वहीं खराब नजर के कारण एयरफोर्स में भी उनका चयन नहीं हुआ। एक के बाद एक रास्ते बंद होने के बाद वे अपने भविष्य को लेकर परेशान थे।
पांच साल में 50 से ज्यादा नाटक किए
फिर अनंत नाग की जिंदगी में थिएटर आया। शुरुआत में एक्टिंग उनका तय करियर नहीं था, लेकिन मंच पर काम करते-करते उन्हें अपना आत्मविश्वास वापस मिलने लगा। अगले पांच साल में उन्होंने 50 से ज्यादा नाटकों में काम किया। उन्होंने कन्नड़, कोंकणी, मराठी और हिंदी थिएटर में अभिनय किया। इसी दौरान सत्यदेव दुबे, गिरीश कर्नाड और अमोल पालेकर जैसे कलाकारों से भी उन्हें सीखने का मौका मिला।
साल 1973 में अनंत नाग ने कन्नड़ फिल्म ‘संकल्प’ से डेब्यू किया। इसी साल श्याम बेनेगल की ‘अंकुर’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी पहचान बनाई। इसके बाद ‘निशांत’, ‘मंथन’ और ‘भूमिका’ जैसी फिल्मों में काम किया। टीवी पर ‘मालगुडी डेज’ ने भी उन्हें घर-घर तक पहुंचाया।
इसके बाद उनका सफर पांच दशक से ज्यादा चलता रहा। 300 से ज्यादा फिल्मों के साथ उन्होंने कन्नड़ सिनेमा के साथ-साथ कई भाषाओं में काम किया। उन्हें पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड और पांच कर्नाटक स्टेट बेस्ट एक्टर अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। 2025 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
‘केजीएफ: चैप्टर 1’ में पत्रकार आनंद इंगलागी के रोल में अनंत नाग।
और अब 10वीं में फेल होने वाले उस लड़के के नाम के साथ दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड जुड़ चुका है। उनकी कहानी बताती है कि एक रास्ता बंद होने का मतलब यह नहीं कि सफर भी खत्म हो गया।
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नेशनल फिल्म अवॉर्ड में कार्तिक-यामी बेस्ट एक्टर-एक्ट्रेस: KGF अभिनेता को दादासाहेब फाल्के; 72 साल में अवॉर्ड्स 7 से बढ़कर 45 हुए
कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ और ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिया गया। यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया।
सेरेमनी गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में मंगलवार को हुई। विजेताओं की घोषणा 18 जुलाई को हुई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
22 सितंबर को गुजरात के एकतानगर (केवड़िया) में भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च माना जाने वाला नेशनल फिल्म अवॉर्ड का भव्य समारोह आयोजित हो रहा है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई नेता और बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ के सेलिब्रिटीज भी मौजूद रहेंगे।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स) में फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, फिल्म ‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म और यामी गौतम को लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार दिया जाएगा। वहीं, ‘भ्रमयुगम’ के लिए ममूटी और ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को लीडिंग रोल में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिया जाएगा।
इस अवॉर्ड के 72 साल के इतिहास में पहली बार यह समारोह दिल्ली के बाहर आयोजित हो रहा है और इस बार गुजरात को इसकी मेजबानी सौंपी गई है। इसे लेकर एकतानगर में जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में मेहमानों के लिए AC जर्मन डोम तैयार किया गया है, जिसमें 1,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। इसके अलावा मेहमानों को गुजराती के फेमस व्यंजन परोसे जाएंगे।
1,000 लोगों की बैठक क्षमता वाला विशाल हाईटेक डोम तैयार किया गया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंची दैनिक भास्कर की टीम
एकतानगर में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड समारोह को लेकर दैनिक भास्कर की टीम मौके पर पहुंची। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास ‘बस बे’ (बस टर्मिनल) क्षेत्र में कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस भव्य समारोह को सफल और यादगार बनाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के 500 से अधिक टेक्नीशियन, कारीगर और मजदूरों की टीम दिन-रात लगातार काम में जुटी हुई है।
‘जर्मन एल्युमिनियम स्ट्रक्चरल डोम’, वाटरप्रूफ और सेंट्रली एयर-कंडीशंड
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के पास ही 1,000 लोगों की बैठक क्षमता वाला विशाल और हाईटेक डोम तैयार किया जा रहा है। यह आधुनिक ‘जर्मन एल्युमिनियम स्ट्रक्चरल डोम’ पूरी तरह वाटरप्रूफ और सेंट्रली एयर-कंडीशंड होगा। समारोह के शानदार अनुभव के लिए इसे स्टेट-ऑफ-द-आर्ट साउंड और आधुनिक लाइटिंग सिस्टम से पूरी तरह सुसज्जित किया जा रहा है।
आकर्षक स्टेज लाइटिंग और VIP लाउंज
‘जर्मन डोम’ के स्ट्रक्चर और अंदर के इंटीरियर का काम अंतिम चरण में है। हाईटेक साउंड सिस्टम, आकर्षक स्टेज लाइटिंग और VIP लाउंज तैयार करने के लिए विशेषज्ञ लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। राष्ट्रपति और देश के दिग्गज फिल्म कलाकारों के आगमन से पहले पूरे परिसर को आकर्षक रोशनी और थीम आधारित डेकोरेशन से सजाने का काम जोर-शोर से चल रहा है।
500 से अधिक टेक्नीशियन, कारीगर और मजदूरों की टीम दिन-रात लगातार काम कर रही है।
कैसा होगा नेशनल अवॉर्ड सेरेमनी का शेड्यूल?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में करीब 75 मिनट के मुख्य प्रोटोकॉल सेशन के दौरान विभिन्न कैटेगरी के विजेताओं को अवॉर्ड और सम्मान पत्र प्रदान किए जाएंगे।
शाम 4 से 5:15 बजे के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगान के साथ मुख्य समारोह की शुरुआत होगी।
इसके बाद फीचर फिल्म, नॉन-फीचर फिल्म के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अभिनेत्री सहित विभिन्न श्रेणियों में अवॉर्ड दिए जाएंगे।
शाम 5:15 से 6 बजे के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू फिल्म इंडस्ट्री की हस्तियों को संबोधित करेंगी।
इसके बाद सभी अवॉर्ड विजेताओं के साथ आधिकारिक ग्रुप फोटोग्राफी की जाएगी।
मुख्य समारोह खत्म होने के बाद शाम 6:30 बजे के बाद मेहमानों के लिए नर्मदा नदी के किनारे विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।
इसके अलावा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में खास थीम आधारित लेजर और लाइट एंड साउंड शो का भी आयोजन किया गया है।
इस साल सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड मुख्य भूमिका में कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता मम्मूटी को ‘भ्रमयुगम’ फिल्म के लिए दिया जाएगा। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड यामी गौतम को ‘आर्टिकल 370’ फिल्म के लिए प्रदान किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर का अवॉर्ड रणदीप हुड्डा को ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए दिया जाएगा।
एकतानगर में नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित समारोह के आयोजन से गुजरात के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिलेगी। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक सुंदरता देश-विदेश में और अधिक प्रसिद्ध होगी, जिससे पर्यटकों की संख्या में बड़ा इजाफा होगा। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय होटल, रिसॉर्ट, ट्रांसपोर्ट, हस्तशिल्प और गाइड जैसे रोजगार से जुड़े लोगों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा।
इस मामले में बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स की मौजूदगी से गुजरात एक प्रमुख ‘फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में उभरेगा। एकतानगर के खूबसूरत लोकेशंस भविष्य में बड़े बजट की फिल्मों की शूटिंग के लिए आकर्षण का केंद्र बनेंगे, जिससे स्थानीय कलाकारों और टेक्नीशियनों को राष्ट्रीय स्तर पर काम करने के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही, दिल्ली या मुंबई जैसे मेट्रो शहरों के अलावा भी गुजरात ऐसे बड़े VVIP आयोजनों को सफलतापूर्वक आयोजित कर सकता है, यह साबित होने से राज्य की ब्रांड इमेज और मजबूत होगी।