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  • Nana Patekar Death Reason; Cardiac Arrest Vs Heart Attack Symptoms & Treatment Explained

    Nana Patekar Death Reason; Cardiac Arrest Vs Heart Attack Symptoms & Treatment Explained


    8 अक्टूबर की रात करीब 2:30 बजे, नाना पाटेकर ने अपने दोस्त को मैसेज करके कहा कि उनकी तबीयत बिगड़ रही है। दोस्त ने वक्त पर मैसेज नहीं देखा। करीब दो घंटे बाद नाना को अस्पताल पहुंचाया गया, तो वो पूरी तरह बेहोश हो चुके थे। सुबह 5.20 बजे उन्हें मृत घोषित कर

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    क्या समय पर इलाज मिलता तो नाना बच सकते थे, दिल का दौरा पड़ने के बाद एक-एक मिनट भी कितना अहम होता है और कैसे पहचानें कि बेचैनी या घबराहट दिल का दौरा है या नहीं; एक्सपर्ट्स से समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

    सवाल-1: नाना के आखिरी दो घंटों में क्या-क्या हुआ? जवाब: 4 अक्टूबर को नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वो इस दौरान स्वस्थ दिखाई दिए। उन्होंने कार्यक्रम में कहा था, ‘हम सभी को एक दिन जाना है, पता नहीं मैं कल यहां रहूंगा या नहीं। सबकी जिंदगी में एक मोड़ जरूर आता है, लेकिन इससे पहले खुद से पूछना होगा- क्या मैं वो कर पाऊंगा, जो मैं करना चाहता हूं?’

    4 अक्टूबर को नाना आखिरी बार सार्वजानिक तौर पर नजर आए।

    8 अक्टूबर की रात गोवा के अपने घर में नाना अकेले थे। देर रात उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर ने मीडिया को नाना के आखिरी समय की जानकारी दी…

    • रात करीब 2:30 बजे नाना ने अपने दोस्त को मैसेज भेजा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है। रात होने के चलते दोस्त तब उनका मैसेज नहीं देख पाया। फिर उन्होंने अपने दोस्त को कॉल की।
    • तड़के करीब 4 बजे दोस्त उनके घर पहुंचा। तब नाना को बहुत पसीना आ रहा था और वो धीरे-धीरे बेहोश होते जा रहे थे। उन्होंने नाना को होश में लाने की कोशिश की और उनके केयरटेकर को अस्पताल भेजा।
    • अस्पताल की एंबुलेंस और इमरजेंसी टीम नाना के घर पहुंची। इस समय तक नाना पूरी तरह बेसुध हो चुके थे।
    • डॉक्टर्स ने उन्हें उठाकर सीधा किया और उनकी कार्डियक मसाज और CPR देना शुरू किया। घर से लेकर अस्पताल ले जाते समय भी CPR देना जारी रखा गया।
    • करीब 4:20 बजे नाना मणिपाल हॉस्पिटल पहुंचे। यहां डॉक्टर्स ने करीब 45 मिनट तक कार्डियक मसाज, CPR और बाकी कोशिशें कीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
    • सुबह करीब 5:20 बजे नाना को मृत घोषित कर दिया गया।
    डॉ. शेखर ने कहा कि नाना को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

    डॉ. शेखर ने कहा कि नाना को अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। शव को पोस्टमार्टम के लिए गोवा मेडिकल कॉलेज भेजा गया।

    सवाल-2: नाना को कैसा कार्डियक अरेस्ट आया और क्या जान बचाई जा सकती थी? जवाब: आम तौर पर दिल की दिक्कत से होने वाली मौतों के मामले में कई शब्द सुनते हैं- दिल का दौरा, कार्डियक अरेस्ट, हार्ट अटैक। असल में दिल का दौरा या कार्डियक अरेस्ट एक ही बात है, जबकी हार्ट अटैक अलग है।

    हार्ट अटैक: दिल तक जाने वाली नसों में थक्का जमना

    • हार्ट अटैक का मतलब है- दिल तक आने वाली एक या ज्यादा नसों में खून का थक्का जमना, जिसके चलते खून दिल तक नहीं पहुंच पाता।
    • इससे दिल की मांसपेशियां खराब होने लगती हैं और दिल काम करना बंद कर सकता है। हालांकि इसमें मरीज को कई घंटों से कुछ दिनों तक का समय भी मिल सकता है।
    • हार्ट अटैक में सीने में तेज दर्द होता है। शरीर के ऊपरी हिस्सों में भी तकलीफ हो सकती है। व्यक्ति हांफने लगता है। पसीना आता है।
    • ऐसा भी महसूस हो सकता है कि पेट में कोई दिक्कत है। कई बार लोग कब्ज की दिक्कत को भी हार्ट अटैक समझ लेते हैं। इसका उल्टा भी हो सकता है।

    कार्डियक अरेस्ट: दिल का अचानक काम करना बंद कर देना

    • दिल, दिमाग के भेजे गए इलेक्ट्रिकल सिग्नल की वजह से धड़कता है। अगर इन इलेक्ट्रिकल सिग्नल में कोई दिक्कत हो जाए, तो दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। इसे कार्डियक अरेस्ट कहते हैं।
    • इसमें दिल से शरीर के बाकी हिस्सों में खून नहीं पहुंच पाता और वो अंग काम करना बंद कर देते हैं।
    • कार्डियक अरेस्ट होते ही व्यक्ति बहुत कम समय में बेहोश हो सकता है और कुछ ही मिनटों में मौत हो सकती है।

    कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित शर्मा बताते हैं कि, ‘ज्यादातर मामलों में हार्ट अटैक के चलते ही कार्डियक अरेस्ट आता है। हालांकि कुछ मामलों में दिल की पुरानी बीमारी या नसों में थक्का जमने की दिक्कत के बिना भी अचानक कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। इसे ‘सडेन कार्डियक अरेस्ट’ (CSA) कहते हैं।’ डॉ. अमित शर्मा के मुताबिक, ‘ये कहना मुश्किल है कि नाना को हार्ट अटैक से कार्डियक अरेस्ट हुआ, या अचानक सीधे कार्डियक अरेस्ट हुआ। उन्हें दो घंटे मिले, अगर जल्द से जल्द CPR शुरू हो जाता और फिर बाकी इलाज मिलता, तो उनकी जान बच सकती थी।’

    डॉ. शेखर ने कहा है, ‘नाना को कार्डियक अरेस्ट आया, लेकिन इसकी वजह नहीं पता है। अस्पताल को ये भी नहीं पता था कि उनको दिल की कोई बीमारी थी या नहीं, या वो पहले से दिल की कोई दवाई ले रहे थे।’ हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नाना पाटेकर को लंबे समय से दिल से जुड़ी दिक्कतें थीं।’

    दिल की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा ज्यादा होता है। पहले कभी हार्ट अटैक आया हो, तो उसका असर बना रह सकता है और इससे इलेक्ट्रिकल सिग्नल या हार्ट-बीट असामान्य हो सकती है।

    दिल की पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा ज्यादा होता है। पहले कभी हार्ट अटैक आया हो, तो उसका असर बना रह सकता है और इससे इलेक्ट्रिकल सिग्नल या हार्ट-बीट असामान्य हो सकती है।

    सवाल-3: CPR देने के बावजूद जान नहीं बच पाई, इसमें टाइम का कितना रोल? जवाब: CPR, यानी कार्डियो-पल्मोनरी रिसैसिटेशन’ की प्रक्रिया हाथों से की जा सकती है। छाती के बीचोबीच मुट्ठी बनाकर एक मिनट में 100 से 120 बार तक तेजी से छाती दबाना ही CPR देना है। हालांकि कार्डियक अरेस्ट होने पर CPR की टाइमिंग सबसे जरूरी है…

    • कार्डियक अरेस्ट होने पर दिमाग और शरीर के बाकी अंगों में खून का फ्लो रुक जाता है। व्यक्ति तेजी से बेहोश होने लगता है।
    • CPR एक मैन्युअल पंप की तरह काम करता है। छाती पर बार-बार दबाव पड़ने से शरीर के बाकी हिस्सों में ब्लड का फ्लो बनाए रखने में मदद मिलती है।
    • अगर कार्डियक अरेस्ट के शुरुआती 2 मिनट के अंदर मरीज के आसपास मौजूद कोई व्यक्ति CPR की प्रक्रिया शुरू कर दे, तो मरीज के जीवित रहने की संभावना 40% तक बढ़ जाती है।
    • CPR तुरंत शुरू करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि हर गुजरते मिनट के साथ जीवित रहने की संभावना 10% तक घटती जाती है।

    वहीं नाना की तबीयत बिगड़ने के करीब डेढ़ घंटे बाद उनको CPR मिला, जब उनके दोस्त घर पहुंचे। तब तक नाना बेहोश होने लगे थे।

    CPR में हाथों की पोजीशन छाती के बीच इस तरह होनी चाहिए।

    CPR में हाथों की पोजीशन छाती के बीच इस तरह होनी चाहिए।

    सवाल-4: अगर दिल का दौरा पड़े, तो CPR के अलावा शुरुआती इलाज क्या है? जवाब: कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक को लेकर 3 जरूरी बातें हैं…

    1. ‘घर पर ये तय कर पाना मुश्किल होता है, कि किसी को कार्डियक अरेस्ट आया है या हार्ट अटैक। ऐसे में बिना समय गंवाए शुरुआती मिनटों में ही CPR देना शुरू कर देना चाहिए और आगे के इलाज के लिए जल्दी से जल्दी अस्पताल में भर्ती किया जाए।
    2. अगर अचानक कार्डियक अरेस्ट आया है, तो अस्पताल में या एंबुलेंस में ही AED, यानी ‘ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफ्रिबिलेटर’ से शॉक दिए जाते हैं। अगर दिल में इलेक्ट्रिक सिग्नल से जुड़ी दिक्कत है, हार्टबीट बहुत कम है, तो इससे रोगी को फायदा हो सकता है। आम तौर पर ये मेडिकल स्टाफ या डॉक्टर्स करते हैं।
    3. अगर हार्ट अटैक आया है और दिल की धड़कन मौजूद है, तो CPR के साथ ही खून को पतला करने वाली और नसों को चौड़ा करने वाली दवाइयां शुरू की जाती हैं। डॉक्टर्स से सलाह लेकर इमरजेंसी के लिए ये दवाइयां लोग अपने पास रख सकते हैं। दिल के मरीजों को ये दवाइयां हर समय अपने पास रखनी चाहिए।

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    दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन बचाया नहीं जा सका। अंतिम संस्कार पुणे के फॉर्महाउस में होगा। पूरी खबर पढ़ें…



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  • Nana Patekar Death Actor Dies Goa Residence Father Relationship Revealed Interview

    Nana Patekar Death Actor Dies Goa Residence Father Relationship Revealed Interview


    20 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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    नाना पाटेकर के पिता दिनकर पाटेकर रायगढ़ जिले के मुरुड-जंजीरा गांव में छोटा सा टेक्सटाइल प्रिंटिंग (कपड़ा छपाई) का व्यवसाय करते थे।

    नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित अपने घर पर कार्डियक अरेस्ट आया था। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

    नाना अपने पीछे फिल्मों के साथ कई ऐसे किस्से छोड़ गए, जिनसे उनकी जिंदगी के संघर्ष और रिश्तों की झलक मिलती है। दिसंबर 2024 में दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने पिता के साथ रिश्ते को लेकर बात की थी।

    नाना ने बचपन में वह खुद को दूसरों से कमतर समझते थे। उन्हें लगता था कि वह दिखने में अपने दोनों भाइयों से कम अच्छे हैं। इसी वजह से उनके मन में यह बात भी बैठ गई थी कि उनके पिता बाकी भाइयों को उनसे ज्यादा प्यार करते हैं।

    बचपन में नाना गांव और आसपास होने वाले नाटकों में हिस्सा लेते थे। एक बार उन्होंने (वाल्मीकि) नाटक में काम किया। खास बात यह थी कि उनका अभिनय देखने के लिए उनके पिता मुंबई से गांव आए थे। नाना के लिए यह पल बेहद खास था। उन्हें महसूस हुआ कि उनके पिता को भी उनकी कला पर गर्व है। इसी अनुभव ने उनके मन में पिता को लेकर बनी गलतफहमी को काफी हद तक दूर कर दिया।

    आखिरी दिनों में नाना से गहरी दोस्ती हो गई थी

    नाना ने बताया था कि पिता के आखिरी दिनों में दोनों के बीच रिश्ता बहुत गहरा हो गया था। उनके पिता कभी उनका हाथ पकड़कर कहते थे कि उन्हें हमेशा लगता रहा कि नाना के मन में यह बात होगी कि भाइयों से उन्हें ज्यादा प्यार मिला।

    नाना ने कहा था कि उन्हें पिता से कोई शिकायत नहीं थी। हालांकि, उन्हें जिंदगी भर इस बात का दुख रहा कि जब पिता का निधन हुआ, तब वह उनके लिए कुछ कर नहीं पाए। उनके पिता का निधन कॉरपोरेशन के अस्पताल में हुआ था और इलाज के लिए दवाइयों के पैसे की जरूरत थी। उस वक्त नाना के दोस्तों ने उनकी आर्थिक मदद की थी।

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    रेपिस्ट के रोल पर नाना ने डायरेक्टर को गालियां दीं:’परिंदा’ के क्लाईमैक्स में आग से झुलसे, आर्मी जॉइन करने के लिए रक्षामंत्री को फोन किया

    नाना पाटेकर ने अपने करीब पांच दशक के करियर में कई यादगार किरदार निभाए थे। नाना अपने बेबाक और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। एक बार डायरेक्टर रवि चोपड़ा ने उन्हें फिल्म में रेपिस्ट का रोल ऑफर किया तो नाना भड़क गए और उन्हें गालियां तक दे दीं। बाद में स्मिता पाटिल के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ और नाना को फिल्म में अहम विलेन का किरदार मिला। (परिंदा) की शूटिंग के दौरान भी उनका डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा से विवाद हुआ था। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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