राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित हुईं ममता कुलकर्णी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने फिल्मी करियर, ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग और इंडस्ट्री से दूरी बनाने के फैसले पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अलवर में ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान, सलमान खान और पूरी टीम के साथ करीब एक महीने बिताया था। ममता ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ना उनके लिए मोहभंग नहीं, बल्कि भीतर से आई आध्यात्मिक जीवन की पुकार थी। ममता कुलकर्णी ने करीब 15 साल के फिल्मी करियर में 48 फिल्मों में काम किया। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाली ममता ने करियर के उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली थीं। राजस्थान लौटने पर उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ने के फैसले और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़ाव पर खुलकर बातचीत की। सवाल: राजस्थान की धरती पर आपको लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जा रहा है। आप इस सम्मान को किस तरह देखती हैं? ममता कुलकर्णी: देखिए, मेरी 48 फिल्में रिलीज हुई हैं और मेरा करीब 15 साल का फिल्मी करियर रहा है। जिंदगी में भाग्य भी बहुत मायने रखता है। भगवान की कृपा और गुरु का आशीर्वाद रहा कि मेरे करियर में ज्यादातर फिल्में हिट या सुपरहिट रहीं। इसलिए जब इतने वर्षों बाद आपको कोई लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान देता है तो वह आपके पूरे सफर को याद करने जैसा होता है। मेरा फिल्मी सफर तमिलनाडु से शुरू हुआ था। मेरी पहली फिल्म एस. चंद्रशेखर की ‘ननबर्गल’ थी। इसके बाद मेरी दूसरी फिल्म ‘प्रेम शिकरम’ थी, जिसने काफी लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने कहा कि नेल्लोर में लोगों ने मेरे नाम का मंदिर तक बना दिया था और इसकी खबर टाइम्स मैगजीन में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद मैं बॉलीवुड में आई। मेरी पहली हिंदी फिल्म ‘तिरंगा’ थी। फिर ‘आशिक आवारा’ ‘क्रांतिवीर’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘आंदोलन’, ‘करण अर्जुन’, ‘घातक’ और ‘नसीब’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। तो जब आज इतने वर्षों के बाद मुझे लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान मिल रहा है तो मेरे लिए यह बहुत भावुक पल है। सवाल: राजस्थान से आपका गहरा जुड़ाव रहा है। आपकी कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई और आपकी एक बेहद लोकप्रिय फिल्म का गाना भी राजस्थान में शूट हुआ। इस जुड़ाव को आप किस तरह देखती हैं? ममता कुलकर्णी: मुझे राजस्थान का खाना बहुत पसंद है। मुझे गट्टे की कढ़ी-चावल और बाजरे की रोटी मेरे पसंदीदा हैं। मेरी कई फिल्मों की शूटिंग राजस्थान में हुई। खास तौर पर ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग अलवर में हुई थी, जहां सलमान खान, शाहरुख खान और फिल्म के दूसरे कलाकारों के साथ वह करीब एक महीने तक रहीं। इसके बाद ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ का ‘भोली भाली लड़की’ वाला हिस्सा जयपुर में शूट हुआ था। ‘नसीब’ की शूटिंग उम्मेद भवन पैलेस में हुई। इसलिए राजस्थान मेरे लिए सिर्फ एक जगह नहीं है, बल्कि मेरे करियर की कई यादों से जुड़ा हुआ है। इतने साल बाद जब मैं राजस्थान वापस आई हूं तो अंदर से बहुत अच्छी और भावुक अनुभूति हो रही है। ऐसा लग रहा है जैसे अपने पुराने सफर के किसी हिस्से में वापस आ गई हूं। सवाल: ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग की कोई खास याद, खासकर शाहरुख खान या सलमान खान के साथ, जिसे आप दर्शकों के साथ साझा करना चाहेंगी? ममता कुलकर्णी: देखिए, उस समय हम सब नए थे। हम सभी अपने-अपने करियर में आगे बढ़ रहे थे और हमारे अंदर बहुत ज्यादा उत्साह और मेहनत करने की भूख थी। जब कोई कलाकार नया होता है तो उसके अंदर खुद को साबित करने की एक अलग ऊर्जा होती है। 1995 मेरे करियर के लिए भी बहुत खास साल रहा। उस साल मेरी करीब 11 फिल्में रिलीज हुई थीं। ‘आंदोलन’ आई, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ आई, आमिर खान के साथ ‘बाजी’ आई, ‘बेकाबू’ आई, ‘करण अर्जुन’ आई और उसके बाद ‘घातक’ जैसी फिल्में भी आईं। ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग के दौरान हम सभी ने जी-जान लगा दी थी। हम नए कलाकार थे और हमारे अंदर बहुत ज्यादा भूख थी कि कुछ अच्छा करना है, अपनी पहचान बनानी है। सुबह से लेकर शाम तक हम लोग बहुत मेहनत करते थे। इसलिए उस फिल्म की शूटिंग की बहुत सारी यादें आज भी मेरे साथ हैं। सवाल: करियर के चरम पर आपने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली। ऐसा क्या हुआ था? ममता कुलकर्णी: जिंदगी में एक समय आता है जब आपको लगता है कि अब कुछ और तलाशना है। मेरे जीवन में भी ऐसा ही समय आया। मेरे अंदर आध्यात्मिक जीवन को लेकर एक आवाज आई। मेरे गुरु मेरे जीवन में आए और उसके बाद मेरा रुझान अध्यात्म की तरफ बढ़ता चला गया। उस समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में ब्रुनेई के सुल्तान ने अपनी बेटी प्रिंसेस हमीदा के जन्मदिन पर मेरे लिए प्राइवेट जेट भेजा था। प्रिसेस मेरी प्रशंसक थीं। एक बार ब्रुनेई में प्रिंसेस हमीदा के जन्मदिन पर मैं गई थी। मैंने उनसे कहा था कि अक्टूबर में मैं शाहरुख के साथ एक शो के लिए आ रही हूं, तुम भी आना। इसके बाद जब हम अक्टूबर में वेम्बली स्टेडियम में शो करने पहुंचे तो मैं बैकस्टेज थी। तभी अली मोरानी दौड़ते हुए मेरे पास आए और बोले- ममता, ममता…। आपने जिस प्रिंसेस हमीदा को बुलाया था, वह अपनी मां और पूरी सिक्योरिटी के साथ आ गई हैं। उन्होंने स्टेडियम का एक पूरा हिस्सा सुरक्षा के लिए खाली करवा दिया था। वह अनुभव मेरे लिए बहुत अलग था। मैंने दुनिया का ग्लैमर, शोहरत और भौतिक जीवन बहुत करीब से देखा। शायद उसी के बाद मेरे भीतर अध्यात्म की तलाश और गहरी होती चली गई। सवाल: राजस्थान फिल्म फेस्टिवल क्षेत्रीय सिनेमा को एक बड़ा मंच देता है। आपको क्या लगता है कि क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने की कितनी जरूरत है? ममता कुलकर्णी: बिल्कुल जरूरत है। फिल्म तो फिल्म होती है, चाहे वह किसी भी भाषा में बनाई गई हो। मैंने खुद कई भाषाओं में काम किया है। मेरी तीसरी फिल्म ‘शेष भोंक सो दो’ बंगाली भाषा की थी। उस समय मैं बहुत व्यस्त थी, लेकिन मुझे राष्ट्रपति की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार से जुड़ा पत्र भी मिला था कि आप आइए, हम आपको सम्मान देना चाहते हैं। मैं खुद एक बहुभाषी अभिनेत्री रही हूं। मेरी मातृभाषा मराठी है, लेकिन मैंने अभी तक मराठी में कोई फिल्म नहीं की। मैंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली सहित कई भाषाओं में काम किया है। भारत की खूबसूरती ही यही है कि यहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और कहानियां हैं। क्षेत्रीय सिनेमा इन्हीं कहानियों को सामने लाता है। इसलिए क्षेत्रीय फिल्मों और कलाकारों को मंच मिलना बहुत जरूरी है।
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ममता कुलकर्णी बोलीं-आध्यात्मिक पुकार पर इंडस्ट्री छोड़ी:48 सुपरहिट फिल्में दी, ब्रुनेई सुल्तान की बेटी ने मेरे लिए स्टेडियम खाली कराया; नेल्लोर में मेरा मंदिर
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जयपुर- फिल्म 'करण अर्जुन’ के गाने पर नाचीं ममता कुलकर्णी:कॉलेज स्टूडेंट्स के साथ किया डांस, बोलीं- डांस और एक्टिंग मनोरंजन नहीं साधना है
एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जयपुर में अपने फेमस गाने पर डांस करती दिखीं। खास बात यह रही कि ममता ने सिर्फ मंच पर प्रस्तुति नहीं दी, बल्कि स्टूडेंंट्स के बीच जाकर उनके साथ भी कदम मिलाए। महारानी कॉलेज की छात्राओं के साथ उन्होंने अपने लोकप्रिय गानों पर डांस किया और कुछ गीत गाकर भी सुनाए। ममता कुलकर्णी राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के तहत शुक्रवार को मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में आयोजित आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट 2026 और इंटर स्कूल-कॉलेज डांस कॉम्पिटिशन के फिनाले में पहुंची थीं। इस दौरान ममता कुलकर्णी ने फिल्म करण अर्जुन के गाने भंगडा पाले, ‘घातक’ के ‘कोई जाए तो ले आए’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ के ‘एक मुंडा मेरी उम्र का’ और ‘लंबा-लंबा घूंघट काहे को डाला’ जैसे गीतों पर डांस किया। इस दौरान स्टूडेंट्स भी उनके साथ शामिल हो गए। ममता ने अपने पुराने फिल्मी अंदाज की झलक दिखाते हुए गीतों की धुन पर डांस किया तो ऑडिटोरियम तालियों से गूंज उठा। यहां देखिए इवेंट के फोटोज…
स्टूडेंट्स से बोलीं- डांस और एक्टिंग को साधना की तरह करें ममता कुलकर्णी ने स्टूडेंट्स से बातचीत करते हुए कहा कि डांस हो या एक्टिंग, इसे केवल मनोरंजन नहीं बल्कि साधना की तरह करना चाहिए। जब तक किसी कला में परफेक्शन नहीं आता, तब तक उसे स्टेज पर पेश करने से बचना चाहिए। उन्होंने स्टूडेंट्स को जिंदगी को लेकर भी एक दिलचस्प सलाह दी। उन्होंने कहा कि जो करना है, उसे आज की सोच के साथ करें। ममता ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई नए कपड़े लेकर आया है और सोच रहा है कि उन्हें किसी खास दिन पहनेगा तो उस दिन का इंतजार करने के बजाय कपड़े उसी दिन पहन लेने चाहिए, जिस दिन वे खरीदे हैं। सोशल मीडिया क्रिएटर्स को मिला सम्मान कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों में पहचान बनाने वाले क्रिएटर्स को आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। आरएफएफ की फाउंडर डायरेक्टर संजना शर्मा ने बताया- नेहा एंड अंशु को बेस्ट फूड इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर, सोमी शर्मा को इमर्जिंग डांस स्टार ऑफ द ईयर, निधि नरवाल को पोएट्री आइकन ऑफ द ईयर और विजय को फादर-डॉटर डिजिटल डुओ ऑफ द ईयर का सम्मान दिया गया। इसी क्रम में ब्यूटीफुल गुलाबी नगरी की अनिशा जैन को सिटी इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर, प्रवीण प्रजापत को यूथ आइकन इन राजस्थानी फोक आर्ट्स, एडवोकेट अमृता वर्मा को लीगल अवेयरनेस क्रिएटर ऑफ द ईयर, द वाइज स्टोरीज की युवरागी राठौड़ को रीजनल स्टोरीटेलर ऑफ द ईयर और चारू असोपा को व्लॉगर ऑफ द ईयर की कैटेगरी में सम्मानित किया गया। प्रोग्रामिंग हेड अनिल जैन ने बताया कि सोशल मीडिया क्रिएटर्स की कैटेगरी उनके कंटेंट और डिजिटल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए तय की गई थीं। कार्यक्रम में खान-पान, कविता, डांस, राजस्थानी लोक कला, कानूनी जागरूकता और क्षेत्रीय कहानियों जैसे अलग-अलग विषयों पर काम करने वाले क्रिएटर्स को मंच मिला। 14 प्रस्तुतियों में दिखी विद्यार्थियों की क्रिएटिविटी इंटर स्कूल-कॉलेज कॉम्पीटिशन के फिनाले में जयपुर के तीन कॉलेज और 11 स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के तहत जयपुर के स्कूल-कॉलेजों में अब तक करीब 100 गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। फिनाले के लिए चयनित विद्यार्थियों ने सामाजिक सरोकार, संस्कृति, कला और रचनात्मकता से जुड़ी अलग-अलग थीम पर कुल 14 प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों को रचनात्मक अंदाज में मंच पर पेश किया। कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के साथ विद्यार्थियों की ऊर्जा और उत्साह भी देखने को मिला। प्रतियोगिता में महारानी कॉलेज की टीम विजेता रही। विजेता टीम को 25 हजार रुपए और ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं कनोडिया कॉलेज की टीम दूसरे स्थान पर रही, जिसे 5 हजार रुपए और ट्रॉफी दी गई। विजेताओं को ममता कुलकर्णी और अतिथियों ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में आरएफएफ की फाउंडर डायरेक्टर संजना शर्मा और राजस्व, उपनिवेशन एवं सैनिक कल्याण विभाग के राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी सहित आयोजन से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे।
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