इमोशन, जज्बात एक सरगम की तरह हैं। अगर आप सोच सकते हैं, अगर आपके पास एक मस्तिष्क है, जो आपको इंसान बनाता है, तो आपके भीतर भावनाएं भी होंगी ही। मैं अच्छी-बुरी भावनाओं की बात नहीं कर रहा हूं। सभी प्राणियों में इंसान का दिमाग सबसे बड़ा है। ऐसा क्यों? वैसे आकार में तो हाथी का दिमाग इंसान के दिमाग से बड़ा होगा, क्योंकि उसका शरीर बड़ा होता है। लेकिन शरीर के अनुपात में सबसे बड़ा दिमाग इंसान का होता है। इंसान के शरीर का नर्वस सिस्टम उसके शरीर को पूरी तरह नियंत्रित कर लेता है, लेकिन उसके बाद भी इंसान के दिमाग में इतनी एनर्जी और जगह बचती है कि वह और भी बहुत कुछ कर सकता है। अगर कोई आपको देखकर हाथ हिलाता है, तो दिमाग कहता है कि हाथ हिलाओ। तभी हाथ हिलता है। नर्वस सिस्टम मैसेज भेजता है कि हाथ उठेगा, तो आपका हाथ उठता है। लेकिन जिंदगी के सारे बेसिक काम, जैसे खाना, पीना, परिवार बढ़ाना, ये सब करने के बाद भी इंसान और बहुत कुछ कर सकता है और उसने किया भी है। आप देखिए कि इंसान ने अपना सफर कहां से शुरू किया था और आज वह कहां तक पहुंच गया है। जब इंसान के दिमाग में इतनी जगह है, तो जिन बातों से उसे कभी तकलीफ हुई थी, वे भी उसमें रह जाती हैं, जिसे आप गम कहते हैं। इसी तरह, वे बातें जो बहुत अच्छी लगीं और जो बहुत प्यारी लगीं, उनकी याद और खयाल भी रह जाता है। इसे मोहब्बत कहते हैं। आपके साथ कभी बहुत बुरा हुआ था और जिसने आपको बहुत तकलीफ भी दी थी, उसके खिलाफ गुस्से या नफरत के लिए भी दिमाग में जगह रहती है। हमारे मस्तिष्क में इतनी जगह है कि जो भी घटनाएं और बातें हमारे साथ हुईं, उनसे जो प्रतिक्रियाएं हुईं और आपने उनका जो नतीजा निकाला, वह सब दिमाग में रह जाता है। खास बात यह है कि ये गुण आपके खून में चलते रहते हैं। जब बच्चा जन्म लेता है, तो वह ‘ब्लैंक’ नहीं होता। ऐसा नहीं है कि तब उसके जज्बात नहीं होते। ये सब तो सदियों से हो रहा है और उसके खून में शामिल है। उसके डीएनए में हैं ये जज्बात, अच्छे भी, बुरे भी। और ऐसा इसलिए है कि उसके पास जज्बात रखने की जगह है। वह जो देखता है, सोचता है और जो इंस्टिंक्ट्स (सहज-बोध) उसमें हैं, वे उसके डीएनए में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती आ रही हैं। बच्चा पैदा होता है, उसे भूख लगती है और वह रोने लगता है। ये उसके जज्बात ही हैं, जो उसे रुला देते हैं। मां उसे गले लगाती है, तो वह चुप हो जाता है। ये भी उसके जज्बात हैं, जो उसके खून में उसके साथ हमेशा से चलते आए हैं। लेकिन कुछ जज्बात जिंदगी के तजुर्बों से बनते हैं, और इसलिए बनते हैं, क्योंकि कोई घटना आपके साथ होती है। लेकिन कोई घटना जज्बात नहीं होती है। एक हादसा, एक वाकया जज्बात नहीं है। लेकिन उससे जो आपने महसूस किया, उससे आप जिस नतीजे पर पहुंचे, जिस नतीजे को आप कहीं भी अप्लाई कर सकते थे, वह जज्बात है। और वे जज्बात भी आपके साथ रह जाते हैं। आप उसकी वजह भूल जाते हैं कि यह कैसे बना था, लेकिन वह एहसास आपमें रह जाता है- चाहे वह गम हो, गुस्सा हो या खुशी। ये एक सरगम है। आप उसे लेकर पैदा ही हुए थे, दो-तीन सुर लेकर। लेकिन वक्त के साथ, आपके तजुर्बों से, वह सरगम पूरी होती है। किस वजह से ऐसा हुआ था, यह याद नहीं रहता, लेकिन यह एहसास रह जाता है कि गम क्या है, खुशी क्या है, मोहब्बत क्या है, किसी को ‘मिस’ करना क्या है। ये सारे जज्बात, इमोशन या भावनाओं की एक सरगम आपमें पैदा होने के साथ ही मौजूद होती है, जो जिंदगी के अनुभवों और वक्त के साथ पूरी होती जाती है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
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Tag: लहरलहरगम
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लहर-लहर:गम, खुशी, मोहब्बत भीतर की सरगम हैं… इन जज्बातों के साथ जन्म लेते हैं हम