अभिनेत्री शबाना आजमी ने मशहूर लेखक-शायर जावेद अख्तर की ओर से उनके लिए लिखी गई एक कविता का जिक्र किया और कहा कि जावेद साहब को वह कविता अब याद नहीं है। वहीं जावेद अख्तर ने कामयाबी और नाकामी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सफलता पर इतराना नहीं चाहिए और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए। जयपुर में मशहूर लेखक-शायर जावेद अख्तर और अभिनेत्री शबाना आजमी रविवार को एक खास साहित्यिक शाम का हिस्सा बने। सीतापुरा स्थित इंटरकॉन्टिनेंटल जयपुर में आयोजित ‘पोएट्री एंड कन्वर्सेशन’ में जावेद अख्तर ने अपनी कविताएं, शायरी और गीतों को अपने अंदाज में पेश किया, वहीं शबाना आजमी ने उनके शब्दों का अंग्रेजी में अनुवाद करते हुए उनकी भावनाओं और विचारों को दर्शकों तक पहुंचाया। कार्यक्रम में जावेद अख्तर की रचनात्मक यात्रा, संघर्ष, लेखन और निजी जिंदगी से जुड़े कई किस्से भी सामने आए। यह आयोजन दिल्ली के मशहूर रेस्तरां ‘चोर बाजार’ के जयपुर आगमन के मौके पर ईएचवी इंटरनेशनल की ओर से किया गया था। साहित्य, सिनेमा और कला से जुड़े लोगों के लिए यह शाम जावेद अख्तर और शबाना आजमी को करीब से सुनने का खास अवसर रही। पहले, यहां देखिए इवेंट के PHOTO’S… ‘अनुवाद में खुशबू कहीं न कहीं उड़ जाती है’ कार्यक्रम में शबाना आजमी ने जावेद अख्तर की शायरी के अनुवाद को लेकर दिलचस्प बात कही। उन्होंने कहा कि अनुवाद किसी परफ्यूम को एक शीशी से दूसरी शीशी में डालने जैसा है। ऐसा करते समय उसकी कुछ खुशबू उड़ ही जाती है। इसलिए किसी शायर की रचना को दूसरी भाषा में पेश करना आसान काम नहीं है। इसके बावजूद शबाना ने जावेद की कविताओं और शायरी का अंग्रेजी में ऐसा भावानुवाद किया कि दर्शक मूल रचना के भाव और अर्थ से जुड़े रहे। एक तरफ जावेद अख्तर अपनी रचनाएं पढ़ते रहे तो दूसरी तरफ शबाना आजमी उनके शब्दों को अंग्रेजी में समझाती रहीं। दोनों की बातचीत और संवाद ने कार्यक्रम को सिर्फ कविता पाठ न रखकर एक साहित्यिक अनुभव में बदल दिया। जावेद अख्तर ने कहा कि अपनी कामयाबी पर किसी को इतराना नहीं चाहिए और अपने दुख या नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए। सिर्फ जिंदगी का धन्यवाद देना चाहिए, जो हमें यह मिली है। ‘इनके शरीर की एक हड्डी में भी रोमांस नहीं है’ जावेद अख्तर के रोमांटिक गीतों और शायरी की चर्चा के दौरान शबाना आजमी ने अपने खास अंदाज में मजेदार किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उनसे, खासकर महिलाएं, यह कहती हैं कि जावेद साहब इतनी रोमांटिक बातें लिखते हैं तो असल जिंदगी में भी काफी रोमांटिक होंगे। शबाना ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इनके शरीर की एक हड्डी में भी रोमांस नहीं है। इस पर जावेद अख्तर ने भी तुरंत जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो इंसान सर्कस में उल्टा लटकता है, जरूरी नहीं कि वह घर जाकर भी उल्टा ही लटके। जावेद और शबाना की इस नोकझोंक पर दर्शकों के बीच खूब ठहाके गूंजे। शबाना ने कहा कि आप देखिए इन्होंने इतनी सारी नज्में बिना किताब देखें यहां पढ़ी और जो मेरे लिए ‘शबाना’ कविता लिखी है, वह तक याद नहीं है। 19 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर कार्यक्रम के दौरान शबाना आजमी ने जावेद अख्तर की जिंदगी के संघर्ष को भी दर्शकों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर 1964 को एक 19 साल का नौजवान बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा था। उसकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े-बड़े सपने थे। शबाना ने बताया कि जावेद अख्तर ने मुंबई में संघर्ष के दौरान कई मुश्किलें देखीं। उन्होंने फुटपाथ, रेलवे स्टेशनों और कई स्टूडियो के परिसरों में रातें गुजारीं। एक दौर ऐसा भी आया जब उनके पास लगातार तीन दिन तक खाने के लिए कुछ नहीं था और शरीर पर पहने कपड़े भी फटे-पुराने थे। उन्होंने कहा कि निराशा के उस दौर में जब कोई व्यक्ति हार मान सकता था, जावेद अख्तर ने खुद से कहा कि वह यूं ही मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। ये दिन बदलेंगे। शबाना ने कहा कि समय बदला भी। 4 अक्टूबर 1964 का वह 19 साल का नौजवान, जिसके पास लगभग कुछ नहीं था। दशकों बाद ऐसी जिंदगी जी रहा था, जिसने भारत को कुछ सबसे यादगार शब्द दिए। आज वही 4 अक्टूबर का दिन है। ‘गुलजार और जावेद के अंदाज-ए-बयां में फर्क’ शबाना आजमी ने जावेद अख्तर और गुलजार के लेखन के अंदाज का भी दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने गुलजार और जावेद अख्तर दोनों से रोमांटिक कुछ लिखने के लिए कहा था। उन्होंने बताया कि गुलजार साहब ने लिखा- ‘जा जा रे पिया मोरे पिया मोरे, मोरा लागे ना जिया।’ वहीं, उसी धुन पर जावेद अख्तर ने लिखा- ‘बातों से नहीं बोलूं, ओ जा रे जा रे, तू ना मेरा सनम, तू ना मेरा पिया।’ शबाना ने कहा कि यही दोनों के अंदाज-ए-बयां का अंतर है। एक ही भाव को दो अलग रचनाकार किस तरह अपनी-अपनी शैली में सामने रखते हैं, इसका यह बेहतरीन उदाहरण है। ‘मेरा आंगन, मेरा पेड़’ से यादों के आंगन में लौटे जावेद कार्यक्रम में जावेद अख्तर ने अपनी चर्चित कविता ‘मेरा आंगन, मेरा पेड़’ भी सुनाई। बचपन के घर, आंगन और उस पेड़ के बहाने उन्होंने उम्र के साथ बदलती नजर और यादों को शब्द दिए।जावेद अख्तर ने ‘वो कमरा याद आता है’ कविता भी सुनाई। इसमें उन्होंने उस कमरे को याद किया, जो जिंदगी की धूप, थकान और संघर्ष से लौटे व्यक्ति को अपनी मां की तरह अपने भीतर छुपा लेता है। जावेद अख्तर ने ‘ये खेल क्या है’ कविता के जरिए जिंदगी और जीत-हार को भी अलग नजरिए से देखा। काले-सफेद मोहरों को देखते हुए वह सवाल करते हैं कि अगर ये सिर्फ लकड़ी के खिलौने हैं तो फिर जीतना क्या और हारना क्या। दादर का किस्सा और एक हजार रुपए की उम्मीद जावेद अख्तर ने अपनी जिंदगी के संघर्ष से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दिनों में एक बार वह एक हजार रुपए की फीस लेने के लिए दादर गए थे। जेब में बहुत कम पैसे थे और जिस निर्माता के दफ्तर में जाना था, वहां पहुंचने पर पता चला कि दफ्तर पर ताला लगा है। उस समय उनके सामने बड़ा सवाल था कि बचे हुए पैसों से घर लौटने के लिए ट्रेन का टिकट लें या कुछ खा लें। भूख लगी थी, इसलिए उन्होंने रास्ते में चने खरीदे और दादर से बांद्रा तक पैदल लौटने का फैसला किया। इसी दौरान उन्होंने खुद से एक संकल्प लिया कि एक दिन वह इसी रास्ते से अपनी कार में गुजरेंगे। संघर्ष के दौर में देखा गया यह सपना बाद में सच हुआ। जावेद अख्तर ने बताया कि करीब चार दशक बाद जब वह अपनी बेटी जोया अख्तर के साथ उसी इलाके से गुजर रहे थे, तो उन्होंने जोया को अपने संघर्ष के दिनों का वही किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि किस तरह कभी उनके पास पैसे नहीं थे और उन्होंने दादर से बांद्रा तक पैदल जाने का फैसला किया था। उनकी बात सुनने के बाद जोया ने मजाकिया अंदाज में ऐसा जवाब दिया कि वह खुद भी निरुत्तर हो गए। जोया ने उन्हें कहा कि उस समय 20 पैसे के चने भी खूब आते होंगे।
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मेरा आंगन, मेरा पेड़ मेरा आंगन
कितना कुशादा, कितना बड़ा था जिसमें
मेरे सारे खेल
समा जाते थे और आंगन के आगे था वो पेड़
कि जो मुझसे काफी ऊंचा था लेकिन
मुझको इसका यकीं था जब मैं बड़ा हो जाऊंगा
इस पेड़ की फुंगी भी छू लूंगा बरसों बाद
मैं घर लौटा हूँ देख रहा हूँ
ये आंगन
कितना छोटा है पेड़ मगर
पहले से भी थोड़ा ऊंचा है वो कमरा याद आता है मैं जब भी
ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तपकर मैं जब भी
दूसरों के और अपने झूठ से थककर मैं सबसे लड़ के
खुद से हार के जब भी उस एक कमरे में जाता था वो हल्के और गहरे कत्थई रंगों का इक कमरा
वो बेहद मेहरबां कमरा जो अपनी नर्म मुट्ठी में मुझे
ऐसे छुपा लेता था जैसे कोई मां
बच्चे को आंचल में छुपा ले प्यार से डांटे
ये क्या आदत है जलती दोपहर में
मारे-मारे घूमते हो तुम
:::::::::::::::::::::::::: वो कमरा याद आता है दबीज और खासा भारी
कुछ जरा मुश्किल से खुलने वाला वो शीशम का दरवाजा
कि जैसे कोई अक्खड़ बाप अपने खुरदुरे सीने में
शफकत के समुंदर को छुपाए हो वो कुर्सी
और उसके साथ वो जुड़वां बहन उसकी वो दोनों दोस्त थीं मेरी वो इक गुस्ताख, मुंहफट आईना
जो दिल का अच्छा था वो बेढंग सी अलमारी
जो कोने में खड़ी इक बूढ़ी अन्ना की तरह
आईने को तंबीह करती थी वो इक गुलदान
नन्हा सा
बहुत शैतान उन दिनों पे हंसता था दरीचा
या ज़ेहानत से भरी इक मुस्कुराहट और दरीचे पर झुकी वो बेल
कोई सब्ज़ सरगोशी किताबें
ताक में और शेल्फ पर संजीदा उस्तानी बनी बैठीं
मगर सब मुंतज़िर इस बात की।
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शबाना बोलीं-मुझ पर लिखी कविता जावेद साहब को याद नहीं:अख्तर बोले- कामयाबी पर इतराना नहीं और नाकामी को मेडल नहीं बनाना चाहिए
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रीति तिवारी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर भड़के सलमान:बोले- किसी का अपमान करने की भी एक सीमा होनी चाहिए; आपको इस पर गर्व क्यों है
सलमान खान ने रीति तिवारी को उदिति सिंह और काजी तौकीर के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर फटकार लगाई। बिग बॉस 20 के इस हफ्ते के वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान ने रीति से पूछा कि वह अपनी बातों पर गर्व क्यों कर रही हैं और कहा कि किसी का अपमान करने की भी एक लिमिट होनी चाहिए। दरअसल, हाल ही में एक डिस बैटल के दौरान रीति तिवारी ने उदिति सिंह और काजी तौकीर को लेकर टिप्पणी की थी। टास्क खत्म होने के बाद भी रीति अपने बयान पर कायम रहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने किए पर गर्व है और उन्हें भरोसा है कि उनके पिता भी उन पर गर्व करेंगे। सलमान ने पूछा- इस पर गर्व क्यों कर रही हैं? आने वाले वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान खान रीति के व्यवहार पर सवाल करते नजर आएंगे। सलमान ने कहा कि रीति काजी से जलती हैं और असुरक्षित महसूस करती हैं। इस पर रीति ने कहा कि वह काजी से नहीं जलतीं, बल्कि उन्हें एक व्यक्ति के तौर पर पसंद नहीं करतीं। इसके बाद सलमान ने टास्क के दौरान उदिति और काजी के खिलाफ की गई रीति की टिप्पणियों पर बात की। उन्होंने कहा, “डिस को भूल जाइए, मुझे समझ नहीं आता कि आपको इस पर गर्व क्यों है, लेकिन मुझे लगता है कि यह अब तक का सबसे खराब डिस था। किसी का अपमान करने की भी एक सीमा होनी चाहिए।” रीति ने सफाई देते हुए कहा कि उनका इरादा वह कहने का नहीं था, जो उन्होंने डिस के दौरान कहा। इस पर सलमान ने सवाल किया कि अगर उन्हें अपनी बात का मतलब ही नहीं पता था, तो उन्होंने ऐसी टिप्पणी क्यों की। सलमान ने बाकी घरवालों से भी सवाल किया सलमान ने घर के दूसरे सदस्यों से भी पूछा कि जब रीति लगातार ऐसी बातें कर रही थीं, तब किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने कहा, “क्या आपको नहीं लगा कि अपनी बातों से वह डिसरिस्पेक्ट की सीमा पार कर रही थीं? ये आपको चढ़ा रहे थे और ये चढ़ रही थीं।” सलमान ने आसिफ से भी इस मामले में सवाल किया। आसिफ ने रीति का समर्थन किया था, जब वह उदिति के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर रही थीं। सलमान ने पूछा कि उन्होंने रीति को रोकने की कोशिश क्यों नहीं की। उन्होंने आसिफ से यह भी सवाल किया कि अगर यही डिस उनकी बहन को लेकर किया गया होता, तो क्या वह ऐसे शब्दों को बर्दाश्त करते। आखिर क्या था मामला? मामला बिग बॉस 20 के एक टास्क से शुरू हुआ। घर में दो टीमों के बीच एक-दूसरे को ‘डिस’ करने का टास्क रखा गया था। पहले रीति का मुकाबला उदिति सिंह से होना था। उदिति के इनकार के बाद काजी तौकीर सामने आए। टास्क के दौरान रीति ने उदिति और काजी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। उनकी कुछ बातें शो के एडिट में म्यूट करनी पड़ीं। इसको लेकर घर में बहस भी हुई। रीति ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने ये शब्द सिर्फ राइमिंग के लिए इस्तेमाल किए थे। उन्होंने इन्हें स्लैंग बताया। मामला यहीं नहीं रुका। एक दूसरे टास्क के दौरान रीति ने काजी को धमकी भी दी। उन्होंने कहा, “अगर मेरे बाप आपको यह सब करते हुए देख लेते, तो आपको पता नहीं है आपका क्या हाल होता।” रीति ने काजी से यह भी कहा, “तेरा म्यूट बटन दबा दूंगी मैं। कौन है तू, तू किससे बात कर रहा है? तेरे बाप की नौकर हूं? कौन हूं मैं, तू कौन है? मुझसे बात मत करना और मेरी तरफ देखना भी मत।” शो में शामिल हो सकते हैं मनोज तिवारी इस बीच रीति के पिता और अभिनेता-राजनेता मनोज तिवारी के भी बिग बॉस 20 के वीकेंड का वार में पहुंचने की खबर है। इंडिया फोरम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मनोज तिवारी शो में अपनी बेटी के व्यवहार को लेकर उनसे बात कर सकते हैं। इससे पहले पैपराजी से बातचीत में मनोज तिवारी से पूछा गया था कि क्या वह बिग बॉस 20 में अपनी बेटी का सफर देख रहे हैं। उन्होंने रीति के गेम को लेकर कहा था, “डर-डर के देखता हूं।” इससे पहले ‘बिग बॉस 20’ के प्रीमियर के एपिसोड में मनोज तिवारी नजर आए थे। वह रीति तिवारी को शो में छोड़ने पहुंचे थे। मनोज तिवारी गाना गाते हुए स्टेज पर पहुंचे थे। सलमान खान ने उन्हें दोबारा शो में आने को लेकर मजाक किया था। इस पर मनोज ने बताया था कि वह खुद कंटेस्टेंट बनने नहीं, बल्कि बेटी को शो में छोड़ने आए हैं। प्रीमियर के दौरान रीति को सलमान ने घर के अंदर होने वाले झगड़ों को लेकर सलाह दी थी। उन्होंने मजाक में कहा था कि अंडों को लेकर लड़ाई मत करना। इसके बाद सलमान ने कहा था, “ऐ बाप पे मत जाना।”
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जूबीन गर्ग के निधन के एक साल:पत्नी गरिमा बोलीं- वो हर जगह दिखते हैं, सिंगापुर में क्या हुआ, इसका जवाब चाहिए, न्याय किसके लिए
असम के मशहूर गायक जुबीन गर्ग की पहली बरसी पर उनकी पत्नी गरिमा ने न्याय की मांग की है। मशहूर सिंगर जुबीन गर्ग का 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में निधन हुआ था। वह एक कॉन्सर्ट के लिए गए थे। मौत के बाद 7 लोगों को जांच के दायरे में लिया गया है। उनकी पहली बरसी पर कई चाहनेवाले उनके घर पहुंच रहे हैं। इस पर उनकी पत्नी ने कहा है कि परिवार और असम के लोग अब भी जवाब का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर उनकी मौत कैसे हुई। गरिमा ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, “हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में असल में में क्या हुआ था। मैं उन्हें हर जगह देखती हूं। जिस तरह लोग यहां आए हैं, वे किसी की जाति, धर्म या विचारधारा को नहीं देख रहे हैं। वे इंसान बनकर आए हैं।” असम सरकार ने सिंगापुर में उनकी मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। केस अदालत में आगे बढ़ रहा है। असम सरकार ने कहा है कि जांच का मकसद जुबीन की सिंगापुर में मौत से जुड़ी परिस्थितियों और तथ्यों का पता लगाना है। न्याय की मांग पर गरिमा ने कहा, “हम सभी जुबीन गर्ग के लिए न्याय चाहते हैं। हम जानना चाहते हैं कि 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में वास्तव में क्या हुआ था। हम अब भी उस जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हमें न्याय मिलना चाहिए। अगर जुबीन के लिए न्याय नहीं है, तो फिर किसके लिए है?” फैंस ने मना रहे हैं जुबीन दिवस जुबीन गर्ग की पहली बरसी को उनके फैंस जुबीन दिवस के रूप में मना रहे हैं। 17 सितंबर से शुरू हुआ तीन दिवसीय जुबीन दिवस संगीत, प्रार्थना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया जा रहा है। कामारकुची स्थित स्मारक पर प्रशंसकों की भीड़ जुटी। स्मारक को फूलों और गमोसों से सजाया गया था। तीन दिवसीय कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए इंतजाम किए गए थे। यह कार्यक्रम शनिवार को यानी आज खत्म होगा। देखिए जुबीन गर्ग दिवस की चुनिंदा तस्वीरें- पिछले साल सितंबर में मौत हुई थी, सिंगापुर पुलिस बोली- मौत डूबने से हुई सिंगर जुबीन गर्ग का निधन 19 सितंबर 2025 को हुआ। जुबीन गर्ग सिंगापुर में भारत और सिंगापुर के बीच 60 साल के कूटनीतिक रिश्तों के जश्न में शामिल होने गए थे। उन्हें वहां ‘नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल’ में परफॉर्म करना था। परफॉर्मेंस से जुबीन अपने दोस्तों के साथ लाजरस आइलैंड के पास एक यॉट पर पार्टी कर रहे थे, तभी डूबने से उनकी मौत हो गई थी। सिंगर की मौत की खबर मिलते ही उस बड़े आयोजन को रद्द कर दिया गया था। जुबीन गर्ग के निधन के बाद असम में उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा समेत घटना के वक्त उनके साथ मौजूद सभी लोगों और इवेंट मैनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई है। शिकायत होने के बाद सिंगर की पत्नी गरिमा ने सिंगर के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से रोते हुए एक वीडियो जारी कर मैनेजर के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत वापस लिए जाने की अपील की है। कुछ समय बाद जुबीन की पत्नी ने हत्या का शक जताते हुए जांच की मांग की। शिकायत होने के बाद जुबीन के साथ यॉट में मौजूद दोस्तों और इवेंट ऑर्गेनाइजर की गिरफ्तारी हुई। दूसरी तरफ गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के सिंगर जुबीन गर्ग की मौत के मामले की हर दिन सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक सेशन कोर्ट बनाई है। बक्सा जिले की जिला जज शर्मिला भुइयां इस फास्ट-ट्रैक कोर्ट की अध्यक्षता करेंगी। गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने ये नियुक्ति की है। असम पुलिस की CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले की जांच की और स्थानीय कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 25 नवंबर को विधानसभा में कहा था कि जुबीन गर्ग की मौत कोई हादसा नहीं, बल्कि हत्या थी। वे दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे। असम पुलिस के साथ-साथ सिंगापुर पुलिस ने भी मामले की जांच की। जनवरी में सिंगर जुबीन गर्ग की मौत को लेकर सिंगापुर पुलिस ने किसी भी तरह की साजिश से इनकार किया। अदालत को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, जुबीन की मौत डूबने की वजह से हुई थी। उन्होंने नशे की हालत में लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था। सिंगापुर पुलिस ने 35 लोगों की गवाही के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। गवाहों ने उस दिन की पल-पल की जानकारी दी और बताया कि जुबीन गर्ग ने कितनी शराब पी और नशे में डाइविंग करने पहुंचे। अदालत में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 52 साल के जुबीन गर्ग घटना के समय नशे में थे। उनकी टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में ब्लड अल्कोहल की मात्रा 333 मिलीग्राम पाई गई, जो सिंगापुर की कानूनी सीमा (80 मिलीग्राम) से चार गुना से भी ज्यादा थी। कोरोनर ने कहा कि इतने नशे की वजह से वे सही फैसला नहीं ले पा रहे थे। उन्होंने पहले तो लाइफ जैकेट पहनी थी, लेकिन पहली बार तैरने के बाद उसे उतार दिया। दूसरी बार जब वे पानी में उतरे, तो कैप्टन और दूसरे साथियों के टोकने के बावजूद उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से साफ मना कर दिया था। पत्नी के आरोपों को कोर्ट ने किया खारिज जुबीन की पत्नी ने शक जताया था कि सिंगर को पानी में धक्का दिया गया होगा। इस पर कोरोनर नाखोडा ने साफ किया कि पुलिस ने बहुत बारीकी से जांच की है। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे लगे कि किसी ने उन्हें मजबूर किया या धक्का दिया। यहां तक कि उन्हें बचाने की कोशिश करने वाले लोगों ने भी पूरी जान लगाई थी। कोर्ट ने कहा कि जुबीन अपनी मर्जी से तैरने के लिए पानी में उतरे थे और डूबने के दौरान किसी ने भी उनका चेहरा जानबूझकर पानी के नीचे नहीं दबाया था।
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