दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का शनिवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने चेन्नई के कावेरी अस्पताल में आखिरी सांस ली। उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनका अस्पताल में इलाज चल रहा था। सिंगीतम ने ‘पुष्पक विमानम’ और ‘आदित्य 369’ समेत तेलुगु, कन्नड़, तमिल, हिंदी और अंग्रेजी में करीब 60 फिल्मों का निर्देशन किया था। उन्हें दो नेशनल फिल्म अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिले। 94 साल की उम्र में उन्होंने अपनी आखिरी फिल्म ‘सिंग गीथम’ निर्देशित की थी। यह फिल्म 12 जून 2026 को रिलीज हुई थी। तेलुगु और तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। कमल हासन, जूनियर NTR, श्रुति हासन, नाग अश्विन, महेश बाबू ने उनके निधन पर दुख जताया। सिंगीतम श्रीनिवास राव का फिल्मी सफर सिंगीतम श्रीनिवास राव ने फिल्मी करियर की शुरुआत दिग्गज निर्देशक के.वी. रेड्डी के सहायक के तौर पर की। उन्होंने ‘मायाबाजार’ और ‘जगदेक वीरुनी कथा’ जैसी फिल्मों में काम किया। साल 1972 में तेलुगु फिल्म ‘नीति-निजायती’ से निर्देशन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी में करीब 60 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘दिक्कत्र पार्वती’, ‘मयूरी’, ‘पुष्पक विमानम’, ‘आदित्य 369’, ‘भैरव द्वीपम’, ‘मगलिर मत्तुम’ और ‘माइकल मदना काम राजन’ शामिल हैं। कमल हासन के साथ खास साझेदारी सिंगीतम और कमल हासन ने कई चर्चित फिल्मों में साथ काम किया। इनमें ‘पुष्पक विमानम’, ‘अपूर्व सगोदरगल’ और ‘माइकल मदना काम राजन’ शामिल हैं। ‘पुष्पक विमानम’ में बिना संवाद के कहानी बताने का प्रयोग किया गया था। हिंदी सिनेमा में भी किया काम सिंगीतम ने हिंदी और हिंदी समेत कई भाषाओं में बनी फिल्मों का निर्देशन किया। इनमें ‘थ्रिलोक सुंदरी’ (1982), ‘लिटिल जॉन’ (2001), ‘मुंबई एक्सप्रेस’ (2005) और एनिमेशन फिल्म ‘घटोत्कच’ (2008) शामिल हैं। ‘फूल’ (1993) भी उनकी हिंदी फिल्मों में शामिल रही। ‘पुष्पक’ की खास पहचान ‘पुष्पक विमान’ 27 नवंबर 1987 को रिलीज हुई थी। फिल्म 27 नवंबर 1987 को रिलीज हुई थी। अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से रिलीज किया गया था। कर्नाटक में इसका मूल नाम ‘पुष्पक विमान’ था। आंध्र प्रदेश में इसे ‘पुष्पक विमानम’ नाम से रिलीज किया गया। हिंदी भाषी क्षेत्रों में फिल्म का नाम ‘पुष्पक’ रखा गया, जिसका अर्थ ‘फूल’ है। तमिलनाडु में इसे ‘पेसुम पडम’ नाम से रिलीज किया गया, जिसका अर्थ ‘बोलती तस्वीर’ है। वहीं केरल में इसे ‘पुष्पकविमानम’ नाम से रिलीज किया गया। फिल्म में कोई संवाद नहीं था। इसके बावजूद इसे दर्शकों और समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली। बेंगलुरु में फिल्म 35 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चली। फिल्म को बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 35वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ में सिंगीतम को बेस्ट डायरेक्टर और कमल हासन को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। फिल्म को बेस्ट फिल्म का पुरस्कार भी मिला। प्रयोगात्मक फिल्मों के लिए पहचान सिंगीतम अलग तरह की कहानियों और प्रयोगों के लिए जाने गए। ‘दिक्कत्र पार्वती’ को भी नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। ‘आदित्य 369’ को तेलुगु सिनेमा की चर्चित साइंस फिक्शन फिल्मों में गिना जाता है, जबकि ‘भैरव द्वीपम’ फैंटेसी शैली की प्रमुख फिल्मों में शामिल रही। आखिरी फिल्म तक सिनेमा से जुड़े रहे साल 2026 में सिंगीतम ने करीब 10 साल बाद निर्देशन में वापसी की। उनकी आखिरी फिल्म ‘सिंग गीथम’ थी। 94 साल की उम्र तक वह सिनेमा से जुड़े रहे और नई कहानियों पर काम करते रहे। कमल हासन ने खुद को शिष्य बताया कमल हासन ने रविवार को X पर सिंगीतम की तस्वीर शेयर की। उन्होंने खुद को सिंगीतम का शिष्य बताया और उनके साथ काम करने का अनुभव याद किया। कमल हासन ने लिखा, “सिंगीतम कारू ने अपनी इच्छा के अनुसार, अपनी जवानी के साथ ही आखिरी सांस ली। उनकी जवानी बहुत लोगों तक नहीं पहुंची। उस खूबी को फैलाने की चाहत में, जिन दोस्तों का हाथ पकड़कर वे चले, उन शिष्यों में मैं भी एक हूं।” उन्होंने आगे लिखा, “कम उम्र में मरना हमेशा दुखद नहीं होता। यह गौरवपूर्ण भी हो सकता है। सिंगीतम श्रीनिवास राव इसका शानदार उदाहरण हैं। जब से मैंने उन्हें जाना, तब से उनकी प्रशंसा की है। अब मैं भी उनके जैसे जीने की इच्छा रखता हूं।” जूनियर NTR ने बताया समय से आगे सोचने वाला फिल्ममेकर जूनियर NTR ने X पर सिंगीतम को समय से आगे सोचने वाला फिल्ममेकर बताया। उन्होंने लिखा, “सिंगीतम श्रीनिवास राव गरु के नहीं रहने की खबर बेहद दुखद है।” उन्होंने आगे लिखा, “‘आदित्य 369’, ‘पुष्पक विमानम’, ‘मयूरी’… वे समय से आगे सोचने वाले फिल्ममेकर थे। उन्होंने ऐसी फिल्में बनाईं, जो कई पीढ़ियों के बाद भी नई लगती हैं। उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ओम शांति।” नाग अश्विन ने साझा किया आखिरी स्क्रिप्ट आइडिया फिल्ममेकर नाग अश्विन ने सिंगीतम की क्रिएटिव सोच की एक झलक साझा की। उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर सिंगीतम के एक मैसेज का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया। यह मैसेज 5 सितंबर 2026 का था। इसमें लिखा था, “ए फ्रूट कट्स द नाइफ, मेरी नई स्क्रिप्ट का टाइटल।” महेश बाबू ने भी दी श्रद्धांजलि महेश बाबू ने X पर सिंगीतम को भारतीय सिनेमा का दिग्गज बताया। उन्होंने लिखा, “भारतीय सिनेमा का एक दिग्गज अब हमारे बीच नहीं है। सिंगीतम श्रीनिवास राव गरु हर मायने में एक लीजेंड थे।” महेश बाबू ने आगे लिखा, “वे असाधारण कल्पना, साहस और प्रतिभा वाले फिल्ममेकर थे। भारतीय सिनेमा हमेशा उनका ऋणी रहेगा। सर, आपकी आत्मा को शांति मिले। आपके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।”
Source link
Tag: द
-

फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का निधन:94 साल की उम्र में अपनी आखिरी फिल्म का निर्देशन किया था, कमल हासन-जूनियर NTR ने दी श्रद्धांजलि
-

फिल्म रामायण के बिहाइंड द सीन विजुअल आए:रणबीर बोले- ये सिर्फ रोल नहीं, जिम्मेदारी है; देखिए ग्रीन स्क्रीन में किस तरह हुई फिल्म की शूटिंग
28 सितंबर 2026 को रणबीर कपूर के 44वें जन्मदिन के खास मौके पर मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण का बिहाइंड द सीन वीडियो जारी किया गया है। फिल्म के कई हिस्सों को ग्रीन स्क्रीन में शूट कर VFX के जरिए भव्य इमारत में तब्दील किया गया है। इस दौरान रणबीर कपूर ने भगवान राम का किरदार निभाने की जिम्मेदारी पर भी बात की है। देखिए कैसे ग्रीन स्क्रीन पर हुई रामायण की शूटिंग- रणबीर कपूर ने भगवान राम का किरदार निभाने की जिम्मेदारी पर कहा है कि यह सिर्फ फिल्म का रोल नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “यह रोल नहीं है। ऐसा नहीं है कि मुझे एक फिल्म ऑफर हुई और यह रोल रोमांचक लगा। यह एक जिम्मेदारी है।” अरुण गोविल की बात रणबीर को याद रही रणबीर ने अरुण गोविल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि अरुण सर हम सभी के लिए आइकॉनिक भगवान राम हैं। रणबीर ने बताया कि अरुण गोविल की एक बात उनके मन में रह गई। उन्होंने कहा, “क्षमा धर्म, क्षमा यज्ञ, क्षमा वेद, सनातन। भगवान राम की सबसे बड़ी शक्ति उनका धनुष नहीं था। वह उनकी क्षमा थी। उनके अंदर माफ करने की क्षमता थी।” रणबीर की कास्टिंग पर अरुण गोविल ने कहा- ‘मौजूदा समय में जितने भी स्टार्स हैं, रणबीर उन सबसे राम का किरदार निभाने के सबसे करीब हैं।’ फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें- प्रमोशनल इवेंट में हुआ था विवाद रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर ‘रामायण’ के प्रचार को लेकर शनिवार को मुंबई के फिल्म सिटी स्थित प्राइम फोकस स्टूडियो में खास कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम का पहला समय दोपहर 12 बजे बताया गया था, जिसे बाद में दोपहर 1 बजे कर दिया गया। तय समय के अनुसार मीडिया कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गया, लेकिन बातचीत शुरू होने में करीब साढ़े चार घंटे की देरी हुई। इस दौरान रणबीर कपूर, साई पल्लवी, निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी समेत फिल्म की टीम मौजूद थी। देरी की वजह मिस्टर बीस्ट के कार्यक्रम में देर से पहुंचने को बताया गया। मिस्टर बीस्ट की वजह से हुई देरी कार्यक्रम में मिस्टर बीस्ट की मौजूदगी को लेकर पहले से काफी उत्सुकता थी। उन्हें ‘रामायण’ की टीम के साथ विशेष बातचीत में शामिल होना था। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद मीडिया को बताया गया कि मिस्टर बीस्ट इससे पहले दो उड़ानें मिस कर चुके थे और उनके देर से पहुंचने के कारण कार्यक्रम में देरी हुई। उनके पहुंचने के बाद ही फिल्म की टीम के साथ तय बातचीत आगे बढ़ी। मीडिया के लिए आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों ने अपना समय निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रखा था। ऐसे में लंबे इंतजार को लेकर कई मीडिया प्रतिनिधियों में असंतोष देखने को मिला। मिस्टर बीस्ट को रणबीर ने बताया राम का परिचय इवेंट के दौरान एक पैपराजी ने मिस्टर बीस्ट से ‘जय श्री राम’ कहा। मिस्टर बीस्ट जवाब देने को लेकर असमंजस में दिखे, जिसके बाद रणबीर कपूर ने उन्हें ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए कहा। मिस्टर बीस्ट ने भी रणबीर की बात दोहराई। इसके बाद रणबीर ने मिस्टर बीस्ट को भगवान राम के बारे में बताते हुए कहा कि वे राजकुमार थे और उनके पास सब कुछ था, लेकिन पिता के वचन और अपने कर्तव्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने सब त्याग दिया। रणबीर ने कहा कि भगवान राम को एक आदर्श पुरुष के रूप में जाना जाता है और उम्मीद है कि फिल्म के जरिए मिस्टर बीस्ट को भारतीय संस्कृति और इतिहास की झलक मिलेगी। इवेंट में रणबीर ने उठाया शिव धनुष कार्यक्रम में रणबीर कपूर शिव धनुष उठाते हुए भी नजर आए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया। इवेंट में रणबीर के साथ साई पल्लवी, रवि दुबे, नितेश तिवारी और नमित मल्होत्रा भी मौजूद रहे। मिस्टर बीस्ट की मौजूदगी को फिल्म के अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। उनकी वैश्विक लोकप्रियता को देखते हुए निर्माताओं की कोशिश ‘रामायण’ को भारतीय दर्शकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की है। रामायण: पार्ट-1 दिवाली के मौके पर 6 नवंबर को रिलीज होने के लिए शेड्यूल है। जबकि पार्ट 2 को दिवाली 2027 पर रिलीज करने की योजना है। देखिए फिल्म से सभी कलाकारों के लुक- शांत, तेजस्वी और मर्यादा पुरुषोत्तम की छवि में रणबीर कपूर का लुक प्रभावशाली नजर आया। भगवान राम के प्रति समर्पित लक्ष्मण के रोल में रवि दुबे हैं। माता सीता के किरदार में साई पल्लवी के लुक में सादगी और शालीनता नजर आ रही है। दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और खतरनाक अंदाज में रावण बने यश सबसे ज्यादा चर्चा में है। गरिमामयी व्यक्तित्व के साथ अरुण गोविल का दशरथ का रोल प्रभावी लगा। वह रामायण शो में पहले राम बन चुके हैं। फिल्म ‘रामायण’ में लारा दत्ता कैकेयी के किरदार में हैं। फिल्म ‘रामायण’ में रकुल प्रीत सिंह रावण की बहन शूर्पणखा का किरदार निभा रही हैं।
Source link -

लता मंगेशकर की बर्थ एनिवर्सरी:पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- आपका योगदान युग-युगांतर तक स्मरणीय रहेगा, इनका गाना सुन रोए जवाहरलाल नेहरू, जानिए कहानी
लीजेंड्री गायिका लता मंगेशकर की आज 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। लता मंगेश्कर का जन्म 28 सितंबर 1929 में हुआ था। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘अपनी दिव्य गायन प्रतिभा से विश्व में देश का नाम रोशन करने वालीं आदरणीया लता दीदी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने भारतवर्ष को न केवल अपने सुमधुर सुरों से सजाया-संवारा, बल्कि देश की समृद्धि से जुड़ी हर पहल को भी सदैव प्रोत्साहित किया। भारतीय संगीत जगत में उनका अप्रतिम योगदान युग-युगांतर तक स्मरणीय रहेगा।’ लता मंगेशकर की बर्थ एनिवर्सरी पर पढ़िए, स्वरकोकिला बनने की कहानी, गानों के चुनिंदा किस्सों के साथ- 28 सितंबर 1929 को लता दीदी का जन्म इंदौर के एक सिख मोहल्ले में मौसी के घर हुआ। उन्होंने 5 साल की उम्र से ही संगीत सिखाना शुरू कर दिया था। वहीं 9 साल की उम्र से वो अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर के साथ नाटक कंपनी में शोज करने लगीं। 1940-41 के आसपास दिल्ली में ऑल इंडिया रेडियो के बुलावे पर लता दीदी पिता के साथ पहली बार रिकॉर्डिंग के लिए गई थीं। 24 अप्रैल 1942 को पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। पहले गाने के लिए मिली 25 रुपए फीस पिता के निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी लता दीदी के कंधों पर आ गई थी। इसी दौरान पिता के दोस्त और फिल्ममेकर मास्टर विनायक ने उन्हें अपनी मराठी फिल्म पहिली मंगला गौर के लिए अप्रोच किया। पैसों की जरूरत थी तो उन्होंने हां कर दी और फिल्म में एक छोटा सा रोल भी किया। साथ में उन्होंने फिल्म के गाने नटली चैत्राची नवलाई गाना भी गाया। इस गाने के लिए उन्हें 25 रुपए फीस मिली थी और फिल्म में रोल के लिए कुल 300 रुपए। इसके बाद उन्होंने मास्टर विनायक की कंपनी में काम किया। अपनी बायोग्राफी में लता मंगेश्कर ने कहा, ‘13 साल की उम्र में पूरे परिवार की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई थी। ऐसे में न चाहते हुए भी मुझे फिल्मों में काम करना पड़ा। घर में मां के अलावा चार भाई-बहनों की परवरिश एक चुनौती थी, जिसके लिए फिल्मों में काम करने का रास्ता ही मुझे ठीक लगा।’ पैसों की कमी की वजह से घर खाली करने की नौबत आ गई थी दीनानाथ मंगेशकर के निधन के बाद लता दीदी पूरे परिवार को लेकर कोल्हापुर आ गई थीं। मास्टर विनायक ने उन्हें एक मकान रहने के लिए दिया। 1947 में मास्टर विनायक का निधन हो गया। इसके बाद उनके रिश्तेदारों ने लता पर घर खाली करने का दबाव डालना शुरू कर दिया। इसी बीच एक कैमरामैन लता से मिलने आए। उन्होंने कहा- एक हरिश्चंद्र बाली हैं, जो आपसे मिलकर आपका गाना सुनना चाहते हैं। अगले दिन उन्होंने जाकर उनसे मुलाकात की। उन्होंने लता को सुना और गाना गाने का मौका दिया। इसके बदले उन्होंने लता को मोटी रकम दी। उसी पैसे से लताजी ने घर का किराया चुकाया। तब जाकर उन्हें उस घर में रहने दिया गया। चाचा ने कहा- परिवार का नाम खराब कर देगी ये लड़की लता मंगेशकर की बायोग्राफी लता सुरगाथा के मुताबिक, ‘14 साल की उम्र में मैं कोल्हापुर से मुंबई एक शो में गाने के लिए अपनी मौसी के साथ गई थी। यहां मैं अपने चाचा कमलनाथ मंगेशकर के घर रुकी थी। घर पहुंचते ही मैं रियाज करने लग गई। मगर चाचाजी मुझसे नाराज थे। उन्होंने मुझे देखकर कहा, ये लड़की भाई दीनानाथ मंगेशकर का नाम खराब कर देगी। कहां वो एक सुधी गायक और कहां ये लड़की। ये लड़की ठीक से गा नहीं पाएगी और पूरे खानदान का नाम मिट्टी में मिल जाएगा। उन लोगों की ये बात सुन मैं बहुत आहत हुई और रोने लगी।’ गाना सुनकर ललिता पवार ने दीं सोने की बालियां अगले दिन लता मंगेशकर परफॉर्मेंस के लिए पहुंचीं। दर्शकों के बीच एक्ट्रेस ललिता पवार भी मौजूद थीं। लता का गाना उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने खुश होकर ईनाम में सोने की बालियां दीं। जब आवाज पतली कहकर रिजेक्ट किया गया लता मंगेशकर को कुछ स्टेज शोज के बाद रिकॉर्डिंग के ऑफर मिलने लगे। एक रिकॉर्डिंग के बीच एक पठान ने उनका गाना सुना और गुलाम हैदर को उनका नाम सुझाया। पठान ने गुलाम हैदर से कहा- कोई एक नई लड़की आई है, जो बहुत ही उम्दा गाती है। आप उसे बुलाकर एक बार जरूर सुनें। मास्टर गुलाम हैदर अली ने मिलने के लिए हामी भर दी। अगले दिन लता मंगेशकर अपनी मौसेरी बहन के साथ मास्टर गुलाम हैदर अली के स्टूडियो मिलने गईं। मास्टर हैदर अली ने लता की मुलाकात प्रोड्यूसर शशधर मुखर्जी से करवाई, जो उस समय फिल्म शहीद पर काम कर रहे थे, लेकिन उन्होंने लता को काम देने से इनकार कर दिया। मुखर्जी ने कहा- इस लड़की की आवाज बहुत पतली है। इस पर मास्टर हैदर अली ने कहा- आने वाले दिनों में प्रोड्यूसर और डायरेक्टर इस लड़की के पैरों में गिरकर अपनी फिल्म में गाना गाने की विनती करेंगे। फिर मास्टर गुलाम हैदर ने ही लता को फिल्म ‘मजबूर’ के गीत ‘अंग्रेजी छोरा चला गया’ में गायक मुकेश के साथ गाने का मौका दिया। यह लता का पहला बड़ा ब्रेक था, इसके बाद उन्हें काम की कभी कमी नहीं हुई। बाद में शशधर ने अपनी गलती मानी और ‘अनारकली’, ‘जिद्दी’ जैसी फिल्मों में लता से कई गाने गवाए। जल्द ही लता मंगेशकर हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन सिंगर्स में शामिल हुईं और उन्होंने लगातार कई फिल्मों के गाने गाए। बीमार महबूब खान को फोन पर सुनाया गीत 1958 में फिल्ममेकर महबूब खान अमेरिका में ऑस्कर समारोह में गए थे। यहां पहुंचे उन्हें 2 दिन ही हुए थे कि उन्हें हार्ट अटैक आ गया। उनका हाल जानने के लिए लता दीदी ने उन्हें फोन किया। महबूब खान ने बातचीत के दौरान कहा- विदेश में तुम्हारा गाना सुनने का बहुत मन कर रहा है, लेकिन यहां कहां से तुम्हारे गानों की रिकॉर्डिंग लाऊं। लता दीदी ने जवाब दिया- आप कौन सा गीत सुनना चाहते हैं। महबूब खान की फरमाइश पर लता दीदी ने उन्हें ‘रसिक बलमा’ गीत सुनाया। उनके इस गीत से महबूब खान की तबीयत में सुधार जरूर हुआ था। जब जवाहर लाल नेहरु बोले-इस लड़की ने रुला दिया 1962 में चीन के आक्रमण के दौरान पं. प्रदीप (कवि प्रदीप) ने देशभक्ति गीत ‘ए मेरे वतन के लोगों’ लिखा। उन्होंने लता मंगेशकर से गुजारिश की थी कि वह 26 जनवरी, 1963 को गणतंत्र दिवस के मौके पर इस गीत को गाएं। उस प्रोग्राम में जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे। जैसे ही लता दीदी ने गाना शुरू किया, जवाहरलाल नेहरू मंच पर खड़े ही रो पड़े। गाने के बाद लता मंगेशकर स्टेज के पीछे कॉफी पी रही थीं, तभी निर्देशक महबूब खान ने उनसे आकर कहा कि तुम्हें पंडितजी बुला रहे हैं। नेहरू के सामने उन्होंने ले जाकर कहा, ‘ये रही हमारी लता। आपको कैसा लगा इसका गाना?’ नेहरू ने कहा,’बहुत अच्छा। इस लड़की ने मेरी आंखों में पानी ला दिया।’ इतना कहकर उन्होंने लता मंगेशकर को गले लगा लिया। अब पढ़िए लता मंगेशकर के कुछ चुनिंदा गाने और उनकी रिकॉर्डिंग से जुड़े अनसुने किस्से- 1961 की फिल्म ‘माया’ के गाने तस्वीर तेरी दिल में के दौरान स्टूडियो में लता और रफी साहब की गायकों की रॉयल्टी पर ऐसी बहस छिड़ी की दोनों ने साथ काम न करने का फैसला लिया। लता ने इंडस्ट्री में सभी सिंगर्स की आवाज उठाते हुए उनके लिए रॉयल्टी की मांग की थी। सभी गायकों ने मीटिंग रखी, लेकिन रफी साहब, लता और रॉयल्टी मांग रहे सभी सिंगर्स की सोच के खिलाफ थे। रफी साहब ने लता से कहा कि वो अब उनके साथ गाना नहीं गाएंगे। इंडस्ट्री में नई आईं गुस्से की तेज लता ने जवाब में कहा, आप क्या मेरे साथ गाना नहीं गाएंगे, मैं खुद कभी आपके साथ नहीं गाऊंगी। दोनों ने करीब 4 साल तक साथ में गाना नहीं गाया, ना ही कोई मंच साझा किया। लता मंगेशकर ने गानों की रॉयल्टी हासिल की। निधन के समय तक उन्हें हर महीने रॉयल्टी के 40 लाख रुपए मिलते थे। साल 1967 में रिलीज हुई फिल्म ‘ज्वेल थीफ’ के गाने दिल पुकारे आ रे आ रे को लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी ने अपनी सुरीली आवाज दी थी। इस गाने को मोहम्मद रफी और लता जी के चार साल पुराने झगड़े को सुलझाने का क्रेडिट देना गलत नहीं होगा। 1967 में संगीतकार जयकिशन के कहने पर रफी साहब ने लता से चिट्ठी लिखकर माफी मांगी। 1967 में आरडी बर्मन के एक समारोह में दोनों ने इसी साल रिलीज हुई फिल्म ‘ज्वेल थीफ’का ये गाना गाया और झगड़ा खत्म कर लिया। लता मंगेशकर ने फिल्म ‘जिद्दी’ में पहली बार किशोर कुमार के साथ ये कौन आया रे गाना गाया था। इस गाने की रिकॉर्डिंग के समय ही पहली बार लता और किशोर की मुलाकात हुई थी। करियर की शुरुआत में लता दी लोकल ट्रेन पकड़कर स्टूडियो जाती थीं। एक दिन महालक्ष्मी स्टेशन में एक व्यक्ति कुर्ता पजामा पहने और छड़ी लिए उनके कंपार्टमेंट में चढ़ गया। लता जी को वो शख्स जाना पहचाना लग रहा था, लेकिन उनका ख्याल साफ नहीं था। जब उन्होंने लोकल से उतरकर तांगा लिया तो वो शख्स भी तांगे से पीछे आने लगा। लता जी घबरा गईं और तेजी में स्टूडियो पहुंची, यहां भी वो शख्स पीछे ही आ रहा था। स्टूडियो पहुंचकर उन्होंने संगीतकार खेमचंद्र के पास जाकर कहा, ये कौन है, जो मेरा पीछा कर रहा है। खेमचंद्र ने पीछे देखा तो हंसने लगे और कहा ये किशोर कुमार है, अशोक कुमार का भाई। प्लेबैक सिंगर के रूप में ये किशोर दा की पहली फिल्म थी, जिसमें उन्होंने देव आनंद को आवाज दी थी। कुछ इस तरह संगीत की दुनिया के दो सबसे बड़े सितारों की पहली मुलाकात हुई थी। 1960 की फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में लता जी मधुबाला की आवाज बनी थीं। म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद ने 150 गानों को रिजेक्ट करने के बाद प्यार किया तो डरना क्या… सिलेक्ट किया था। इस गाने में जो गूंज नौशाद साहब को चाहिए थी, वो स्टूडियो में नहीं थी। ऐसे में उन्होंने लता जी से बाथरुम में ये गाना रिकॉर्ड करवाया था। उस जमाने में 10-15 लाख में पूरी फिल्म बना करती थी, लेकिन इस गाने में पूरे 10 लाख रुपए का खर्च आया था। मधुबाला लता की आवाज की ऐसी दीवानी थीं कि उन्होंने फिल्मों में काम करने की शर्त रखी थी कि उन्हें लता जी ही आवाज देंगी। ये गाना लता जी के करियर के शुरुआती हिट गानों में से एक है। उस जमाने में रिकॉर्डिंग स्टूडियो की व्यवस्था नहीं हुआ करती थी, जिससे सिंगर किसी भी खाली जगह में गाना रिकॉर्ड कर लिया करते थे। 1948-49 के पास का समय है जब लता बॉम्बे टॉकीज में ‘महल’ फिल्म का गाना आएगा, आने वाला आएगा रिकॉर्ड कर रही थीं। वहां एक्ट्रेस नरगिस और जद्दनबाई अपनी फिल्म लाहौर की शूटिंग कर रही थीं। गाना ध्यान से सुनने के बाद जद्दनबाई ने उन्हें बुलाया और कहा, इधर आओ बेटा, क्या नाम है तुम्हारा। उन्होंने जवाब दिया-जी लता। जद्दनबाई ने तारीफ करते हुए आगे कहा, माशाल्लाह, क्या ‘बगैर’ कहा है, दीपक बगैर कैसे परवाने जल रहे हैं। बगैर सुनकर तबीयत खुश हो गई। ऐसा तलफ्फुज हर किसी का नहीं होता, तुम एक दिन बहुत नाम करोगी। वाकई जद्दनबाई की बात सच हुई। 1978 की फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ का टाइटल ट्रैक लता जी ने गाया था। डायरेक्टर राज कपूर से किसी बात पर बहस के बाद लता जी ने गाना गाने से इनकार कर दिया। राज साहब ने लता जी को बहुत समझाया, पर वे मानीं नहीं। तब राज कपूर ने फिल्म के गीतकार पं. नरेंद्र शर्मा से बात की, जिन्हें लता जी पापा कहती थीं। पं. नरेंद्र शर्मा जी के कहने पर लता जी ने कहा कि मैं स्टूडियो आती हूं। वे स्टूडियो गईं। संगीतकार ने उन्हें सत्यम शिवम सुंदरम… गाने को सिर्फ एक-दो बार बताया। इस गाने में आलाप वगैरह होने के बावजूद 6-7 मिनट के गाने को लता जी एक टेक में रिकॉर्ड करके वापस आ गईं। यह किस्सा लता मंगेशकर पर उनकी बहन मीना मंगेशकर-खडीकर की किताब ‘दीदी और मैं’ किताब में है। राज कपूर की बेटी रितु नंदा ने अपनी बुक में खुलासा किया था कि ये फिल्म राज कपूर ने लता जी से इंस्पायर होकर लिखी थी और वो लता जी को ही इस फिल्म में कास्ट करना चाहते थे। सलिल चौधरी के कंपोजिशन में तैयार हुआ ये गाना 1957 की फिल्म ‘मुसाफिर’ का था जिसे लता मंगेशकर और दिलीप कुमार ने आवाज दी थी। लता को अंदाजा नहीं था कि उनके साथ गाना गाएंगे। दिलीप साहब ने प्रैक्टिस तो खूब की, लेकिन जैसे ही रिकॉर्डिंग स्टूडियों में माइक थामा तो वो डर गए। डर का कारण था लता जी जैसी बेहतरीन गायिका के साथ गाना। जब दिलीप कुमार ठीक से नहीं गा सके तो सलिल चौधरी ने उन्हें ब्रांडी पिलाकर रिकॉर्डिंग करवाई। कहा जाता है कि इस रिकॉर्डिंग के बाद से ही लता जी और दिलीप साहब के रिश्ते में कुछ कड़वाहट आ गई थी। लता उन्हें भाई मानती थीं और राखी बांधा करती थीं, लेकिन इसके बाद से ही दोनों की बातचीत करीब 13 सालों तक नाममात्र की बातचीत रही। इस मतभेद का कारण दिलीप साहब का कमेंट था, जिसमें उन्होंने कहा था, मराठियों की उर्दू दाल-चावल की तरह होती है। लता जी इससे काफी नाराज हुई थीं। साल 1974 की फिल्म ‘आपकी कसम’ के गाने सुनो कहो, कुछ हुआ क्या को लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने आवाज दी थी। किशोर कुमार को हर वक्त मजाक करने की आदत थी, लेकिन उनकी इस आदत के कारण लता ने उनके साथ रिकॉर्डिंग करने से इनकार कर दिया था। लता जी का कहना था कि ये जोक सुनाते हैं और हंसने में आवाज थक जाती है, लेकिन एक समय आया जब दोनों को साथ गाना था। जैसे ही लता जी आईं तो किशोर दा ने उन्हें रोककर किस्सा सुनाना चाहा। लता जी ने कहा पहले गाने दीजिए, तो जवाब मिला कि ये किस्सा गाने से ताल्लुक रखता है। सोचो, एक घर के कमोड पर तुम बैठी हो और दूसरे कमोड पर मैं और हम ये गाना गा रहे हों। जाहिर है ये मजाक सुनकर सभी देर तक हंसते रहे थे।
Source link -

ममता कुलकर्णी बोलीं-आध्यात्मिक पुकार पर इंडस्ट्री छोड़ी:48 सुपरहिट फिल्में दी, ब्रुनेई सुल्तान की बेटी ने मेरे लिए स्टेडियम खाली कराया; नेल्लोर में मेरा मंदिर
राजस्थान फिल्म फेस्टिवल में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित हुईं ममता कुलकर्णी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अपने फिल्मी करियर, ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग और इंडस्ट्री से दूरी बनाने के फैसले पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अलवर में ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग के दौरान शाहरुख खान, सलमान खान और पूरी टीम के साथ करीब एक महीने बिताया था। ममता ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री छोड़ना उनके लिए मोहभंग नहीं, बल्कि भीतर से आई आध्यात्मिक जीवन की पुकार थी। ममता कुलकर्णी ने करीब 15 साल के फिल्मी करियर में 48 फिल्मों में काम किया। तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली और हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाली ममता ने करियर के उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली थीं। राजस्थान लौटने पर उन्होंने अचानक इंडस्ट्री छोड़ने के फैसले और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़ाव पर खुलकर बातचीत की। सवाल: राजस्थान की धरती पर आपको लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जा रहा है। आप इस सम्मान को किस तरह देखती हैं? ममता कुलकर्णी: देखिए, मेरी 48 फिल्में रिलीज हुई हैं और मेरा करीब 15 साल का फिल्मी करियर रहा है। जिंदगी में भाग्य भी बहुत मायने रखता है। भगवान की कृपा और गुरु का आशीर्वाद रहा कि मेरे करियर में ज्यादातर फिल्में हिट या सुपरहिट रहीं। इसलिए जब इतने वर्षों बाद आपको कोई लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान देता है तो वह आपके पूरे सफर को याद करने जैसा होता है। मेरा फिल्मी सफर तमिलनाडु से शुरू हुआ था। मेरी पहली फिल्म एस. चंद्रशेखर की ‘ननबर्गल’ थी। इसके बाद मेरी दूसरी फिल्म ‘प्रेम शिकरम’ थी, जिसने काफी लोकप्रियता दिलाई। उन्होंने कहा कि नेल्लोर में लोगों ने मेरे नाम का मंदिर तक बना दिया था और इसकी खबर टाइम्स मैगजीन में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद मैं बॉलीवुड में आई। मेरी पहली हिंदी फिल्म ‘तिरंगा’ थी। फिर ‘आशिक आवारा’ ‘क्रांतिवीर’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘आंदोलन’, ‘करण अर्जुन’, ‘घातक’ और ‘नसीब’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। तो जब आज इतने वर्षों के बाद मुझे लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान मिल रहा है तो मेरे लिए यह बहुत भावुक पल है। सवाल: राजस्थान से आपका गहरा जुड़ाव रहा है। आपकी कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई और आपकी एक बेहद लोकप्रिय फिल्म का गाना भी राजस्थान में शूट हुआ। इस जुड़ाव को आप किस तरह देखती हैं? ममता कुलकर्णी: मुझे राजस्थान का खाना बहुत पसंद है। मुझे गट्टे की कढ़ी-चावल और बाजरे की रोटी मेरे पसंदीदा हैं। मेरी कई फिल्मों की शूटिंग राजस्थान में हुई। खास तौर पर ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग अलवर में हुई थी, जहां सलमान खान, शाहरुख खान और फिल्म के दूसरे कलाकारों के साथ वह करीब एक महीने तक रहीं। इसके बाद ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ का ‘भोली भाली लड़की’ वाला हिस्सा जयपुर में शूट हुआ था। ‘नसीब’ की शूटिंग उम्मेद भवन पैलेस में हुई। इसलिए राजस्थान मेरे लिए सिर्फ एक जगह नहीं है, बल्कि मेरे करियर की कई यादों से जुड़ा हुआ है। इतने साल बाद जब मैं राजस्थान वापस आई हूं तो अंदर से बहुत अच्छी और भावुक अनुभूति हो रही है। ऐसा लग रहा है जैसे अपने पुराने सफर के किसी हिस्से में वापस आ गई हूं। सवाल: ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग की कोई खास याद, खासकर शाहरुख खान या सलमान खान के साथ, जिसे आप दर्शकों के साथ साझा करना चाहेंगी? ममता कुलकर्णी: देखिए, उस समय हम सब नए थे। हम सभी अपने-अपने करियर में आगे बढ़ रहे थे और हमारे अंदर बहुत ज्यादा उत्साह और मेहनत करने की भूख थी। जब कोई कलाकार नया होता है तो उसके अंदर खुद को साबित करने की एक अलग ऊर्जा होती है। 1995 मेरे करियर के लिए भी बहुत खास साल रहा। उस साल मेरी करीब 11 फिल्में रिलीज हुई थीं। ‘आंदोलन’ आई, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’ आई, आमिर खान के साथ ‘बाजी’ आई, ‘बेकाबू’ आई, ‘करण अर्जुन’ आई और उसके बाद ‘घातक’ जैसी फिल्में भी आईं। ‘करण अर्जुन’ की शूटिंग के दौरान हम सभी ने जी-जान लगा दी थी। हम नए कलाकार थे और हमारे अंदर बहुत ज्यादा भूख थी कि कुछ अच्छा करना है, अपनी पहचान बनानी है। सुबह से लेकर शाम तक हम लोग बहुत मेहनत करते थे। इसलिए उस फिल्म की शूटिंग की बहुत सारी यादें आज भी मेरे साथ हैं। सवाल: करियर के चरम पर आपने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली। ऐसा क्या हुआ था? ममता कुलकर्णी: जिंदगी में एक समय आता है जब आपको लगता है कि अब कुछ और तलाशना है। मेरे जीवन में भी ऐसा ही समय आया। मेरे अंदर आध्यात्मिक जीवन को लेकर एक आवाज आई। मेरे गुरु मेरे जीवन में आए और उसके बाद मेरा रुझान अध्यात्म की तरफ बढ़ता चला गया। उस समय दुनिया के सबसे अमीर लोगों में ब्रुनेई के सुल्तान ने अपनी बेटी प्रिंसेस हमीदा के जन्मदिन पर मेरे लिए प्राइवेट जेट भेजा था। प्रिसेस मेरी प्रशंसक थीं। एक बार ब्रुनेई में प्रिंसेस हमीदा के जन्मदिन पर मैं गई थी। मैंने उनसे कहा था कि अक्टूबर में मैं शाहरुख के साथ एक शो के लिए आ रही हूं, तुम भी आना। इसके बाद जब हम अक्टूबर में वेम्बली स्टेडियम में शो करने पहुंचे तो मैं बैकस्टेज थी। तभी अली मोरानी दौड़ते हुए मेरे पास आए और बोले- ममता, ममता…। आपने जिस प्रिंसेस हमीदा को बुलाया था, वह अपनी मां और पूरी सिक्योरिटी के साथ आ गई हैं। उन्होंने स्टेडियम का एक पूरा हिस्सा सुरक्षा के लिए खाली करवा दिया था। वह अनुभव मेरे लिए बहुत अलग था। मैंने दुनिया का ग्लैमर, शोहरत और भौतिक जीवन बहुत करीब से देखा। शायद उसी के बाद मेरे भीतर अध्यात्म की तलाश और गहरी होती चली गई। सवाल: राजस्थान फिल्म फेस्टिवल क्षेत्रीय सिनेमा को एक बड़ा मंच देता है। आपको क्या लगता है कि क्षेत्रीय सिनेमा को प्रोत्साहित करने की कितनी जरूरत है? ममता कुलकर्णी: बिल्कुल जरूरत है। फिल्म तो फिल्म होती है, चाहे वह किसी भी भाषा में बनाई गई हो। मैंने खुद कई भाषाओं में काम किया है। मेरी तीसरी फिल्म ‘शेष भोंक सो दो’ बंगाली भाषा की थी। उस समय मैं बहुत व्यस्त थी, लेकिन मुझे राष्ट्रपति की ओर से राष्ट्रीय पुरस्कार से जुड़ा पत्र भी मिला था कि आप आइए, हम आपको सम्मान देना चाहते हैं। मैं खुद एक बहुभाषी अभिनेत्री रही हूं। मेरी मातृभाषा मराठी है, लेकिन मैंने अभी तक मराठी में कोई फिल्म नहीं की। मैंने तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली सहित कई भाषाओं में काम किया है। भारत की खूबसूरती ही यही है कि यहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और कहानियां हैं। क्षेत्रीय सिनेमा इन्हीं कहानियों को सामने लाता है। इसलिए क्षेत्रीय फिल्मों और कलाकारों को मंच मिलना बहुत जरूरी है।
Source link -

‘द वन’ ने पहले दिन ₹8 करोड़ कमाए:सिद्धार्थ की पिछली 10 फिल्मों में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग; ‘हनुमान अंश’ ने 50वें दिन ₹3.35 करोड़ कमाए
शुक्रवार को रिलीज हुई सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘द वन’ ने पहले दिन भारत में 8 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, 6,746 शोज में रिलीज हुई फिल्म की ऑक्यूपेंसी 26% रही। फिल्म का भारत में ग्रॉस कलेक्शन 9.6 करोड़ रुपए हो गया। वहीं अपने रिलीज के 50वें दिन भी ‘हनुमान अंश’ ने ‘मिर्जापुर: द मूवी’, ‘वाइब’ जैसी कई फिल्मों से ज्यादा कमाई की। ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का निर्देशन ‘पंचायत’ फेम दीपक कुमार मिश्रा ने किया है। यह उनका फीचर फिल्म डायरेक्शन डेब्यू है। फिल्म भारतीय लोककथाओं पर आधारित है और इसमें सुपरनैचुरल फैंटेसी, पौराणिक कथाओं, एक्शन और थ्रिलर के एलिमेंट्स हैं। इस महीने रिलीज हुई करीना कपूर की ‘दायरा’ और कुणाल खेमू की ‘वाइब’ की तुलना में ‘द वन’ की शुरुआत बेहतर रही। दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर करीब 1 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था। सिद्धार्थ मल्होत्रा की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ₹8 करोड़ का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ यह फिल्म एक्टर की पिछली 10 थिएट्रिकल रिलीज में दूसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई है। इस लिस्ट में ‘थैंक गॉड’ ₹8.10 करोड़ के साथ पहले स्थान पर है। ‘परम सुंदरी’ ने ₹7.25 करोड़, ‘मरजावां’ ने ₹7 करोड़ और ‘बार बार देखो’ ने ₹6.80 करोड़ की ओपनिंग की थी। फिल्म में तमन्ना भाटिया भी लीड रोल में हैं। यह सात साल बाद उनकी पहली हिंदी थिएट्रिकल फिल्म है, जिसमें वह लीड रोल में हैं। उनकी पिछली हिंदी फीचर फिल्म ‘खामोशी’ थी, जिसमें प्रभु देवा भी थे। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर नहीं चली थी। ‘खामोशी’ के बाद तमन्ना हिंदी फिल्मों में ज्यादातर स्पेशल सॉन्ग सीक्वेंस में नजर आईं। इनमें ‘स्त्री’ और ‘रेड 2’ शामिल हैं। ‘अवेंजर्स: एंडगेम’ से हुआ सामना ‘द वन’ को हिंदी बॉक्स ऑफिस पर सोलो रिलीज मिली। इसके साथ रिलीज हुई एकमात्र बड़ी फिल्म ‘अवेंजर्स: एंडगेम-एन्कोर’ थी। इसने भारत में सभी भाषाओं में 8.68 करोड़ रुपए का ग्रॉस कलेक्शन किया, जिसमें इंग्लिश वर्जन की हिस्सेदारी 5.25 करोड़ रुपए रही। फिल्म को 3,635 शोज में दिखाया गया। ‘अवेंजर्स: एंडगेम – एन्कोर’ 2019 की मार्वल स्टूडियोज की फिल्म ‘अवेंजर्स: एंडगेम’ की थिएट्रिकल री-रिलीज थी। इसमें कुछ अतिरिक्त फुटेज जोड़ा गया था, जो कहानी को ‘अवेंजर्स: डूम्सडे’ से जोड़ता है। ‘डूम्सडे’ दिसंबर में रिलीज होने वाली है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का कलेक्शन ‘मिर्जापुर: द मूवी’ 23वें दिन 503 शोज में चल रही है। फिल्म ने आज लाइव कलेक्शन के तौर पर 0.28 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है। इसके साथ फिल्म का भारत में कुल ग्रॉस कलेक्शन 266.70 करोड़ रुपए और कुल नेट कलेक्शन 224.08 करोड़ रुपए हो गया है। इससे पहले 25 सितंबर, 4वें शुक्रवार यानी 22वें दिन फिल्म ने 1.00 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया था। ‘हनुमान अंश’ ने 50वें दिन भी दिखाया दम भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शुक्रवार को कई फिल्मों के बीच ‘हनुमान अंश’ की कमाई चर्चा में रही। फिल्म ने रिलीज के 50वें दिन भी 3.35 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। वहीं, ‘वाइब’ ने शुक्रवार को ₹85 लाख, ‘दायरा’ ने ₹13 लाख और ‘लव लॉटरी’ ने करीब ₹9 लाख का नेट कलेक्शन किया। सैकनिल्क के मुताबिक, भारत में ‘हनुमान अंश’ का कुल नेट कलेक्शन 291.53 करोड़ रुपए हो गया है। भारत में फिल्म का कुल ग्रॉस कलेक्शन 344.35 करोड़ रुपए पहुंच गया है। वहीं, ओवरसीज में 50वें दिन फिल्म ने 50 लाख रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 37 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 381.35 करोड़ रुपए हो चुका है। नानी की फिल्म ‘द पैराडाइज’ ने दूसरे दिन भारत में 14.90 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। फिल्म को दूसरे दिन 7,049 शोज मिले। इसके साथ भारत में फिल्म का कुल नेट कलेक्शन 61.15 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन 72.50 करोड़ रुपए पहुंच चुका है। ओवरसीज में दूसरे दिन फिल्म ने 3 करोड़ रुपए कमाए। इसके साथ विदेशों में कुल ग्रॉस कलेक्शन 25 करोड़ रुपए हो गया है। फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 97.50 करोड़ रुपए हो चुका है। वहीं, दूसरे दिन फिल्म के हिंदी वर्जन ने 1.50 करोड़ रुपए कमाए।
Source link -

अनुपम खेर बोले- गोविंदा अपने आसपास के माहौल से परेशान:कहा- आदतों को काम पर हावी न होने दें; रूमर्ड गर्लफ्रेंड के चलते विवाद में फंसे गोविंदा
बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा अपनी रूमर्ड गर्लफ्रेंड और पत्नी सुनीता आहूजा के साथ जारी अनबन की खबरों को लेकर चर्चा में हैं। अब अभिनेता अनुपम खेर ने गोविंदा की निजी जिंदगी पर प्रतिक्रिया दी है। फरीदून शहरयार को दिए इंटरव्यू में अनुपम खेर ने कहा कि गोविंदा बेहतरीन एक्टर हैं, लेकिन उन्हें अपनी निजी जिंदगी और आदतों को काम पर हावी नहीं होने देना चाहिए। दरअसल हाल ही में वे कोमल रानी स्वर्णकार के साथ लालबागचा राजा के दर्शन करने पहुंचे थे, जबकि उनकी पत्नी सुनीता उसी दिन अकेली पहुंची थीं। ‘आसपास के माहौल से परेशान हैं गोविंदा’ अनुपम ने कहा कि गोविंदा को अपनी आदतों या निजी परेशानियों को अपनी पूरी जिंदगी और काम पर हावी होने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। अनुपम ने बताया कि वे गोविंदा पर कोई फैसला या टिप्पणी करने वाले व्यक्ति नहीं हैं और गोविंदा अपनी जिंदगी को बेहतर समझते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने गोविंदा को फोन किया था, लेकिन उन्होंने वापस कॉल करने की बात कही। अनुपम उन्हें सिर्फ यह कहना चाहते थे कि यह मुश्किल दौर भी बीत जाएगा। अनुपम के मुताबिक, हर किसी की जिंदगी में परेशानियां आती हैं। गोविंदा अपने आसपास के माहौल और परिस्थितियों से थोड़े परेशान जरूर हैं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी है और वापसी की पूरी उम्मीद है। ‘गोविंदा की एक्टिंग और डांस में कोई मुकाबला नहीं’ अनुपम खेर ने गोविंदा के काम की तारीफ करते हुए कहा कि वे उन सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं, जिनके साथ उन्होंने काम किया है। दोनों ने साथ में 10 से 12 फिल्मों में काम किया है। अनुपम के मुताबिक, इम्प्रोवाइजेशन, एक्टिंग और डांस के मामले में गोविंदा का मुकाबला कोई नहीं कर सकता। कोमल संग दिखे गोविंदा, अकेली पहुंची थीं पत्नी सुनीता गोविंदा की पर्सनल लाइफ पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है। हाल ही में गणेशोत्सव के दौरान मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा पंडाल में गोविंदा अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ गणपति के दर्शन करने पहुंचे थे। वहीं, उसी दिन उनसे पहले उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अकेले ही दर्शन के लिए पहुंची थीं। दोनों के अलग-अलग पहुंचने और कोमल के साथ दिखने के बाद से उनके रिश्ते और कथित अफेयर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सुनीता आहूजा बोलीं- इंसान धोखा ही देते हैं गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा को अभिनेत्री और रूमर्ड गर्लफ्रेंड कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दिखने के बाद सुनीता आहूजा का एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इंसानों को धोखेबाज बताते हुए जानवरों से प्यार को बेहतर बताया। हालांकि, सुनीता ने अपने बयान में गोविंदा का नाम नहीं लिया। दरअसल, मुंबई एयरपोर्ट पर पैपराजी से बातचीत के दौरान सुनीता अपने पालतू कुत्ते विंटर के साथ थीं। पैपराजी से बात करते हुए सुनीता ने कहा कि इंसानों को जितना भी प्यार करो, कोई फायदा नहीं है। धोखा ही देते हैं। इनको प्यार करो, देखो, हमेशा चिपके रहते हैं। जानवरों से प्यार करो, इंसानों से नहीं। धोखेबाज होते हैं इंसान। गणपति उत्सव में भी अलग नजर आया परिवार
इस साल गणपति उत्सव के दौरान गोविंदा और सुनीता साथ नजर नहीं आए। गणेश चतुर्थी के मौके पर सुनीता आहूजा के घर गणपति बप्पा का स्वागत किया गया। गणेशोत्सव के दौरान गोविंदा और सुनीता के बेटे यशवर्धन और बेटी टीना भी मौजूद थे। हालांकि, इस दौरान गोविंदा नजर नहीं आए। सुनीता का दावा- कोमल रानी से शादी करने वाले थे गोविंदा सुनीता आहूजा ने दिसंबर 2025 में गोविंदा से तलाक की अर्जी दाखिल की थी, हालांकि 19 अगस्त को उन्होंने अर्जी वापस ले ली है। इस दौरान राखी सावंत से कॉल पर बात करते हुए सुनीता ने दावा किया है कि तलाक के बाद गोविंदा कोमल से शादी करने वाले थे, यही वजह है कि उन्होंने तलाक का केस वापस ले लिया है।
Source link