टीवी और फिल्मों में शब्बीर अहलूवालिया अपनी रोमांटिक, माचो और रॉकस्टार इमेज के लिए मशहूर हैं। उनकी पत्नी कांची कौल खूबसूरती और बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं। दोनों करीब 18 साल से साथ हैं और अब कलर्स के शो ‘धमाल विद पति, पत्नी और पंगा सीजन 2’ में कंटेस्टेंट हैं। शो में दर्शकों को उनकी नोकझोंक, मस्ती और साथ बिताए पलों की झलक मिलेगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में शब्बीर और कांची ने कहा कि वे आइडल कपल कहलाने के बजाय अपनी असली केमिस्ट्री दिखाना चाहते हैं। उन्होंने एक-दूसरे की खूबियों, पहली मुलाकात, रोमांस के अंदाज और शो से जुड़े मजेदार किस्सों पर भी बात की। सवाल: शब्बीर भाई पर्दे पर अपनी रोमांटिक, माचो और रॉकस्टार इमेज के लिए मशहूर हैं। क्या असल जिंदगी में भी वे उतने ही हीरो हैं? कांची, आपके लिए घर का असली हीरो कौन है? जवाब/कांची: असल जिंदगी में भी शब्बीर वैसे ही हैं। मेरे लिए वे हमेशा एवरग्रीन रॉकस्टार रहेंगे। बाहर से जितने माचो दिखते हैं, अंदर से उतने ही सॉफ्ट और भावुक हैं। उनका दिल बहुत मुलायम है। भावनाएं जाहिर करने का उनका तरीका अलग है, लेकिन वे बहुत इमोशनल हैं। वे जिंदगी भी रॉकस्टार की तरह जीते हैं। सवाल: हमने हमेशा आप दोनों को आइडल कपल के तौर पर देखा है। ‘पति, पत्नी और पंगा’ में काफी मस्ती और नोकझोंक होती है। आप इस शो का हिस्सा बनने के लिए कैसे तैयार हुए? जवाब/शब्बीर: हमें आइडल कपल बनना पसंद नहीं है। हम चाहते हैं कि लोग हमें अनआइडल कपल के तौर पर देखें। कांची: हमें लगा कि दर्शकों ने अब तक हमारी जिंदगी का यह पहलू नहीं देखा है। मैं भी काफी समय बाद पर्दे पर नजर आ रही हूं। हमने पहले कभी साथ काम नहीं किया था। हमने सोचा कि अपनी असली केमिस्ट्री और रोजमर्रा की नोकझोंक दर्शकों से साझा करने का यह अच्छा मौका है। हम अपनी मस्तीभरी जिंदगी की कुछ झलकियां भी दिखाना चाहते थे। सवाल: शब्बीर, आप दोनों को इस शो में साथ आने का फैसला कैसे सही लगा? जवाब/शब्बीर: हमने शो का पहला सीजन देखा था और हमें बहुत मजा आया था। सभी कपल्स इसे खूब एंजॉय कर रहे थे। हम 18 साल से साथ हैं, लेकिन कभी किसी शो में साथ काम नहीं किया था। इसलिए हमें लगा कि यह अच्छा मौका है। यह मजेदार शो विवादों के बजाय कपल्स और उनके रिश्तों पर ध्यान देता है। यह अच्छी बात है। यह साफ-सुथरा मनोरंजन है, जिसे पूरा परिवार साथ बैठकर देख सकता है। दर्शकों को भरोसा रहेगा कि इसमें कुछ गलत नहीं दिखाया जाएगा। कांची: हर शादी और रिश्ता अलग होता है। शो में सभी कपल्स की अपनी कहानी है। दर्शक किसी न किसी कपल या उसके रिश्ते से जुड़ी घटना में खुद को देख पाएंगे। शादीशुदा जिंदगी की छोटी-छोटी बातें ही शो को मजेदार बनाती हैं। सवाल: शो की शूटिंग के दौरान कोई ऐसा मजेदार किस्सा हुआ, जिससे आपको एक-दूसरे के बारे में कुछ नया पता चला हो? जवाब/शब्बीर: मजेदार किस्से बहुत हुए हैं। कई बार हम उन घटनाओं का हिस्सा बनने के बजाय वहां हो रही हंसी-मजाक का आनंद ले रहे थे। हम उनके बारे में ज्यादा नहीं बता सकते, क्योंकि वे शो के खास हिस्से और एपिसोड के हाई पॉइंट्स हैं। कांची: बिल्कुल, ऐसे कई किस्से हुए हैं। यही वजह है कि दर्शकों को शो देखना चाहिए। अगर हम अभी सारे मजेदार किस्से बता देंगे, तो देखने के लिए क्या बचेगा! सवाल: आपके लिए तो आप दोनों ही सबसे अच्छे कपल हैं, लेकिन शो में आपके अलावा कौन-सा कपल सबसे दिलचस्प लगा? जवाब/कांची: सभी कपल्स दिलचस्प हैं और एक-दूसरे से काफी अलग हैं। उनकी नोकझोंक, व्यवहार और शादीशुदा जिंदगी जीने का तरीका भी अलग है। यही विविधता शो को खास बनाती है। शब्बीर: कई बार शूटिंग के दौरान शो का हिस्सा होने के बावजूद हम दर्शक बन जाते हैं। दूसरे कपल्स की नोकझोंक का आनंद लेने लगते हैं। तब लगता है कि शो अच्छा बन रहा है और दर्शकों को भी इसे देखने में मजा आएगा। जब हमें शूटिंग में इतना मजा आता है, तो घर पर देखने वाले दर्शक भी इसे एंजॉय करेंगे। सवाल: पहली बार एक-दूसरे को देखकर क्या इंप्रेशन बना था? जवाब/शब्बीर: मेरा पहला इंप्रेशन जबरदस्त था। कांची को पहली बार देखकर मेरे मुंह से निकला, ‘ओह माय गॉड! ये कितनी खूबसूरत हैं!’ धीरे-धीरे पता चला कि वे खूबसूरत होने के साथ समझदार भी हैं। मेरे लिए यह सोने पर सुहागा था। कांची: उन्हें देखकर मेरा इंप्रेशन बहुत तगड़ा था। मैंने सोचा था कि ये कितने हॉट हैं! आज भी उन्हें देखकर या उनसे मिलकर मेरा इंप्रेशन वही रहता है। उनके लुक के साथ-साथ उनका मजबूत व्यक्तित्व भी मुझे पसंद आया। वे अंदर से भी बहुत मजबूत हैं। सवाल: आप दोनों में पहले किसने प्रपोज किया और दूसरे को कैसे मनाया? जवाब/शब्बीर: मैंने ही पहले प्रपोज किया था। हम अच्छे दोस्त बने और किसी भी विषय पर बात करने में झिझकते नहीं थे। उन्हीं बातचीत के दौरान हमारा रिश्ता आगे बढ़ता गया। सवाल: आजकल सोशल मीडिया पर परफेक्ट कपल दिखने का दबाव रहता है। आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब/शब्बीर: यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप दूसरों को क्या दिखाना चाहते हैं। मेरे हिसाब से परफेक्ट कपल की कोई एक परिभाषा नहीं है। हर रिश्ते में वही चीजें मायने रखती हैं, जो उस कपल के लिए सही हों। कांची: अगर आप सिर्फ दूसरों को दिखाने के लिए रिश्ता निभाते हैं, तो वह आदर्श रिश्ता नहीं है। असल जिंदगी में दो लोगों के व्यक्तित्व अलग होते हैं। लेकिन हर परिस्थिति में टीम की तरह साथ चलना ही रिश्ते की खूबसूरती है। नोक-झोंक हो या मस्ती, एक-दूसरे का साथ देना जरूरी है। शब्बीर: बिल्कुल। कोई कपल दिनभर झगड़ता है, तो कोई बिल्कुल नहीं। दोनों के रिश्ते अपने तरीके से खूबसूरत हो सकते हैं। कहीं नोक-झोंक में प्यार होता है, तो कहीं खामोशी भी बहुत कुछ कह देती है। हर कपल का रिश्ता अलग होता है। सवाल: इतने साल की शादी के बाद, रिश्ता खूबसूरत बनाए रखने के लिए आप क्या सलाह देंगे? जवाब/शब्बीर: मेरी सलाह है कि जिसके साथ आप हैं, उसके साथ वक्त बिताने में मजा आना चाहिए। साथ समय बिताते हुए पता ही न चले कि वक्त कब बीत गया। कांची: जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। हर परिस्थिति का सामना टीम की तरह करने से असहमति के बावजूद रिश्ता मजबूत रहता है। एक-दूसरे का सम्मान करना जरूरी है। कई बार साथी से ऐसी बात कहनी पड़ सकती है, जो उसे पसंद न आए। लेकिन बात सही तरीके से और सम्मान के साथ कहने से चीजें आसान हो जाती हैं। रिश्ते में सम्मान बनाए रखें और खूब मस्ती भी करें। मेरे हिसाब से रिश्ता अच्छा रखने का यही तरीका है। सवाल: कांची, शब्बीर को दूसरी एक्ट्रेस के साथ रोमांटिक सीन करते देखकर कभी जलन हुई है? जवाब/कांची: नहीं, बिल्कुल नहीं। पर्दे पर कई शादियां हो चुकी हैं। पता नहीं, कितने हनीमून भी हो चुके हैं। सवाल: शब्बीर, कांची को मनाने का आपका सबसे आजमाया हुआ तरीका क्या है? जवाब/शब्बीर: वह नाराज ही नहीं होतीं, इसलिए मुझे उन्हें मनाने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर कभी नाराजगी हो भी, तो हम बात करके मामला खत्म कर लेते हैं। सवाल: आप दोनों की जोड़ी पर बॉलीवुड की किस फिल्म का टाइटल सबसे ज्यादा सूट करेगा? जवाब/शब्बीर: ‘बंटी और बबली’। सवाल: ऐसा क्यों? जवाब/कांची: क्योंकि हम दोनों बहुत मस्तीखोर हैं। हम मन में आने वाली बातें करते हैं। हमें साथ में मस्ती करना बहुत पसंद है। सवाल: आप दोनों को एक-दूसरे का मूड खराब होने का कितनी जल्दी पता चलता है और उसे ठीक कैसे करते हैं? जवाब/कांची और शब्बीर: तुरंत पता चल जाता है। हम एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं और पहले से अंदाजा होता है कि कौन-सी बात दूसरे का मूड खराब कर सकती है। सवाल: क्या आपमें से कोई झगड़ा खत्म होने के बाद भी मन में जवाब तैयार करता रहता है? जवाब/कांची और शब्बीर: नहीं, बिल्कुल नहीं। हम तो सीधे WWF करते हैं। सवाल: कांची, शब्बीर की कौन-सी खूबी आपके लिए सबसे बड़ा ग्रीन फ्लैग है? जवाब/कांची: मैं आज तक शब्बीर जैसा अच्छे दिल वाला इंसान से नहीं मिली। उनके मन में किसी के लिए नकारात्मक भावना नहीं रहती। कोई उनके साथ गलत भी करे, तो वह कहते हैं, जाने दो, छोड़ो। हम अपनी जिंदगी जीते हैं। वह किसी के प्रति नकारात्मकता नहीं रखते। यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। सवाल: शब्बीर, कांची की सबसे अच्छी खूबी क्या है? जवाब/शब्बीर: कांची के विचार स्पष्ट हैं। उनके लिए चीजें या तो सही होती हैं या गलत। उनके मन में कोई ग्रे जोन नहीं है। उनकी स्पष्ट सोच के साथ-साथ उनमें बहुत प्यार भी है। जो लोग कांची को नहीं जानते, उन्हें समझने में थोड़ा वक्त लग सकता है। लेकिन वह दिल की बहुत अच्छी हैं। उनका दिल सोने जैसा है। सवाल: अगर आपको एक-दूसरे को बॉलीवुड का किरदार देना हो, तो क्या देंगे? जवाब/कांची: मेरे लिए शब्बीर रॉकस्टार हैं। शब्बीर: मेरे लिए कांची अप्सरा हैं। सवाल: आप दोनों में ज्यादा फिल्मी, रोमांटिक और प्रैक्टिकल कौन है? जवाब/कांची और शब्बीर: कांची ज्यादा प्रैक्टिकल हैं। हम दोनों फिल्मी हैं, लेकिन अलग-अलग अंदाज में। हमारा फिल्मी अंदाज मस्तीभरा और मजाकिया है। हम खूब मस्ती करते हैं। हम बंटी और बबली जैसे हैं- एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं और अलग भी। सवाल: रोमांटिक कौन ज्यादा है? जवाब/कांची और शब्बीर: हम दोनों रोमांटिक हैं, लेकिन हमारे लिए रोमांस का मतलब अलग है। हम फूल देने या पारंपरिक तरीके से प्यार जताने में ज्यादा विश्वास नहीं करते। हमारे लिए ट्रैकिंग, डाइविंग, साथ खाना और खाना बनाना भी रोमांस है। हमारे रिश्ते में बातचीत और साथ बिताए पलों की अहमियत है। हम अपने तरीके से प्यार जताते हैं। सवाल: बॉलीवुड में आपका पसंदीदा आइडल कपल कौन है? जवाब/कांची और शब्बीर: रितेश देशमुख और जेनेलिया डिसूजा। वे हमारे अच्छे दोस्त भी हैं। सवाल: आपके फैंस आपके और आपके रिश्ते के बारे में काफी कुछ जानते हैं। क्या कोई ऐसा राज है, जो अब तक लोगों को नहीं पता और आप बताना चाहेंगे? जवाब/कांची और शब्बीर: इसके लिए आपको ‘पति-पत्नी और पंगा’ देखना होगा। शो में हमारे बारे में कई मजेदार बातें जानने को मिलेंगी।
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शब्बीर अहलूवालिया के रोमांटिक सीन पर कांची ने ली चुटकी:बोलीं- कितनी शादियां और हनीमून हो चुके, अब जलन नहीं होती
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रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर संगीतकार देवा का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, 400 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत
दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार देवा का शनिवार, 17 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हो गया। वे 75 साल के थे। देवा ने सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर इंट्रो म्यूजिक को अपनी धुनों से खास पहचान दी थी। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा की 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया। उनके निधन से दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे संगीतकार देवा को शनिवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद चेन्नई के सूर्या हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उपचार के बावजूद 75 वर्षीय देवा को नहीं बचाया जा सका। वे उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे। रजनीकांत की फिल्मों के इंट्रो म्यूजिक से मिली खास पहचान देवा का पूरा नाम देवनासन चोक्कालिंगम था। उन्हें तमिल फिल्म इंडस्ट्री में ‘थेनिसाई थेंद्रल’ के नाम से जाना जाता था। इस उपाधि का अर्थ है ‘मधुर संगीत की बयार’। रजनीकांत की फिल्मों में सुपरस्टार के नाम के साथ बजने वाली मशहूर धुन को तैयार करने का श्रेय भी देवा को जाता है। साल 1992 में आई फिल्म ‘अन्नामलाई’ के संगीत ने रजनीकांत की स्क्रीन इमेज को एक नई पहचान दी। इसके बाद फिल्म ‘बाशा’ में भी देवा के संगीत ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया। रजनीकांत की फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली यह धुन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई। देवा ने रजनीकांत के साथ ‘अरुणाचलम’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। उनकी धुनों में जोश, दमदार बीट्स और लोक संगीत का ऐसा मेल था, जो रजनीकांत के पर्दे पर आने के अंदाज के साथ खूब जंचता था। 1996 में 36 फिल्मों में दिया संगीत देवा का करियर करीब चार दशक लंबा रहा। इस दौरान उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। साल 1996 उनके करियर के सबसे व्यस्त वर्षों में से एक था। इस साल उन्होंने अकेले 36 फिल्मों में संगीत दिया। तमिल सिनेमा के अलावा उन्होंने तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी काम किया। उनकी खासियत यह थी कि वे लोक संगीत की धुनों को लोकप्रिय फिल्मी संगीत में ढालने में माहिर थे। उन्होंने चेन्नई की गलियों में लोकप्रिय गाना संगीत की शैली ‘गाना’ को मुख्यधारा के तमिल सिनेमा में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एमएस विश्वनाथन ने दिया था ‘थेनिसाई थेंद्रल’ नाम देवा को ‘थेनिसाई थेंद्रल’ की उपाधि दिग्गज संगीतकार एमएस विश्वनाथन ने 1985 में दी थी। चेन्नई के तिरुवेरकाडु मंदिर में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान उन्हें यह नाम मिला था। उस समय देवा भक्ति संगीत के कई एल्बम तैयार कर चुके थे। एमएस विश्वनाथन ने इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री से देवा को फिल्मों में काम देने की अपील भी की थी। उन्होंने देवा की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा था कि उनमें फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता है। इस प्रोत्साहन ने देवा के करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘आसई’ और ‘काधल कोट्टई’ जैसी फिल्मों में भी दिया संगीत देवा ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘आसई’, ‘काधल कोट्टई’, ‘नेरुक्कु नेर’, ‘वाली’, ‘अव्वई षण्मुखी’, ‘खुशी’ और ‘पंचतंत्रम’ शामिल हैं। उनके संगीत में मेलोडी के साथ लोक संगीत और दमदार बैकग्राउंड स्कोर का खास मेल देखने को मिलता था। यही वजह रही कि उन्होंने 1990 के दशक में तमिल फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई। खुशबू सुंदर और विजय सेतुपति ने जताया दुख देवा के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों ने शोक जताया। अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वह करीब 10 दिन पहले ही देवा से मिली थीं। उन्होंने लिखा कि कुछ दिन पहले तक हंसते-मुस्कुराते और आशीर्वाद देते नजर आने वाले देवा का अचानक चले जाना बेहद दुखद है। खुशबू ने उन्हें मधुर संगीत और सरल स्वभाव वाला इंसान बताते हुए कहा कि संगीत और सिनेमा की दुनिया में उनका योगदान बहुत बड़ा है। अभिनेता विजय सेतुपति ने भी देवा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संगीतकार ने तमिल सिनेमा की संगीत दुनिया पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके गीत और संगीत हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेंगे। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने संगीतकार और गायक देवा के निधन पर गहरा दुख जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एर सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से भारतीय फिल्म और संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि देवा के सदाबहार गीत और उनकी विनम्रता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। AICWA ने दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिवार व प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
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रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर संगीतकार देवा का निधन:75 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, 400 से ज्यादा फिल्मों में दिया संगीत
दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज संगीतकार देवा का शनिवार, 17 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हो गया। वे 75 साल के थे। देवा ने सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों के मशहूर इंट्रो म्यूजिक को अपनी धुनों से खास पहचान दी थी। करीब चार दशक के करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम भाषा की 400 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया। उनके निधन से दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे संगीतकार देवा को शनिवार सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद चेन्नई के सूर्या हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें सुबह करीब 8:30 बजे अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उपचार के बावजूद 75 वर्षीय देवा को नहीं बचाया जा सका। वे उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहे थे। रजनीकांत की फिल्मों के इंट्रो म्यूजिक से मिली खास पहचान देवा का पूरा नाम देवनासन चोक्कालिंगम था। उन्हें तमिल फिल्म इंडस्ट्री में ‘थेनिसाई थेंद्रल’ के नाम से जाना जाता था। इस उपाधि का अर्थ है ‘मधुर संगीत की बयार’। रजनीकांत की फिल्मों में सुपरस्टार के नाम के साथ बजने वाली मशहूर धुन को तैयार करने का श्रेय भी देवा को जाता है। साल 1992 में आई फिल्म ‘अन्नामलाई’ के संगीत ने रजनीकांत की स्क्रीन इमेज को एक नई पहचान दी। इसके बाद फिल्म ‘बाशा’ में भी देवा के संगीत ने उनके स्टारडम को और मजबूत किया। रजनीकांत की फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली यह धुन दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुई। देवा ने रजनीकांत के साथ ‘अरुणाचलम’ जैसी फिल्मों में भी काम किया। उनकी धुनों में जोश, दमदार बीट्स और लोक संगीत का ऐसा मेल था, जो रजनीकांत के पर्दे पर आने के अंदाज के साथ खूब जंचता था। 1996 में 36 फिल्मों में दिया संगीत देवा का करियर करीब चार दशक लंबा रहा। इस दौरान उन्होंने 400 से ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। साल 1996 उनके करियर के सबसे व्यस्त वर्षों में से एक था। इस साल उन्होंने अकेले 36 फिल्मों में संगीत दिया। तमिल सिनेमा के अलावा उन्होंने तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी काम किया। उनकी खासियत यह थी कि वे लोक संगीत की धुनों को लोकप्रिय फिल्मी संगीत में ढालने में माहिर थे। उन्होंने चेन्नई की गलियों में लोकप्रिय गाना संगीत की शैली ‘गाना’ को मुख्यधारा के तमिल सिनेमा में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। एमएस विश्वनाथन ने दिया था ‘थेनिसाई थेंद्रल’ नाम देवा को ‘थेनिसाई थेंद्रल’ की उपाधि दिग्गज संगीतकार एमएस विश्वनाथन ने 1985 में दी थी। चेन्नई के तिरुवेरकाडु मंदिर में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान उन्हें यह नाम मिला था। उस समय देवा भक्ति संगीत के कई एल्बम तैयार कर चुके थे। एमएस विश्वनाथन ने इस दौरान फिल्म इंडस्ट्री से देवा को फिल्मों में काम देने की अपील भी की थी। उन्होंने देवा की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा था कि उनमें फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने की क्षमता है। इस प्रोत्साहन ने देवा के करियर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ‘आसई’ और ‘काधल कोट्टई’ जैसी फिल्मों में भी दिया संगीत देवा ने अपने करियर में कई लोकप्रिय फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘आसई’, ‘काधल कोट्टई’, ‘नेरुक्कु नेर’, ‘वाली’, ‘अव्वई षण्मुखी’, ‘खुशी’ और ‘पंचतंत्रम’ शामिल हैं। उनके संगीत में मेलोडी के साथ लोक संगीत और दमदार बैकग्राउंड स्कोर का खास मेल देखने को मिलता था। यही वजह रही कि उन्होंने 1990 के दशक में तमिल फिल्म संगीत की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई। खुशबू सुंदर और विजय सेतुपति ने जताया दुख देवा के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कलाकारों ने शोक जताया। अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने सोशल मीडिया पर दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वह करीब 10 दिन पहले ही देवा से मिली थीं। उन्होंने लिखा कि कुछ दिन पहले तक हंसते-मुस्कुराते और आशीर्वाद देते नजर आने वाले देवा का अचानक चले जाना बेहद दुखद है। खुशबू ने उन्हें मधुर संगीत और सरल स्वभाव वाला इंसान बताते हुए कहा कि संगीत और सिनेमा की दुनिया में उनका योगदान बहुत बड़ा है। अभिनेता विजय सेतुपति ने भी देवा के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संगीतकार ने तमिल सिनेमा की संगीत दुनिया पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके गीत और संगीत हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेंगे। ऑल इंडियन सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA) ने संगीतकार और गायक देवा के निधन पर गहरा दुख जताया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एर सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से भारतीय फिल्म और संगीत जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि देवा के सदाबहार गीत और उनकी विनम्रता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। AICWA ने दिवंगत आत्मा की शांति और उनके परिवार व प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
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