सलमान खान ने रियलिटी शो बिग बॉस 20 के पिछले वीकेंड का वार में बैक पोज लेने पर पैपराजी को फटकारा था। अब इस हफ्ते सलमान ने फिर ये मुद्दा उठाया और सोशल मीडिया पर सेंसर लगाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने AI के मिसयूज पर भी नाराजगी जताई है। सलमान ने हालिया एपिसोड में कहा है, ‘AI का भी मिसयूज हो रहा है। किसी ने आपकी AI वॉयस लेकर किसी को गाली बक दी। आपको पता है ये लोग AI वीडियोज बना रहे हैं बहुत सारे लोगों के। यहां तक की मैं भी AI वीडियोज में होता हूं। कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें नहीं पता मैं कैसा हूं, वो पोस्ट कर देते हैं कि सलमान खान पब में था। जिनको ये बात पता है, जिन्होंने ये वीडियो बनाया है, वो किस तरह के लोग हैं।’ आगे सलमान ने कहा है, ‘इस तरह के लोगों को जेल में डालना चाहिए। जब तक एक दो अंदर जाएगा नहीं, तब तक ये सब रुकने वाला है नहीं। इसके लिए कानून लाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर भी सेंसर शिप होना चाहिए। मैं इस चीज को बेहद गंभीरता से लेने वाला हूं।’ शो में फिल्म हुंकार प्रमोट करने पहुंचीं फातिमा सना शेख ने सलमान की पैपराजी से जुड़ा मुद्दा उठाने पर तारीफ की। इस पर उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत दिनों से नोटिस कर रहा था। कुछ लड़कियां बहुत असहज हो जाती हैं। पैप्स ने कहा है कि वो भी अब से ये नहीं कर रहे हैं। एक-दो कोई ऐसे हैं, लेकिन अब बाकी के लोग ये नहीं कर रहे हैं। कुछ लोग मोबाइल लेकर खड़े होते हैं, जो पैप्स हैं भी नहीं। असली प्रेस वालों और पैप्स को उनको वहां से भगाना चाहिए। कोई भी हाथ में कैमरा रख लेता है।’ सलमान ने कहा, ‘यहां सेंसर बोर्ड जैसा कुछ आना चाहिए, जहां लोगों को अपने कमेंट, शब्दों के लिए जवाबदेही लेनी चाहिए। इन्फ्लूएंसर्स इससे पैसे कमाते हैं। रोजगार के लिए ये अच्छा है, लेकिन इसका मिसयूज नहीं होना चाहिए।’ अपने ही वीडियोज देखकर हैरान हो जाते हैं सलमान सलमान खान ने बताया है कि वह कभी-कभी अपने ही AI वीडियोज देखकर शॉक हो जाते हैं। उसमें आवाज भी बिल्कुल रियल होती है। आगे सलमान ने कहा, ‘मैंने हाल ही में जो आवाज उठाई, उसकी लोगों से सहारना की। 10-15 प्रतिशत लोगों ने उसके भी मीम बनाए, लेकिन धीरे-धीरे करके ये पूरा खेल बदला जाना चाहिए।’ क्या था सलमान का पिछला बयान और क्या हुआ असर? बिग बॉस 20 के वीकेंड का वार एपिसोड में सलमान ने कटरीना कैफ को वजन, भाई सोहेल के चेहरे और सनी देओल के फटे जूतों पर ट्रोल करने वालों की कड़ी शब्दों में निंदा की। इस दौरान उन्होंने एक्ट्रेसेस के गलत एंगल से शॉट लेने और पोस्ट किए जाने पर कहा, “आजकल एक नया ट्रेंड है। गाड़ी से निकलते वक्त कैमरा यहां (कमर पर) होता है और गाड़ी में बैठते वक्त भी कैमरा यहां होता है, ताकि हिप शॉट मिल जाए, टांगों का शॉट मिल जाए। इसके बाद पीछे से भी एक शॉट लिया जाता है, जो कोई भी अभिनेत्री या लड़की पसंद नहीं करती।” उन्होंने कहा कि कुछ महिलाएं ऐसी तस्वीरों को लेकर सहज हो सकती हैं, लेकिन सवाल उन महिलाओं का है जिन्हें यह पसंद नहीं है। सलमान ने इस दौरान अभिनेत्री सई मांजरेकर, नेहा धूपिया और भांजी का जिक्र किया। सलमान ने आगे कहा कि पीछे से महिलाओं की तस्वीरें लेने के बाद उन पर “पहचानो ये कौन है” जैसे कैप्शन क्यों लगाए जाते हैं। सलमान बोले- अपनी मां-बहन के शॉट सोशल मीडिया पर डालो सलमान ने कहा कि जो महिलाएं इस तरह की तस्वीरों से असहज होती हैं, उन्हें इसका विरोध करना चाहिए। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा, “जहां ऐसा हुआ न, घूम के चांटा मारो। बोलना अपनी मां-बहनों का ये शॉट ले लो और हमें दिखाओ। सोशल मीडिया पर डालो। जांघों का शॉट ले लो।” सलमान ने पूछा कि ऐसे लोगों को प्रेस का कार्ड किसने दिया और ऐसी सोच क्यों है? गुस्से में सलमान ने मंच पर ही अपनी शर्ट उतारकर पेट दिखाया और कहा कि अब जो चाहे उन्हें ट्रोल कर सकता है। सलमान ने ये भी कहा कि कुछ समय पहले उन्हें गंजा कहते हुए ट्रोल किया जा रहा था, जबकि असल में वो उनकी आने वाली फिल्म का लुक था, उन्होंने कुछ समय पहले अपना दोस्त भी खो दिया था। कई सेलेब्स ने की सलमान के बयान की सहारना एक्ट्रेस नेहा धूपिया ने कुछ समय पहले ही बैक शॉट पोस्ट करने पर एक इवेंट में सरेआम पैपराजी को फटकारा था। अब सलमान का बयान आने के बाद नेहा लिखती हैं, टाइगर जिंदा है। वरुण धवन ने एक वीडियो जारी कर सलमान को सपोर्ट किया। उन्होंने आधिकारिक सोशल मीडिया से एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वो पिता डेविड धवन के साथ सलमान को देखकर खुशी जाहिर करते नजर आ रहे हैं। डायरेक्टर कुणाल कोहली ने लिखा है, सलमान खान आपको सलाम। आपने सोशल मीडिया पर लोगों के व्यवहार, ट्रोलिंग, पैपराजी और इस तरह के व्यवहार को बढ़ावा देने वालों पर बहुत जरूरी बातें कहीं। और जब भाई बोलता है, तो उसके बाद किसी के पास कहने के लिए कुछ नहीं बचता। एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा, ऐसी बात कहना एक बड़ी और उदार सोच को दिखाता है और लोगों को ट्रोलिंग पर ध्यान नहीं देना चाहिए। ऋचा ने उन पुरुषों पर भी सवाल उठाया जो महिलाओं के शरीर और उनके लुक्स को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुष महिलाओं के बिना अस्तित्व में नहीं आ सकते, क्योंकि हर व्यक्ति मां की कोख से जन्म लेता है। उनके मुताबिक, अगर कोई मांओं का मजाक उड़ाता है, तो उसका असर उल्टा पड़ सकता है। बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट बोली- सलमान पाखंडी है सलमान का बयान सामने आने के बाद बिग बॉस 7 की कंटेस्टेंट रह चुकीं ब्रिटिश मॉडल, सिंगर और एक्ट्रेस सोफिया हयात ने सलमान को पाखंडी कहा है। उन्होंने सलमान का क्लिप शेयर कर लिखा है, सलमान एक पाखंडी और बेवकूफ इंसान है। जब मैं बिग बॉस में थी, तब उसने मेरे शरीर और चेहरे को लेकर आलोचना की थी, जबकि गौहर से कहा था कि उसका शरीर अच्छा है। क्या था सलमान खान का बयान? यह खबर भी पढ़ें… सलमान खान ने पैपराजी-ट्रोलर्स को फटकारा:वरुण धवन, नेहा धूपिया ने किया सपोर्ट, एक्स बिग बॉस कंटेस्टेंट सोफिया हयात बोलीं- सलमान पाखंडी हैं, मेरा मजाक उड़ाया सलमान खान के पैपराजी और ट्रोलिंग के खिलाफ बयान के बाद कई बॉलीवुड सितारों ने उनका समर्थन किया। नेहा धूपिया ने सलमान के बयान पर ‘टाइगर जिंदा है’ लिखकर प्रतिक्रिया दी। वरुण धवन ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर सलमान को सपोर्ट किया। डायरेक्टर कुणाल कोहली ने भी सलमान की तारीफ की और सोशल मीडिया ट्रोलिंग व पैपराजी के व्यवहार पर उनकी बात को जरूरी बताया। हालांकि, सोफिया हयात ने सलमान के बयान की आलोचना की। उन्होंने सलमान को पाखंडी बताया और अपने पुराने अनुभव का जिक्र किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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पैपराजी, ट्रोल्स और AI के मिसयूज पर भड़के सलमान खान:कहा- सेंसर लगाने की सख्त जरूरत, मैं सीरियस हूं, मेरे भी फर्जी वीडियो आते हैं
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कृति सेन ने पितृसत्ता पर उठाए सवाल:कहा- कब तक पूछेंगे कि लड़की ने क्या पहना, आदमियों को क्यों नहीं सिखाते कि शोषण, जबरदस्ती न करें
रक्षाबंधन से जुड़े एड में पहनावे के चलते विवादों में रहीं कृति सेनन ने अब देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे छेड़छाड़, रेप और शोषण के मामलों में पितृसत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ये लड़ाई आदमियों और औरतों के बीच नहीं बल्कि उन औरतों के साथ भी है, जो पितृसत्ता को ही संस्कार मानती हैं। कृति सेनन ने बिना किसी घटना का जिक्र किए आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा, यह लड़ाई पुरुषों और महिलाओं के बीच नहीं है। यह महिलाओं और पितृसत्तात्मक सोच के बीच की लड़ाई है। उन पुरुषों के खिलाफ, जो महिलाओं को कमतर समझते हैं और उन महिलाओं के खिलाफ भी, जो पितृसत्ता को ही संस्कार मान बैठी हैं। आगे कृति ने लिखा, ‘आखिर कब तक महिलाओं को ही यह सिखाया जाता रहेगा कि वे खुद को यौन हिंसा से कैसे बचाएं? पुरुषों को यह क्यों नहीं सिखाया जाता कि वे महिलाओं के साथ छेड़छाड़, यौन शोषण और जबरदस्ती न करें?’ ‘जब किसी नाबालिग के साथ बलात्कार होता है, तो सवाल यह क्यों नहीं पूछा जाता कि ऐसा करने वाला इंसान किस तरह की सोच रखता है? इसके बजाय आज भी लोग यही पूछते हैं कि लड़की ने क्या पहना था, वह कहां थी, किसके साथ थी, बाहर क्यों गई थी और उसके परिवार ने उसे ऐसा करने की इजाजत क्यों दी?’ इसके अलावा कृति ने लिखा, ‘महिलाओं को हर बार यह समझाना बंद कीजिए कि वे खुद को सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा सावधान रहें। जरूरत पुरुषों को यह सिखाने की है कि वे महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आएं और अपनी मर्यादा में रहें। लड़कों को सहमति और सम्मान का मतलब सिखाइए। उन्हें अपने व्यवहार की जिम्मेदारी लेना सिखाइए। जो पुरुष गलत व्यवहार करते हैं, उनकी गलती का बोझ महिलाओं पर डालना बंद कीजिए।’ आएशा खान बोलीं- ये देखकर घिन आती है धुरंधर के गाने शरारत में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस ने भी कुछ समय पहले जमुई में लड़की के साथ हुई बर्बरता पर लिखा था, बिहार में जो हुआ, उसे देखकर मुझे सच में घिन आती है। सोचिए, जब लोग आपको घेरकर खड़े हों, आप डरे हुए हों, अपमानित महसूस कर रहे हों और लोग आपकी मदद करने के बजाय खड़े होकर आपका वीडियो बना रहे हों। इसे नैतिकता का नाम देना बंद कीजिए। उत्पीड़न को संस्कृति की आड़ में छिपाना बंद कीजिए। यह बेहद शर्मनाक और घिनौना है। दिशा पाटनी की बहन खुशबू बोलीं- कोई साथ घूमे तो आपत्ति क्यों खुशबू पाटनी ने 22 सितंबर को एक वीडियो शेयर कर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। खुशबू ने सवाल उठाया कि अगर कोई लड़का और लड़की अपनी मर्जी से साथ रहना चाहते हैं, साथ घूमना चाहते हैं या दोस्त बनना चाहते हैं, तो लोगों को इससे आपत्ति क्यों होनी चाहिए? जमुई केस के बारे में पढ़िए- 19 सितंबर को जमुई के मड़वा पहाड़ इलाके में 14 साल की छात्रा के साथ सड़क पर छेड़खानी और अभद्र व्यवहार किया गया था। इसका वीडियो 21 सितंबर को सामने आया। पुलिस के अनुसार, वीडियो की जानकारी 21 सितंबर को मिली, जिसके बाद पीड़िता की पहचान कर केस दर्ज किया गया। इसके लिए SIT बनाई गई। वीडियो में दिख रहे तीन नाबालिगों को पकड़ा गया, जबकि मुख्य आरोपियों के रूप में बताए जा रहे हरेराम यादव और नंदन यादव का 22 सितंबर को एनकाउंटर किया गया। एडीजी (विधि-व्यवस्था) केएस अनुपम ने बताया कि छेड़खानी मामले में तीन नाबालिगों को पकड़ा गया है जबकि वीडियो वायरल करने के आरोप में रामाशीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। पटना के मुख्य आरोपी नंदन यादव (लाल गमछा) और हरे राम यादव अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। मामले की जांच के लिए SIT गठित की गई है और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चल रहे वीडियो को टेकडाउन कराया गया है। आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित करने को लेकर दो दर्जन से अधिक लोगों, ट्विटर हैंडलर, फेसबुक और इंस्टाग्राम को चिन्हित किया गया है। वीडियो प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ भी POSCO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
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सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइन:सलमान की फिल्म पर पड़ेगा असर; हिंसा, ड्रग्स और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्ती, जानिए क्या बदलाव हुए
भारतीय फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर सरकार ने नई गाइडलाइन जारी की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को फिल्म सर्टिफिकेशन के नियमों में बदलाव किया है। नई गाइडलाइन ने 1991 में बनाए गए पुराने नियमों की जगह ली है। हालांकि सेंसरशिप के पुराने प्रावधानों को पूरी तरह बदला नहीं गया है, लेकिन क्रिएटिव फ्रीडम, सामाजिक बदलाव, उम्र के हिसाब से रेटिंग और कंटेंट से जुड़े नियमों को नए तरीके से स्पष्ट किया गया है। नई गाइडलाइन में फिल्ममेकर्स को हिंसा, ड्रग्स, धूम्रपान, यौन हिंसा और महिलाओं के चित्रण को लेकर खास सावधानी बरतने को कहा गया है। साथ ही बच्चों और कमजोर वर्गों के चित्रण से जुड़े नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। जानिए कैसी है नई गाइडलाइन, किन फिल्मों पर पड़ेगा असर? 1. क्रिएटिव फ्रीडम और सेंसरशिप में संतुलन नई गाइडलाइन के मुताबिक सेंसर बोर्ड को यह ध्यान रखना होगा कि फिल्मों में सामाजिक मूल्यों और जिम्मेदारी का पालन हो, लेकिन इसके नाम पर कलाकारों की रचनात्मक आजादी को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाए। यानी सेंसरशिप और क्रिएटिव फ्रीडम के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। 2. हिंसा और अपराध का महिमामंडन नहीं फिल्मों में हिंसा या अपराध को बढ़ावा देने या उसका महिमामंडन करने से बचना होगा। अपराध करने के तरीकों को इतनी विस्तार से दिखाने पर भी रोक होगी, जिससे लोगों को अपराध करने का तरीका मिल सके। बिना जरूरत की अत्यधिक हिंसा, क्रूरता और डरावने दृश्यों को भी कम करने के निर्देश दिए गए हैं। 3. बच्चों से जुड़े कंटेंट पर सख्ती बच्चों को हिंसा का शिकार, हिंसा करने वाला या जबरन हिंसा का गवाह बनाकर दिखाने वाले कंटेंट पर भी सख्ती की गई है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार को दिखाने से भी बचने को कहा गया है। 4. दिव्यांग लोगों और जानवरों के साथ क्रूरता पर रोक फिल्मों में जानवरों के साथ बिना जरूरत की क्रूरता दिखाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाने या उनके साथ दुर्व्यवहार दिखाने वाले कंटेंट को भी प्रतिबंधित किया गया है। 5. शराब, ड्रग्स और स्मोकिंग का महिमामंडन नहीं फिल्मों में शराब पीने, ड्रग्स लेने या धूम्रपान को ग्लैमराइज करने से बचना होगा। नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक सब्सटेंस से जुड़े दृश्यों में निर्धारित एंटी-ड्रग चेतावनी दिखाना जरूरी होगा। 6. यौन हिंसा के ग्राफिक सीन नहीं महिलाओं को अपमानजनक या नीचा दिखाने वाले कंटेंट पर भी रोक रहेगी। अगर कहानी के लिए यौन हिंसा दिखाना जरूरी है, तो उसे ग्राफिक या बेहद विस्तृत तरीके से नहीं दिखाया जा सकेगा। गाइडलाइन में यौन कंटेंट को भी जरूरत के मुताबिक सीमित रखने की बात कही गई है। 7. अश्लीलता और डबल मीनिंग डायलॉग पर भी नजर फिल्मों में अश्लीलता, आपत्तिजनक भाषा और ऐसे डबल मीनिंग डायलॉग जो दर्शकों की ‘बेसर इंस्टिंक्ट्स’ को उकसाने वाले माने जाएं, उन पर मौजूदा प्रतिबंध जारी रहेंगे। 8. धर्म और समुदायों को लेकर सावधानी किसी धर्म, नस्ल या समुदाय के खिलाफ अपमानजनक शब्दों या दृश्यों को दिखाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा सांप्रदायिकता, अंधविश्वास, गैर-वैज्ञानिक सोच या ‘राष्ट्र-विरोधी’ विचारों को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर भी प्रतिबंध रहेगा। 9. देश की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट पर रोक रहेगी। दूसरे देशों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रभावित करने वाली सामग्री को लेकर भी नियम लागू होंगे। 10. कोर्ट और मानहानि से जुड़े नियम फिल्मों में मानहानिकारक सामग्री और अदालत की अवमानना से जुड़े कंटेंट पर भी रोक रहेगी। गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि ऐसा कंटेंट जो अदालतों के प्रति अपमान, तिरस्कार या अनादर पैदा करता है या उनकी गरिमा को कमजोर करता है, वह अवमानना के दायरे में आ सकता है। उम्र के हिसाब से भी होगा सर्टिफिकेशन नई गाइडलाइन में U/A 7+, U/A 13+ और U/A 16+ कैटेगरी को शामिल किया गया है। हालांकि ये कैटेगरी भी पूरी तरह नई नहीं हैं; इन्हें पहले ही 2024 के सर्टिफिकेशन और 2025 में गाइडलाइन में शामिल किया जा चुका था। सलमान खान की फिल्म पर पड़ सकता है असर सलमान खान जल्द ही फिल्म मातृभूमि में नजर आने वाले हैं। ये फिल्म भारत-चीन की झड़प पर बनी है, जिसमें जाहिर तौर पर चीन के खिलाफ कुछ सीन दिखाए जाएंगे, लेकिन नई गाइडलाइन से फिल्म पर बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि अब फिल्मों में ऐसे देशों के खिलाफ सीन नहीं रखे जा सकते, जिनसे भारत के संबंध अच्छे हैं। फिल्म पहले ही विवादों में है। फिल्म 2020 में हुई गलवान झड़प पर है, पहले इसका टाइटल ही बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, लेकिन आपत्ति होने पर इसे बदलकर मातृभूमि कर दिया गया है। फिल्म का ट्रेलर जारी होने के बाद इसकी काफी आलोचना हुई थी। इसे अब तक सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट नहीं मिला है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड का ऐलान किया है। इस नई टीम में सिनेमा और टीवी इंडस्ट्री के कई बड़े चेहरों को शामिल किया गया है। इनमें एक्ट्रेस प्रीति जिंटा, एक्टर सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी, टीवी एक्ट्रेस रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और बंगाली सिनेमा के दिग्गज एक्टर प्रोसेनजीत चटर्जी का नाम प्रमुख है। नया बोर्ड सिनेमाग्राफ एक्ट के तहत 3 साल की अवधि या अगले आदेश तक काम करेगा। पुराने नियम क्या थे? 1991 की गाइडलाइन में भी कहा गया था कि- जानिए क्या है सेंसर बोर्ड? सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) को सेंसर बोर्ड के नाम से भी जाना जाता है। यह एक वैधानिक संस्था है जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आती है। यह संस्था भारत में बनने वाली फिल्मों को रिलीज से पहले उनके कंटेंट के हिसाब से सर्टिफिकेट देती है। यह सर्टिफिकेट सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 के तहत आता है। इंडियन सिनेमैटोग्राफी एक्ट साल 1920 में बना। यह तब मद्रास (चेन्नई), बॉम्बे (मुंबई), कलकत्ता (कोलकाता), लाहौर (पाकिस्तान) और रंगून (यांगून, बर्मा ) सेंसर बोर्ड पुलिस चीफ के अंडर आता था। पहले रीजनल सेंसर्स स्वतंत्र थे। आजादी के बाद रीजनल सेंसर्स को बॉम्बे बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर्स के अधीन कर दिया गया। उसके बाद 1952 में सिनेमैटोग्राफ एक्ट लागू होने के बाद बोर्ड का ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सेंसर्स’ के नाम से पुनर्गठन हुआ। 1983 में फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े एक्ट में कुछ बदलाव किए गए और इस संस्था का नाम ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ यानी ‘सीबीएफसी’ रखा गया। क्या सीबीएफसी को फिल्म बैन करने का अधिकार है? सिनेमैटोग्राफी एक्ट 1952 और सिनेमैटोग्राफी के नियम में 1983 में आए बदलाव के मुताबिक सेंसर बोर्ड किसी भी फिल्म पर बैन नहीं लगा सकता है। वह सिर्फ फिल्म को सर्टिफिकेट देने से इनकार कर सकता है। ऐसी स्थिति में फिल्म थिएटर में रिलीज नहीं की जा सकती है। सीधे तौर पर यह बैन जैसी ही स्थिति होती है। केंद्र सरकार ने इस मसले पर 31 मार्च 2022 को राज्यसभा में कहा था कि सेंसर बोर्ड किसी फिल्म को बैन नहीं कर सकता, लेकिन सिनेमैटोग्राफी एक्ट के तहत दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर सर्टिफिकेट देने से मना जरूर कर सकता है। सीबीएफसी कैसे काम करता है? सीबीएफसी यानी सेंसर बोर्ड के पास फिल्म के सर्टिफिकेशन के लिए अधिकतम 68 दिनों का समय होता है। पहले फिल्म के आवेदन की जांच की जाती है। इसमें एक हफ्ते का समय लगता है। इसके बाद फिल्म को जांच समिति के पास भेजा जाता है। उनके पास फिल्म की जांच के लिए 15 दिनों का समय होता है। जांच समिति फिल्म को सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष के पास भेजती है। सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष फिल्म की जांच के लिए अधिकतम 10 दिनों का समय ले सकता है। इसके बाद 36 दिनों के भीतर सेंसर बोर्ड आवेदक को जरूरी कट्स के बारे में जानकारी और सर्टिफिकेट प्रदान करता है। सेंसर बोर्ड के नाम को लेकर कन्फ्यूजन क्यों है? दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान बॉलीवुड के जाने-माने प्रोड्यूसर और सेंसर बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी ने कहा कि लोग ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन’ और सेंसर बोर्ड के नाम को लेकर कन्फ्यूजन में हैं। निहलानी ने कहा- मिनिस्ट्री से लेकर पब्लिक तक इस कन्फ्यूजन में हैं कि इसे क्या बोलना चाहिए। मेरे कार्यकाल में केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने इंडस्ट्री में यह हवा फैला दी थी कि सेंट्रल सर्टिफिकेशन बॉडी है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि सीबीएफसी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन है या सेंसर बोर्ड।
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