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  • रोहतक फिल्म फेस्टिवल में एक्टर रणदीप हुड्डा का देसी अंदाज:युवाओं से बोले- कलेजा पाटैन नै हो रहा; किमै न किमै जरूर होवेगा

    रोहतक फिल्म फेस्टिवल में एक्टर रणदीप हुड्डा का देसी अंदाज:युवाओं से बोले- कलेजा पाटैन नै हो रहा; किमै न किमै जरूर होवेगा




    रोहतक की दादा लख्मी चंद यूनिवर्सिटी सुपवा में चल रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में कई बॉलीवुड हस्तियों ने हिस्सा लिया और कुछ अभिनेताओं ने अपनी वीडियो भेजकर संदेश दिया। गांव जसिया के रहने वाले अभिनेता रणदीप हुड्डा ने अपनी वीडियो में रोहतक वासियों के लिए संदेश भेजा। रणदीप हुड्डा ने अपनी वीडियो की शुरूआत में सभी को देसी अंदाज में राम राम कहा। रणदीप ने कहा कि मेरा तो कलेजा पाटैन नै हो रहा है कि रोहतक में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल हो रहा है। सारे ज्यूरी आले, इन कलाकारा पर थोड़ा रहम करियो और स्टूडेंट्स कुछ सीख भी लियो। जिस बीज का मैं पौधा, उसने राम-राम कर दियो रणदीप हुड्डा ने अपने मजाकिया अंदाज में युवाओं से कहा कि लागे रहो, किमै न किमै जरूर होवेगा। जिस पौधे का मैं बीज हूं मेरी मां, वहां जरूर आ रही है। उसने राम-राम जरूर करियो। लागे रहो, खैंचे रहो मीटर। मेहनत कभी बेकार नहीं होती, सफलता जरूर मिलती है। हरियाणवी सिनेमा को छूना हुआ मुश्किल बॉलीवुड अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि हरियाणवी सिनेमा उद्योग जिस तरफ जा रहा है, उसे छूना मुश्किल हो गया है। मासूम शर्मा मेरा स्टूडेंट भी रहा है और लाइसेंस के रूप में एक अच्छी फिल्म बनाई है। युवा पीढ़ी में बहुत ऊर्जा है, लेकिन उसे सही दिशा देने की जरूरत है। हरियाणा के युवा कमाल कर रहे है। चंद्र शेखर आजाद का किया रोल बॉलीवुड अभिनेता अखिलेंद्र मिश्रा ने कहा कि केवल डरावने रोल नहीं किए, बल्कि अच्छे रोल भी किए है। लेकिन लोग डरते हैं तो मैं क्या करू। शहीद भगत सिंह मूवी में चंद्र शेखर आजाद का रोल किया, उससे बड़ा कौन सा रोल हो सकता है। नई पीढ़ी को बताना कि इस प्रकार का सिनेमा बन रहा है। हरियाणवी फिल्म सांगी से कैरियर की शुरूआत अभिनेता रणदीप हुड्डा की मां आशा हुड्डा ने कहा कि वह डीएलएफ कॉलोनी में रहती थी और पढ़ाई भी रोहतक से ही की है। एमडीयू से एमए किया है, पहले इसका नाम कुछ और था। हरियाणवी फिल्म सांगी से कैरियर की शुरूआत की थी। आशा हुड्‌डा ने कहा कि वही गुण बेटे रणदीप में भी आए और डॉक्टर बनने की बजाय एक्टिंग में कैरियर बनाया और आज एक सफल अभिनेता के रूप में देखकर काफी खुश है। 22 साल पहले रोहतक को छोड़ा था, लेकिन आज भी आकर वही अहसास जिंदा हो जाता है।



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  • इंटरव्यू:‘द कन्फ़ेशन…’ की कहानी घटना से ज्यादा नैतिक सवालों पर है: आदिल हुसैन

    इंटरव्यू:‘द कन्फ़ेशन…’ की कहानी घटना से ज्यादा नैतिक सवालों पर है: आदिल हुसैन




    आदिल हुसैन की फिल्म ‘द कन्फ़ेशन ऑफ मैरी’ टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हुई है। फिल्म में नाना पाटेकर भी अहम भूमिका में हैं। इस फिल्म को लेकर आदिल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। क्या यह फिल्म 1966 के केरल के चर्चित ‘मदाथरुवी केस’ पर बेस्ड है? फिल्म को किसी एक व्यक्ति या घटना की सीधी कहानी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। फिल्म के संदर्भ में किसी पुराने घटनाक्रम से प्रेरणा लिए जाने की बात रिपोर्ट्स में कही गई थी, लेकिन उस घटना की सटीक पहचान को लेकर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए इसे किसी वास्तविक व्यक्ति का सीधा चित्रण मानने के बजाय इसके विषय और नैतिक द्वंद्व के स्तर पर देखना ज्यादा उचित है। कहानी का मुख्य केंद्र उस व्यक्ति पर है, जो बेहद जिम्मेदारी वाले पद पर है और परिस्थितियों के दबाव के बावजूद अपने सिद्धांतों को संभालने की कोशिश करता है। फिल्म किसी एक घटना को दोहराने के बजाय उससे जुड़े मानवीय और नैतिक सवालों को सिनेमाई अंदाज में पेश करती है। क्या किसी वास्तविक वकील को देखकर आपने किरदार की तैयारी की? मैंने किसी एक वास्तविक वकील की नकल करने के बजाय इस बात पर ध्यान दिया कि इस पेशे की काम करने की प्रक्रिया क्या होती है? मेरे लिए किसी किरदार की विश्वसनीयता उसके बाहरी हावभाव से ज्यादा उसकी सोच और निर्णय लेने की प्रक्रिया में होती है। अगर किरदार वकील है तो उसके सामने आने वाली परिस्थितियों को उसी पेशेवर नजरिए से समझना जरूरी है। वह किसी व्यक्ति के बारे में अपनी निजी धारणा बनाने के बजाय उसके पक्ष को कानूनी नजरिए से देखेगा। इसलिए मैंने किसी खास व्यक्ति को कॉपी करने के बजाय पेशे की तकनीकी समझ को प्राथमिकता दी। आपकी अभिनय शैली और नाना पाटेकर की प्रक्रिया में क्या समानता दिखी? समानता शायद इस स्तर पर है कि दोनों के लिए किरदार को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन हर अभिनेता का रास्ता अलग हो सकता है। थिएटर की पृष्ठभूमि ने मुझे भी यह सिखाया है कि किरदार को केवल सतह पर नहीं देखना चाहिए, लेकिन किसी कलाकार की अपनी तैयारी, अनुभव और भीतर की प्रक्रिया उसके अभिनय को अलग बनाती है। नाना साहब की खासियत यह लगी कि वह स्क्रिप्ट पढ़ते हुए ही किरदार के भीतर मौजूद किसी जरूरी तत्व को पकड़ लेते हैं। उस प्रक्रिया को बाहर से देखकर पूरी तरह समझना संभव नहीं है, क्योंकि अभिनेता के भीतर चल रही तैयारी दिखाई नहीं देती। स्वतंत्र सिनेमा के लिए फेस्टिवल सर्किट कितना महत्वपूर्ण है? स्वतंत्र सिनेमा के लिए फेस्टिवल सर्किट एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकता है, क्योंकि वहां ऐसी फिल्मों को दर्शक मिलते हैं जिन्हें पारंपरिक व्यावसायिक रिलीज के जरिए पर्याप्त पहचान मिलना मुश्किल हो सकता है। फेस्टिवल में फिल्म सिर्फ दिखाई नहीं जाती, बल्कि उसके साथ बातचीत और नए लोगों से जुड़ने का अवसर भी मिलता है। उसके बाद वितरण, प्रचार और दर्शकों तक पहुंच जैसे चरण भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं।



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  • मिर्जापुर में मुमताज बीवी बनीं सोनल चौहान बोलीं:सोशल मीडिया पर शादी के प्रस्ताव बहुत आते हैं, सपनों का राजकुमार शायद आसपास ही है

    मिर्जापुर में मुमताज बीवी बनीं सोनल चौहान बोलीं:सोशल मीडिया पर शादी के प्रस्ताव बहुत आते हैं, सपनों का राजकुमार शायद आसपास ही है




    फिल्म मिर्जापुर: द मूवी में सोनल चौहान ने मुमताज बीवी का किरदार निभाकर दर्शकों का ध्यान खींचा है। उनका किरदार भले ही कम स्क्रीन टाइम में नजर आया, लेकिन मुमताज और बब्बन की लव स्टोरी को खूब पसंद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके किरदार को लेकर मीम्स और चर्चाएं भी हो रही हैं। सोनल ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि वह मुमताज के किरदार तक कैसे पहुंचीं, टेंट से बाहर आने के सवाल पर क्या सोचती हैं, रवि किशन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा और जन्नत के बाद करियर में लंबा अंतर क्यों आया। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के अनुभव और अपने ड्रीम रोल पर भी बात की। सवाल: फिल्म में आपके किरदार मुमताज बीवी की काफी चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि आप टेंट से बाहर क्यों आईं? जवाब: मुझे उम्मीद नहीं थी कि लोग मुझसे यह सवाल इतने ज्यादा पूछेंगे। सोशल मीडिया पर लोग डीएम और फोन करके पूछ रहे हैं कि मैं टेंट से बाहर क्यों आई। मुझे लगता है कि सही जवाब यही है कि मैं प्यार के लिए बाहर आई और उसी के लिए लड़ रही थी। अगर आगे कहानी बढ़ती है तो मुमताज बब्बन की मौत का बदला ले सकती है। फिल्म में भी हमने एक-दूसरे से कहा था कि हम एक-दूसरे की जिम्मेदारी हैं। सवाल: आपको मुमताज के किरदार के लिए कैसे चुना गया? जवाब: मुझे लगता है कि मिर्जापुर मेरे लिए डेस्टिनी थी। मैं डायरेक्टर गुरमीत सिंह से किसी दूसरे काम के सिलसिले में मिली थी। उस समय फिल्म की कास्टिंग लगभग पूरी हो चुकी थी। करीब 10 मिनट बाद उन्होंने कहा कि शायद एक कास्टिंग अभी बाकी है और उन्हें लगा कि मैं मुमताज का किरदार निभा सकती हूं। मुझे लगता है कि मैं सही समय पर सही जगह पहुंची थी। सवाल: मुमताज के किरदार को निभाने के लिए आपने क्या तैयारी की? जवाब: हमने तय किया था कि मुमताज को बहुत सॉफ्ट रखा जाएगा। मिर्जापुर की दुनिया हिंसा, सत्ता और मैनिपुलेशन से भरी है, इसलिए मुमताज उस दुनिया में कॉन्ट्रास्ट थी। मेरे पास ज्यादा स्क्रीन टाइम और डायलॉग नहीं थे, इसलिए मैंने कोशिश की कि कम समय में भी दर्शकों का कनेक्शन किरदार से बने। दो लाइनों के बीच वह बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कहती है। मुझे खुशी है कि दर्शकों ने उन छोटी-छोटी चीजों को समझा। सवाल: जैसलमेर के रेगिस्तान में ‘घूम घूम’ गाने की शूटिंग करना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: वह शूट दिसंबर की सर्दियों में रात के समय हुआ था। रात में करीब 2 बजे के बाद तापमान बहुत गिर जाता था और मेरे कॉस्ट्यूम में गर्म कपड़े पहनने की गुंजाइश नहीं थी। यह चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब अच्छी याद बन चुका है। सबसे ज्यादा मायने यह रखता है कि दर्शकों ने गाने को पसंद किया। सवाल: राजस्थान में शूटिंग के दौरान सांप-बिच्छुओं से डर नहीं लगा? जवाब: नहीं, मुझे तो सांप बहुत पसंद हैं। फिल्म में जो बिच्छू दिखा था, वह नकली था। मैं खुद राजपूत हूं और हमारी जड़ें राजस्थान से हैं। इसलिए राजस्थान जाकर ऐसा लगता है जैसे घर आ गए हों। सवाल: आप रॉयल फैमिली से आती हैं। इंडस्ट्री में आने पर परिवार ने विरोध नहीं किया? जवाब: बहुत डांट पड़ी थी। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं फिल्म इंडस्ट्री में आ सकती हूं। मैं बहुत कंजर्वेटिव फैमिली से आती हूं। मेरी परवरिश ऐसी हुई थी कि घर से बाहर जाना भी आसानी से अलाउड नहीं था। आज मैं अकेले मुंबई में रहती हूं। मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिंदगी ऐसी होगी। इसलिए मैं डेस्टिनी में बहुत मानती हूं। कुछ चीजें शायद पहले से लिखी होती हैं। अब मैं बहुत सारी चीजें भगवान के हाथों में छोड़कर चलती हूं। सवाल: जन्नत के बाद आपके करियर में लंबा गैप क्यों आया? जवाब: फिल्में आई थीं, लेकिन शायद उतनी नहीं, जितनी लोगों को लगता है। मैंने जन्नत बहुत कम उम्र में की थी और उस समय इंडस्ट्री में मेरे कोई कॉन्टैक्ट्स नहीं थे। मुझे यह भी नहीं पता था कि काम के लिए लोगों से मिलना पड़ता है। मुझे लगता था कि जैसे जन्नत आई है, वैसे ही काम आता जाएगा। लेकिन समय बीतता गया और जैसा काम मैं करना चाहती थी, वैसा नहीं आया। जन्नत के बाद लोग मुझे जोया कहते थे और आज भी कई लोग जोया कहते हैं। अब लोग मुमताज बीवी भी बुला रहे हैं। एक कलाकार के लिए इससे बड़ी जीत क्या होगी कि लोग आपका नाम भूलकर आपको किरदार के नाम से बुलाने लगें। सवाल: आपने साउथ की फिल्मों में भी काम किया है। वहां का अनुभव कैसा रहा? जवाब: साउथ में मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा। मैंने बड़े और अनुभवी कलाकारों के साथ काम किया और उनसे बहुत कुछ सीखा। वहां अपनी ऑडियंस को बहुत महत्व दिया जाता है और अनुशासन के साथ काम होता है। अगर मुझे आगे अच्छे मौके मिलते हैं तो मैं जरूर काम करना चाहूंगी। सवाल: फिल्म ‘बुड्ढा होगा तेरा बाप’ का कनेक्शन साउथ से कैसे बना? जवाब: जन्नत के बाद मैंने एक साउथ फिल्म की थी। उसके बाद बुड्ढा होगा तेरा बाप के डायरेक्टर पुरी जगन्नाथ सर के साथ काम करने का मौका मिला। वह साउथ के बहुत बड़े डायरेक्टर हैं। वहीं से यह सिलसिला आगे बढ़ता गया। सवाल: अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मेरी दूसरी हिंदी फिल्म में ही अमिताभ बच्चन जी के साथ काम करने का मौका मिला। उनके साथ एक फ्रेम शेयर करना भी बहुत बड़ी बात है। उनके सामने बैठकर भी आप बहुत कुछ सीख सकते हैं- ह्यूमिलिटी, अनुशासन, डेडिकेशन और पैशन। एक्टिंग के अलावा लोगों के साथ किस तरह व्यवहार करना है और हर किसी को बराबर सम्मान देना है, यह भी उनसे सीखा। सवाल: बुड्ढा होगा तेरा बाप के सेट का कोई खास किस्सा याद है? जवाब: बच्चन साहब की एनर्जी देखकर हम लोग थक जाते थे, लेकिन वह कभी नहीं थकते थे। मैंने खुद देखा कि वह लगातार काम करते रहते थे। उन्होंने कभी यह नहीं पूछा कि मेरे शॉट में कितना समय है। वह हर कलाकार को उतनी ही इज्जत और सम्मान देते थे। मुझे लगता है कि उनकी शानदार एक्टिंग के साथ उनका इंसान होना भी उनकी खासियत है। सवाल: मिर्जापुर मूवी के बाद अब किस तरह के ऑफर्स मिल रहे हैं? जवाब: ऑफर्स आ रहे हैं। उम्मीद है कि अब मुझे वैसे किरदार ऑफर होंगे, जिस तरह दर्शक मुझे देखना चाहते हैं। मैं अलग-अलग तरह के रोल करना चाहती हूं, ताकि एक ही तरह के किरदार में न बंध जाऊं और खुद को अलग-अलग भूमिकाओं में साबित कर सकूं। सवाल: आपका कोई ड्रीम रोल है, जिसे आप जिंदगी में जरूर करना चाहती हैं? जवाब: शायद मेरा ड्रीम रोल मुझे पहली फिल्म में ही मिल गया था। मुझे लव स्टोरी बहुत पसंद हैं और मैं प्यार में बहुत विश्वास करती हूं। मेरी पसंदीदा फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे हुआ करती थी। मैं सच में मानती थी कि एक राज आएगा और उसी तरह मुझसे प्यार करेगा। शायद मैंने उसे मैनिफेस्ट किया और जन्नत भी एक कल्ट लव स्टोरी बन गई। लेकिन हम कलाकार थोड़े लालची होते हैं। इसलिए मैं फिर से ऐसी लव स्टोरी करना चाहूंगी, जो बहुत आइकॉनिक हो और जिसे लोग लंबे समय तक याद रखें। सवाल: इतने लंबे समय तक दर्शकों ने आपको याद रखा। इसका सबसे बड़ा श्रेय किसे देंगी? जवाब: मैं इसका सबसे बड़ा श्रेय अपनी ऑडियंस और फैंस को देना चाहूंगी। उन्होंने मुझे इतने लंबे समय तक मोटिवेटेड रखा और कभी महसूस नहीं होने दिया कि मैं यहां नहीं हूं। आज भी लोग कहते हैं कि मेरे अंदर उन्हें वही मासूमियत और जज्बा नजर आता है। यह सब उनके प्यार की वजह से है। जन्नत के इतने साल बाद भी लोगों को लगता है जैसे फिल्म कल ही रिलीज हुई थी। सोशल मीडिया पर मुझे बहुत प्यारे मैसेज और डीएम आते रहते हैं। मुझे ट्रोलिंग का सामना बहुत कम करना पड़ा है। ज्यादातर लोगों से सिर्फ प्यार और पॉजिटिविटी मिली है। सवाल: आपके पास किस तरह के डीएम आते हैं? जवाब: बहुत तरह के डीएम आते हैं, लेकिन सबसे ज्यादा शादी से जुड़े मैसेज होते हैं। मुझे काफी शादी के प्रपोजल्स आते हैं और लोग अलग-अलग मजेदार तरीके से अपने दिल की बात बताते हैं। कई बार ऐसे मैसेज पढ़कर हंसी भी आती है और अच्छा भी लगता है कि लोग आज भी मुझे इतना प्यार करते हैं। सवाल: आपके पेरेंट्स भी पूछते होंगे कि शादी के लिए कोई मिला या नहीं? जवाब: नहीं-नहीं, पेरेंट्स डीएम वाले शादी के प्रपोजल्स के बारे में तो नहीं पूछते। (हंसते हुए) वैसे भी सोशल मीडिया पर आने वाले हर मैसेज को घर पर डिस्कस थोड़ी किया जा सकता है। हां, शादी को लेकर सवाल तो कभी-कभी आते ही हैं, लेकिन अभी तक ऐसा कोई जवाब देने लायक अपडेट नहीं है। सवाल: तो सपनों का राजकुमार अभी तक नहीं मिला? जवाब: शायद मेरे सपनों का राजकुमार अभी आसपास ही हो। हो सकता है कि वह आसपास हो और मुझे अभी पता ही न हो। जब सही समय आएगा और सही इंसान मिलेगा, तब शायद मुझे भी पता चल जाएगा कि यही मेरे सपनों का राजकुमार है।



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  • जूबीन गर्ग के निधन के एक साल:पत्नी गरिमा बोलीं- वो हर जगह दिखते हैं, सिंगापुर में क्या हुआ, इसका जवाब चाहिए, न्याय किसके लिए

    जूबीन गर्ग के निधन के एक साल:पत्नी गरिमा बोलीं- वो हर जगह दिखते हैं, सिंगापुर में क्या हुआ, इसका जवाब चाहिए, न्याय किसके लिए




    असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग की पहली बरसी पर उनकी पत्नी गरिमा ने न्याय की मांग की है। मशहूर सिंगर जुबीन गर्ग का 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में निधन हुआ था। वह एक कॉन्सर्ट के लिए गए थे। मौत के बाद 7 लोगों को जांच के दायरे में लिया गया है। उनकी पहली बरसी पर कई चाहनेवाले उनके घर पहुंच रहे हैं। इस पर उनकी पत्नी ने कहा है कि परिवार और असम के लोग अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर उनकी मौत कैसे हुई। गरिमा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में असल में में क्या हुआ था। मैं उन्हें हर जगह देखती हूं। जिस तरह लोग यहां आए हैं, वे किसी की जाति, धर्म या विचारधारा को नहीं देख रहे हैं। वे इंसान बनकर आए हैं।” असम सरकार ने सिंगापुर में उनकी मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। केस अदालत में आगे बढ़ रहा है। असम सरकार ने कहा है कि जांच का मकसद जुबीन की सिंगापुर में मौत से जुड़ी परिस्थितियों और तथ्यों का पता लगाना है। न्याय की मांग पर गरिमा ने कहा, “हम सभी जुबीन गर्ग के लिए न्याय चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में वास्तव में क्या हुआ था। हम अब भी उस जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हमें न्याय मिलना चाहिए। अगर जुबीन के लिए न्याय नहीं है, तो फिर किसके लिए है?” फैंस ने मना रहे हैं जुबीन दिवस जुबीन गर्ग की पहली बरसी को उनके फैंस जुबीन दिवस के रूप में मना रहे हैं। 17 सितंबर से शुरू हुआ तीन दिवसीय जुबीन दिवस संगीत, प्रार्थना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। कामारकुची स्थित स्मारक पर प्रशंसकों की भीड़ जुटी। स्मारक को फूलों और गमोसों से सजाया गया था। तीन दिवसीय कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए इंतजाम किए गए थे। यह कार्यक्रम शनिवार को यानी आज खत्म होगा। देखिए जुबीन गर्ग दिवस की चुनिंदा तस्वीरें- पिछले साल सितंबर में मौत हुई थी, सिंगापुर पुलिस बोली- मौत डूबने से हुई सिंगर जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को हुआ। जुबीन गर्ग सिंगापुर में भारत और सिंगापुर के बीच 60 साल के कूटनीतिक रिश्तों के जश्न में शामिल होने गए थे। उन्हें वहां ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में परफॉर्म करना था। परफॉर्मेंस से जुबीन अपने दोस्तों के साथ लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर पार्टी कर रहे थे, तभी डूबने से उनकी मौत हो गई थी। सिंगर की मौत की खबर मिलते ही उस बड़े आयोजन को रद्द कर दिया गया था। जुबीन गर्ग के निधन के बाद असम में उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा समेत घटना के वक्त उनके साथ मौजूद सभी लोगों और इवेंट मैनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। शिकायत होने के बाद सिंगर की पत्नी गरिमा ने सिंगर के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से रोते हुए एक वीडियो जारी कर मैनेजर के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत वापस लिए जाने की अपील की है। कुछ समय बाद जुबीन की पत्नी ने हत्या का शक जताते हुए जांच की मांग की। शिकायत होने के बाद जुबीन के साथ यॉट में मौजूद दोस्तों और इवेंट ऑर्गेनाइजर की गिरफ्तारी हुई। दूसरी तरफ गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की हर दिन सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट बनाई है। बक्सा जिले की जिला जज शर्मिला भुइयां इस फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अध्यक्षता करेंगी। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने ये नियुक्ति की है। असम पुलिस की CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले की जांच की और स्थानीय कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 25 नवंबर को विधानसभा में कहा था कि जुबीन गर्ग की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि हत्या थी। वे दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे। असम पुलिस के साथ-साथ सिंगापुर पुलिस ने भी मामले की जांच की। जनवरी में सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को लेकर सिंगापुर पुलिस ने किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया। अदालत को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, जुबीन की मौत डूबने की वजह से हुई थी। उन्होंने नशे की हालत में लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। सिंगापुर पुलिस ने 35 लोगों की गवाही के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। गवाहों ने उस दिन की पल-पल की जानकारी दी और बताया कि जुबीन गर्ग ने कितनी शराब पी और नशे में डाइविंग करने पहुंचे। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 52 साल के जुबीन गर्ग घटना के समय नशे में थे। उनकी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में ब्लड अल्कोहल की मात्रा 333 मिलीग्राम पाई गई, जो सिंगापुर की कानूनी सीमा (80 मिलीग्राम) से चार गुना से भी ज्यादा थी। कोरोनर ने कहा कि इतने नशे की वजह से वे सही फैसला नहीं ले पा रहे थे। उन्होंने पहले तो लाइफ जैकेट पहनी थी, लेकिन पहली बार तैरने के बाद उसे उतार दिया। दूसरी बार जब वे पानी में उतरे, तो कैप्टन और दूसरे साथियों के टोकने के बावजूद उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से साफ मना कर दिया था। पत्नी के आरोपों को कोर्ट ने किया खारिज जुबीन की पत्नी ने शक जताया था कि सिंगर को पानी में धक्का दिया गया होगा। इस पर कोरोनर नाखोडा ने साफ किया कि पुलिस ने बहुत बारीकी से जांच की है। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे लगे कि किसी ने उन्हें मजबूर किया या धक्का दिया। यहां तक कि उन्हें बचाने की कोशिश करने वाले लोगों ने भी पूरी जान लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि जुबीन अपनी मर्जी से तैरने के लिए पानी में उतरे थे और डूबने के दौरान किसी ने भी उनका चेहरा जानबूझकर पानी के नीचे नहीं दबाया था।



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